Wednesday, September 29, 2021

इनपुट और आउटपुट डिवाइस किसे कहते हैं | Input And Output Devices – Best Info In Hindi

इनपुट और आउटपुट डिवाइस किसे कहते हैं | Input And Output Devices – Best Info In Hindi

इनपुट और आउटपुट डिवाइस –जब कम्प्यूटर पर कार्य किया जाता है, तो कम्प्यूटर तथा प्रयोगकर्ता में परस्पर सम्पर्क बनाये रखने के लिए इनपुट एवं आऊटपुट  डिवाइसों की आवश्यकता होती है। इन दोनों ही  डिवाइसों का कम्प्यूटर के गणनात्मक कार्य से कोई सम्बन्ध नहीं होता बल्कि  इनका कार्य केवल यूजर  के निर्देशों को सी.पी.यू. तक पहुंचाना तथा सी.पी.यू. द्वारा निर्मित रिजल्ट को प्रयोगकर्ता तक पहुंचाना मात्र है।

इनपुट और आउटपुट डिवाइस का कार्य ( Functions of input and output devices )

इनपुट डिवाइस  (Input Devices)

इनपुट डिवाइस  (Input Devices) – जिन डिवाइसों का प्रयोग डेटा और निर्देशों को कम्प्यूटर में प्रविष्ट करने के लिए किया जाता है, वे सभी डिवाइस इनपुट डिवाइस कहलाती हैं। यह भी कहा जा सकता है कि मानवीय भाषा में प्रविष्ट किए जा रहे डेटा अथवा प्रोग्राम को कम्प्यूटर के समझने योग्य रूप में परिवर्तित करने के लिए प्रयोग की जाने वाली  डिवाइसों को इनपुट डिवाइस कहा जाता है। ये डिवाइस अक्षरों, अंकों तथा अन्य विशिष्ट चिन्हों को बायनरी डिजिट अर्थात् 0 तथा 1 में परिवर्तित करके सी.पी.यू. के समझने योग्य बनाती हैं। इनपुट के लिए सबसे अधिक प्रयुक्त की जाने वाली डिवाइस है-की-बोर्ड (Key Board)|

मुख्यतः कम्प्यूटर्स में इनपुट के लिए की-बोर्ड का ही प्रयोग किया जाता है, परन्तु कुछ अन्य इनपुट डिवाइस (Input Devices) भी उपलब्ध रहती हैं, जोकि निम्नलिखित हैं-

(1) माऊस (Mouse)
(2) ट्रैकर बॉल (Tracker Ball)
(3) लाइटपेन (Light Pen)
(4) जायस्टिक (Joystick)
(5) हैण्ड-हैल्ड टर्मिनल (Hand-Held Terminal)
(6) बार-कोड रिकॉगनेशन (Bar-code Recognition)
(7) OMR, OCR UD MICR
(8) स्कैनर (Scanner)
(9) माइक (Mike)

इनपुट और आउटपुट डिवाइस

इनपुट और आउटपुट डिवाइस किसे कहते हैं | Input And Output Devices – Best Info In Hindi
इनपुट और आउटपुट डिवाइस किसे कहते हैं | Input And Output Devices – Best Info In Hindi


क्रम संख्या (1) से (5) तक की सभी इनपुट डिवाइस (Input Devices) मॉनीटर स्क्रीन पर किसी चिन्ह को चिन्हित (point) करने के काम आती है अतः प्वॉइन्टिंग डिवाइस (Pointing Devices) कहलाती हैं। माइक्रोफोन को भी इनपुट डिवाइस के रूप में प्रयुक्त किया जाता है। इनसे हम अपनी आवाज को डेटा के रूप में कम्प्यूटर में प्रविष्ट करा सकते हैं। पारिभाषिक शब्दों में, वे डिवाइस जिनकी सहायता से कम्प्यूटर को सूचनाएं प्रेषित की जाती हैं, आगम अथवा इनपुट डिवाइस कहलाती हैं। प्रमुख इनपुट  डिवाइसों का परिचय निम्नानुसार है-

ट्रैकर बॉल (Tracker Ball)

ट्रैकर बॉल (Tracker Ball) – यह प्वॉइन्टिंग डिवाइस उल्टे माउस की तरह होती है, इसमें माउस के ठीक विपरीत बॉल ऊपर की ओर होती है। ट्रैकर बॉल को चारों तरफ घुमा सकते हैं। ट्रैकर बॉल विशेष रूप से बच्चों के लिए बनाई जाती है जिसके द्वारा वे कम्प्यूटर पर गेम्स खेल सकते हैं। लेपटॉप कम्प्यूटर्स पर
ट्रैकर बॉल ही लगी होती है। स्टिक एक सॉकेट जैसे आधार पर लगी होती है जिसके नीचे प्रिन्टेड सर्किट (परिपथ) बोर्ड लगा होता है, जो स्टिक की यांत्रिक गतियों को एनालॉग विधि से विद्युतीय स्पंदन (Pulses) में बदल देता है।

लाइट पेन (Light Pen)

लाइट पेन (Light Pen) – इसका प्रयोग कम्प्यूटर में चित्रों को भेजने के लिए किया जाता है। किसी भी चित्र को कम्प्यूटर में बनाना होता है तो उस आकृति पर लाइट पेन से रेखांकन करते हैं और वह आकृति मॉनीटर स्क्रीन पर प्रदर्शित होने लगती है। इसका प्रयोग मुख्यतः डिज़ाइनिंग में किया जाता है।

जॉयस्टिक (Joystick)

जॉयस्टिक (Joystick) – इस डिवाइस का प्रयोग वीडियो गेम्स में होता है। यह एक विद्युत-यांत्रिक डिवाइस है। जॉयस्टिक का ऊपरी भाग एक हेण्डल अथवा स्टिक के समान होता है, जिसे उसके नीचे लगे सॉकेट में घुमाया जा सकता है। इसके घुमाने की दिशा में ही मॉनीटर स्क्रीन पर ऑब्जैक्ट अपने स्थान से विस्थापित होता है। अनेक वीडियो गेम्स में जॉयस्टिक का प्रयोग किया जाता है। यदि यह वीडियो गेम पीसी में स्थापित है, तो सामान्यतः की-बोर्ड पर स्थित कर्सर मूवमेण्ट ‘कीज़’ का प्रयोग करने से भी वही कार्य होता है, जोकि जॉयस्टिक के हेण्डल को घुमाने से होता है।

हैण्ड-हेल्ड टर्मिनल (Hand-Held Terminal)

हैण्ड-हेल्ड टर्मिनल (Hand-Held Terminal)  – यह एक इलैक्ट्रॉनिक यंत्र है, जो सामान्यतः देखने एवं आकार में एक आम कैलकुलेटर की भांति होता है। इस इनपुट डिवाइस का कहीं भी प्रयोग किया जा सकता है, इसलिए इसमें भण्डारण क्षमता तथा विद्युत बैटरी की सुविधा प्रदान की जाती है। इस यंत्र में संकेतों को ‘कीज़’ की सहायता से, लाइट पेन की सहायता से अथवा बार-कोड स्कैनर द्वारा प्रविष्ट कर सकते हैं।

बार-कोड रिकॉगनेशन (Bar-code Recognition)

बार-कोड रिकॉगनेशन (Bar-code Recognition) – इसका प्रयोग मुख्यतः वस्तु के उत्पादन सम्बन्धी सूचनाओं को पढ़ने के लिए किया जाता है। इन संकेतों को किसी भी वस्तु पर एक विशेष पद्धति द्वारा लिखा जाता है। यह देखने में खड़ी रेखाएं होती हैं, जो कि ऊंचाई तो समान होती हैं, परन्तु इनकी मोटाई भिन्न-भिन्न होती है। इन चित्र-6-बार-कोड रेखाओं को बार-कोड स्कैनर अथवा लाइट पेन की सहायता से पढ़ा जा सकता है। इस प्रकार पढ़ी गई रेखाएं उस वस्तु और उस वस्तु के उत्पादन सम्बन्धी सूचनाएं आउटपुट डिवाइस पर प्रदर्शित करती हैं।

स्कैनर (Scanner)

स्कैनर (Scanner) – स्कैनर का प्रयोग किसी ग्राफिक इमेज को कम्प्यूटर में इनपुट करने के लिए किया जाता है। आकार एवं उपयोग के आधार पर स्कैनर्स तीन प्रकार के होते हैं-हेण्डी स्कैनर्स, फ्लैटबेड स्कैनर्स तथा ड्रम स्कैनर्स। इस स्कैनर को वांछित ग्राफिक इमेज पर रखकर ऊपर से नीचे की ओर खींचा जाता है। इसे खींचते समय इसकी साइड में दिया गया बटन दबा लिया जाता है, इससे इसमें इमेज पर चलते समय एक लाइट जलती है।

स्कैनर में लगे लेन्स और प्रकाशस्रोत इमेज को फोटोसेन्स करते हैं। परावर्तित प्रकाश से यह इमेज को कम्प्यूटर में इनपुट कर देता है। इस प्रकार का स्कैनर सामान्यतः 4 इंच 5 इंच चौड़ी इमेज को ही स्कैन कर सकते हैं। इसमें स्कैनर को खींचते समय हाथ के हिलने से स्कैन की गई इमेज भी क्षतिग्रस्त हो सकती है। इन परेशानियां से बचने के लिए फ्लैटबेड स्कैनर का प्रयोग किया जाता है। यह स्कैनर Letter आकार अर्थात् 8.5 इंच चौड़ी तथा 11 इंच लम्बी इमेज को भी स्कैन कर सकता है।

इस स्कैनर में एक फोटोस्टेट मशीन की भांति इमेज को इसमें रख दिया जाता है। इससे स्कैन की जा रही इमेज के इनपुट के समय क्षतिग्रस्त होकर इनपुट की सम्भावना ही नहीं रहती। इस स्कैनर से अपेक्षाकृत उच्च गुणवत्ता भी प्राप्त की जा सकती है। यदि स्कैन की जाने वाली इमेज का आकार इससे बड़ा है अथवा इससे अधिक गुणवत्ता चाहिए तो इसके लिए ड्रम स्कैनर का प्रयोग किया जाता है। इसकी गुणवत्ता अर्थात् इमेज की रिजॉल्यूशन को DPI (Dots per Inch) में मापा जाता है।

माइक (Mike)

माइक (Mike) – कम्प्यूटर में मल्टीमीडिया की शुरूआत के साथ ही कम्प्यूटर में माइक में बोलकर भी इनपुट किया जा सकता है। माइक का प्रयोग करके ध्वनि को इलैक्ट्रॉनिक संकेतों में परिवर्तित कर दिया जाता है। इन इलैक्ट्रॉनिक संकेतों को कम्प्यूटर बायनरी कोड्स में परिवर्तित कर देता है। कम्प्यूटर पुनः इन बायनरी कोड्स को इलैक्ट्रॉनिक संकेतों में परिवर्तित करके तारों की सहायता से स्पीकर्स को प्रेषित करता है। आजकल अनेक ऐसे सॉफ्टवेयर्स बाजार में उपलब्ध हैं, जिनमें कम्प्यूटर प्रयोगकर्ता केवल बोलकर ही टैक्स्ट को टाइप कर सकते हैं।

आउटपुट डिवाइस  (Output Devices)

आउटपुट डिवाइस  (Output Devices) – सी.पी.यू. द्वारा निर्मित परिणाम बाइनरी कोड (0 और 1) के रूप में होता है, जिसे सीधे-सीधे नहीं समझा जा सकता। इस परिणाम को मानवीय भाषा में परिवर्तित करने के लिए आउटपुट  डिवाइसों का प्रयोग किया जाता है। आउटपुट डिवाइस कम्प्यूटर द्वारा निर्मित परिणाम को साधारण भाषा में परिवर्तित करके बाहरी वातावरण में प्रयुक्त कर देती है। पारिभाषिक शब्दों में कहा जा सकता है कि वे डिवाइस जिनसे कम्प्यूटर से प्राप्त परिणामों को प्रस्तुत किया जाता है, निर्गम अथवा आउटपुट डिवाइस कहलाती हैं।

जब आउटपुट अक्षरों, चिन्हों तथा अंकों के रूप में प्राप्त होता है, तो इस आउटपुट को टैक्स्ट (Text) आउटपुट कहा जाता है। चित्रों, फोटोग्राफ अथवा रेखाचित्र के रूप में प्राप्त होने वाला आउटपुट ग्राफिक (Graphic) आउटपुट कहलाता है। ध्वनि के रूप में प्राप्त होने वाले आउटपुट को साउण्ड (Sound) आउटपुट कहा जाता है। टैक्स्ट तथा ग्राफिक आउटपुट की गुणवत्ता को मापने के लिए रिजॉल्यूशन का प्रयोग किया जाता है। रिजॉल्यूशन का तात्पर्य है आउटपुट की स्पष्टता। 

प्रमुख आउटपुट डिवाइस निम्नलिखित हैं-

(i) विजुअल डिस्प्ले यूनिट (Visual Display Unit)
(ii) प्रिन्टर्स (Printers)
(iii) प्लॉटर्स (Ploters)
(iv) साउण्ड कार्ड एवं स्पीकर्स (Sound Card and Speakers)

वॉयस आउटपुट डिवाइस (Voice output Device)

वॉयस आउटपुट डिवाइस (Voice output Device) – कभी-कभी टेलीफोन पर नम्बर डायल करने पर सुनाई देता है-‘Please check the number you have dialed. डायल किया गया नम्बर कृपया जांच लें। दो बार इस सन्देश की पुनरावृत्ति के बाद Engage की टोन सुनाई देने लगती है। यह सन्देश हमें वॉयस आउटपुट डिवाइस की सहायता से टेलीफोन पर सुनाई देता है।

कम्प्यूटर में पहले से संचित शब्दों की फाइल में से शब्दों का चुनाव करके सन्देश का निर्माण करता है। इसके लिए कम्प्यूटर पर अनेक शब्दों का उच्चारण करके शब्द भण्डार को संचित किया जाता है। इस शब्द भण्डार में कम्प्यूटर प्रोग्राम के निर्देशानुसार वांछित शब्दों का समायोजित करके सन्देश का निर्माण करता है और वॉयस आउटपुट डिवाइस इन सन्देशों का स्पीकर्स की सहायता से उच्चारण करती है। 

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