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कंट्रोल स्टेटमेण्ट पार्ट-2 | Best Control Statement In Hindi

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कंट्रोल स्टेटमेंट क्या है एवं उपयोग | Loop कितने प्रकार के होते हैं? - कंट्रोल स्टेटमेण्ट पार्ट-2 | Control Flow Statements In Vb.Net In Hindi
कंट्रोल स्टेटमेंट क्या है एवं उपयोग | Loop कितने प्रकार के होते हैं? - कंट्रोल स्टेटमेण्ट पार्ट-2 | Control Flow Statements In Vb.Net In Hindi

कंट्रोल स्टेटमेंट क्या है एवं उपयोग | Loop कितने प्रकार के होते हैं? – कंट्रोल स्टेटमेण्ट पार्ट-2 | Control Flow Statements In Vb.Net In Hindi

कंट्रोल स्टेटमेण्ट पार्ट-2 लॉजिकल ऑपरेटर का परिचय (Introduction)- प्रोग्रामिंग भाषा पूर्णतः प्राकृतिक भाषा से प्रेरित होता है। और प्रोग्राम आपके नित्य प्रतिदिन के कार्यों से अलग नहीं होता है। आप जो भी प्रातःकाल से संध्या तक करते हैं वह एक तरह का प्रोग्राम ही होता है। इस प्रोग्राम के दौरान कुछ तो काम आप रूटीन के हिसाब से क्रम में करते रहते हैं तथा कुछ काम परिस्थिति के अनुसार करते हैं।

लूप स्टेटमेण्टस (Loop Statements)

लूप का शाब्दिक अर्थ फंदा या छल्ला होता है । लूप किसी कार्य को बार बार एक निश्चित समय तक दोहराने को विवश करता है । लूप स्टेटमेण्ट भी यही कार्य करता है। यह प्रोग्राम के किसी एक ब्लॉक को एक निश्चित समय तक दोहराता है। यह कार्य तब तक बार बार होता रहता है जब तक कि कडिशन सत्य रहता है । कडिशन के असत्य होने पर लूप समाप्त हो जाता है और लूप के बाद वाला स्टेटमेण्ट एक्ज़िक्यूट होता है । वी बी डॉट नेट में कई प्रकार से लूप का प्रयोग होता है। 

लूपिंग स्टेटमेंट क्या होता है? – कंट्रोल स्टेटमेण्ट पार्ट-2 | What is loop statement with example? In Hindi

कंट्रोल स्टेटमेंट क्या है एवं उपयोग | Loop कितने प्रकार के होते हैं? - कंट्रोल स्टेटमेण्ट पार्ट-2 | Control Flow Statements In Vb.Net In Hindi
कंट्रोल स्टेटमेंट क्या है एवं उपयोग | Loop कितने प्रकार के होते हैं? – कंट्रोल स्टेटमेण्ट पार्ट-2 | Control Flow Statements In Vb.Net In Hindi

व्हाइल एण्ड व्हाइल लूप (While… End While Loop)

While… End While स्टेटमेण्ट का उपयोग आप तब करते हैं जब आप प्रोग्राम के एक विशेष भाग को बार बार तब तक दोहराना चाहते हैं जब तक कि कडिशन असत्य न हो जाय । इस का प्रारूप इस प्रकार होता है –

While <condition>
statements
End While

जहाँ condition से तात्पर्य वह व्यंजक है जिसका मान बूलियन (सत्य या असत्य) होता है। उदाहरण के लिए num < 10 का परिणाम सत्य या असत्य होगा। तथा स्टेटमेण्टस से तात्पर्य एक या एक से अधिक स्टेटमेण्ट हैं जो तब एक्ज़िक्यूट होगा जब कंडिशन का मान सत्य हो । तथा End While, While लूप को समाप्त करता है ।

उदाहरण- एक कंसोल एपलकेशन लिखें जो स्कीन पर 1 से 20 तक के मध्य सभी विषम संख्यायों को छापे ।

समाधान :

  • File मेन्यू को क्लिक करें तथा New Project का चयन करें।
  • New Project डायलॉग बॉक्स खुलने के पश्चात Templates पेन Console Application को क्लिक करें।
  • Name टेक्स्टबॉक्स में My Project टाइप करें तथा OK को क्लिक करें। उसके बाद कोड एडिटर खुलेगा। यहाँ Sub Main) और End Sub के मध्य निम्नलिखित कोड लिखें-

dim num as integer = 1

                   while num <= 19
                         Console.WriteLine(num)
                         num = num + 2
            End While
Console.ReadLine())

  • F5 दबायें तथा परिणाम को जाँचें। 

डू व्हाइल………..लूप  (Do While…Loop)

Do While…Loop का उपयोग किसी भी प्रोग्रामिंग भाषा की तरह ही वी० बी० डॉट नेट में स्टेटमेंट के एक क्रम (sequence) को कई बार दोहराने के लिए होता है। प्रत्येक दोहराव (repetition) पर स्टेटमेण्ट उन वेरियेबल पर कार्य करते हैं जिनके मान बदलते रहते हैं। Do While स्टेटमेण्ट के क्रम को एक निश्चित समय तक दोहराता रहता है या फिर किसी खास कंडीशन के सत्य होने तक दोहराता रहता है।

Do While स्टेटमेण्ट के क्रम से पहले आता है तथा Loop स्टेटमेण्ट स्टेटमेण्ट के क्रम का अनुसरण करता है। उदाहरण के लिए निम्नलिखित-
Do while <कंडीशन>
स्टेटमेण्ट
Loop

में यह कंडीशन के सही मान का पता लगाता है। यदि कंडीशन गलत है तो लूप के अंदर का स्टेटमेण्ट एक्जिक्यूट नहीं होता है तथा प्रोग्राम Loop स्टेटमेण्ट के बाद लाइन के साथ क्रमशः रहता है। यदि कंडीशन सत्य हो जाता है तब लूप के अंदर का स्टेटमेण्ट एक्जिक्यूट होता है। Loop स्टेटमेण्ट के मिलने पर पूरी प्रक्रिया दोहरायी जाती है जो Do While स्टेटमेण्ट में कंडीशन की जाँच शुरू होता है। अन्य शब्दों में लूप के अंदर स्टेटमेण्ट तब तक बार-बार एक्जिक्यूट होता रहता है जब तक कंडीशन पूरा न हो जाय।

उदाहरण प्रोग्राम 1 से 10 तक स्क्रीन पर छापता है। इसके बाद एक संदेश देता है जो 1 to 10 is already printed छापता है। इसमें सबसे पहले num का मान 1 माना गया है। Do While के साथ एक कॉडेशन num <=10 है जिसका अर्थ यह है कि num का मान 10 या इससे कम होना चाहिए। 

Console.WriteLine, num के प्रत्येक मान को स्कीन पर छापता है। सबसे पहले यह num का मान । छापता है। प्रोग्राम न छप जाय। 1 से 10 तक छपने के बाद एक्जिक्यूशन लूप से बाहर निकलता है और लूप के ठीक बाद प्रोग्राम के उस में अगले लाइन पर num+=1 num के मान में 1 जोड़ता है।

यह तब तक जोड़ता रहता है जब तक कि स्क्रीन पर 10 न छप जाय | लाइन 1 to 10 is already printed छपता है। Console. Read स्कीन को पढ़ने के लिए तब तक रोके रहता है जब तक आप एण्टर (Enter) की न दबा दें। इस प्रोग्राम से यह तो रूपष्ट है कि जब तक Do While का कडिशन पूरा नहीं हो जाता तब तक एक्जिक्यूशन लूप के बाहर नहीं आता।

उदाहरण- एक ऐसा कंसोल प्रोग्राम लिखें जो Do While … Loop का प्रयोग करते हुए स्कीन पर 1 से लेकर 10 तक छापे।

समाधान-

  • File मेन्यू को क्लिक करें तथा New Project का चयन करें।
  • New Project डायलॉग बॉक्स खुलने के पश्चात Templates पेन में Console Application को क्लिक करें।
  • Name टेक्स्टबॉक्स में My Project टाइप करें तथा OK को क्लिक करें। उसके बाद कोड एडिटर खुलेगा। जहाँ इस कोड को लिखें –

Dim num As Integer = 1
          Do While num <= 10
          Console.WriteLine(num)
          num += 1
          Loop
          Console.WriteLine(“1 to 10 is already printed”)
Console.Read()

F5 दबाएँ। आउटपुट दिखेगा।

डू अनटील लूप (Do Until Loop)

आपने देखा कि Do While स्टेटमेण्ट किसी सूप को तभी तक दोहराता है जब तक कि कंडीशन सत्य रहता है। उदाहरण के लिए 1 से 10 तक की संख्या को छापने के लिए दिया जाने वाला कोड – do while num < 10

तब तक संख्या को छापता रहता है जब तक कि num का कस मान 10 से नीचे या इसके बराबर तक रहता है। अर्थात Do While स्टेटमेण्ट सत्य रहता है। लेकिन कभी कभी आप किसी कार्य या फॉर्मूला को तब तक दोहराना चाहते होंगे जब तक कि कॅडिशन पूरा न हो। इस के लिए, आप Do Until स्टेटमेण्ट का प्रयोग कर सकते हैं।

इसका भी प्रारूप Do While की तरह ही लगता है तथा दोनों के मध्य अंतर केवल इसके कॉडिशन में होता है। इसका प्रारूप इस प्रकार होगा-
Do Until <condition>
        statement to be executed

Loop

इसे यदि आप Do Until… Loop का उपयोग करके सम्पन्न करना चाहते हैं तो केवल Do While mum <= 10 के बदले Do Until >=10 कर दें।

डू… लूप व्हाइल (Do. Loop While)

Do… Loop While स्टेटमेण्ट While… End While स्टेटमेण्ट के समान है। केवल इसमें अंतर यह है कि While…End While स्टेटमेण्ट को तब तक एक्ज़िक्यूट करता रहता है जब तक कंडिशन सत्य रहता है। बाई डिफॉल्ट Do…Loop While स्टेटमेण्ट एक ही बार एक्ज़िक्यूट होता है चाहे परिणाम सत्य हो या असत्य हो ।

तथा तदुपरांत कॅडिशन का मूल्यांकन होता है। इसका प्रारूप यह है –
Do
statements
Loop While condition

डू … लूप अनटील (Do… Loop Until)

Do … Loop Until ब्लॉक में कंडीशन सामान्यतः लूप के शीर्ष पर अर्थात् स्टेटमेण्ट एक्जिक्यूट होने से पहले चेक होता है। विकल्प के रूप में, कंडीशन को लूप के सबसे नीचे भी चेक किया जा सकता है जब स्टेटमेंट Loop पर पहुँचता है। जब वी० बी० डॉट नेट में इस प्रकार का Do Loop स्वरूप होता है-

Do
Statement (s)
Loop Until condition

तब यह लूप के अंदर के स्टेटमेण्ट को एक्जिक्यूट करता है तथा फिर कंडीशन के सत्यमान (truth value) की जाँच करता है। यदि कंडीशन सत्य होता है तो प्रोग्राम Loop स्टेटमेण्ट के बाद के लाइन के साथ क्रमशः रहता है। यदि कंडीशन असत्य होता है तब पूरी प्रक्रिया Do स्टेटमेण्ट के शुरू से ही दोहरायी जाती है। दूसरे शब्दों में, लूप के अंदर के स्टेटमेण्ट एक बार एक्जिक्यूट होते हैं और फिर बार-बार तब तक एक्जिक्यूट होते रहते है जब तक कि कंडीशन सही न हो।

फॉर नेक्स्ट (For Next )

जब आप कोइ प्रोग्राम लिखते हैं तो आपको एक्शनों को बारम्बार दोहराने की आवश्यकता पड़ती है। उदाहरण के लिए, मान लिजिए कि आप कोइ फंक्शन लिख रहे हैं जो संख्यायों की एक सीरीज को स्क्रीन पर डिस्पले करता है। आप चाहेंगे कि कोड का वह लाइन दोहराया जाय जो संख्या को उतनी ही बार डिस्पले करे जितनी बार आवश्यक है।

For… Next लूप की सहायता से आप किसी विशेष एक्शन को एक संख्या देकर उसके दोहराव को सीमित कर सकते हैं। ऐसा करने पर वह उतनी ही बार होगा जितना आपने स्पष्ट किया है । इसका प्रारूप यह है

For counter [ As datatype] = start To end [ Step step ]
[ statements ]
[ Exit For ]
[ statements ]
Next [ counter ]
counter

For – स्टेटमेण्ट के लिए यह आवश्यक अवयव है। यह वह संख्यात्मक वेरिएबल है जो लूप को नियंत्रित करता है।

datatype – यह तब आवश्यक है जब आपने counter के डाटा को डिक्लेअर नहीं किया है।

start – यह भी आवश्यक अवयव है। यह न्यूमेरिक व्यंजक है जो counter का प्रारम्भिक मान होता है।

end – यह भी आवश्यक अवयव है। यह न्यूमेरिक व्यंजक है जो counter का अंतिम मान होता है।

step – यह एच्छिक है। यह वह व्यंजक होता है जो प्रत्येक संख्या के अनुसार counter को बढ़ाता है।

statements – यह भी वैकल्पिक है। इसे आप आवश्यकतानुसार रख सकते हैं। सामान्यतः इसका प्रयोग नहीं होता है। ये For तथा Next के मध्य स्पष्ट किए गए संख्या के अनुसार उतनी ही बार रन करता है।

Exit For – यह भी वैकल्पिक है। यह For लूप के बाहर कंट्रोल (control) को भेजता है।

Next – यह आवश्यक अवयव है। यह For लूप को समाप्त करता है।

उदाहरण के लिए इस प्रोग्राम को देखें-
Dim i As Integer
Fori = 1 To 10
Console. WriteLine (i)
Next

उपरोक्त कोड स्क्रीन पर 1 से 10 तक छापेगा। इसे उपरोक्त प्रारूप के अनुसार इस
For i as Integer = 1 To 10
Console. WriteLine (i)
Next

आप Next के बदले Nexti भी लिख सकते हैं।

अब यदि आप चाहते हैं कि कंट्रोल वेरिएबल लूप को एक संख्या (यथा 2) के आधार पर बढ़ाए अर्थात उपरोक्त प्रोग्राम में यह लूप केवल
5 बार ही चले तो इसमें Step जोड़ सकते हैं। इसका कोडिंग इस प्रकार होगा –
For i as Integer = 1 To 10 Step 2
Console. WriteLine (i)
Next

उपरोक्त कोड स्क्रीन पर यह आउटपुट देगा –

1
3
5
7
9

जैसे –  (1 ) एक कंसोल एप्लिकेशन लिखें जो 2 का पहाड़ा स्क्रीन पर छापे।

समाधान :

  • File मेन्यू को क्लिक करें तथा New Project का चयन करें।
  • New Project डायलॉग बॉक्स खुलने के पश्चात Templates पेन में Console Application को क्लिक करें।
  • Name टेक्स्टबॉक्स में My Project टाइप करें तथा OK को क्लिक करें। उसके बाद कोड एडिटर खुलेगा। जहाँ इस कोड को लिखें.

Dim i As Integer
For i = 2 To 20 Step 2
Console.WriteLine(i)
Next
Console.ReadLine()

  • F5 दबाकर परिणाम को देखें।

Console.ReadLine) स्क्रीन पर आपको आपके परिणाम को देखने में सहायता करता है। यह तब तक आउटपुट स्क्रीन को
तब तक नहीं हटाता जब तक कि आप एण्टर (Enter) न दबाएँ। 

जैसे –  (2) एक कसोल एप्लिकेशन बनाएं जो आपके द्वारा इनपुट किए गए संख्या का पहाडा स्कीन पर छापे

समाधान :

  • File मेन्यू को क्लिक करें तथा New Project का चयन करें।
  • New Project डायलॉग बॉक्स खुलने के पश्चात Templates पेन में Console Application को क्लिक करें।
  • Name टेक्स्टबॉक्स में My Project टाइप करें तथा OK को क्लिक करें। उसके बाद कोड एडिटर खुलेगा।
    जहाँ इस कोड को लिखें

Dim i As Integer
Dim j As Integer
Console. Write (“Enter Integer of Table “)
J= CInt (Console. ReadLine ())
For I = J To j * 10 Step j
Console. WriteLine (i)
Next
Console.ReadLine()

F5 दबाकर परिणाम को प्रकट करें।

आज आपने क्या सीखा (What Did You Learn Today)

  • स्टेटमेण्ट किसी प्रोग्रामिंग भाषा का सबसे छोटा अवयव होता है। इसका उपयोग प्रोग्राम एक्जिक्यूशन के दौरान किसी कार्य को सम्पन्न करने  लिए कम्प्यूटर को सूचित करने के लिए होता है।
  • कंट्रोल फ्लो उस क्रम को कहते हैं जिस क्रम में स्टेटमेण्ट एक्जिक्यूट होता है। वैसे स्टेटमेण्ट जो प्रोग्राम में एक्जिक्यूशन के फ्लो को नियंत्रित करते हैं कंट्रोल फ्लो स्टेटमेण्ट कहलाते है।
  • कंट्रोल फ्लो स्टेटमेण्ट को मूलतः दो प्रकार निर्णयन स्टेटमेण्ट तथा लूप स्टेटमेण्ट में बांटा जा सकता है। If… Else प्रोग्राम को किसी विशेष कार्य जिसमें शर्त या तो सत्य होता है या असत्य के आधार पर कार्य करने देता है। यह एक प्रकार से आपके प्रोग्राम में इंटेलिजेन्स (intelligence) को जोड़ता है जिसमें परिस्थिति के अनुसार विकल्पों में से किसी को चयन करना होता है।
  • If … ElseIf … Else कंट्रोल स्टेटमेण्ट If … Else का ही एक्स्टेंशन है। इसके माध्यम से आप ElseIf का प्रयोग कर दो या अधिक संभावित विकल्पों को जोड़ सकते हैं।
  • नेस्टेड If ब्लॉक में एक If … End If के अंदर कई If … End If हो सकता है । इसीलिए इसे नेस्टेड If ब्लॉक कहा जाता है । इस ब्लॉक का उपयोग बहुत कम होता है क्योंकि यह थोड़ा जटिल है
  • नेस्टेड If ब्लॉक के बदले आप साधारण If ब्लॉक का भी प्रयोग कर सकते हैं । ऐसा आप If ब्लॉक में AND ऑपरेटर को जोड़ कर कर सकते हैं ।
  • Select Case का प्रयोग कर आप जितना चाहें उतने कंडिशनों को सहज रूप से उपयोग में ला सकते हैं जो उन स्थितियों में जहाँ कई विकल्प हैं को प्रयोग करना आसान बनाता है ।
  • लूप का शाब्दिक अर्थ फंदा या छल्ला होता है । लूप किसी कार्य को बार बार एक निश्चित समय तक दोहराने को विवश करता है । लूप स्टेटमेण्ट भी यही कार्य करता है । यह प्रोग्राम के किसी एक ब्लॉक को एक निश्चित समय तक दोहराता है ।
  • While… End While स्टेटमेण्ट का उपयोग आप तब करते हैं जब आप प्रोग्राम के एक विशेष भाग को बार बार तब तक दोहराना चाहते हैं जब तक कि कंडिशन असत्य न हो जाय । 
  • Do White. Loop का उपयोग किसी भी प्रोग्रामिंग भाषा को कम (sequence) को कई बार दोहराने के लिए होता है। प्रत्येक
  • लूप स्टेटमेण्ट का उपयोग करते समय आप सही खूप स्टेटमेण्ट का ही प्रयोग करें। स्टेटमेण्ट के एक सेट को अनिश्चितकालिन बार तक दोहराते हो तब While End While का उपयोग करें। यदि आपकशन को किसी विशेष स्थान पर तथा किसी विशेष परिणाम
    के लिए जाँचना चाहते है तो Do..Loop स्टेटमेण्ट का प्रयोग करें। यदि आप किसी स्टेटमेण्ट को एक निश्चित समय तक के लिए दोहराना चाहते हैं तो For… Next स्टेटमेण्ट उत्तम होगा।
  • Do… Loop While स्टेटमेण्ट While..End While स्टेटमेण्ट के समान है। केवल इसमें अंतर यह है कि While..End While स्टेटमेण्ट को तब तक ज़क्यूट करता रहता है जब तक रहता है। वाई डिफॉल्ट Do…Loop While स्टेटमेण्ट एक ही बार एक्क्यूिट होता है चाहे परिणाम सत्य हो या असत्य हो ।
  • Do… Loop Until ब्लॉक में कंडोशन सामान्यतः लूप के शीर्ष पर अर्थात स्टेटमेण्ट एक्जिक्यूट होने से पहले चेक होता है। विकल्प के रूप में, कडीशन को खूप के सबसे नीचे भी चेक किया जा सकता है जब स्टेटमेंट Loop पर पहुँचता है।
  • For… Next लूप की सहायता से आप किसी विशेष एक्शन को एक संख्या देकर उसके दोहराब को सीमित कर सकते हैं। ऐसा करने पर वह उतनी ही बार होगा जितना आपने स्पष्ट किया है।

कंट्रोल स्टेटमेण्ट पार्ट-1 | Best Control Statement In Hindi

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कंट्रोल स्टेटमेंट क्या है एवं उपयोग | कंट्रोल स्टेटमेण्ट लॉजिकल ऑपरेटर (Control Statement) | Control Flow Statements In Vb.Net In Hindi
कंट्रोल स्टेटमेंट क्या है एवं उपयोग | कंट्रोल स्टेटमेण्ट लॉजिकल ऑपरेटर (Control Statement) | Control Flow Statements In Vb.Net In Hindi

कंट्रोल स्टेटमेंट क्या है एवं उपयोग | कंट्रोल स्टेटमेण्ट लॉजिकल ऑपरेटर (Control Statement) | Control Flow Statements In Vb.Net In Hindi

कंट्रोल स्टेटमेण्ट लॉजिकल ऑपरेटर का परिचय (Introduction)- प्रोग्रामिंग भाषा पूर्णतः प्राकृतिक भाषा से प्रेरित होता है। और प्रोग्राम आपके नित्य प्रतिदिन के कार्यों से अलग नहीं होता है। आप जो भी प्रातःकाल से संध्या तक करते हैं वह एक तरह का प्रोग्राम ही होता है। इस प्रोग्राम के दौरान कुछ तो काम आप रूटीन के हिसाब से क्रम में करते रहते हैं तथा कुछ काम परिस्थिति के अनुसार करते हैं।

उदाहरण के तौर पर आप यदि सब्जी बाजार जाते है और आपने रात के खाने के लिए भिण्डी और लौकी लेने का प्रोग्राम बनाया है परन्तु भिण्डी बाजार में उपलब्ध नहीं है।

ऐसी स्थिति में आपके प्रोग्राम में परिस्थितिवश बदलाव आएगा तथा आप भिण्डी के बदले कुछ और खरीदेंगे या फिर केवल लौकी लेकर ही वापस आ जायेंगे। दूसरा, आपके प्रोग्राम में एक नियत समय में एक ही काम को बार-बार करने का भी कुछ होता है। उदाहरण के तौर पर 12 बजे खाना खाना है, 4 बजे चाय पीना और 8 बजे रात में रात्रि भोज लेना है।

इस तरह के कार्य की आपको कम्प्यूटर प्रोग्राम में भी आवश्यकता पड़ती है। इस आर्टिकल में मैं आपसे इनहीं अवयवों पर चर्चा करेंगे। इस प्रकार के कार्य को लॉजिकल ऑपरेशन कहा जाता है। इसके लिए लॉजिकल ऑपरेटर की आवश्यकता पड़ती है।

कंट्रोल स्टेटमेण्ट कितने प्रकार के होते हैं? | What Is Control Statement And Its Types In Hindi

कंट्रोल स्टेटमेंट क्या है एवं उपयोग | कंट्रोल स्टेटमेण्ट लॉजिकल ऑपरेटर (Control Statement) | Control Flow Statements In Vb.Net In Hindi
कंट्रोल स्टेटमेंट क्या है एवं उपयोग | कंट्रोल स्टेटमेण्ट लॉजिकल ऑपरेटर (Control Statement) | Control Flow Statements In Vb.Net In Hindi

लॉजिकल ऑपरेटर (Logical Operator)

लॉजिक गेटस के बारे में तो आप जानते ही होंगे। लॉजिक गेटस की तरह ही लॉजिकल ऑपरेटर्स होते है जो परिणाम के रूप में केवल बूलियन मान ही लौटाते है। बूलियन मान का अर्थ सत्य या 1 तथा असत्य या 0 होता है। लॉजिकल ऑपरेटर्स लॉजिकल ऑपरेशन को पूरा करते हैं। उदाहरण के लिए निम्नलिखित को देखें-

1 < 2 = True OR 1
2 < 1 = False OR 0
A < a = rue OR 1
A = A = True OR 1

(चूंकि A का ऐनसी मान 65 तथा a का ऐनसी मान 97 होता है।
वी० बी० डॉट नेट में मूलतः चार लॉजिकल ऑपरेटर हैं। इनके नाम Not, And, Or तथा XOR हैं।

Not ऑपरेटर (Not Operator)

Not ऑपरेटर में एक ही ऑपरेण्ड होता है। इस Not ऑपरेटर का परिणाम सत्य या असत्य हो सकता है । इसका परिणाम तब सत्य होगा जब ऑपरेण्ड असत्य होगा तथा यह असत्य होगा जब ऑपरेण्ड सत्य होगा। सांरणी में NOT ऑपरेटर के ऑपरेण्ड तथा परिणाम दिखाये गये हैं।

ऑपरेण्डपरिणाम
सत्य (1)
असत्य (0)
असत्य (0)
सत्य (1)

And ऑपरेटर (And Operator)

And ऑपरेटर में मूलतः दो ऑपरेण्ड होते हैं। तथा इसमें यदि दोनों ऑपरेण्ड सत्य हैं तो परिणाम भी सत्य होगा। यदि दोनों में कोई भी ऑपरेण्ड असत्य होगा तो परिणाम असत्य ही होगा। इसे सारणी में दर्शाया गया है।

ऑपरेण्ड 1ऑपरेण्ड 2परिणाम
सत्य (1)
सत्य (1)
असत्य (0)
असत्य (0)
सत्य (1)
असत्य (0)
सत्य (1)
असत्य (0)
सत्य (1)
असत्य (0)
असत्य (0)
असत्य (0)

OR ऑपरेटर (OR Operator)

OR ऑपरेटर में भी And की भाँति मूलतः दो ही ऑपरेण्ड होते हैं। और यह कुछ स्थितियों में And ऑपरेटर के ठीक विपरीत परिणाम देता है। यदि दोनों ऑपरेण्ड असत्य है तो यह भी And की तरह ही असत्य परिणाम देता है। परन्तु यदि दोनों में कोई भी ऑपरेण्ड सत्य है तो यह And के विपरीत परिणाम सत्य ही होगा। इसे सारणी में दर्शाया गया है।

ऑपरेण्ड 1ऑपरेण्ड 2परिणाम
असत्य (0)
असत्य (0)
सत्य (1)
सत्य (1)
असत्य (0)
सत्य (1)
असत्य (0)
सत्य (1)
असत्य (0)
असत्य (0)
सत्य (1)
सत्य (1)

XOR ऑपरेटर (XOR Operator)

XOR ऑपरेटर में भी मूलतः दो ऑपरेण्ड होते है। इसका पूर्ण रूप एक्स्क्लूसिव OR (eXclusive OR) होता है। इसमें यदि दोनों ऑपरेण्ड सत्य है तो परिणाम असत्य होगा। और यदि दोनों ऑपरेण्ड असत्य है तो परिणाम असत्य होगा। साथ ही दोनों में से कोई भी ऑपरेण्ड के सत्य होने पर परिणाम सत्य ही होगा। इसे सारणी में दर्शाया गया है।

ऑपरेण्ड 1ऑपरेण्ड 2परिणाम
सत्य (1)
सत्य (1)
असत्य (0)
असत्य (0)
सत्य (1)
असत्य (0)
सत्य (1)
असत्य (0)
असत्य (0)
सत्य (1)
सत्य (1)
असत्य (0)

लॉजिकल ऑपरेटर प्रिसिडेन्स (Logical Operator Precedence)

प्रिसिडेन्स का अर्थ होता है कि यदि एक से अधिक ऑपरेटर के समायोजन से कोई स्टेटमेण्ट बनता है तो कौन सा ऑपरेटर पहले कार्य करेगा। उदाहरण False Or True And True
उपरोक्त स्टेटमेण्ट में दो लॉजिकल ऑपरेटर है। तथा इसे दो तरह से भी इस प्रकार पढ़ा जा सकता है।
False Or True
True And True 

लेकिन कौन सा सही कार्य करेगा यह ऑपरेटर की प्राथमिकता क्रम जानने के बाद होगा। सारणी में लॉजिकल ऑपरेटर प्रिसिडेन्स दर्शाया गया है।

ऑपरेटरप्रिसिडेन्स
NOT
AND
OR
XOR
1
2
3
4

अब सारणी में आप को ऊपर के लॉजिकल ऑपरेटर का परिणाम पता चल जाएगा। चूँकि उपर का स्टेटमेण्ट AND तथा OR का समायोजन है। इसलिए वरीयतानुसार पहले हम AND का परिणाम निकालेंगे जो कि सत्य होगा। उसके बाद फिर FALSE OR TRUE का परिणाम सत्य होगा।

कंट्रोल फ्लो स्टेटमेण्ट (Control Flow Statement)

कंट्रोल फ्लो स्टेटमेण्ट जानने से पहले आइए हम जानते हैं कि स्टेटमेण्ट क्या है? स्टेटमेण्ट किसी प्रोग्रामिंग भाषा का सबसे छोटा अवयव होता है। इसका उपयोग प्रोग्राम एक्जिक्यूशन के दौरान किसी कार्य को सम्पन्न करने के लिए कम्प्यूटर को सूचित करने के लिए होता है। कंट्रोल फ्लो उस क्रम को कहते हैं जिस क्रम में स्टेटमेण्ट एक्जिक्यूट होता है। वैसे स्टेटमेण्ट जो प्रोग्राम में एक्जिक्यूशन के फ्लो को नियंत्रित करते हैं कंट्रोल फ्लो स्टेटमेण्ट कहलाते है। कंट्रोल फ्लो स्टेटमेण्ट को मूलतः दो प्रकार निर्णयन स्टेटमेण्ट तथा लूप स्टेटमेण्ट में बॉटा जा सकता है।

निर्णयन स्टेटमेण्टस (Decisions Statements)

सामान्य स्टेटमेण्ट में स्टेटमेण्टस प्रोग्राम में लिखे गये क्रम में एक के बाद एक के आधार पर एक्जिक्यूट होता है। परन्तु आवश्यकतानुसार कम्प्यूटर कुछ स्टेटमेण्टस के एक्जिक्यूशन क्रम को बदल सकता है। वैसे स्टेटमेण्टस जो एक्जिक्यूशन के क्रम को बदल दे निर्णयन स्टेटमेण्टस कहे जाते हैं। वी०बी० डॉट नेट में ऐसे कई स्टेटमेण्टस हैं जो किसी विशेष कंडिशन के आधार पर स्टेटमेण्ट को एक्ज़िक्यूट करता है। ये कंडिशन कुछ भी हो सकते हैं। इनमें बूलियन मान, उपयोगकर्ता द्वारा इनपुट किया गया मान तथा फंक्शन के द्वारा लौटाया गया मान हो सकता है। 

इफ…एलस् स्टेटमेण्ट (If… Else Statement)

If… Else प्रोग्राम को किसी विशेष कार्य जिसमें शर्त या तो सत्य होता है या असत्य के आधार पर कार्य करने देता है। यह एक प्रकार से आपके प्रोग्राम में इंटेलिजेन्स (intelligence) को जोड़ता है जिसमें परिस्थिति के अनुसार विकल्पों में से किसी को चयन करना होता है। उदाहरणार्थ यदि मंगलवार है तो नमक ग्रहण नहीं करेंगे अन्यथा नमक ग्रहण करेंगे। यदि रविवार है तो यातायात बाधित नहीं होगा अन्यथा यातायात जाम रहेगा। इसका सिण्टैक्स इस प्रकार होगा –

If Condition then
      action1
      Else
      action2
End If

अर्थात यदि कंडीशन सही मिलता है तो पहला कार्य संपन्न होगा नहीं तो दूसरा कार्य अवश्य पूरा होगा। यह कंडीशन हम अक्सर आम दिनों में भी रखते हैं। उदाहरण के तौर पर बारिश नहीं होगी तो क्रिक्रेट खेलेंगे नहीं तो शतरंज खेलेंगे। इसका स्यूडो कोड कुछ इस प्रकार होना चाहिए-

If Rains Then
        Play Chess
        Else
        Play Cricket
End If

इफ. एल्सइफ…एल्स स्टेटमेण्ट (If..EIself..Else Statement)

If… EIself… EIise कंट्रील स्टेटमेण्ट If … EIse का ही एक्स्टेंशन है। इसके माध्यम से आप EIseIf का प्रयोग कर दो
या अधिक संभावित विकल्पों को जोड़ सकते हैं। इसका प्रारूप कुछ इस प्रकार होता है-

If          Condition1       Then

            Action1

Elself   Condition2       Then

            Action2

Elself   Condition2       Then

Action3

Else
End If

If… EIself… EIise ब्लोक में सबसे पहले सही कंडीशन का खोज होता है। सही कंडीशन मिलने पर उसके एक्शन को करता है तथा सही कंडीशन मिलने पर यह END IF तक के स्टेटमेण्ट तक आगे बढ़ता है। यदि कोई भी कंडीशन सम्पन्न नहीं होता है तब Else वाला एक्शन सम्पन्न होता है। इसके EIself क्लाठज (clause) कई हो सकते हैं तथा Else कलाउज वैकल्पिक होता है।

नेस्टेड If (Nested If )

नेस्टेड If ब्लॉक में एक If … End If के अंदर कई If … End If हो सकता है। इसीलिए इसे नेस्टेड If ब्लॉक कहा जाता है। इस ब्लॉक का उपयोग बहुत कम होता है क्योंकि यह थोड़ा जटिल है। इसका स्यूडोकोड इस प्रकार होगा –

If condition1 Then
     action
If condition2 Then
      action
End If

इस नेस्टेड If ब्लॉक के बदले आप साधारण If ब्लॉक का भी प्रयोग कर सकते ऐसा आप IF ब्लॉक में AND ऑपरेटर को जोड़ कर कर सकते हैं । इसका स्यूडोकोड इस प्रकार होगा –

If condition1 And condition2 Then
action End If

सेलेक्ट केस (Select Case)

पिछले खण्ड में आपने पढ़ा कि If…Then का प्रयोग किस प्रकार विभिन्न कडिशन के लिए विभिन्न ब्लॉक को रन करने के लिए करते हैं। जबकि IF..Then स्टेटमेण्ट में ElseIf कीवर्ड का प्रयोग कर एक से अधिक कॉडशनों को इवैल्यूएट किया जा सकता है परन्तु Select Case स्टेटमेण्ट एक से अधिक कॉडशनो को इवैल्यूएट करने हेतू बेहतर विधि उपलब्ध कराता है।

Select Case का प्रयोग कर आप जितना चाहें उतने कंडिशनों को सहज रूप से उपयोग में ला सकते हैं जो उन स्थितियों में जहाँ कई विकल्प हैं को प्रयोग करना आसान बनाता है । Select Case ब्लॉक का सामान्य स्वरूप यह है- 

Select Case Selector
Case Valuelist1
action1
Case Valuelist 2
action2
Case Else
Final action
End Select

जहाँ Case Else तथा इसका एक्शन ऐच्छिक होता है तथा प्रत्येक मान सूची (Value list) एक या अधिक लिटरल, वेरियेबल, एक्सप्रेशन इत्यादि रखते है। प्रत्येक एक्शन एक या अधिक स्टेटमेंट पर बना होता है। सेलेक्टर के इवैल्यूएट होने के उपरांत वी० बी० डॉट नेट सबसे पहले वैल्यू लिस्ट को जाँचता है जिसमें सेलेक्टर का मान शामिल होता है तथा इससे संबंधित एक्शन क्रियान्वित होता है। यदि सेलेक्टर का मान दो अलग-अलग वैल्यू सूचियों में प्रदर्शित होता है तो केवल पहले वैल्यू लिस्ट के साथ संबंधित एक्शन क्रियान्वित होगा।

यदि सेलेक्टर का मान किसी भी वैल्यू लिस्ट में प्रकट नहीं होता तथा यदि कोई Case Else क्लाउज नहीं हो तो प्रोग्राम का क्रियान्वयन Select Case ब्लॉक के बाद आने वाले स्टेटमेण्ट के साथ चलेगा।

उदाहरण के लिए आपका प्रोग्राम रंग विकल्प को स्टोर करने के लिए स्ट्रिंग वेरिएबल का प्रयोग करते हैं तथा आपको रंग के मान को प्राप्त करने की आवश्यकता पडती है । इसके लिए आपको इस प्रकार Select Case स्टेटमेण्ट का प्रयोग करना होगा –

Select Case Color
    Case “red”
         MsgBox (“You selected red”)
    Case “blue”
         MsgBox(“You selected blue”)
    Case “green”
         MsgBox (“You selected green”)
End Select

जब यह कोड रन हाकता है तो Select Case लाइन व्यंजक के मान (Color) को निर्धारित करता है। मान लें कि Color एक स्ट्रिंग वेरिएबल है और यह वेरिएबल मेथड के लिए एक वेरिएबल है जो Select Case स्टेटमेण्ट रखता है। ब्वसवत के मान को उसके बाद पहले बेंग स्टेटमेण्ट के साथ तुलना करता है । यदि मान मिल जाता है तो कोड का अगला लाइन रन होता है और उसके बाद म्दक मसमबज लाइन पर कोड चला जाता है ।

यदि मान नही मिलता है तो कोड के अगले Case लाइन को जाँचा जाता है। बेंम स्टेटमेण्ट के कई फॉर्म हो सकते हैं जैसे कि उपर के उदाहरण में यह स्ट्रिंग है । किन्तु यह कोइ थी डाटा टाइप या व्यंजक हो सकता है। आप संख्याओं की एक रेंज को ज्व की वर्ड का प्रयोग करके इवैल्यूएट कर सकते हैं । इस प्रकार –
Case 1 To 10
इस उदाहरण में कोइ भी संख्या 1 से 10 के मध्य परिणाम को प्रकट करेगा।
आप चाहें तो एक ही Case स्टेटमेण्ट में कई मानों का मूल्यांकन कर सकते हैं। इसके लिए प्रत्येक मान के बाद आप कौमा जोड़ें। इस प्रकार –  Case “red”, “white”, “blue”

इस उदाहरण में तीनों मानों में कोई भी मान परिणाम देगा।
आप केस स्टेटमेण्ट के साथ तुलनात्मक ऑपरेटर और रे की-वर्ड का प्रयोग कर भी मान को जाँच के लिए रख सकते हैं। इस प्रकार –
Case Is > 9
इस उदाहरण में 9 से उपर कोई भी मान परिणाम देगा।

आओ सीखें


उदाहरण-1 : एक विण्डोज प्रोग्राम लिखें जिसमें Select Case का प्रयोग करके महीनों के नाम इनपुट करने पर वह यह बताए कि उस महीने में कितने दिन होते हैं।

समाधान :

  • File मेन्यू को क्लिक करें तथा New Project का चयन करें।
  • New Project डायलॉग बॉक्स खुलने के पश्चात Templates पेन Windows Application को क्लिक करें।
  • Name टेक्स्टबॉक्स में My Project टाइप करें तथा OK को क्लिक करें । उसके बाद एक नया विण्डोज
    फॉर्मस प्रोजेक्ट खुलेगा। 
  • फॉर्म पर प्रश्न में दिए गए विवरण के अनुसार टूलबॉक्स से कंट्रोल को जोड़ें। तथा प्रश्नानुसार उनके प्रॉपर्टी को सेट करें तथा चित्रानुसार उनहें सजाएँ।
  • Find Days In A Month बटन को दो बार क्लिक करें और btnFind_Click इवेण्ट हैण्डलर के लिए निम्नलिखित कोड लिखें-

Private Sub Button1 Click(ByVal sender As System.Object, ByVal e As System.EventArgs)
Handles Button1. Click
                  Dim month As String
                  month = TextBox1.Text
                  TextBox2.Text = month. ToUpper & ” has ” & TotalDays (month) & ” days.”
End Sub

Function TotalDays(ByVal month As String) As Integer
              Select Case month.ToUpper

Case “JANUARY”
Return 31
Case “FEBRUARY”
Return 28
Case “MARCH”
Return 31
Case “APRIL”
Return 30
Case “MAY”
Return 31
Case “JUNE”
Return 30
Case “JULY”
Return 31
Case “AUGUST”
Return 31
Case “SEPTEMBER”
Return 30
Case “OCTOBER”
Return 31
Case “NOVEMBER”
Return 30
Case “DECEMBER”
Return 31

           End Select
End Function

F5 दबायें तथा परिणाम को जाँचें।

इसके दूसरे भाग को हम इस प्रकार भी लिख सकते है।

Select Case Month
Case “FEBRUARY”
Return 28 

Case “JANUARY”, “MARCH”, “MAY”, “JULY”, “AUGUST”, “OCTOBER”, “DECEMBER”
Return 31
Case “APRIL”, “JUNE”, “SEPTEMBER”, “NOVEMBER”
End Select

उदाहरण-2 : एक विण्डोज प्रोग्राम लिखें जिसमें Select Case का उपयोग हुआ हो तथा आपके द्वारा देश का इनपुट किये जाने पर वहाँ का राष्ट्रीय खेल परिणामस्वरूप प्रदर्शित करें।

समाधान :

  • File मेन्यू को क्लिक करें तथा New Project का चयन करें ।
  • New Project डायलॉग बॉक्स खुलने के पश्चात Templates पेन में Windows Application को क्लिक करें ।
  • Name टेक्स्टबॉक्स में My Project टाइप करें तथा OK को क्लिक करें । उसके बाद एक नया विण्डोज फॉर्मस प्रोजेक्ट खुलेगा।
  • फॉर्म पर प्रश्न में दिए गए विवरण के अनुसार टूलबॉक्स से कंट्रोल को जोड़ें । तथा प्रश्नानुसार उनके प्रॉपर्टी को सेट करें तथा उनहें सजाएँ ।
  • Show National Game बटन को दो बार क्लिक करें और btnShow_Click इवेण्ट हैण्डलर के लिए निम्नलिखित
    कोड लिखें-

Private Sub Button1_Click(ByVal sender As System. Object, ByVal e As System.EventArgs)
Handles Button1.Click
       Dim country As String
         country = txtCountry.Text.ToUpper
         txtResult.Text = NameOfSports(country)
End Sub

Function NameOfSports(ByVal country As String) As String

Select Case country
      Case “INDIA”
             Return “Hockey”
      Case “AUSTRALIA”
             Return “Cricket”
      Case “SPAIN”
             Return “Bull Fighting”
      Case “AMERICA”
             Return Base Ball”
      Case “JAPAN”
             Return ” Judo “
      Case “RUSSIA”
             Return “Rugby”
      Case Else
             Return “Sorry this country does not exist in our database.”
End Select

End Function

आज आपने क्या सीखा (What Did You Learn Today)

  • प्रोग्रामिंग भाषा पूर्णतः प्राकृतिक भाषा से प्रेरित होता है। और प्रोग्राम आपके नित्य प्रतिदिन के कार्यों से अलग नहीं होता है। आप जो भी प्रातःकाल से संध्या तक करते हैं वह एक तरह का प्रोग्राम ही होता है। इस प्रोग्राम के दौरान कुछ तो काम आप रूटीन के हिसाब से क्रम में करते रहते हैं तथा कुछ काम परिस्थिति के अनुसार करते हैं।
  • लॉजिकल ऑपरेटर्स लॉजिक गेटस की तरह होते है जो परिणाम के रूप में केवल बूलियन मान ही लौटाते है। बूलियन मान का अर्थ सत्य या 1 तथा असत्य या 0 होता है। लॉजिकल ऑपरेटर्स लॉजिकल ऑपरेशन को पूरा करते हैं।
  • Not ऑपरेटर में एक ही ऑपरेण्ड होता है। इस Not ऑपरेटर का परिणाम सत्य या असत्य हो सकता है । इसका परिणाम तब सत्य होगा जब ऑपरेण्ड असत्य होगा तथा यह असत्य होगा जब ऑपरेण्ड सत्य होगा । 
  • And ऑपरेटर में मूलतः दो ऑपरेण्ड होते हैं। तथा इसमें यदि दोनों ऑपरेण्ड सत्य हैं तो परिणाम भी सत्य होगा। यदि दोनों में कोई भी ऑपरेण्ड असत्य होगा तो परिणाम असत्य ही होगा।
  • OR ऑपरेटर में भी And की भाँति मूलतः दो ही ऑपरेण्ड होते हैं। और यह कुछ स्थितियों में And ऑपरेटर के ठीक विपरीत परिणाम देता है। यदि दोनों ऑपरेण्ड असत्य है तो यह भी And की तरह ही असत्य परिणाम देता है। परन्तु यदि दोनों में कोई भी ऑपरेण्ड सत्य है तो यह And के विपरीत परिणाम सत्य ही देगा।
  • XOR ऑपरेटर में भी मूलतः दो ऑपरेण्ड होते है। इसका पूर्ण रूप एक्स्क्लूसिव OR (eXclusive OR) होता है। इसमें यदि दोनों ऑपरेण्ड सत्य है तो परिणाम असत्य होगा। और यदि दोनों ऑपरेण्ड असत्य है तो परिणाम असत्य होगा। साथ ही दोनों में से कोई भी ऑपरेण्ड के सत्य होने पर परिणाम सत्य ही होगा।
  • प्रिसिडेन्स का अर्थ होता है कि यदि एक से अधिक ऑपरेटर के समायोजन से कोई स्टेटमेण्ट बनता है तो कौन सा ऑपरेटर पहले कार्य करेगा।
  • स्टेटमेण्ट किसी प्रोग्रामिंग भाषा का सबसे छोटा अवयव होता है। इसका उपयोग प्रोग्राम एक्जिक्यूशन के दौरान किसी कार्य को सम्पन्न करने  लिए कम्प्यूटर को सूचित करने के लिए होता है।
  • कंट्रोल फ्लो उस क्रम को कहते हैं जिस क्रम में स्टेटमेण्ट एक्जिक्यूट होता है। वैसे स्टेटमेण्ट जो प्रोग्राम में एक्जिक्यूशन के फ्लो को नियंत्रित करते हैं कंट्रोल फ्लो स्टेटमेण्ट कहलाते है।
  • कंट्रोल फ्लो स्टेटमेण्ट को मूलतः दो प्रकार निर्णयन स्टेटमेण्ट तथा लूप स्टेटमेण्ट में बांटा जा सकता है। If… Else प्रोग्राम को किसी विशेष कार्य जिसमें शर्त या तो सत्य होता है या असत्य के आधार पर कार्य करने देता है। यह एक प्रकार से आपके प्रोग्राम में इंटेलिजेन्स (intelligence) को जोड़ता है जिसमें परिस्थिति के अनुसार विकल्पों में से किसी को चयन करना होता है।
  • If … ElseIf … Else कंट्रोल स्टेटमेण्ट If … Else का ही एक्स्टेंशन है। इसके माध्यम से आप ElseIf का प्रयोग कर दो या अधिक संभावित विकल्पों को जोड़ सकते हैं।
  • नेस्टेड If ब्लॉक में एक If … End If के अंदर कई If … End If हो सकता है । इसीलिए इसे नेस्टेड If ब्लॉक कहा जाता है । इस ब्लॉक का उपयोग बहुत कम होता है क्योंकि यह थोड़ा जटिल है
  • नेस्टेड If ब्लॉक के बदले आप साधारण If ब्लॉक का भी प्रयोग कर सकते हैं । ऐसा आप If ब्लॉक में AND ऑपरेटर को जोड़ कर कर सकते हैं ।
  • Select Case का प्रयोग कर आप जितना चाहें उतने कंडिशनों को सहज रूप से उपयोग में ला सकते हैं जो उन स्थितियों में जहाँ कई विकल्प हैं को प्रयोग करना आसान बनाता है ।

कम्प्यूटर की प्रोग्रामिंग भाषा पार्ट-2 | Best Computer Programming Language

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कम्प्यूटर की प्रोग्रामिंग भाषा पार्ट-2 | Best Computer Programming Language
कम्प्यूटर की प्रोग्रामिंग भाषा पार्ट-2 | Best Computer Programming Language

कम्प्यूटर की प्रोग्रामिंग भाषा क्या होता है – कम्प्यूटर की प्रोग्रामिंग भाषा पार्ट-2 | प्रोग्रामिंग भाषा क्या है इसके प्रकार | Computer Programming Language In Hindi

कम्प्यूटर की प्रोग्रामिंग भाषा पार्ट-2 परिचय (Introduction) – किसी भी प्राकृतिक भाषा या आम बोल-चाल की भाषा में वर्ण, शब्द, वाक्यांश, वाक्य के अतिरिक्त एक विशेष व्याकरण होता है। व्याकरण हमें भाषा को शुद्ध बोलना और उसकी लिपि को लिखना सीखाता है। ठीक उसी प्रकार कम्प्यूटर की प्रोग्रामिंग भाषा के अपने वर्ण, शब्द, वाक्यांश तथा व्याकरण होते हैं। प्रोग्राम लिखते समय इन चीजों का ख्याल रखना अत्यंत आवश्यक होता है। आइये जानते हैं इस आर्टिकल कम्प्यूटर की प्रोग्रामिंग भाषा पार्ट-2 में |

ऐरे (Arrays)

वेरियेबल के बारे में आपने पीछे पढ़ा होगा। वेरियेबल किसी एक मान को असाइन करने वाला एक नाम है। इस प्रकार-
Dim Student As String
एक Student नाम का वेरियेबल प्रोग्राम में मान लिया गया, जो स्ट्रिंग टाइप का है। अब मान लें कि आपको किसी विद्यालय के विभिन्न कक्षाओं का अंक-पत्र (Marksheet) निकालना है। एक कक्षा में 50 विद्यार्थी हैं, जिसे वेरियेबल के हिसाब से उपयोग में लाने का एक ही तरीका है और वह यह है- 

Dim Student1 As String
Dim Student2 As String
Dim Student3 As String
Dim Student4 As String
Dim Student5 As String

अब समझ लिजिए कि संख्या और बडी रही, तो क्या मुसीबत आ सकती है। 50 विद्यार्थी का अलग-अलग वेरियेबल और अलग-अलग वेरियेबल पर अलग से प्रोसेस कितना दुखदायी हो सकता है। तो क्या कोई ऐसा उपाय है कि 50 विद्यार्थियों के वेरियेबल को एक ही बार डिक्लेअर कर दिया जाए। हाँ है, एक उपाय! इसे ऐरे इस प्रकार से कर सकते हैं-
            Dim Student (50) As String

उपरोक्त स्टेटमेण्ट ऐरे डिक्लेअरेशन स्टेटमेण्ट है। तो ऐरे क्या है? ऐरे की परिभाषा यह है- ऐरे एक ऐसा डाटा स्ट्रक्चर है, जो एक ही प्रकार के डाटा के वेरियेबलों का संकलन है। अर्थात् ऐरे में एक ही प्रकार के एक से अधिक मानों को समाया जा सकता है। इसे इंटीजर, डबल, स्ट्रिंग वेरियेबल का सेट भी कहा जा सकता है। ऐरे में एक से अधिक मान समाहित होने के बावजूद इसका नाम एक ही होता है। इनके मानों को इनके इंडेक्स वैल्यू से एक्सेस किया जाता है। वी.बी. डॉट नेट में ऐरे इंडेक्स 0 से आरम्भ होता है।

ऐरे से संबंधित तथ्य :

  • ऐरे एक डाटा स्ट्रक्चर है, जो एक ही प्रकार के एक से अधिक वेरियेबल का संकलन है।
  • ऐरे का एक ही नाम होता है।
  • ऐरे के एलिमेण्ट (अवयव) की गिनती 0 से शुरू होती है। अर्थात् ऐरे संकलन का पहला वेरियेबल Variable (0) होगा न कि ऐरे Variable (1)।
  • प्रत्येक वेरियेबल के ब्रैकेट के अंदर की संख्या सब्स्क्रीप्ट कही जाती है।
  • ऐरे का प्रत्येक वेरियेबल सब्स्क्रप्टेड वेरियेबल (subscripted variable) कहलाता है।

हम शायद ही Student (0) उपयोग करते हैं। हम वेरियेबल के इन संकलन को ऐरे वेरियेबल Student (0) की भाति निर्दिष्ट करते हैं। प्रत्येक अलग-अलग वेरियेबल के ब्रैकेट के अंदर की संख्या सबस्क्रिप्ट (subscript) कही जाती है। तथा प्रत्येक वेरियेबल (या ऐरे का प्रत्येक एलिमेण्ट) सबस्क्रिप्टेड वेरियेबल या एलिमेण्ट कहा जाता है। उदाहरणार्थ, Student (3) ऐरे Student ) का तीसरा सबस्क्रिप्टेड वेरियेबल है। ऐरे के एलिमेण्ट (अवयव) को उनके क्रम के अनुसार मेमोरी में भी स्थान मिलता है।

यदि arrayName ऐरे का नाम है तथा n इंटिजरल लिटरल, वेरियेबल अथवा एक्स्प्रेशन है, तो डिक्लेअरेशन स्टेटमेण्ट –

Dim arrayName (n) As VarType


array Name (0), array Name (1), array Name (2), arrayName (n) सब्स्क्रप्टेड वेरियेबलों के मानों को रखने के लिए मेमोरी में स्थान सुरक्षित करता है। n का मान ऐरे की अधिकतम सीमा (upper bound) कही जाती है। ऐरे का लोअर बाउण्ड (lower bound) हमेशा 0 होता है। ऐरे में एलिमेण्ट की संख्या n+1 ऐरे का आकार होता है ।

अलग-अलग सबस्क्रिप्टिड वेरियेबलों को असाइनमेण्ट स्टेटमेण्ट के साथ वैल्यू असाइन किये जा सकते हैं तथा टेक्स्ट बॉक्स तथा लिस्ट बॉक्स में इनहें सामान्य वेरियेबलों के मानों की भांति ही डिस्प्ले किया जा सकता है। ऐरे के बारे में आपने जाना कि ऐरे एक समान डाटा के ही वेरियेबल का संकलन है। किन्तु यदि ऐसी स्थिति आ जाय कि आप ऐरे से विभिन्न प्रकार के डाटा के वेरियेबल को संचित करना चाहे तो? इसका भी उपाय वी.बी. डॉट नेट में हैं। आप डाटा टाइप Object घोषित कर यह कार्य कर सकते हैं। इस प्रकार- Dim Student As object

कम्प्यूटर की प्रोग्रामिंग भाषा पार्ट-2 | ऐरे का वर्णन करें- ऐरे कितने प्रकार का होता है

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ऐरे के प्रकार (Types of Array)

ऐरे मुख्यतः चार प्रकार के हो सकते हैं :

  • एक-विमीय ऐरे (Single dimensional array)
  • बहु-विमीय ऐरे (Multi-dimensional array)
  • डायनामिक ऐरे (Dynamic array)
  • जैगूड ऐरे (Jagged array)

1- एक-विमीय ऐरे (Single Dimensional Array)

एक-विमीय ऐरे (Single Dimensional Array) – अभी तक पीछे जो भी चर्चा हुई वह सब एक-विमीय ऐरे पर ही केन्द्रित थी। एक-विमीय ऐरे उस तालिका की तरह होता है जिसमें केवल एक कॉलम होता है।

Student (0)
Student (1)
Student (2)
Student (3)
Student (4)

एक-विमीय ऐरे – ऐरे में स्टोर आइटमों की संख्या को पंक्तियों की संख्या के रूप में समझा जा सकता है। एक-विमीय ऐरे में आप एक ही इंडेक्स उदाहरण के लिए, विद्यार्थियों के नाम का उपयोग कर सूचना को स्टोर कर सकते हैं।

एक-विमीय ऐरे को बनाना तथा उनका मान रखना (Creating Single Dimensional Array and Putting Values on them) – एक-विमीय ऐरे को बनाने के लिए आप ऐरे का नाम, आकार तथा डाटा टाइप देते हैं। ऐरे को डिक्लेअर करने के लिए वेरियेबल डिक्लेअरेशन की भांति ही Dim की-वर्ड का उपयोग होता है। उदाहरण के लिए, 50 विद्यार्थियों के संकलन वाले एक ऐरे को बनाने के लिए निम्नलिखित स्टेटमेण्ट का उपयोग होगा-

Dim Student (49) String  उपरोक्त स्टेटमेण्ट Student ) ऐरे का निर्माण करेगा जिसका डाटा टाइप स्ट्रिंग होगा तथा इसका आकार 49 होगा। परन्तु, इस ऐरे में 50 विद्यार्थियों का मान संकलन करेंगे। क्योंकि जैसाकि बताया जा चुका है इंडेक्स 0 से शुरू होगा। अब ऐरे के एलिमेण्ट मान को असाइन करने के लिए उस मान के साथ इंडेक्स लोकेशन को स्पष्ट करते हैं। इस प्रकार-
Student (0) = “Rama”
Student (1) = “John”
Student (2) = “Alisha”

अब हम किसी एलिमेण्ट को एक्सेस करने के लिए उस इंडेक्स का रिफ्रेन्स देकर कभी भी एक्सेस कर सकते हैं। इसे इस प्रकार कर सकते हैं-
TextBox1.
Text = Student ( 1 )
उपरोक्त स्टेटमेन्ट Student (1) के मान को टेक्स्ट बॉक्स में डिस्प्ले करेगा।

2- बहु-विमीय ऐरे (Multi-Dimensional Array)

बहु-विमीय ऐरे (Multi-Dimensional Array) – ऐरे की विमा ( dimension) मुख्य रूप से इसके इंडेक्स पर निर्भर करता है। इंडेक्स ऐरे के ब्रैकेट के अंदर की संख्या को कहते हैं। एक इंडेक्स वाले ऐरे एक-विमीय होते हैं, ठीक उसी प्रकार एक से अधिक इंडेक्स वाले ऐरे बहु-विमीय ऐरे (multi-dimensional) कहे जाते हैं। बहु-विमीय ऐरे वैसे तालिका की तरह होता है जिसमें दो या अधिक कॉलम होते हैं।

सामान्यतः जब हम बहु-विमीय ऐरे की बात करते हैं तो हम द्वि-विमीय की बात कर रहे होते हैं । इसका प्रत्येक कॉलम एलिमेन्ट के एक फीचर को व्यक्त करता है। बहु-विमीय ऐरे का प्रत्येक एलिमेन्ट इससे जुड़े दो इंडेक्स रखता है। जहाँ एक इंडेक्स ऐरे के पंक्ति को तथा दूसरा इंडेक्स ऐरे के कॉलम को व्यक्त करता है।

(0,0)(0,1)(0,2)(0,3)(0,4)
(1,0)(1,1)(1,2)(1,3)(1,4)
(2,0)(2,1)(2,2)(2,3)(2,4)
(3,0)(3,1)(3,2)(3,3)(3,4)

इसका प्रारूप इस प्रकार होता है-
Dim 2DArray (rows, columns) As DataType

इसी प्रकार आप इस प्रारूप से त्रि-विमीय ऐरे का निर्माण कर सकते हैं-
Dim 3DArray (X, Y, Z) As DataType

बहु-विमीय ऐरे के उपयोग के साथ ही प्रत्येक ऐरे एलिमेण्ट डाटा को रखने के लिए मेमोरी में स्थान घेरता है चाहे डाटा शून्य हो या फिर रिक्त स्ट्रिंग। परिणामस्वरूप बहु-विमीय ऐरे बिना उपयोगिता के भी मेमोरी में स्थान ले लेते हैं। अतः यह सुझाव है कि बहु-विमीय ऐरे का उपयोग समझ कर करें। 

3- जैगूड ऐरे (Jagged Arrays )

बी.बी. डॉट नेट एक ऐसा ऐरे भी उपलब्ध कराता है जिसका प्रत्येक एलिमेण्ट एक ऐरे है। इस ऐरे को जैगूड ऐरे या ऐरे का का ऐरे (Array of arrays) कहते हैं। जैग्ड ऐरे एक-विमीय या बहु-विमीय हो सकता है साथ ही इसके एलिमेण्ट भी एक-विमीय तथा बहु-विमीय हो सकते हैं।

नोट: ऐरे को एलिमेण्ट के रूप में रखना बहु-विमीय ऐरे की तरह की बात नहीं है। बहु-विमीय में एक ही ऐरे पर एक से अधिक इंडेक्स होते हैं।

कभी-कभी आपके एप्लीकेशन में डाटा स्ट्रक्चर द्वि-विमीय होते हैं, परन्तु आयताकार नहीं होते हैं। उदाहरण के लिए, आप months ऐरे ले सकते हैं जिसका प्रत्येक एलिमेन्ट days का ऐरे है। चुकि अलग-अलग महीनों के दिनों की संख्या भिन्न हो सकती है इसलिए एलिमेण्ट आयताकार द्वि-विमीय ऐरे नहीं बना पाते। इस स्थिति में आप बहु-विमीय ऐरे की जगह पर जैगूड ऐरे का उपयोग करते हैं।

निम्नलिखित उदाहरण Double डाटा टाइप वाले एलिमेण्ट का जैण्ड ऐरे रखने के लिए एक ऐरे डिक्लेअर करता है। Sales ) ऐरे का प्रत्येक अवयव स्वयं ही एक ऐरे है, जो महीने को व्यक्त करता है। प्रत्येक month) ऐरे उस महीने के प्रत्येक दिन के लिए मानों को रखता है।

Dim Sales () () As Double = New Double (11) ) {}
Dim month As Integer
Dim days As Integer
For month = 0 to 11
        days = DateTime. DaysInMonth (Year (Now), month + 1)
        Sales (month) = New Double (days –1) {}
Next month

Sales के डिक्लेअरेशन में New क्लाउज ऐरे को 12 अवयव (एलिमेण्ट) ऐरे सेट करता है। जिसका प्रत्येक अवयव Double टाइप का है। For लूप में (Year (Now)) यह निर्धारित करता है कि प्रत्येक महीना कितने दिनों का है तथा Sales के आने वाले अवयव को उपयुक्त आकार के Double ऐरे में सेट करता है। इस उदाहरण में, जैगड ऐरे द्वि-विमीय ऐरे की तुलना में सात अवयव (लीप वर्ष में 6) की बचत करता है। जटिल स्थिति में इससे मेमोरी की और अधिक बचत हो सकती है।

4-  डायनामिक ऐरे (Dynamic Array)

जब जब आप ऐरे को बनाते हैं तब तब आप इसे इनिशियलाइज़ करते हैं। आप इंडेक्स संख्या का प्रयोग कर ऐरे को इनिशियलाइज़ करते हैं। कुछ ऐरे में, अवयवों की संख्या इसके निर्माण के साथ मालूम नहीं होती है। जब ऐसा होता है तब हम ऐरे का आकार बाद में स्पष्ट कर सकते हैं। ऐसे ऐरे को डायनामिक ऐरे कहते हैं। उदाहरणार्थ DynArray नामक ऐरे जिसका आकार निर्माण के समय स्पष्ट नहीं है। इस प्रकार-
            Dim dynArray() As Integer

जिसका आकार हम बाद में ReDim कमाण्ड के माध्यम से सेट करते हैं। इस प्रकार-
            ReDim dynArray(n) As Integer
जहाँ n dynArray का आकार है। 

कंट्रोल ऐरे (Control Array)

हमने ऐरे अथवा सबस्क्रिप्टेड वेरियेबल की उपयोगिता के कई उदाहरण देखें। ये कई प्रोग्रामिंग समस्याओं के संक्षिप्त समाधान लिखने के लिए आवश्यक है। सबस्क्रिप्टेड वेरियेबल द्वारा प्रदान किये जाने वाले उपयोगिता के कारण वी.बी. डॉट नेट लेबल, टेक्स्टबॉक्स और बटन के लिए भी ऐरे प्रदान करते हैं। चूंकि लेबल, टेक्स्टबॉक्स और बटन वी. बी. डॉट नेट में सामान्यतः कंट्रोल समझे जाते हैं, इन ऑब्जेक्ट के ऐरे को कंट्रोल ऐरे कहा जाता है।

कंट्रोल ऐरे को भी उसी तरह बनाया जाता है जिस प्रकार हम अन्य ऐरे बनाते हैं। इस प्रकार-
                Dim arrayName (n) As ControlType
                                              अथवा,
Dim arrayName() As ControlType
उदाहरण के लिए निम्नलिखित तीन स्टेटमेन्ट क्रमशः लेबल, टेक्स्टबॉक्स और बटन के कंट्रोल ऐरे बनाते हैं-
                  Dim lblTitle (10) As Label
                  Dim txtNumber (8) As TextBox
                  Dim btrArront() As Button
अंतिम स्टेटमेन्ट में सबस्क्रिप्ट/इंडेक्स नहीं दिया गया है।

स्ट्रक्चर (Structures)

Double, Integer, String तथा Boolean जैसे डाटा टाइप के साथ आप पहले ही कार्य कर चुके हैं। Structure एक ऐसा डाटा टाइप है जी आपको विभिन्न प्रकार के वेरियेबलों को यूनिट के रूप में रखने में सहायता करता है। इसे अन्य प्रोग्रामिंग भाषाओं में हम यूजर परिभाषित टाइप (User Defined Type) के नाम से जानते हैं। उदाहरणार्थ Country से संबंधित Name, Capital, Population, NumberOfStates तथा PerCapitaIncome चार सूचनाएँ हैं। स्ट्रक्चर टाइप में India में हम इन चारों सूचनाओं को इस प्रकार मान सकते हैं-

Structure Country
        Dim Name As String
        Dim Capital As String
        Dim Poulation As Integer
        Dim NumberOfStates As Integer
        Dim PerCapitaIncome As Double

End Structure

स्ट्रक्चर टाइप Country के चार उप-वेरियेबल इस टाइप के मेम्बर हैं। Country टाइप के स्ट्रक्चर वेरियेबल को स्टेटमेन्ट के द्वारा इस प्रकार डिक्लेअर कर सकते हैं-
                              Dim Country1 As Country
प्रत्येक मेम्बर को स्ट्रक्चर वेरियेबल का नाम तथा मेम्बर तथा इन दोनों के मध्य एक पिरियड (.) देकर एक्सेस कर सकते हैं। उदाहरणार्थ Country1 स्ट्रक्चर वेरियेबल के पांचों मेम्बर को Country1.Name, Country1.Capital, Country1.Poputation, Country 1.NumberOfStates तथा Country 1.PerCapitaIncome के द्वारा एक्सेस किये जा सकते हैं। सामन्य रूप से, फॉर्म के Structure ब्लॉक द्वारा स्ट्रक्चर टाइप को परिभाषित किया जाता है। इस प्रकार-

Structure Structure Type
       Dim MemberName1 As MemberType1 

       Dim MemberName2 As MemberType2
End Structure

जहाँ Structure Type यूजर परिभाषित डाटा टाइप का नाम है। MemberName1, MemberName2, स्ट्रक्चर के मेम्बर के नाम हैं। तथा MemberType1, MemberType2 इनके संबंधित डाटा टाइप हैं।

सबरूटीन (Subroutine)

फॉर्म पर जब आप किसी बटन को दो-बार क्लिक करते हैं, तो कोड एडिटर खुलने पर इसका Click इवेण्ट प्रदर्शित होता है, जो कुछ इस प्रकार से आरम्भ तथा समाप्त होता है-
Private Sub….
End Sub

यहाँ Sub वस्तुतः subroutine का संक्षिप्त रूप है। इसका अर्थ यह है कि जब-जब आप बटन को क्लिक करते हैं यह रूटीन एक्जिक्यूट होता है। इस प्रकार का सबरूटीन आप स्वयं भी बना सकते हैं। ऐसा करने पर आप के एप्लीकेशन का दूसरा कोड आवश्यकता होने पर उस सबरूटीन को कॉल कर सकता है। सब रूटीन का लाभ यह है कि जिस कार्य के लिए आपने सबरूटीन बनाया है उस कार्य को सम्पन्न करने के लिए उस एप्लीकेशन में कहीं भी Call की-वर्ड का प्रयोग कर कॉल कर सकते हैं यद्यपि Call की-वर्ड का उपयोग ऐच्छिक है । केवल सबरूटीन का नाम भी कार्य करेगा।

फंक्शन (Function)

वी.बी. डॉट नेट में पहले से कई फंक्शन मौजूद हैं जिन्हें परिशिष्ट अ में देखा जा सकता है। फंक्शन वस्तुतः छोटे प्रोग्राम ही होते हैं। वे इनपुट लेते हैं उन्हें प्रोसेस करते हैं तथा आप को आउटपुट लौटाते हैं। वी.बी. डॉट नेट में पूर्व-निर्मित फंक्शन उपयोग करने के अतिरिक्त हम अपना फंक्शन भी परिभाषित कर सकते हैं। ये फंक्शन फक्शन प्रोग्राम या यूजर परिभाषित फंक्शन कहे जाते हैं।

इन्हें ठीक उसी प्रकार परिभाषित किया जाता है जिस प्रकार हम सबरूटीन को परिभाषित करते हैं। तथा इन्हें पूर्व-निर्मित फंक्शन की तरह ही उपयोग किये जाते हैं। फंक्शन प्रोसीजर को ठीक उसी प्रकार एक्सप्रेशन में उपयोग किया जा सकता है जिस प्रकार वी.बी. डॉट नेट के मूल फंक्शनों का उपयोग होता है। प्रोग्राम इन फंक्शनों को लिटरल, वेरियेबल अथवा एक्सप्रेशन की तरह रेफर करता है। फंक्शन बनाने की यह विधि है-

Function FunctionName (By Val Var1 As Type1, ByVal Var2 As Type2) As DataType
             Statement (s)
             Return expression
End Function

सबसे पहली पंक्ति में प्रकट हो रहे वेरियेबल पैरामीटर (parameters) कहे जाते हैं। फंक्शन ब्लॉक के अंदर स्टेटमेण्ट द्वारा डिक्लेअर वेरियेबल केवल उस ब्लॉक में ही एक्सेसेबल होते हैं। फंक्शन का नाम रखने की कोई सीमा नहीं है परन्तु अच्छा यह है कि इसका नाम इसके द्वारा किये जाने वाले कार्य की ओर इंगित करे। इसके नामकरण के सभी नियम वही हैं, जो वेरियेबल का नाम रखने में होते हैं।

DataType आउटपुट के प्रकार को स्पष्ट करता है, जो String, Integer, Double इत्यादि हो सकता है। सबरूटीन या सब प्रोसीजर की तरह फंक्शन प्रोसीजर भी कोड विण्डो में ही लिखे जाते हैं। फंक्शन में पास किये जाने वाले वेरियेबल मान द्वारा पास किये जाते हैं। किन्तु इसे रेफ्रेन्स द्वारा भी पास किये जा सकते हैं। जब ये वेरियेबल रेफ्रेन्स द्वारा पास किये जाते हैं, तो इनके मान में भी बदलाव सम्भव होता है। यहाँ हम दो फंक्शन FtoC तथा FirstName परिभाषित कर रहे हैं ।

Function FtoC (ByVal t As Double) As Double
         Return (5/9) * (t-32) // फॉरेनहाइट को सेल्सियस में बदलता है।
End Function

यह फंक्शन फॉरेनहाइट को सेल्सियस में बदलता है। FirstName फंक्शन पूरे नाम से केवल नाम के पहले भाग को अलग करता है।
Function FirstName (ByVal Name As String) As String
             Dim FirstSpace As String
             FirstSpace = name.Index Of (” “)
             Return name. Substring (0, FirstSpace)
End Functon

आज आपने क्या सीखा (What Did You Learn Today)

  • किसी भी प्राकृतिक भाषा या आम बोल-चाल की भाषा में वर्ण, शब्द, वाक्यांश, वाक्य के अतिरिक्त एक विशेष व्याकरण होता है। व्याकरण हमें भाषा को शुद्ध बोलना और उसकी लिपि को लिखना सीखाता है। ठीक उसी प्रकार कम्प्यूटर की प्रोग्रामिंग भाषा के अपने वर्ण, शब्द, वाक्यांश तथा व्याकरण होते हैं। प्रोग्राम लिखते समय इन चीजों का ख्याल रखना अत्यंत आवश्यक होता है।
  • वेरियेबल का शब्दिक अर्थ चर मतलब वैसा कुछ जो हमेशा बदलता हो, होता है।
  • वेरियेबल प्रोग्राम से संबंधित सूचना का ऐसा धारक होता है, जो एक या अधिक मानों को संचित कर सकता है। जब कभी आपको प्रोग्राम में उपयोग किये जा रहे किसी सूचना को स्टोर करना होता है आप उसे वेरियेबल के रूप में एक नाम दे सकते हैं।
  • वेरियेबल प्रोग्राम के क्रियान्वयन के दौरान मानों को स्टोर करते हैं। विजुअल बेसिक डॉट नेट में रनटाइम (क्रियान्वयन) वेरियेबल का उपयोग डाटा को अस्थायी रूप से संचित करने में होता है।
  • वेरियेबल का एक खास नाम तथा इसका डाटा एक खास प्रकार का होता है। वेरियेबल के नाम का उपयोग वेरियेबल के मान को एक्सेस करने तथा मनिप्यूलेट करने में होता है।
  • किसी भी वेरियेबल के नाम की शुरूआत किसी वर्ण के साथ अच्छा समझा जाता है। यद्यपि यदि आप वेरियेबल के नाम की शुरूआत किसी अंडरस्कोर () के साथ करते हैं, तो भी यह मान्य है, परन्तु यह अनुशंसित नहीं है।
  • वेरियेबल के नाम में एल्फाबेट, न्यूमेरिक तथा अंडरस्कोर के अतिरिक्त विशेष अक्षर के नाम में श्वेत स्थान (white space) भी मान्य नहीं है।
  • वेरियेबल के नाम में पास्कल केसिंग का उपयोग अच्छा समझा जाता है। हालांकि अनेक प्रोग्रामर कैमल केसिंग का भी प्रयोग करते हैं। EmpFirstName पास्कल केसिंग का उदाहरण है।
  • वेरियेबल का नाम ज्यादा लम्बा अनावश्यक रूप से प्रचलन में नहीं है।
  • वेरियेबल का नाम वी.बी. डॉट नेट का कोई आरक्षित शब्द अर्थात् की-वर्ड नहीं होना चाहिए।
  • वेरियेबल नामकरण नियम का सार यह है कि प्रोग्रामिंग के क्रियान्वयन के दौरान वेरियेबल का नाम आपको भ्रमित न करे तथा क्रियान्वयन त्रुटि रहित हो। 
  • वेरियेबल को डिक्लेअर करने का अर्थ है कि वेरियेबल का नाम क्या होगा तथा उसके डाटा का प्रकार क्या होगा विजुअल बेसिक डॉट नेट में वेरियेबल को डिक्लेअर करने के लिए, Dlm की-वर्ड का उपयोग होता है।
  • मेमोरी प्रबंधन के साथ ही प्रोग्राम को डिबग करना आसान बनाने के लिए आवश्यक है कि आप रिल डाटा प्रकार को सावधानी के साथ डिक्लेअर करें।
  • वैज्ञानिक नोटेशन में B 10 के घात को व्यक्त करता है। अतः 1.10B+2 का अर्थ 1.10 X 102 या 110 तथा 1.10E-2 का अर्थ 1.10 / 102 या 0.0110 होगा ।
  • बी.बी. डॉट नेट में मुद्रा डाटा टाइप बी.बी. 6 की तरह उपलब्ध नहीं है। इसमें आप Decimal डाय यह का प्रयोग मुद्रा को असाइन करने के लिए करते हैं।
  • वी.बी. डॉट नेट में डाटा के प्रकार को डिक्लेअर करने का एक अनोखा तरीका है। इसे आइडेन्टिफायर म कैरैक्टर कहते हैं ।
  • माइकोसॉफट डिज़ायन नियमावली के अनुसार फील्ड के नाम कैमल केसिंग में तथा प्रॉपर्टी के नाम पास्कल केसिंग में लिखना प्रचलन में है। पास्कल केस में आइडेन्टिफायर का प्रत्येक शब्द का प्रथम वर्ण बड़ा होता है तथा कैमल केस मेंप्रत्येक शब्द का प्रथम वर्ण छोटा होता है । EmpName पास्कल केसिंग तथा empName कैमल कीसंग का उदाहरण है ।
  • OPTION EXPLICIT स्टेटमेण्ट यह सुनिश्चित करता है कि कम्पाइलर को स्पष्ट रूप से सभी वेरियेबल को
    प्रोग्राम में उपयोग करने से पहले डिक्लेअर करने की आवश्यकता है अथवा नहीं ।
  • OPTION EXPLICIT का दो मोड ON या OFF होता है। यदि OPTION EXPLICIT ऑन मोड में है तो आपको वेरिएबल को प्रोग्राम में उपयोग करने से पहले उनहें डिक्लेअर करना आवश्यक होगा ।
  • बाई डिफॉल्ट OPTION EXPLICIT ऑन होता है। OPTION EXPLICIT को ऑन मोड में रख कर आप संभावित त्रुटि को कम कर सकते हैं जो वेरिएबल के नाम में गलती के फलस्वरूप होता है।
  • स्कोप किसी प्रोग्रामिंग भाषा का वह एट्रिब्यूट होता है, जो प्रोग्राम के अंदर वेरियेबल की एक्सेसिबिलिटी (accessibility) को डिजाइन करता है। इसका अर्थ यह है कि कौन-सा वेरियेबल प्रोग्राम के किस हिस्से के लिए एक्सेस योग्य है, स्कोप यह तय करता है।
  • Public वेरियेबल पूरे एप्लीकेशन में उपलब्ध रहता है। ये ग्लोबल वेरियेबल होते हैं, जो पूरे एप्लीकेशन में जुड़े होते हैं।
  • Private कीवर्ड का प्रयोग डिक्लेअरेशन स्टेटमेण्ट में यह स्पष्ट करता है कि इसके एलिमेण्ट केवल मॉडयूल क्लास या स्ट्रक्चर के अंदर ही एक्सेसिबल हैं |
  • वेरियेबल का लाइफटाइम वह समय होता है जिसके दौरान वे उपलब्ध रहते हैं। इस उद्देश्य के लिए कम्पाइलर प्रोसीजर, पैरामीटर तथा फंक्शन रिटर्न को वेरियेबल के खास मामलों की तरह समझता है।
  • कॉन्स्टैण्ट वेरियेबल के समान ही होते हैं किन्तु कॉन्स्टैण्ट के मान प्रोग्राम के एक्जिक्यूशन के समय बदलते नहीं है। इसीलिए इन्हें हिन्दी में अचर (न बदलने वाला) कहते हैं।
  • आमतौर पर इन्यूमरेशन का प्रयोग एक विशेष वेरियेबल के लिए मानों के सभी संभावित सेट को इकट्ठा करने में होता है। प्रत्येक इन्यूमरेशन को एक अनोखा नाम दिया जाता है जिसके साथ इसे एक्सेस किया जाता है।
  • ऐरे एक ऐसा डाटा स्ट्रक्चर है, जो एक ही प्रकार के डाटा के वेरियेबलों का संकलन है। अर्थात् ऐरे में एक ही प्रकार के एक से अधिक मानों को समाया जा सकता है। इसे इंटीजर, डबल, स्ट्रिंग वेरियेबल का सेट भी कहा जा सकता है। 
  • अलग सबस्क्रिप्टिक बेरियेबलों को असाइनमेण्ट स्टेटमेण्ट के साथ वैल्यू असाइन किये जा सकते हैं तथा तथालिस्ट बॉक्स में इन्हें सामान्य वेरियेबलों के मानों की भाँति ही डिस्प्ले किया जा सकता है।
  • वस्तुत: subroutine का संक्षिप्त रूप है। इसका अर्थ यह है कि जब-जब आप बटन को क्लिक करते हैं. यह स्प्टीन एक्जिक्यूट होता है। इस प्रकार का सबरूटीन आप स्वयं भी बना सकते हैं। ऐसा करने पर आप के एप्लीकेशन का दूसरा कोड आवश्यकता होने पर उस सबरूटीन को कॉल कर सकता है।
  • सबस्टीन की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आपको एक ही कोड बार-बार नहीं लिखना होता है। आप एक बार किसी विशेष कार्य के लिए सबरूटीन बनायें तथा उसे जब चाहें एप्लीकेशन में कॉल कर लें।
  • बी.बी. डॉट नेट में पूर्व-निर्मित फंक्शन उपयोग करने के अतिरिक्त हम अपना फंक्शन भी परिभाषित कर सकते हैं। वे फंक्शन फंक्शन प्रोग्राम या यूजर परिभाषित फंक्शन कहे जाते हैं।

कम्प्यूटर की प्रोग्रामिंग भाषा पार्ट-1 | Best Computer Programming Language

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कंप्यूटर में प्रोग्रामिंग भाषा क्या है? | कम्प्यूटर की प्रोग्रामिंग भाषा क्या होता है |प्रोग्रामिंग भाषा क्या है इसके प्रकार | Computer Programming Language In Hindi
कंप्यूटर में प्रोग्रामिंग भाषा क्या है? | कम्प्यूटर की प्रोग्रामिंग भाषा क्या होता है |प्रोग्रामिंग भाषा क्या है इसके प्रकार | Computer Programming Language In Hindi

Table of Contents

कंप्यूटर में प्रोग्रामिंग भाषा क्या है? | कम्प्यूटर की प्रोग्रामिंग भाषा क्या होता है |प्रोग्रामिंग भाषा क्या है इसके प्रकार | Computer Programming Language In Hindi

कम्प्यूटर की प्रोग्रामिंग भाषा का परिचय (Introduction) – किसी भी प्राकृतिक भाषा या आम बोल-चाल की भाषा में वर्ण, शब्द, वाक्यांश, वाक्य के अतिरिक्त एक विशेष व्याकरण होता है। व्याकरण हमें भाषा को शुद्ध बोलना और उसकी लिपि को लिखना सीखाता है। ठीक उसी प्रकार कम्प्यूटर की प्रोग्रामिंग भाषा के अपने वर्ण, शब्द, वाक्यांश तथा व्याकरण होते हैं। प्रोग्राम लिखते समय इन चीजों का ख्याल रखना अत्यंत आवश्यक होता है।

वेरियेबल (Variable)

वेरियेबल का शब्दिक अर्थ चर मतलब वैसा कुछ जो हमेशा बदलता हो, होता है। यह कम्प्यूटर में आपके रसोई में डिब्बे के समान होता है जिसमें कभी कुछ तो कभी कुछ रखते हैं। तकनीकी शब्दों में अगर कहें तो इसकी परिभाषा इस प्रकार होगी-

वेरियेबल प्रोग्राम से संबंधित सूचना का ऐसा धारक होता है, जो एक या अधिक मानों को संचित कर सकता है। जब कभी आपको प्रोग्राम में उपयोग किये जा रहे किसी सूचना को स्टोर करना होता है आप उसे वेरियेबल के रूप नाम दे सकते हैं। वेरियेबल का नाम सामान्यतः नहीं बदलता परन्तु प्रोग्राम के क्रियान्वयन के दौरान मान बदल सकने की संभावना होती है। वेरियेबल को आप किसी तालिका के कॉलम हेडिंग के रूप में भी समझ सकते हैं।

वेरियेबल के नाम तथा मान

IDNamesClassDues
1011RajuV735
1012SunitaIX420
1034BrijeshX1725
1138SunilVI730
1188SarveshIII820
1189PriyaIV924

कम्प्यूटर की प्रोग्रामिंग भाषा- कंप्यूटर की पहली प्रोग्रामिंग भाषा कौन सी है? |  Computer Programming Language Kya Hota Hai In Hindi

कंप्यूटर में प्रोग्रामिंग भाषा क्या है? | कम्प्यूटर की प्रोग्रामिंग भाषा क्या होता है |प्रोग्रामिंग भाषा क्या है इसके प्रकार | Computer Programming Language In Hindi
कंप्यूटर में प्रोग्रामिंग भाषा क्या है? | कम्प्यूटर की प्रोग्रामिंग भाषा क्या होता है |प्रोग्रामिंग भाषा क्या है इसके प्रकार | Computer Programming Language In Hindi

वेरियेबल के नामकरण नियम (Naming Conventions Of Variable)

वेरियेबल प्रोग्राम के क्रियान्वयन के दौरान मानों को स्टोर करते हैं। विजुअल बेसिक डॉट नेट में रनटाइम (क्रियान्वयन वेरियेबल का उपयोग डाटा को अस्थायी रूप से संचित करने में होता है। वेरियेबल का एक खास नाम तथा इसका डाट एक खास प्रकार का होता है। वेरियेबल के नाम का उपयोग वेरियेबल के मान को एक्सेस करने तथा मनिप्यूलेट करने में होता है।

वेरियेबल डाटा का प्रकार डाटा के उस प्रकार को निर्धारित करता है, जो वेरियेबल स्टोर कर सकता है। वेरियेबल का नाम प्रोग्राम में बहुत महत्वपूर्ण होता है इसलिए यह आवश्यक है कि आप इसका नाम देते हुए सावधानी बरतें। वेरियेबल के नाम के कुछ स्टैण्डर्ड नियम हैं, जो सामान्यतः सभी प्रोग्रामिंग भाषाओं में लगभग समान होते हैं। आइए देखते हैं कि इनके नियम क्या हैं-

  • किसी भी वेरियेबल के नाम की शुरूआत किसी वर्ण के साथ अच्छा समझा जाता है। यद्यपि यदि आप वेरियेबल के नाम की शुरूआत किसी अंडरस्कोर () के साथ करते हैं, तो भी यह मान्य है, परन्तु यह अनुशंसित नहीं है इसका तर्क यह है कि वेरियेबल का नाम आसानी से पहचानने योग्य (recognizable) होना चाहिए।
  • वेरियेबल के नाम में एल्फाबेट, न्यूमेरिक तथा अंडरस्कोर के अतिरिक्त विशेष अक्षर के नाम में श्वेत स्थान (white space) भी मान्य नहीं है। 
  • वेरियेबल के नाम में पास्कल केसिंग का उपयोग अच्छा समझा जाता है। हालांकि अनेक प्रोग्रामर कैमल केसिंग का भी प्रयोग करते हैं। EmpFirstName पास्कल केसिंग का उदाहरण है। (पास्कल तथा कैमल केसिंग के बारे में जानने के लिए चिंतन देखें )
  • वेरियेबल का नाम ज्यादा लम्बा अनावश्यक रूप से प्रचलन में नहीं है।
  • बेरियेबल का नाम बी.बी. डॉट नेट का कोई आरक्षित शब्द अर्थात् की-वर्ड नहीं होना चाहिए।

हालांकि उपरोक्त नियम उतना सख्त नहीं जितना कि किसी देश का पेनेल कोड जिसको न मानने पर कोई सजा हो जाए।
परन्तु यदि इन नियमों का पालन किया जाए तो प्रोग्राम में कई प्रकार की त्रुटियों से बचने के अलावा त्रुटि निवारण में मदद
प्राप्त कर सकते हैं। सारणी में कुछ मान्य तथा अमान्य वेरियेबल के नाम दिये गये हैं तथा उन्हें क्यों मान्य या अमान्य
समझा जाता है यह बताया गया है।

वेरियेबल के नामस्टेटसकारण
EmpFirstName
Employee FirstName
_EmpFirstName
Emp_First_Name
01EmpFirstName
Emp FirstName
Dim/For
Emp$First Name
मान्य/ अच्छा
मान्य / अच्छा नहीं
मान्य/ अच्छा नहीं
मान्य/ अच्छा नहीं
अमान्य
अमान्य
अमान्य
अमान्य
छोटा एवं सभी प्रचलित नियमों का अनुकरण
थोड़ा बड़ा employee के नाम पर emp का उपयोग हो सकता है।
यह थोड़ा भ्रमित करने वाला है।
यह थोड़ा भ्रमित करने वाला है।
वेरियेबल का शुरूआती केरेक्टर न्यूमेरिक है।
Emp के बाद रिक्त स्थान का उपयोग किया गया है।
वी.बी. डॉट नेट के आरक्षित शब्द हैं।
डॉलर चिन्ह का उपयोग किया गया है।

वेरियेबल नामकरण नियम का सार यह है कि प्रोग्रामिंग के क्रियान्वयन के दौरान वेरियेबल का नाम आपको भ्रमित न करे तथा क्रियान्वयन त्रुटि रहित हो।

वेरियेबल डिक्लेअर करना (Declaring Variables)

वेरियेबल को डिक्लेअर करने का अर्थ है कि वेरियेबल का नाम क्या होगा तथा उसके डाटा का प्रकार क्या होगा। विजुअल बेसिक डॉट नेट में वेरियेबल को डिक्लेअर करने के लिए Dim की-वर्ड का उपयोग होता है। इसका सीधा सिन्टैक्स यह है-
                       Dim Variable [As Type]

यहाँ पर यह समझना आवश्यक होगा कि हम वेरियेबल का टाइप क्यों स्पष्ट करते हैं। वी.बी. डॉट नेट कुछ महत्वपूर्ण कारणो से आपको यह सलाह देता है कि आप वेरियेबल का टाइप भी डिक्लेअर करें। सबसे पहला कारण तो यह है कि आप जान लें कि कौन-सा वेरियेबल किस प्रकार के डाटा को संचित कर सकता है।

दूसरा इसका बड़ा लाभ यह है कि एक ही वेरियेबल में कई प्रकार के डाटा का संचय न हो जाय। और चूँकि वेरियेबल केवल नाम ही नहीं बल्कि यह मेमोरी प्रबंधन का भी एक हिस्सा है। अतः डाटा टाइप डिक्लेअर करने से यह फायदा होगा कि आप मेमोरी को कुशलपूर्वक व्यवस्थि कर पायेंगे क्योंकि अलग-अलग प्रकार के डाटा अलग-अलग स्थान मेमोरी में लेते हैं। उदाहरणार्थ निम्नलिखित स्टेटमेंट –
                          Dim EmpFirstName As String


वेरियेबल का नाम EmpFirstName तथा संचित डाय का प्रकार String डिक्लेअर करता है। अब मान लें कि वेरियेबल के डाटा का प्रकार डिक्लेअर करना आप भूल गये तो क्या होगा? जैसे यह स्टेटमेण्ट –                      

Dim EmpFirstName


वी.बी. डॉट नेट में जब हम किसी वेरियेबल का डाटा टाइप डिक्लेअर नहीं करते हैं, तो वी.बी. डॉट नेट उसे बाई डिफॉल Object टाइप असाइन कर देता है।

डाटा टाइप्स (Data Types )

जैसा कि आपने पिछले आर्टिकल में पढ़ा कि वी.बी डॉट नेट में वेरियेबल डिक्लेअर करते समय डाटा का प्रकार डिक्लेअर करना कितना महत्वपूर्ण है। मेमोरी प्रबंधन के साथ ही प्रोग्राम को डिबग करना आसान बनाने के लिए भी आवश्यक है आप वेरियेबल के डाटा प्रकार को सावधानी के साथ डिक्लेअर करें। सारणी में वी.बी डॉट नेट के डाटा टाइप को बताया गया है।

प्रश्न : मान लें कि आप कर्मचारी के उम्र के लिए वेरियेबल का नामकरण EmpAge करते हैं। बताइए कि इसके लिए कौन-सा डाटा उपयुक्त होगा?
उत्तर : इसके लिए सबसे उपयुक्त डाटा टाइप Byte होगा। इसका स्टेटमेण्ट इस प्रकार होगा।
                                          Dim EmpAge As Byte
इसका कारण यह है कि आप बाइट का मान 0 से 225 तक रख सकते हैं तथा कर्मचारी के उम्र की सीमा भी इसी रेंज में होगी।

डाटा प्रकार (Data) Types)मेमोरी में स्थान (Storage Space)संख्या वे रेंज जो स्वीकृत है / विवरण
(Accepted Range of numbers/Description)
ऑब्जेक्ट (Object)4 या 8 बाइट (प्लेटफॉर्म के अनुसार
बदलता है।)
किसी भी प्रकार से डाटा को स्टोर करने में होता है।
इंटिजर (Integer)4 बाइट–2, 147, 483, 648 से 2,147,647 तक। इसका उपयोग न्यूमेरिक डाटा को स्टोर करने में होता है। यह 32-बिट संख्या में स्टोर होता है।
कैर (Char)2 बाइट0 से 65535 तक। इसका उपयोग हम कैरेक्टर को स्टोर करने में कर सकते हैं।
तिथि (Date)8 बाइटJanuary 1,000, तथा December 31,9999 के मध्य में। इसका प्रयोग तिथि सूचना को स्टोर करने में होता है।
दशमलव (Decimal)16 बाइट+/-79, 228, 162, 514, 264, 337, 593, 543, 950, 335 किसी दशमलव बिन्दु के। +/-7.92281625142644375935439
50335 जिसमें दशमलव बिन्दु के दायीं ओर 28 स्थान हो सकते हैं। इसमें सबसे छोटी अशून्य संख्या +/-0.0000000000000000000000000001 है। इसका प्रयोग बहुत बड़े फ्लोटिंग प्वाईंट मानों को स्टोर
करने में होता है।
बाइट (Byte)1 बाइट0 से 255 तक। इसक उपयोग बाइनेरी डाटा को स्टोर करने में होता है। यह इसके कैरेक्टर मानों को न्यूमेरिक फॉर्मेट में भी स्टोर कर सकता है।
बूलियन (Boolean)प्लेटफॉर्म के अनुसार बदलता है।सत्य (1) या असत्य (0)। इसका उपयोग वैसे डाटा को स्टोर करने में होता है जिनके मान केवल सत्य/असत्य ही हो सकते हैं।
लाँग (Long)8 बाइट-9, 223, 372, 036, 854, 775, 808, 9, 223, 372, 036, 854, 775, 807 तक। इसका प्रयोग न्यूमेरिक डाटा को स्टोर करने में होता है। लाँग डेटा 64-बिट संख्या के रूप में स्टोर होता है।
शॉर्ट (Short)2 बाइट-32, 768 से 32, 767 तक। इसका उपयोग न्यूमेरिक डाटा के छोटे रेन्ज को स्टोर करने में होता है। शॉर्ट डाटा चिन्हित (Signed) 16 -बिट संख्या को स्टोर करने में होता है।
यूशॉर्ट (UShort)2 बाइट0 से 65, 535 तक। इसका उपयोग अनसाइन्ड न्यूमेरिक डाटा के छोटे रेन्ज को स्टोर करने में होता है।
एसबाइट (SByte)1 बाइट– 128 से लेकर 127 । इसका प्रयोग साइन्ड (signed) इंटिजर डाटा को स्टोर करने में होता है।
स्ट्रिंग (String)प्लेटफॉर्म के अनुसार बदलता है।0 से 20 करोड यूनिकोड कैरेक्टर तक। इसका प्रयोग अल्फा न्यूमेरिक डाटा को स्टोर करने में होता है।
यूइंटिजर (UInteger)4 बाइट0 से लेकर 4,294,967,295 । इसका प्रयोग अनसाइन्ड (unsigned) इंटिजर डाटा को स्टोर करने में होता है।
यूलॉग (ULong)8 बाइट0 से लेकर 18,446,744,073,709,551,615 (1.8…E+19 )। इसका प्रयोग अत्यंत बड़े अनसाइन्ड (unsigned) इंटिजर डाटा को स्टोर करने में होता है।
सिंगल (Single)4 बाइट-3.402823E + 38 से 1.401298E 45 (ऋणात्मक संख्याएँ) 1.401298E 45 से 3.402823E38 (धनात्मक संख्याएँ) । इसका प्रयोग सिंगल प्रिसिष्ठान फ्लोटिंग प्वाइन्ट मानों को स्टोर करने में होता है।
डबल (Double)8 बाइट-1.79769313486231E+ से 4.94065645841247E-324 (ऋणात्मक संख्याएँ) तथा 4.94065645841247E-324 से
1.79769313486232E308 (ऋणात्मक संख्याएँ) । इसका उपयोग बड़ी फ्लोटिंग प्वाइंट संख्याओं को स्टोर करने में होता है।

वैज्ञानिक नोटेशन में E10 के घात को व्यक्त करता है । अतः 1.10E+2 का अर्थ 1.10×102 या 110 होगा तथा 1.10E-2 का अर्थ 1.10/102 या 0.0110 होगा।
प्रश्न : मुद्रा डाय (Currency) क्या वी.बी. डॉट नेट में उपलब्ध है? अगर नहीं तो मुद्रा को हम कैसे वी.बी. डॉट नेट में संचित करेंगे।
उत्तर : बी.बी. डॉट नेट में मुद्रा डाटा टाइप वी.बी. 6 की तरह उपलब्ध नहीं है। इसमें आप Decimal डाटा टाइप का प्रयोग मुद्रा को असाइन करने के लिए करते हैं। 

आइडेन्टिफायर टाइप कैरैक्टर – वी. बी. डॉट नेट में डाटा टाइप डिक्लेअर करने का एक अनोखा तरीका (Identifier Type Character – A unique way to declaring data types in VB.Net)

वी.बी. डॉट नेट में डाटा के प्रकार को डिक्लेअर करने का एक अनोखा तरीका है। इसे आइडेन्टिफायर टाइप कैरैक्टर कहते हैं। मान लें कि आप जल्दी में है और प्रोग्रामिंग में थोड़ा कम टाइपिंग चाहते हैं, तो यह तरीका उपयोगी हो सकता है। हालाँकि तरीका आपको भ्रमित करने वाला भी हो सकता है। क्योंकि कौन-सा चिन्ह किस डाटा टाइप को निरूपित करता है यह याद करना होगा। दूसरा कि यह तरीका कुछ खास डाटा टाइप के लिए ही है। सारणी में डाटा टाइप को निरूपित करने वाले चिन्ह को दर्शाता है।

डाटा प्रकार (Data Types)चिन्ह (Symbols)
दशमलव (Decimal)
डबल (Double)
इंटिजर (Integer)
लाँग (Long ) सिंगल (Single)
स्ट्रिंग (String)
@
#
%
&
!
$

उदाहरण के लिए आपको

           Dim a As Integer
के बदले
          Dim a%
ही लिखना काफी होगा।
इसी प्रकार           Dim EmpName As String
के बदले केवल
Dim EmpName$
काम करेगा।

और अगर आपको दो स्ट्रिंग वेरियेबल एक साथ डिक्लेअर करना है, तो क्या करेंगे? घबड़ाइए मत। इसके लिए आपको दो प्रकार उस चिन्ह को इस प्रकार लिखना होगा-
                              Dim EmpFirstName$, EmpLastName$
Boolean, Byte, Char, Date, Object, SByte, Short, UInteger तथा ULong के बदले कोइ आइडेन्टिफायर टाइप कैरैक्टर नहीं होता है। आप आइडेन्टिफायर टाइप कैरैक्टर का प्रयोग फंक्शन के साथ भी कर सकते हैं। उदाहरण के लिए add फंक्शन में $ जोड़ कर उसका मान स्टिंग में प्राप्त कर सकते हैं।

पास्कल तथा कैमल केसिंग से क्या हैं ?

माइक्रोसॉफट डिज़ायन नियमावली के अनुसार फील्ड के नाम कैमल केसिंग में तथा प्रॉपर्टी के नाम पास्कल केसिंग में लिखना प्रचलन में है । पास्कल केस में आइडेन्टिफायर का प्रत्येक शब्द का प्रथम वर्ण बड़ा होता है तथा कैमल केस मेंप्रत्येक शब्द का प्रथम वर्ण छोटा होता है। EmpName पास्कल केसिंग तथा empName कैमल कीसंग का उदाहरण है। 

सामान्य नियम के अनुसार पास्कल केसिंग का उपयोग पैरामीटर तथा प्राइवेट या प्रोटेक्टेड फील्ड को छोड़कर कहीं भी हो सकता है तथा कैमल केसिंग का उपयोग पैरामीटर तथा प्राइवेट या प्रोटेक्टेड फील्ड के लिए ही होता है। इसीलिए जब हम field लिखते हैं तो वह फील्ड का सूचक होता है जबकि Field प्रॉपर्टी को सूचित करता है।

फोर्सिंग वेरियेबल डिक्लेअरेशन करना (Forcing Variable Declaration)

OPTION EXPLICIT स्टेटमेण्ट यह सुनिश्चित करता है कि कम्पाइलर को स्पष्ट रूप से सभी वेरियेबल को प्रोग्राम में उपयोग करने से पहले डिक्लेअर करने की आवश्यकता है अथवा नहीं । OPTION EXPLICIT का दो मोड ON या OFF होता है । यदि OPTION EXPLICIT ऑन मोड में है तो आपको बेरिएबल को प्रोग्राम में उपयोग करने से पहले उनहें डिक्लेअर करना आवश्यक होगा। यदि आप ऐसा नहीं करते हैं तो अनडिक्लेअर्ड बेरिएबल के लिए कम्पाइल टाइम त्रुटि प्रकट होगा ।

यदि OPTION EXPLICIT ऑफ है तो वी बी डॉट नेट वेरिएबल अनडिक्लेअर्ड रहने पर स्वयं ही वेरिएबल का निर्माण कर देता है । बाई डिफॉल्ट OPTION EXPLICIT ऑन होता है । OPTION EXPLICIT को ऑन मोड में रख कर आप संभावित त्रुटि को कम कर सकते हैं जो वेरिएबल के नाम में गुलती के फलस्वरूप होता है। क्योंकि OPTION EXPLICIT यदि ऑन मोड में है तो आपको डाटा को स्टोर करने के लिए प्रोग्राम में प्रत्येक वेरिएबल को डिक्लेअर करना होता है।

उदाहरण के लिए निम्न प्रोग्राम को देखें –
Public Class Form1
           Private Sub Button1_Click(ByVal sender As System.Object, –
           ByVal e As System. EventArgs) Handles Button1.Click
                  Dim str As String
                  str = “Option Explicit ON”
                  MsgBox (str)
           End Sub
End Class

उपरोक्त प्रोग्राम एक स्ट्रिंग वेरिएबल को डिक्लेअर करता है तथा इसको मान असाइन करता है तथा इसे डिस्पले करता है। अब यदि आप चाहते हैं कि वेरिएबल डिक्लेअर किए बगैर वी बी डॉट नेट वेरिएबल का निर्माण कर दे तो आपको OPTION EXPLICIT OFF का प्रयोग करना होगा। इसी को बलपूर्व वेरियेबल डिक्लेअरेशन करना कहते हैं। उदाहरण के लिए निम्न प्रोग्राम को देखें –

OPTION EXPLICIT OFF
Public Class Form1
           Private Sub Button1_Click(ByVal sender As System.Object,_
           ByVal e As System. EventArgs) Handles Button1. Click
                      Dim str As String
                       str = “Option Explicit ON”
                       MsgBox (str)
             End Sub
End Class

जब आप इस प्रोग्राम को रन करेंगे तो कोइ त्रुटि नही मिलेगी। परंतु जैसे ही आप इसमें से OPTION EXPLICIT OFF को हटा देंगे तो त्रुटि प्रकट हो जायगा। 

वेरियेबल स्कोप (Scope of a Variable)

स्कोप किसी प्रोग्रामिंग भाषा का वह एट्रिब्यूट होता है, जो प्रोग्राम के अंदर वेरियेबल की एक्सेसिबिलिटी (accessibility) को डिजाइन करता है। इसका अर्थ यह है कि कौन-सा वेरियेबल प्रोग्राम के किस हिस्से के लिए एक्सेस योग्य है, स्कोप यह तय करता है। कोई वेरियेबल किसी एक ब्लॉक के लिए सीमित हो सकता है, कोई वेरियेबल किसी प्रॉसीजर के द्वारा भी एक्सेस किया जा सकता है, तो कोई वेरियेबल पूरे मॉड्यूल तथा कोई प्रोजेक्ट के लिए भी उपलब्ध हो सकता है।

वेरियेबल स्कोप पूरी तरह से आपकी आवश्यकता पर निर्भर करता है। मान लें कि आप किसी ऐसे वेरियेबल को डिक्लेअर कर रहे हैं जिसकी आवश्यकता आपको किसी खास ब्लॉक के लिए सीमित है। ब्लॉक किसी प्रोग्राम का सबसे छोटा भाग होता है। अगर हम उस वेरियेबल को ब्लॉक के बाहर एक्सेसिबल बना देते हैं, तो स्वाभाविक है कि प्रोग्राम में त्रुटि आएगी।

जैसे इस ब्लॉक को देखें-

If A <B Then
        Dim message As String
        Message = “B is greater than A”
        TextBox1. Text = Message
End If

उपरोक्त प्रोग्राम में जो message नामक वेरियेबल को डिक्लेअर किया गया है उसकी प्रासंगिकता उपरोक्त IF…..END.  IF ब्लॉक में ही समाप्त हो गया। इस तरह के स्कोप आम तौर पर कंट्रोल फ्लो स्टेटमेण्ट के साथ ही प्रयोग होते हैं। ब्लॉक में आगे यदि वेरियेबल की एक्सेसिबिलिटी आप चाहते हैं, तो पूरे एक प्रॉसीजर के लिए वेरियेबल की एक्सेसिबिलिटी डिफाइन कर सकते हैं। प्रोसीजर किसी बड़े प्रोग्राम का एक भाग होता है जिसे उप प्रोग्राम (Sub program) भी कहा जाता है तथा एक कार्य को सम्पन्न करता है। उदाहरणार्थ किसी बड़े प्रोजेक्ट (एक पूरा प्रोग्राम) के अंदर प्रिंटिंग कार्य को पूरा करना। उदाहरण के लिए, इस प्रोग्राम को देखें-

Private Sub btncompute_Click (…) Handles btncompute. Click
       Dim X, Y As Double
       X = CDbl (txtFirstName . Text)
       Y = CDbl (txtSecondNum Text)
       Sum (X, Y)
End Sub

उपरोक्त प्रोग्राम एक इवेण्ट हैण्डलर प्रोग्राम या एक प्रोसीजर है जिसके अंदर X और Y दो वेरियेबल हैं। इन दोनों की एक्सेसिबिलिटी केवल इस प्रोसीजर के अंदर ही सीमित है।
वी.बी डॉट नेट में प्रोसीजर के बाहर भी वेरियेबल डिक्लेअर हो सकता है जिससे वेरियेबल एक से अधिक प्रोसीजर को उपलब्ध हो सकता है। यदि आप ऐसा करना चाहते हैं, तो दो अन्य की-वर्ड Public तथा Private या प्रयोग कर सकते हैं।

Public वेरियेबल पूरे एप्लीकेशन में उपलब्ध रहता है। ये ग्लोबल वेरियेबल होते हैं, जो पूरे एप्लीकेशन में जुड़े होते हैं। वेरियेबल का प्रयोग बचते हुए किया जाना अच्छा होता है। लेकिन ये तब उपयोगी होते हैं जब आपको ऐसे कुछ मान की आवश्यकता होती है जिसका प्रयोग प्रोग्राम में कई जगहों पर यथा डाटाबेस या फाइल के साथ संयोजन में होगा। Private कीवर्ड का प्रयोग डिक्लेअरेशन स्टेटमेण्ट में यह स्पष्ट करता है कि इसके एलिमेण्ट केवल मॉडयूल, क्लास या स्ट्रक्चर के अंदर ही एक्सेसिबल हैं। 

आप Private का उपयोग केवल मॉडयूल लेवल पर ही कर सकते हैं। इसका अर्थ यह है कि आप प्राइवेट वेरियेबल को केवल मॉडयूल, क्लास या स्ट्रक्चर के अंदर ही डिक्लेअर कर सकते हैं तथा इनहें सोर्स फाइल या नेमस्पेस स्तर पर, किसी इंटरफेस या किसी प्रॉसीजर के अंदर नहीं कर सकते हैं । मॉडयूल स्तर पर यदि आप किसी एक्सेस स्पेसिफायर का प्रयोग नहीं करते हैं तो इसका मतलब बाई डिफॉल्ट Private ही होता है । परन्तु यदि आप Private का प्रयोग करे अच्छा है। इससे कोड को समझना आसान हो जाता है ।

स्कोप की सहायता से उस डाटा को अलग करते हैं, जो हमारे एप्लीकेशन का प्रोसीजर काम में लाता है। बेसिक के बहुत पुराने संस्करणों में स्कोप के लिए क्षमता नहीं थी। तथा सभी वेरियेबल प्रोग्राम के सभी हिस्सों से एक्सेस किये जाने के साथ ही बदले जा सकते थे। इसका नकारात्मक पक्ष यह था कि आप मान लिखने में कभी भी गलती कर देते, जो त्रुटि का कारण हो जाता था।

वेरियेबल का लाइफटाइम (Lifetime of a Variable)

वेरियेबल का लाइफटाइम वह समय होता है जिसके दौरान वे उपलब्ध रहते हैं। इस उद्देश्य के लिए कम्पाइलर प्रोसीजर, पैरामीटर तथा फंक्शन रिटर्न को वेरियेबल के खास मामलों की तरह समझता है। वेरियेबल का लाइफटाइम समय के उस अवधि को व्यक्त करता है जिसके दौरान यह कोई मान रखता है। इसके मान पूरे लाइफटाइम से बदलते हैं परन्तु इसमें हमेशा कुछ न कुछ मान रहता है।

मेम्बर वेरियेबल (किसी प्रोसीजर के बाहर मॉड्यूल स्तर पर घोषित) में लाइफटाइम उस अवयव के समान होता है जिसमें यह डिक्लेअर किया जाता है। एक नॉन-शेयर्ड (जिसे किसी के साथ साझा न किया गया हो) वेरियेबल जो किसी क्लास अथवा स्ट्रक्चर मे डिक्लेअर किया गया हो क्लास अथवा स्ट्रक्चर के प्रत्येक इंस्टैन्स के लिए एक अलग कॉपी के रूप में उसी में विद्यमान रहता है जिसमें इसे डिक्लेअर किया गया है। इस प्रकार का प्रत्येक वेरियेबल अपने इंस्टैन्स के रूप में समान लाइफटाइम रखता है। किन्तु शेअर्ड वेरियेबल एक ही लाइफटाइम रखता है, जो पूरे समय तक चलता है।

कॉन्स्टैण्ट (Constant)

कॉन्स्टैण्ट वेरियेबल के समान ही होते हैं किन्तु कॉन्स्टैण्ट के मान प्रोग्राम के एक्जिक्यूशन के समय बदलते नहीं है। इसीलिए इन्हें हिन्दी में अचर (न बदलने वाला) कहते हैं। वी.बी. डॉट नेट में हम कॉन्स्टैण्ट को Const की-वर्ड के साथ डिक्लेअर करते हैं। उदाहरण के लिए, निम्नलिखित कोडिंग को देखें-

Module ABC
Sub main()
        Const Pi = 3.14159
        Dim Radius, Area As Single
        Radius = 1
        Area = Pi* Radius *Radius
        WriteLine (“Area =” & Str (Area))
        End sub
End Module

उपरोक्त कोडिंग में Pi नामक एक कॉन्स्टैण्ट बनाया गया है साथ ही दो वेरियेबल Radius तथा Area हैं। इसका अर्थ यह है कि Pi का मान किसी भी स्थिति में बदला नहीं जाऐगा।

इन्यूमरेशन (Enumeration)

कॉन्स्टैण्ट तथा इन्यूमरेशन कुछ–कुछ संबंधित है। मान लें कि आपको किसी प्रोग्राम में ढेर सारे उदाहरणार्थ पचास-सौ कॉन्स्टैण्ट डिफाइन करना है और आप उन्हें छोटे-छोटे फंक्शन समूहों में बांटना चाहते हैं, तो क्या आप यह नहीं चाहेंगे कि वी.बी. डॉट नेट में कोई ऐसा फीचर हो जो इसका उपाय करे। वी.बी. डॉट नेट में इसके लिए इन्यूमरेशन (Enumeration) फीचर है। इन्यूमरेशन नाम वाला कॉन्स्टैण्ट (named constant) होता है। इसे आप कॉन्स्टैण्ट का मान सेट भी कह सकते हैं। ये वह मान होते हैं, जो पूरे प्रोग्राम में अनोखे होते हैं तथा इन मानों को ग्लोबल रूप से पहचाना जा सकता है। ये कॉन्स्टैण्ट संख्यात्मक मानों को अर्थपूर्ण नाम देते हैं।

आमतौर पर इन्यूमरेशन का प्रयोग एक विशेष वेरियेबल के लिए मानों के सभी संभावित सेट को इकट्ठा करने में होता है। प्रत्येक इन्यूमरेशन को एक अनोखा नाम दिया जाता है जिसके साथ इसे एक्सेस किया जाता है। यह एक ऐसा विकल्प है जिसका प्रयोग आप ऐसे मानों के सेट को याद करने में करते हैं, जो प्रोग्राम में कहीं भी प्रयोग किये जा सकेंगे। इन्यूमरेशन को बनाने के लिए Enum की-वर्ड का प्रयोग होता है। इन्यूमरेशन एक वैल्यू डाटा टाइप होता है। प्रत्येक इन्यूमरेशन का एक अंतर्निहित संख्यात्मक बेस डाटा टाइप होता है, जो न्यूमेरिक होता है। इन्यूमरेशन का सिन्टैक्स इस प्रकार होता है-

Enum <<enumname>>
        <member1>> = [value]
        <member2> = [value]
End Enum

उदाहरण के लिए, महीनों के नाम के लिए आप इस प्रकार इन्यूमरेशन बना सकते हैं-

Module NameMonth
       Enum Months
            January
            February
            March
            April
           May
           June
           July
           August
           September
           October
           November
           December
     End Enum
End Module

उपरोक्त कोडिंग में इन्यूमरेशन का नाम Months है। हालांकि इन्यूमरेशन सदस्य के लिए हमने इसमें कोई संख्यात्मक मान असाइन नहीं किया है। मान असाइन न करने की स्थिति में वी.बी डॉट नेट बाई डिफॉल्ट 0 से मान असाइन करना शुरू कर देता है। अर्थात् January का मान 0 से शुरू होकर December का मान 11 तक होगा। हम इस कोडिंग को इस तरह भी लिख सकते हैं-

Module NameMonth
       Enum Months

January = 5
February = 10 

March = 15
April = 20
May = 25
June = 30
July = 35
August = 40
September = 45
October = 50
November = 55
December = 6
      End Enum
End Module

इससे हम रैण्डम मान भी दे सकते हैं। इसे समझने लिए इस कोडिंग को देखें-

Module NameMonth
           Enum Months

January
February
March = 5
April
May
July
August
September
October
November
December

         End Enum
End Module

अब देखेंगे कि इसका संख्यात्मक मान किस प्रकार होगा। उपरोक्त कोडिंग के अनुसार January का नाम डिफॉल्ट विधि से 0 तथा February का मान 1 होगा। तथा March का मान 5, April, May, July, August, September, October, November और December का मान क्रमश: 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12, 13 और 14 होगा।

आओ सीखें – एक कंसोल प्रोग्राम लिखें जो इन्यूमरेशन का प्रयोग क्लास, संख्या, प्रोसीजर या ब्लॉक लेवल पर कैसे हो इसको दर्शाए।

समाधान :

  • File मेन्यू को क्लिक करें तथा New Project का चयन करें।
  • New Project डायलॉग बॉक्स खुलने के पश्चात Templates पेन में Console Application को क्लिक करें।
  • Name टेक्स्टबॉक्स में My Project टाइप करें तथा OK को क्लिक करें। उसके बाद कोड एडिटर खुलेगा। इसके बाद निम्नलिखित कोड टाइप करें 

Module Module 1
Public Enum Months

January
February
march
April
May
July
August
September
October
November
December

End Enum

Dim number As Integer
Dim int Input As Integer

Public Function Get Month () As Months

System.Console.WriteLine(“Enter an Integer…”)
intInput = Val (System. Console. ReadLine ( ) )
If intInput < 4 Then
            System.Console.WriteLine(“This is winter in India.”)
ElseIf intInput < 9 Then
            System.Console.WriteLine(“This is Summer in India.”)
ElseIf intInput < 12 Then
            System.Console.WriteLine(“This is autumn in India.”)
Else

            System.Console.WriteLine(“No Known Number.”)
End If
            System.Console.ReadLine()

End Function

Sub Main ( )
            GetMonth ( )
End Sub
End Module

F5 दबाएं और परिणाम देखें।

आज आपने क्या सीखा (What Did You Learn Today)

  • किसी भी प्राकृतिक भाषा या आम बोल-चाल की भाषा में वर्ण, शब्द, वाक्यांश, वाक्य के अतिरिक्त एक विशेष व्याकरण होता है। व्याकरण हमें भाषा को शुद्ध बोलना और उसकी लिपि को लिखना सीखाता है। ठीक उसी प्रकार कम्प्यूटर की प्रोग्रामिंग भाषा के अपने वर्ण, शब्द, वाक्यांश तथा व्याकरण होते हैं। प्रोग्राम लिखते समय इन चीजों का ख्याल रखना अत्यंत आवश्यक होता है।
  • वेरियेबल का शब्दिक अर्थ चर मतलब वैसा कुछ जो हमेशा बदलता हो, होता है।
  • वेरियेबल प्रोग्राम से संबंधित सूचना का ऐसा धारक होता है, जो एक या अधिक मानों को संचित कर सकता है। जब कभी आपको प्रोग्राम में उपयोग किये जा रहे किसी सूचना को स्टोर करना होता है आप उसे वेरियेबल के रूप में एक नाम दे सकते हैं।
  • वेरियेबल प्रोग्राम के क्रियान्वयन के दौरान मानों को स्टोर करते हैं। विजुअल बेसिक डॉट नेट में रनटाइम (क्रियान्वयन) वेरियेबल का उपयोग डाटा को अस्थायी रूप से संचित करने में होता है।
  • वेरियेबल का एक खास नाम तथा इसका डाटा एक खास प्रकार का होता है। वेरियेबल के नाम का उपयोग वेरियेबल के मान को एक्सेस करने तथा मनिप्यूलेट करने में होता है।
  • किसी भी वेरियेबल के नाम की शुरूआत किसी वर्ण के साथ अच्छा समझा जाता है। यद्यपि यदि आप वेरियेबल के नाम की शुरूआत किसी अंडरस्कोर () के साथ करते हैं, तो भी यह मान्य है, परन्तु यह अनुशंसित नहीं है।
  • वेरियेबल के नाम में एल्फाबेट, न्यूमेरिक तथा अंडरस्कोर के अतिरिक्त विशेष अक्षर के नाम में श्वेत स्थान (white space) भी मान्य नहीं है।
  • वेरियेबल के नाम में पास्कल केसिंग का उपयोग अच्छा समझा जाता है। हालांकि अनेक प्रोग्रामर कैमल केसिंग का भी प्रयोग करते हैं। EmpFirstName पास्कल केसिंग का उदाहरण है।
  • वेरियेबल का नाम ज्यादा लम्बा अनावश्यक रूप से प्रचलन में नहीं है।
  • वेरियेबल का नाम वी.बी. डॉट नेट का कोई आरक्षित शब्द अर्थात् की-वर्ड नहीं होना चाहिए।
  • वेरियेबल नामकरण नियम का सार यह है कि प्रोग्रामिंग के क्रियान्वयन के दौरान वेरियेबल का नाम आपको भ्रमित न करे तथा क्रियान्वयन त्रुटि रहित हो। 
  • वेरियेबल को डिक्लेअर करने का अर्थ है कि वेरियेबल का नाम क्या होगा तथा उसके डाटा का प्रकार क्या होगा विजुअल बेसिक डॉट नेट में वेरियेबल को डिक्लेअर करने के लिए, Dlm की-वर्ड का उपयोग होता है।
  • मेमोरी प्रबंधन के साथ ही प्रोग्राम को डिबग करना आसान बनाने के लिए आवश्यक है कि आप रिल डाटा प्रकार को सावधानी के साथ डिक्लेअर करें।
  • वैज्ञानिक नोटेशन में B 10 के घात को व्यक्त करता है। अतः 1.10B+2 का अर्थ 1.10 X 102 या 110 तथा 1.10E-2 का अर्थ 1.10 / 102 या 0.0110 होगा ।
  • बी.बी. डॉट नेट में मुद्रा डाटा टाइप बी.बी. 6 की तरह उपलब्ध नहीं है। इसमें आप Decimal डाय यह का प्रयोग मुद्रा को असाइन करने के लिए करते हैं।
  • वी.बी. डॉट नेट में डाटा के प्रकार को डिक्लेअर करने का एक अनोखा तरीका है। इसे आइडेन्टिफायर म कैरैक्टर कहते हैं ।
  • माइकोसॉफट डिज़ायन नियमावली के अनुसार फील्ड के नाम कैमल केसिंग में तथा प्रॉपर्टी के नाम पास्कल केसिंग में लिखना प्रचलन में है। पास्कल केस में आइडेन्टिफायर का प्रत्येक शब्द का प्रथम वर्ण बड़ा होता है तथा कैमल केस मेंप्रत्येक शब्द का प्रथम वर्ण छोटा होता है । EmpName पास्कल केसिंग तथा empName कैमल कीसंग का उदाहरण है ।
  • OPTION EXPLICIT स्टेटमेण्ट यह सुनिश्चित करता है कि कम्पाइलर को स्पष्ट रूप से सभी वेरियेबल को
    प्रोग्राम में उपयोग करने से पहले डिक्लेअर करने की आवश्यकता है अथवा नहीं ।
  • OPTION EXPLICIT का दो मोड ON या OFF होता है। यदि OPTION EXPLICIT ऑन मोड में है तो आपको वेरिएबल को प्रोग्राम में उपयोग करने से पहले उनहें डिक्लेअर करना आवश्यक होगा ।
  • बाई डिफॉल्ट OPTION EXPLICIT ऑन होता है। OPTION EXPLICIT को ऑन मोड में रख कर आप संभावित त्रुटि को कम कर सकते हैं जो वेरिएबल के नाम में गलती के फलस्वरूप होता है।
  • स्कोप किसी प्रोग्रामिंग भाषा का वह एट्रिब्यूट होता है, जो प्रोग्राम के अंदर वेरियेबल की एक्सेसिबिलिटी (accessibility) को डिजाइन करता है। इसका अर्थ यह है कि कौन-सा वेरियेबल प्रोग्राम के किस हिस्से के लिए एक्सेस योग्य है, स्कोप यह तय करता है।
  • Public वेरियेबल पूरे एप्लीकेशन में उपलब्ध रहता है। ये ग्लोबल वेरियेबल होते हैं, जो पूरे एप्लीकेशन में जुड़े होते हैं।
  • Private कीवर्ड का प्रयोग डिक्लेअरेशन स्टेटमेण्ट में यह स्पष्ट करता है कि इसके एलिमेण्ट केवल मॉडयूल क्लास या स्ट्रक्चर के अंदर ही एक्सेसिबल हैं |
  • वेरियेबल का लाइफटाइम वह समय होता है जिसके दौरान वे उपलब्ध रहते हैं। इस उद्देश्य के लिए कम्पाइलर प्रोसीजर, पैरामीटर तथा फंक्शन रिटर्न को वेरियेबल के खास मामलों की तरह समझता है।
  • कॉन्स्टैण्ट वेरियेबल के समान ही होते हैं किन्तु कॉन्स्टैण्ट के मान प्रोग्राम के एक्जिक्यूशन के समय बदलते नहीं है। इसीलिए इन्हें हिन्दी में अचर (न बदलने वाला) कहते हैं।
  • आमतौर पर इन्यूमरेशन का प्रयोग एक विशेष वेरियेबल के लिए मानों के सभी संभावित सेट को इकट्ठा करने में होता है। प्रत्येक इन्यूमरेशन को एक अनोखा नाम दिया जाता है जिसके साथ इसे एक्सेस किया जाता है।

इंटीग्रेटेड डेवलपमेंन्ट एन्वायरमेण्ट (IDE) | Best IDE in Hindi

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इंटीग्रेटेड डेवलपमेंन्ट एन्वायरमेण्ट क्या होता है एवं उपयोग | आईडीई क्या है और इसकी विशेषताएं क्या है? | What is IDE with example?
इंटीग्रेटेड डेवलपमेंन्ट एन्वायरमेण्ट क्या होता है एवं उपयोग | आईडीई क्या है और इसकी विशेषताएं क्या है? | What is IDE with example?

Table of Contents

इंटीग्रेटेड डेवलपमेंन्ट एन्वायरमेण्ट क्या होता है एवं उपयोग | आईडीई क्या है और इसकी विशेषताएं क्या है? | What is IDE with example?

इंटीग्रेटेड डेवलपमेंन्ट एन्वायरमेण्ट का परिचय (Introduction) – इंटीग्रेटेड डेवलपमेंन्ट एन्वायरमेण्ट कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर का एक प्रकार है जो कम्प्यूटर प्रोग्रामों को सॉफ्टवेयर विकसित करने में सहायता करता है।

किसी इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट इनवायरमेंट में एक सोर्स कोड एडीटर, कम्पाइलर तथा इंटरप्रेटर, बिल्ड ऑटोमेशन टूल्स तथ डिबगर होता है। इसमें इसके अतिरिक्त ग्राफिकल यूजर इंटरफेस का निर्माण हेतु टूल्स भी उपलब्ध होते हैं। कई आधुनिक इंटीग्रेटेड डेवलपमेंन्ट एन्वायरमेण्ट में क्लास ब्राउजर, ऑब्जेक्ट ब्राउजर इत्यादि भी होते हैं। इस आर्टिकल में आपको विजुअल स्टूडियो इंटीग्रेटेड एनवायरमेण्ट के बारे में बताया गया है।

विजुअल स्टूडियो इंटीग्रेटेड डेवलपमेंन्ट एन्वायरमेण्ट| Integrated Development Environment in Hindi

विजुअल स्टूडियो के सभी सदस्य प्रोडक्ट एक ही इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट एनवायरमेंट को उपयोग में लाते हैं। इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट एनवायरमेंट कई अवयवों यथा मेन्यूबार, स्टैण्डर्ड टूलबार, सॉल्यूशन एक्सप्लोरर, प्रॉपर्टीज विण्डो, सर्वर एक्सप्लोरर, टूलबॉक्स तथ अन्य कई टूल विण्डोज से मिलकर बना होता है। ये विण्डोज दायें बायें ऊपर या नीचे डॉक्ड होते हैं या फिर छिपे होते हैं।

आई डी ई के टूल विण्डोज, मेन्यू तथा टूलबार में बदलाव सम्भव होते हैं क्योंकि ये अलग-अलग टाइप के प्रोजेक्ट के लिये अलग-अलग हो सकते हैं। उदाहरण के लिये विण्डोज यूजर इंटरफेस एप्लीकेशन पर कार्य करते समय उपलब्ध मेन्यू, स्टैण्डर्ड टूलबार, कन्सोल यूजर इंटरफेस एप्लीकेशन बनाते समय उपलब्ध मेन्यू, स्टैण्डर्ड टूलबार इत्यादि से अलग होंगे। आपके विजुअल स्टूडियो आई डी ई में टूल विण्डोज तथा इसके अन्य अवयव का स्थान भी आपके द्वारा किये गये में कस्टमाइजेशन के अनुसार बदल सकता है।

इंटीग्रेटेड डेवलपमेंन्ट एन्वायरमेण्ट क्या होता है एवं उपयोग | आईडीई क्या है और इसकी विशेषताएं क्या है? | What is IDE with example?
इंटीग्रेटेड डेवलपमेंन्ट एन्वायरमेण्ट क्या होता है एवं उपयोग | आईडीई क्या है और इसकी विशेषताएं क्या है? | What is IDE with example?

स्टार्ट पेज (Start Page)

स्टार्ट पेज विजुअल स्टूडियो के लिये किसी पुस्तक के कवर पेज की तरह होता है। जब आप विजुअल स्टूडियो खोलते हैं तो सबसे पहला स्क्रीन दिखाई देता है वही स्टार्ट पेज होता है। इस पेज की सहायता से आप नया प्रोजेक्ट बना सकते हैं तथा पुराने प्रोजेक्ट को एक्सेस कर सकते हैं।

इस पेज पर आप वी0बी0 डॉट नेट से सम्बन्धित मौलिक सहायता प्राप्त कर सकते हैं। इस पेज पर आपको आने वाले माइक्रोसॉफ्ट के उत्पादनों तथा कॉन्फ्रेन्स की जानकारी होती है। आप इस पेज पर एप्लीकेशन विकास से सम्बन्धित नयी-नयी सूचना देख सकते हैं। नये प्रोजेक्ट बनाने तथा पुराने प्रोजेक्ट को खोलने के अतिरिक्त सभी कार्यों के लिये ये आवश्यक है कि आप इन्टरनेट से जुड़े हों। आप चाहें तो इस पेज को कस्टमाइज भी कर सकते हैं।

1 स्टार्ट पेज को प्रदर्शित करना (Displaying the Start Page) – स्टार्ट पेज जैसा कि बताया जा चुका है आप तब देखते हैं जब विजुअल स्टूडियो को आप खोलते हैं। फिर भी जब चाहँ आप स्टार्ट पेज को डिस्प्ले कर सकते हैं। इसे कभी भी प्रदर्शित करने के लिये ये करें → View मेन्यू को क्लिक करें। Other Windows को इंगित करें और Start Page का चयन करें।

2 स्टार्ट के अवयव  (Elements of the Start Page)स्टार्ट पेज में चार प्रमुख अवयव हैं , ये इस प्रकार हैं –

  • Recent Projects – इस भाग में उन प्रोजेक्ट की सूची प्रदर्शित होती है जिन पर अभी-अभी कार्य किया गया है | यहाँ आप नये प्रोजेक्ट बना सकते हैं तथा पुराने प्रोजेक्ट को खोल भी सकते हैं।
  • Getting Started इस भाग में सहायता शिक्षयों, सेबसाइटों, तकनीकी लेखों तथा अन्य जानकारी संसाधनों के एक सूच प्रदर्शित होती है जो आपको कार्यक्षमता को बढ़ाने के लिये अत्यन्त लाभकारी होते हैं। साथ ही उत्पाद के मुख्य फीचारों के बारे में भी बताते हैं। इसमें प्रदर्शित सामग्री आपके द्वारा किये गये सेटिंग पर निर्भर करता है|
  • Visual Studio Headlines- माइक्रोसॉफ्ट उत्पाद तथा कार्यक्रम सूचना के लिंक को प्रदर्शित करता है।
  • Visual Studio Developer News – बाई डिफॉल्ट, आपके द्वारा स्पष्ट किये गये माइक्रोसॉफ्ट से एक समय अंतराल के अन्दर लेखों की सूची को प्रदर्शित करता है जिसका चयन कर आप उन लेखों को पढ़ सकते हैं। ये सेटिंग आप Tools Options का चयन कर Options डायलॉग बॉक्स को प्रकट करें। तथा Environment Help के अंदर Startup का चयन करें। तथा स्क्रीन के दायें खण्ड में Start Page news channel टेक्सटबॉक्स में इच्छानुसार यू आर एल का चयन करें। यदि आपके Options डायलॉग में Startup उपलब्ध नहीं है तो डायलॉग बॉक्स के ठीक नीचे Show all settings चेक बॉक्स को चिन्हित कर दें।

फॉर्म डिजाइनर (Form Designer)

फॉर्म आपके एप्लीकेशन का बुनियादी भाग होता है। इसकी सहायता से आप अपने एप्लीकेशन का यूजर इंटरफेस तैयार करते हैं। फॉर्म डिजाइनर आपके इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट एन्वायरमेंट का वह अवयव है जो आपको किसी एप्लीकेशन का ग्राफिक यूजर इंटरफेस बनाने में मदद करता है। आप अपने एप्लीकेशन में सम्मिलित विण्डोज का निर्माण फॉर्म डिजाइनर की सहायता से ही करते हैं। विजुअल स्टूडियो में विण्डोज एप्लीकेशन बनाने के लिये यह एक आधार है। यहाँ से आप विण्डो एप्लीकेशन के विकास की शुरूआत करते हैं। 

कोड एडिटर (Code Editor)

कोड एडिटर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट एन्वायरमेंट का वर्ड प्रोसेसर होता है। इसका उपयोग हम सोर्स कोड को एडिट करने में करते हैं। आप विभिन्न फॉर्म या मॉडयूल के कोड को देखने के लिये एक से अधिक कोड एडिटर खोल सकते हैं तथा उनके कोड को एक कोड एडिटर से दूसरे कोड एडिटर में कॉपी या पेस्ट भी कर सकते हैं। कोड एडिटर को खोलने के कई तरीके हैं।

आप  सॉल्यूशन एक्सप्लोरर से भी कोड एडिटर खोल सकते हैं। इसके लिये ये करें सॉल्यूशन एक्सप्लोरर से फॉर्म या मॉड्यूल का चयन करें। फिर, इसके टूलबार पर व्यू कोड बटन को क्लिक करें या उस फॉर्म या मॉड्यूल को दो बार क्लिक करें। या फिर फॉर्म या मॉड्यूल को दायें क्लिक करें और View Code को शॉर्ट कट मेन्यू से क्लिक करें।

कोड एडिटर को फॉर्म डिजाइनर से भी फॉर्म या इसके किसी कंट्रोल को दो बार क्लिक कर खोला जा सकता है। या फिर आप इसे मेन्यूबार से View और Code का चयन कर खोल सकते हैं। कोड एडिटर का की-बोर्ड शॉर्टकट F7 है। आप F7 फंक्शन की दबाकर भी कोड एडिटर को खोल सकते हैं। ये चयनित/सक्रिय फॉर्म या मॉड्यूल के लिये हो कोड एडिटर को खोलेगा।

कोड एडिटर के लाभ  ( Benefits of Code Editor)

  • कोड एडिटर से डिज़ाइन टाइम में प्रॉपर्टी, मेथड तथा इवेन्ट्स को एक्सेस करना आसान होता है।
  • कोड एडिटर आपको इण्टेलिसेन्स फीचर प्रदान करता है जो आपके स्टेटमेण्ट को पूरा करने में आपकी सहायता करता है।
  • कोड एडिटर में कोड को संकुचित तथा विस्तृत किया जा सकता है। परिणामस्वरूप कोड को देखना आसान हो जाता है।
  • कोड एडिटर आपको कोड स्निपेट इन्सर्टर प्रदान करता है जिसकी सहायता से आप कोड के एक ब्लॉक को अपने प्रोग्राम में जोड़ते हैं।

कोड एडिटर के मुख्य भाग (Main Parts of Code Editor)

कोड एडिटर के मुख्य भाग (Main Parts of Code Editor) – कोड एडिटर के मुख्य भाग इस प्रकार है-

  1. कोड पेन (Code Pane) – यह कोड एडिटर का वो क्षेत्र है जहाँ कोड सम्पादन हेतु डिस्प्ले होता है।
  2. इंडीकेटर मार्जिन (Indicator Margin) – कोड एडिटर के बायें ओर एक ग्रे कॉलम होता है जहाँ ब्रेक पॉइन्ट, बुकमार्क तथा शॉर्टकट उपलब्ध होते हैं। इस क्षेत्र में क्लिक कर आप कोड के लाइन पर ब्रेक पॉइन्ट सेट कर सकते हैं |
  3. चयन मार्जिन (Selection Margin) ये कॉलम वो चित्र है जो इंटीकेटर मार्जिन और एडिटिंग चित्र बीच होता है। कोड में बदलाव यहाँ ट्रैक होता है। यदि अपने ऑप्शन डायलॉग बॉक्स के टेक्स्ट एडिटर के जनरल भाग में ट्रैक चैनवेज को चैक किया हुआ है।
  4. क्षैतिज तथा उदय स्क्रॉल बार (Horizontal and Vertical Scroll Bars)- इन स्क्रॉलबार की सहायता से आप कोड पेन को दायें बायें] ऊपर और नीचे के अदृश्य कोड को देख सकते हैं।

प्रॉपर्टीज विडो (Properties Window)

प्रॉपर्टीज विण्डो का उपयोग मूलतः हम चयनित ऑब्जेक्ट का प्रॉपर्टी तथा इवेण्ट डिजाइन टाइम में देखने तथा उनको बदलने में करते हैं। प्रॉपर्टीज विण्डो का उपयोग फाइल, प्रोजेक्ट तथा सॉल्यूशन के प्रॉपर्टी को सम्पादित करने तथा उन्हें देखने में भी होता है।

प्रॉपर्टीज विण्डो सम्पादन फील्ड के विभिन्न प्रकार को एक विशेष प्रॉपर्टी की आवश्यकता अनुसार डिस्प्ले करता है। ये सम्पादन फील्ड एडिट बॉक्स, ड्रॉप डाउन लिस्ट अथवा कस्टम एडिटर डायलॉग बॉक्स के लिंक हो सकते हैं। जो प्रॉपर्ट हल्के रंग से रंगें होते हैं वो केवल पढ़ने योग्य होते हैं। उन्हें सम्पादित नहीं किया जा सकता है। प्रॉपर्टीज विण्डो के सबसे उपर एक टूलबार होता है । इसके विभिन्न टूल की चर्चा नीचे की जा रही है।

  • ऑब्जेक्ट नेम (Object name) : यहाँ चयनित ऑब्जेक्ट का नाम तथा ऑब्जेक्ट की सूची प्रदर्शित होती है। यहाँ केवल सक्रिय कोड एडिटर तथा फॉर्म डिजाइनर के ऑब्जेक्ट ही दृश्य होते हैं। जब आप कई ऑब्जेक्ट का एक साथ चयन करते हैं तो उन ऑब्जेक्ट के समान प्रॉपर्टी ही यहाँ दिखते हैं तथा यहाँ कुछ भी दृश्य नहीं होता है।
  • कैटेगराइज्ड (Categorized) : चयनित ऑब्जेक्ट के सभी प्रॉपर्टी तथा उनके मान को कैटेगरी में सूचीबद्ध करता है। आप किसी कैटेगरी के जोड़ चिन्ह को क्लिक कर उसे संकुचित भी कर सकते हैं ताकि दृश्य प्रॉपर्टी की संख्या को घटाया जा सके। कैटेगरी के नाम वर्णमाला कर्म में होते हैं। जब कोई कैटेगरी संकुचित होता है तो इसके दायें ओर जोड चिन्ह (+) होता है तथा अगर कैटेगरी के सभी प्रॉपर्टी दृश्य हैं तो इसके बायें ओर घटाव का चिन्ह (-) होता है।
  • अल्फाबेटिक (Alphabetic) : सभी डिजाइन समय प्रॉपर्टी तथा चयनित ऑब्जेक्ट के इवेण्ट को वर्णमाला क्रम में सजाता है।
  • प्रॉपटीज (Properties) : ऑब्जेक्ट की प्रॉपर्टी को प्रदर्शित करता है। कई ऑब्जेक्ट के इवेण्ट को भी प्रॉपर्टीज विण्डो से देखा जा सकता है।
  • इवेण्टस (Events) : ऑब्जेक्ट के इवेण्ट को प्रदर्शित करता है।
  • प्रॉपर्टी पेजेज (Property Pages) : यह चयनित आइटम के लिये प्रॉपर्टी पेजेज डायलॉग बॉक्स या प्रोजेक्ट डिजाइनर को प्रदर्शित करता है। यह प्रॉपर्टीज़ विण्डो में उपलब्ध प्रॉपर्टी के सब सेट तथा सुपर सेट को डिस्पले करता है। इस बटन का उपयोग कर आप अपने प्रोजेक्ट के सक्रिय कनफिगरेशन से सम्बंधित प्रॉपर्टी को देख सकते हैं या उनहें संपादित कर सकते हैं ।
  • डिस्क्रीप्शन पैन (Description Pane) : यहाँ प्रॉपर्टी के टाइप तथा इसके बारे में एक संक्षिप्त परिचय प्रकट होता है। आप प्रॉपर्टी के द्वारा प्रदर्शित विवरण को प्रदर्शित कर सकते हैं या छिपा सकते हैं। ऐसा करने के लिये प्रॉपर्टीज विण्डो में दायोँ क्लिक करें तथा शॉर्ट कट मेन्यू से Description को क्लिक करें। यदि सही का चिन्ह डिस्क्रीप्शन के बायें ओर है तो समझिए की यह चयनित है।

टूलबॉक्स (The Toolbox)

टूलबॉक्स ग्राफिकल यूजर इंटरफेस एप्लीकेशन के लिये सबसे ज्यादा उपयोग होने वाला इस इंटीग्रेटेड डेवलपमेन्ट एनवायरमेन्ट का भाग है। टूलबॉक्स विजुअल स्टूडियो विण्डो में सामान्यतः बायीं ओर प्रकट होता है। इसमें कई टैब यथा All Windows Forms, Common Controls, Conatiners, Menus & Toolbars, Data, Components, Printing,Dialogs, Crystal Reports तथा General होते हैं और प्रत्येक टैब के अन्दर आपके कार्य करने के लिये कंट्रोल तथा कम्पोनेण्ट्स होते हैं।

परन्तु अधिकतर प्रयोग होने वाले जो कंट्रोल होते हैं वो All Windows Forms में मिल जाते हैं। फिर भी, अन्य टैब में उपलब्ध कंट्रोल की भी आवश्यकता प्रायः होती है।

टूलबॉक्स यदि आपके स्क्रीन पर ना दिखे तो, इसे प्रदर्शित करने के लिए ये करें –

  • View मेन्यू को क्लिक करें और Toolbox का चयन करें।
  • या फिर स्टैण्डर्ड टूलबार से टूलबॉक्स बटन। का चयन करें।
  • या फिर, Ctrl + ALT + X की-बोर्ड से दबायें।

मेन्यू बार (Menu Bar)

मेन्यू बार किसी भी ग्राफिल यूजर इंटरफेस इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट एनवायरमेन्ट की तरह विजुअल स्टूडियो इंटीग्रेटेड डेवलपमेंन्ट एनवायरमेंट का एक अभिन्न अंग है। मेन्यू बार की एक विशेषता होती है कि इसमें मेन्यू तथा उप मेन्यू आपकी आवश्यकता के अनुसार बदलते रहते हैं।

ऑब्जेक्ट ब्राउजर (Object Browser)

ऑब्जेक्ट ब्राउजर की सहायता से आप प्रोजेक्ट के उपयोग के लिये उपलब्ध संकेतों (symbols) का चयन कर सकते हैं। तथा उन्हें जाँच सकते हैं। ऑब्जेक्ट ब्राउजर को खोलने के लिये ये करें –

  • View मेन्यू को क्लिक करें तथा Object Browser का चयन करें।
  • या फिर, स्टैण्डर्ड टूलबार से Object Browser बटन को क्लिक करें |
  • या फिर, F2 दबायें।

ऑब्जेक्ट ब्राउजर में तीन पेन होते हैं। इसके बायीं ओर ऑब्जेक्ट पेन होता है तथा दायीं ओर ऊपर वाला पेन मेम्बर पेन होता और दायीं ओर नीचे वाला डिस्क्रप्शन पेन होता है। यदि आप ऑब्जेक्ट ब्राउजर को एक ही कॉलम में करते हैं तो ऑब्जेक्ट सबसे ऊपर, मेम्बरस पेन बीच में और डिस्क्रप्शन पेन सबसे नीचे होता है।

ऑब्जेक्ट पेन में आइकन हायरार्किकल संरचना यथा डॉट नेट फ्रेमवर्क, कॉम (COM) कम्पोनेन्ट्स, नेमस्पेसेज, टाइप लाइब्रेरीज, इन्यूमस तथा क्लास की पहचान करता है। आप इन सरचनाओं को विस्तृत कर उनके सदस्यों की क्रमबद्ध सूची देख सकते हैं। मेम्बर्स पेन में प्रॉपर्टी, मेथड, इवेण्ट, वैरियेबल, कॉन्स्टैन्ट इत्यादि डिस्प्ले होते हैं। चयनित आइटम का ब्यौरा डिस्क्रीप्शन पेन में प्रकट होता है।

सर्वर एक्सप्लोरर (Server Explorer)

सर्वर एक्सप्लोरर का उपयोग आपके नेटवर्क के सर्वर पर उपलब्ध डाटा लिंक, डाटाबेस कनेक्शन तथा सिस्टम संसाधनों को दिखने तथा उनके साथ कार्य करने में होता है। सर्वर एक्सप्लोरर का उपयोग कर आप डाटा कनेक्शन खोल सकते हैं। अन्य सर्वर के साथ जुड़कर उनके डाटाबेस तथा सिस्टम सेवाओं के अतिरिक्त इवेण्ट लॉग, संदेश पंक्ति (क्यू), परफॉरमेन्स सेवाओं को देख सकते हैं।

अन्य डाटाबेस तथा एस क्यू एल (SQL) सर्वरों के साथ संयोजन स्थापित कर सकत हैं। डाटाबेस प्रोजेक्ट तथा रेफरेन्स को संग्रहित कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त आप सर्वर एक्सप्लोरर की सहायता से बहुत कुछ कर सकते हैं। 

सॉल्यूशन एक्सप्लोरर (Solution Explorer)

सॉल्यूशन तथा प्रोजेक्ट के अंदर रेफरेन्स, डाटा कलेक्शनन्स, फोल्डर तथा फाइल होते हैं जिसकी आवश्यकता आपको एप्लीकेशन में पड़ती है। सॉल्यूशन कन्टेनर में एक से अधिक प्रोजेक्ट रह सकते हैं तथा प्रोजेक्ट कंटेनर में आम तौर पर एक अधिक आइटम यथा फॉर्म हो सकते हैं।

सॉल्यूशन एक्सप्लोरर सॉल्यूशन और उनके प्रोजेक्ट तथा उन प्रोजेक्ट के आइटमों (अवयवों) को डिस्प्ले करता है। सॉल्यूशन एक्सप्लोरर से आप फाइलों को खोलकर संपादित कर सकते हैं, प्रोजेक्ट में नयी फाइलों को जोड़ सकते हैं तथा सॉल्यूशन प्रोजेक्ट और आइटम की प्रॉपर्टी को देख सकते हैं।

एरर लिस्ट (Error List)

एरर लिस्ट इस इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट एनवायरमेंट की एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण विशेषता है। यह आपके एप्लीकेशन विकास को तेज करता है। ऐरर लिस्ट, कोड को कम्पाइल तथा संपादन के दौरान होने वाली त्रुटियों, चेतावनियों तथा संदेशों को प्रदर्शित करता है। इसके अतिरिक्त इसकी सहायता से आप सिनटैक्स त्रुटियों को ढूढ़ सकते हैं। ऐरर लिस्ट इन त्रुटियों के अतिरिक्त डिप्लॉयमेंट त्रुटि, कुछ खास प्रकार के स्टैटिक एनालिसिस त्रुटि को भी डिस्प्ले करता है।

आप इसमें दिखाये गये त्रुटियों को डबल क्लिक कर उस स्थान पर जा सकते हैं, जहाँ त्रुटि है तथा वहाँ उसे ठीक कर सकते हैं। जैसे ही आप त्रुटि को ठीक करते हैं, वो ऐरर लिस्ट से गायब हो जाता है।

एरर लिस्ट विण्डो को प्रदर्शित करने के लिये आप ये करें –
View मेन्यू को क्लिक करें तथा Error List का चयन करें। या फिर, पहले Ctrl + W दबायें और फिर CTRL + E दबायें। दोनों को एक के बाद दबाने पर ही एरर लिस्ट विण्डो प्रकट होगा। या फिर, स्टैण्डर्ड टूलबार से एरर लिस्ट बटन को क्लिक करें।

एरर लिस्ट में दिखाये गये त्रुटियों, चेतावनियों तथा संदेशों को वर्णमाला क्रम में किसी विशेष कॉलम के आधार पर डिस्प्ले करने के लिये एरर लिस्ट में दायें क्लिक करें तथा SortBy को इंगित करें और उस कॉलम का चयन करें जिसके आधार पर आप इसे वर्णमाला क्रम में सजाना चाहते हैं।

इस प्रकार आप किसी एक कॉलम या एक से अधिक कॉलम को एरर लिस्ट में छिपा भी सकते हैं। इसके लिये Show Columns को इंगित करें और उस कॉलम के नाम को क्लिक करें यदि वो चेक्ड है। चेक्ड का अर्थ यह है कि वो कॉलम हेडर दृश्य है। इसे फिर से लाने के लिये इसी प्रक्रिया को दोहरायें।

आप अपने सेटिंग में बदलाव कैसे करें ? – सभी डायलॉग बॉक्स तथा मेन्यू कमाण्ड, आपके सिस्टम पर दिखाये गये डायलॉग बॉक्स तथा मेन्यू कमाण्ड से थोड़ा अलग हो सकते हैं यद्यपि इसमें कोई बड़ा परिवर्तन नहीं होता है। अपने सेटिंग को बदलने के लिये Tools मेन्यू से Import and Export Settings का चयन करें  तथा विजार्ड के निर्देशों का अनुसार करें।

1- एरर लिस्ट विण्डोज के विभिन्न अवयव – एरर लिस्ट विण्डो के सबसे ऊपर तीन टैब्स हैं जिनके नाम Errors, Warnings तथा Messages हैं। Errors टैब में त्रुटियों की संख्या दिखती है। इस टैब को क्लिक कर आप त्रुटियों को देख सकते हैं। Warnings टैब में चेतावनियों की संख्या प्रदर्शित होती है। इसे क्लिक कर आप सभी चेतावनियों को देख सकते हैं। Messages टैब में संदेशों की संख्या दिखती है। इसे क्लिक कर आप संदेशों को देख सकते हैं।

एरर लिस्ट में सात कॉलम हैडर हैं। इनका विवरण इस प्रकार है-

  • कैटेगरी (Category) : इस कॉलम में आइकन होते हैं जो सांकेतिक रूप से इसके प्रकार को बताते हैं।
  • डिफॉल्ट ऑर्डर (Default Order) : इसमें त्रुटि, चेतावनी तथा संदेश जिस क्रम में बने हैं उस क्रमांक को दर्शाते हैं।
  • डिस्क्रीप्शन (Description) : इस कॉलम हैडर के अंदर त्रुटि, चेतावनी और संदेश का टेक्स्ट इसके विवरण के साथ प्रकट होता है।
  • फाइल (File) : इस कॉलम हेडर के अंदर फाइल का नाम तथा इसका सम्पूर्ण पाथ प्रकट होता है।
  • लाइन (Line) : कोड के किस लाइन संख्या में समस्या है यहाँ यह प्रकट होता है।
  • कॉलम (Column) : लाइन संख्या के किस कॉलम संख्या से समस्या शुरू होता है वो बताता है।
  • प्रोजेक्ट (Project) : प्रोजेक्ट के नाम को बताता है।

क्लास व्यू (Class View)

क्लास व्यू उस एप्लीकेशन में परिभाषित किये गये, रेफरेन्स या कॉल किये गये संकेतों को दिखाता है जिसे आप विकसित कर रहे हैं। इसके संकेत भी वैसे ही होते जैसे आपने ऑब्जेक्ट ब्राउजर विण्डो में देखा है । इस विण्डो में दो पैन हैं। ऊपर का पेन ऑब्जेक्ट्स पेन है तथा नीचे का पेन मेम्बर पेन है। ऑब्जेक्ट पेन में संकेतों का एक विस्तार योग्य (expandable) ट्री है जिसका सबसे पहला नोड प्रोजेक्ट को बताता है।

नोड को विकसित करने के लिये उस जोड (+) चिन्ह को क्लिक करें या उसे चयन कर की-बोर्ड से जोड (+) की दबायें। आइकन (icon) आपके प्रोजेक्ट से सम्बंधित हायराकिंकल संरचनाओं को बताता है जिनमें नेमस्पेसेज, टाइपस, इंटरफेस, इनमस (enums) तथा क्लास हो सकते हैं। आप इन संरचनाओं को विस्तृत कर इनके सदस्यों को सूचीबद्ध कर सकते हैं। प्रॉपर्टी, नेवड, इवेण्ट, वेरियेबल, कॉन्स्टैण्ट तथा अन्य आइटम मेम्बर्स पेन में दिखते हैं।

इसे खोलने के लिये आप ये कर सकते हैं : – View मेन्यू को क्लिक करें तथा Other Windows को इंगित करें और Class View का चयन करें। या फिर CTRL+Shift+C की-बोर्ड से दवायें। 

कमाण्ड विण्डो (Command Window)

कमाण्ड विण्डो का उपयोग कमाण्ड तथा उसके बदले में उपयोग होने वाले उपनामों (aliases) को विजुअल स्टूडियो इंटीग्रेटेड डेवलपमेन्ट एनवायरमेण्ट में सीधे-सीधे एक्जीक्यूट करने के लिये होता है। आप इस की सहायता से मेन्यू कमाण्ड के उन कमाण्ड को भी एक्जीक्यूट कर सकते हैं जो किसी मेन्यू में दिखाई नहीं देते हैं। कमाण्ड विण्डो को डिस्प्ले करने के लिये – View मेन्यू को क्लिक करें तथा Other Windows को इंगित करें और फिर Command Window का चयन करें। अथवा, की-बोर्ड से CTR + ALT + A दवायें।

उदाहरण के लिये निम्नलिखित कमाण्ड– Debug.print (10+15) कमाण्ड विण्डो में 25 लौटाता है।

इमीडिएट विण्डो (Immediate Window)

इमीडिएट विण्डो का उपयोग एक्सप्रेशन को डिबग करने तथा उसका मूल्यांकन करने, वेरियेबल के मानों को प्रिन्ट करने तथा स्टेटमेण्ट को एक्जीक्यूट करने में होता है। आप प्रोग्राम को ब्रेक मोड में रखकर इमीडिएट विण्डो की सहायता से कोड के किसी एक टुकड़े को रन कर सकते हैं या किसी वेरियेबल या एक्सप्रेशन को जाँच सकते हैं। उदाहरण के लिये मान लें कि आप कोई प्रोग्राम रन कर रहें हैं तथा किसी रिक्त वेरियेबल के कारण आपके प्रोग्राम में रन टाइम त्रुटि पैदा होता है।

इस स्थिति में आप इमीडिएट विण्डो की सहायता से उस वेरियेबल को एक मान असाइन कर सकते हैं तथा उसके पश्चात् शेष प्रोग्राम के परिणाम को देख सकते हैं। आप इमीडिएट विण्डो में कोड एडिटर की तरह ही कोड को टाइप कर के एक्जीक्यूट कर सकते हैं। किसी वेरियेबल या एक्सप्रेशन को जानने के लिए सबसे पहले प्रश्न चिन्ह (?) टाइप करें तथा फिर उस वेरियेबल या एक्सप्रेशन को टाइप करें और एण्टर (Enter) की दबायें। इसका परिणाम आपको अगले लाइन में मिलेगा।

जैसे –  एक कंसोल एप्लिकेशन लिखें जो दूरी इनपुट करने पर उसे गति में बदले। इसमें आपको इमीडिऐट विण्डो के द्वारा प्रोग्राम क्रियान्वयन के दौरान वेरियेबल को मान असाइन करना है ।

समाधान :

  • File मेन्यू को क्लिक करें तथा New Project का चयन करें।
  • New Project डायलॉग बॉक्स खुलने के पश्चात Templates पेन में Console Application को क्लिक करें ।
  • Name टेक्स्टबॉक्स में My Projects टाइप करें तथा OK को क्लिक करें। उसके बाद कोड एडिटर खुलेगा। इसके
    बाद निम्नलिखित कोड टाइप करें।

Module Module1
     Sub Main ()

Dim miles As Integer
Dim hours As Integer
Dim speed As Integer

Console.Write(“Enter the miles…”)
miles = CInt (Console.ReadLine ())
Console. Write (“Enter the hours…”)
hours = CInt (Console. ReadLine())
speed = CInt (miles / hours)

Console.WriteLine(“Speed is ” & speed & ” miles/hour.”)
Console. ReadLine()

        End Sub
End Module


कोड टाइप कर लेने के बाद F5 की दबायें।

आप इसका परिणाम डॉस विण्डो में देखेंगे। सबसे पहले यह पूछेगा
Enter the miles… यहाँ 120 टाइप करें और एण्टर (Enter) दबाएँ। उसके बाद स्क्रीन पर यह आएगा –
Enter the hours… यहाँ 0 टाइप करें।

उसके बाद जब आप एण्टर दबाएंगे तब आपको Exception Handler डायलॉग बॉक्स Overflow Exception was unhandled दिखाएगा। यहाँ आपको संभावित त्रुटि (जैसे कि आप शून्य से भाग दे रहे हैं) के बारे में सूचना प्राप्त होगा। अब यहाँ आप इसे ठीक-ठीक रन करने के लिये इमीडिएट विण्डो की सहायता ले सकते है। इमीडिएट विण्डो यदि नहीं खुला है तो Debug मेन्यू को क्लिक करें Windows को इंगित करें तथा Immediate का चयन करें या CTRL + G दबायें। इमीडिएट विण्डो खुलने के बाद आप यह करें –
            ? miles टाइप करें

आप देखेंगे कि आपने जो मान आउटपुट विण्डो में टाइप किया है वही दिखेगा। उसके बाद यह टाइप करें
           ? hours
उसके बाद आपके द्वारा 0 मान दिया गया अगले लाइन पर इमीडिऐट विण्डो में दिखेगा। अब आप यहाँ सही मान दें। सही मान देने के लिये यह लिखें –
            hours = 5
इस प्रक्रिया के माध्यम से आपने इमीडिएट विण्डो की सहायता से hours वेरिएबल को 5 मान असाइन कर दिया है। अब FS दबायें या Debug Continue का प्रयोग करें। उसके बाद आप आउटपुट विण्डो में देखेंगे कि आउटपुट प्रकट हो गया।

आउटपुट विण्डो (Output Window)

आउटपुट विण्डो इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट एनवायरमेंट में कई फीचरों के लिए स्टेटस संदेशों को डिसले कर सकता है। आउटपुट विंडो में एक टूलबार प्रकट होता है जिसके टूल्स तथा इसके विवरण इस प्रकार हैं।

Show Output from: एक या एक से अधिक आउटपुट पेन को डिस्प्ले करता है। सूचना के कई पेन उपलब्ध हो सकते हैं जो इस बात पर निर्भर करता है कि आईडीई में कौन-कौन से टूल ने उपयोगकर्ता को संदेश देने के लिये आउटपुट विंडो का उपयोग किया है

Find Message in Code : कोड इन्सेर्टर पॉइंट को उस लाइन पर ले जाता है जहाँ कोई विशेष बिल्ड त्रुटि होता है।

Go to Previous Message: आउटपुट विंडो में मिले बिल्ट को फोकस करता है तथा कोड एडिटर में इन्सर्शन पॉइण्ट को उस लाइन पर से जाता है जहाँ कोई विशेष बिल्ड त्रुटि होता है।

Go to Next Message : आउटपुट विंडो में मिले बिल्ट को आदि को फोकस करता है तथा कोड एडिटर में इन्सर्शन पॉइण्ट को उस लाइन पर ले जाता है वह बिल्ड त्रुटि होता है। Clear All : आउटपुट पेन को साफ़ करता है |

टास्क लिस्ट (Task List)

याकलिस्ट की सहायता से आप प्रोग्रामिंग कार्यों की एक सूची बना सकते हैं या उसे व्यवस्थित कर सकते हैं। टास्क लिस्ट विण्डों में आप उपयोगकर्ता कार्य (यूजर) के रूप में किये जाने वाले कार्यों के नोट्स बना सकते हैं। उन लाइनों के लिए कमेंट तैयार कर सकते हैं जिन पर कार्य किया जाना आवश्यक है। इसके अतिरिक्त संदेशों को विभिन्न कैटेगरी में बाँट सकते है। यस्क लिस्ट में वही कमेंट सूचीबद्ध होते हैं जो TODO. UNDONE और Hack शब्द से शुरू होते हैं। अत: यदि आप कमेन्ट लिख रहे हैं तो उन कैटेगरी शब्दको लिखना ना भूलें ।

आज आपने क्या सीखा (What Did You Learn Today)

  • इंटीग्रेटेड डेवलपमेन्ट एन्वायरमेण्ट कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर का एक प्रकार है जो कम्प्यूटर प्रोग्रामों को सॉफ्टवेयर
    विकसित करने में सहायता करता है।
  • किसी इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट इनवायरमेंट में एक सोर्स कोड एडीटर, कम्पाइलर तथा इंटरप्रेटर, बिल्ड ऑटोम
    टूल्स तथ डिबगर होता है। इसमें इसके अतिरिक्त ग्राफिकल यूजर इंटरफेस का निर्माण हेतु टूल्स भी उपलब्ध
    होते हैं।
  • कई आधुनिक इंटीग्रेटेड डेवलपमेंन्ट एन्वायरमेण्ट में क्लास ब्राउजर, ऑब्जेक्ट ब्राउजर इत्यादि भी होते हैं।
    इस आर्टिकल में आपको विजुअल स्टूडियो इंटीग्रेटेड एनवायरमेण्ट के बारे में बताया गया है।
  • स्टार्ट पेज विजुअल स्टूडियो के लिये किसी पुस्तक के कवर पेज की तरह होता है। जब आप विजुअल स्टूडियो
    खोलते हैं तो सबसे पहला स्क्रीन दिखाई देता है वही स्टार्ट पेज होता है।
  • स्टार्ट पेज की सहायता से आप नया प्रोजेक्ट बना सकते हैं तथा पुराने प्रोजेक्ट को एक्सेस कर सकते हैं। पेज पर आप वीबी डॉट नेट से सम्बन्धित मौलिक सहायता प्राप्त कर सकते हैं। इस पेज पर आपको आने वाले माइक्रोसॉफ्ट के उत्पादनों तथा कॉन्फ्रेन्स की जानकारी होती है। 
  • स्टार्ट पेज को डिस्प्ले करने के लिए View मेन्यू को क्लिक करें। Other Windows को इंगित करें और Start Page का चयन करें।
  • फॉर्म आपके एप्लीकेशन का बुनियादी भाग होता है। इसकी सहायता से आप अपने एप्लीकेशन का यूजर इंटरफेस तैयार करते हैं।
  • कोड एडिटर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट एन्वायरमेंट का वर्ड प्रोसेसर होता है। इसका उपयोग हम सोर्स कोड को एडिट करने में करते हैं।
  • कोड एडिटर से डिज़ाइन टाइम में प्रॉपर्टी, मेथड तथा इवेन्ट्स को एक्सेस करना आसान होता है।
  • कोड एडिटर आपको इण्टेलिसेन्स फीचर प्रदान करता है जो आपके स्टेटमेण्ट को पूरा करने में आपकी सहायता करता है।
  • कोड एडिटर में कोड को संकुचित तथा विस्तृत किया जा सकता है। परिणामस्वरूप कोड को देखना आसान हो जाता है।
  • कोड एडिटर आपको कोड स्निपेट इन्सर्टर प्रदान करता है जिसकी सहायता से आप कोड के एक ब्लॉक को अपने प्रोग्राम में जोड़ते हैं।
  • प्रॉपर्टीज विण्डो का उपयोग मूलतः हम चयनित ऑब्जेक्ट का प्रॉपर्टी तथा इवेण्ट डिजाइन टाइम में देखने तथा उनको बदलने में करते हैं।
  • टूलबॉक्स ग्राफिकल यूजर इंटरफेस एप्लीकेशन के लिये सबसे ज्यादा उपयोग होने वाला इस इंटीग्रेटेड डेवलपमेन्ट एनवायरमेन्ट का भाग है। टूलबॉक्स विजुअल स्टूडियो विण्डो में सामान्यतः बायीं ओर प्रकट होता है।
  • टूलबॉक्स को प्रदर्शित करने के लिए Ctrl + ALT + X की-बोर्ड से दबायें।
  • मेन्यू बार किसी भी ग्राफिल यूजर इंटरफेस इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट एनवायरमेन्ट की तरह विजुअल स्टूडियो इंटीग्रेटेड डेवलपमेंन्ट एनवायरमेंट का एक अभिन्न अंग है। मेन्यू बार की एक विशेषता होती है कि इसमें मेन्यू तथा उप मेन्यू आपकी आवश्यकता के अनुसार बदलते रहते हैं।
  • ऑब्जेक्ट ब्राउजर की सहायता से आप प्रोजेक्ट के उपयोग के लिये उपलब्ध संकेतों (symbols) का चयन कर सकते हैं तथा उन्हें जाँच सकते हैं। ऑब्जेक्ट ब्राउजर को खोलने के लिये F2 दबायें।
  • सॉल्यूशन एक्सप्लोरर सॉल्यूशन और उनके प्रोजेक्ट तथा उन प्रोजेक्ट के आइटमों (अवयवों) को डिस्प्ले करता है। सॉल्यूशन एक्सप्लोरर से आप फाइलों को खोलकर संपादित कर सकते हैं, प्रोजेक्ट में नयी फाइलों को जोड़ सकते हैं तथा सॉल्यूशन, प्रोजेक्ट और आइटम की प्रॉपर्टी को देख सकते हैं।
  • सर्वर एक्सप्लोरर का उपयोग आपके नेटवर्क के सर्वर पर उपलब्ध डाटा लिंक, डाटाबेस कनेक्शन तथा सिस्टम संसाधनों को दिखने तथा उनके साथ कार्य करने में होता है। सर्वर एक्सप्लोरर का उपयोग कर आप डाय कनेक्शन खोल सकते हैं।
  • एरर लिस्ट इस इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट एनवायरमेंट की एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण विशेषता है। यह आपके एप्लीकेशन विकास को तेज करता है।
  • क्लास व्यू उस एप्लीकेशन में परिभाषित किये गये रेफरेन्स या कॉल किये गये संकेतों को दिखाता है जिसे आप विकसित कर रहे हैं। इसके संकेत भी ऑब्जेक्ट ब्राउजर विण्डो की भाँति होते हैं।
  • कमाण्ड विण्डो का उपयोग कमाण्ड तथा उसके बदले में उपयोग होने वाले उपनामों (aliases) को विजुअल स्टूडियो इंटीग्रेटेड डेवलपमेन्ट एनवायरमेण्ट में सीधे-सीधे एक्जीक्यूट करने के लिये होता है।
  • इमीडिएट विण्डो का उपयोग एक्सप्रेशन को डिबग करने तथा उसका मूल्यांकन करने, वेरियेबल के मानों को प्रिन्ट करने तथा स्टेटमेण्ट को एक्जीक्यूट करने में होता है। 
  • आप प्रोग्राम को ब्रेक मोड में रखकर इमीडिएट विण्डो की सहायता से कोड के किसी एक टुकड़े को रन कर सकते हैं या किसी वेरियेबल या एक्सप्रेशन को जाँच सकते हैं।
  • आउटपुट विण्डो इंटीग्रेटेड डेवलपमेंन्ट एनवायरमेन्ट में कई फीचरों के लिये स्टेटस संदेशों को डिस्प्ले कर सकता है।

टास्क लिस्ट की सहायता से आप प्रोग्रामिंग कार्यों की एक सूची बना सकते हैं या उसे व्यवस्थित कर सकते हैं।

डॉस जैसा एप्लीकेशन बनाना | Best DOS Type Apps

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क्या डॉस जैसा एप्लीकेशन बनाना आसान है | खुद का ऐप बनाने के लिए क्या करना पड़ेगा? | Create Dos Like Application In Hindi
क्या डॉस जैसा एप्लीकेशन बनाना आसान है | खुद का ऐप बनाने के लिए क्या करना पड़ेगा? | Create Dos Like Application In Hindi

क्या डॉस जैसा एप्लीकेशन बनाना आसान है | खुद का ऐप बनाने के लिए क्या करना पड़ेगा? | Create Dos Like Application In Hindi

डॉस जैसा एप्लीकेशन बनाना – डॉस जैसा एप्लीकेशन का तात्पर्य टेक्चुअल यूजर इन्टरफेस (Textual user Interface) से है। अर्थात् माउस या ग्राफिक्स की उपयोगिता वहाँ नहीं होगी। डॉस जैसा एप्लीकेशन के निर्माण को वी बी डॉट नेट में कन्सोल एप्लीकेशन (Console Application) के नाम से जानते हैं जिसे बनाने के लिए निम्न पदों (Steps) का अनुकरण करते हैं.

  • New Project डायलॉग बॉक्स खोलें।
  • Project types खण्ड से Visual Basic के अंतर्गत Windows का चयन करें तथा Templates खण्ड में Visual Studio installed templates में Console Application का चयन करें। Name में आप देखेंगे कि बिना टाइप किये हुये ConsoleApplication1 आ गया है। यह नाम वी.बी. डॉट नेट की ओर से बाई डिफॉल्ट दिया जाता है। इसे आप अभी या फिर इस प्रोजेक्ट को बंद करते समय भी बदल सकते हैं। बेहतर विधि यही है कि आप नाम अभी बाई डिफॉल्ट ही रहने दें। अगर किसी स्थिति में आप का कम्प्यूटर अचानक बन्द भी हो जाता है तो आपका ऐप्लीकेशन उस नाम से सुरक्षित रहेगा। OK पर क्लिक करें।
  • इसके पश्चात् आपको कोड डिज़ायनर (फॉर्म के स्थान पर) दिखेगा।
  • Sub Main() और End Sub के बीच कोड लिखें। उसके बाद आप का काम केवल इसे सेव करना और एक उपयुक्त नाम देना शेष रह जाता है जो आपको आगे बताया जा रहा है।
क्या डॉस जैसा एप्लीकेशन बनाना आसान है | खुद का ऐप बनाने के लिए क्या करना पड़ेगा? | Create Dos Like Application In Hindi
क्या डॉस जैसा एप्लीकेशन बनाना आसान है | खुद का ऐप बनाने के लिए क्या करना पड़ेगा? | Create Dos Like Application In Hindi

डॉस जैसा एप्लीकेशन कैसे बनायें – डॉस जैसा एप्लीकेशन बनाना | ऐप बनाने के लिए क्या करना पड़ता है | Creating a DOS Type Application

आओ सीखें -1  : एक कन्सोल एप्लिकेशन लिखें। इसको रन कराने के पश्चात यूज़र से उसका नाम प्रविष्ट कराया जाय। तथा परिणामस्वरुप You are welcome के साथ यूज़र द्वारा प्रविष्ट किया गया नाम प्रकट हो। 

समाधान :

  • File मेन्यू को क्लिक करें तथा New Project का चयन करें ।
  • New Project डायलॉग बॉक्स खुलने के पष्ठचात Templates पेन में Console Application को क्लिक करें ।
  • Name टेक्स्टबॉक्स में My Project टाइप करें तथा OK को क्लिक करें । उसके बाद कोड एडिटर खुलेगा।
    उसके पश्चात् कोड में Sub Main ( ) और End Sub के बीच निम्नलिखित कोड लिखें.
    Dim name As String
    Console. Write (“Enter your name “)
    name = Console. ReadLine()
    Console.WriteLine(“You are welcome ” & name)
    Console.ReadLine()
  • उसके बाद F5 दबायें ।

आओ सीखें –2  : एक कन्सोल एप्लीकेशन बनायें जो सेल्सियस तापमान देने पर उसे फैरनहाइट तापमान में बदले।

समाधान :

  • File मेन्यू को क्लिक करें तथा New Project का चयन करें ।
  • New Project डायलॉग बॉक्स खुलने के पष्ठचात Templates पेन में Console Application को क्लिक करें ।
  • Name टेक्स्टबॉक्स में My Project टाइप करें तथा OK को क्लिक करें । उसके बाद कोड एडिटर खुलेगा। उसके पश्चात् कोड में Sub Main () और End Sub के बीच निम्नलिखित कोड को लिखें –

Dim cdeg As Decimal
Console.Write(“Enter the degrees in centigrade…”)
cdeg = CDec (Console.ReadLine ())
Dim fdeg As Decimal
fdeg = ( ( ([email protected] / 5) * cdeg) + 32)
Console.WriteLine(cdeg & ” is ” & fdeg & ” degrees Fahrenheit.”)
Console.ReadLine()

  • उसके बाद F5 दबायें।

आओ सीखें -3  : एक कन्सोल एप्लीकेशन लिखें जो 1 से 10 तक स्क्रीन पर छापे।

समाधान :

  • File मेन्यू को क्लिक करें तथा New Project का चयन करें ।
  • New Project डायलॉग बॉक्स खुलने के पष्ठचात Templates पेन में Console Application को क्लिक करें।
  • Name टेक्स्टबॉक्स में My Project टाइप करें तथा OK को क्लिक करें । उसके बाद कोड एडिटर खुलेगा। उसके पश्चात् कोड में Sub Main () और End Sub के बीच निम्नलिखित कोड लिखें-
    Dim I As Integer
    For I = 1 to 10
    Console.WriteLine (I)
    Next I
    Console. ReadLIne ()

उसके बाद F5 दबायें।

प्रोजेक्ट को सेव करना (Saving A Project)

जब आप प्रोजेक्ट को सेव/सुरक्षित कर रहे होते हैं तो इसके मतलब दो होते हैं। पहला कि आप प्रोजेक्ट में होने वाले बदलाव को सुरक्षित करते हैं। दूसरा कि प्रोजेक्ट को एक अर्थपूर्ण नाम देते पहले मैं आपको बताता हूँ कि आप कैसे किसी प्रोजेक्ट को नाम देते हैं। किसी प्रोजेक्ट को नाम देने के लिये इन पदों का अनुसरण करते हैं।

  • File को क्लिक करें तथा Save All का चयन करें या फिर Ctrl + Shift + S की-बोर्ड से दबायें। 
  • इसके बाद Save Project डायलॉग बॉक्स खुलेगा। Save Project डायलॉग बॉक्स में Name, Location तथा Solution Name तीन टेक्स्ट बॉक्स हैं। Name टेक्स्ट तथा Solution Name टेक्स्ट बॉक्स में आप देख रहे होंगे कि WindowsApplication1 लिखा हुआ है। Name टेक्स्ट बॉक्स में प्रोजेक्ट का नाम टाइप करें जो सॉल्यूशन का नाम भी होगा। आप चाहेंगे तो प्रोजेक्ट और सॉल्यूशन का नाम अलग रख सकते हैं। ऐसा तब होता है जब आप ऐसे एप्लीकेशन का निर्माण कर रहे हों जिसमें एक से अधिक प्रोजेक्ट हों।

यहाँ पर आप Name में वह नाम टाइप कर दें जो प्रोजेक्ट का नाम रखना चाहते हैं। Location टेक्स्ट बॉक्स में आपके हार्ड डिस्क का वह लोकेशन है जहाँ यह प्रोजेक्ट सुरक्षित रहेगा। आप बाई डिफॉल्ट लोकेशन रख सकते हैं या फिर Browse को क्लिक कर के लोकेशन को बदल सकते हैं। यदि आप सॉल्यूशन का अलग डायरेक्ट्री बनाना चाहते हैं तो Create directory for solution को चेक्ड ही रहने दें जो प्रचलित और बढ़िया प्रैक्टिस है।

यदि आप अपने प्रोजेक्ट तथा सॉल्यूशन को किसी डायरेक्ट्री में सुरक्षित नहीं करना चाहते हैं तो Create directory for solution चेक बॉक्स को क्लियर कर दें।

  • यदि आप अपने प्रोजेक्ट में किये गये बदलावों को सुरक्षित करना चाहते हैं तो File Save का चयन करें। या
    फिर Ctrl + S की-बोर्ड से दबायें।

सॉल्यूशन और प्रोजेक्ट में अंतर

सॉल्यूशन माइक्रोसॉट विजुअल स्टूडियो की एक मौलिक इकाई है। जब आप कोई प्रोजेक्ट बनाते हैं तो वस्तुतः वो एक सॉल्यूशन होता है। सॉल्यूशन को आप किसी एक सम्पूर्ण सॉफ्टवेयर की तरह जान सकते हैं। एक सॉल्यूशन में कई प्रोजेक्ट्स हो सकते हैं तथा एक प्रोजेक्ट में कई फॉर्म, क्लास इत्यादि हो सकते हैं।

पहले से बने प्रोजेक्ट को ओपन करना (Open an Existing Project)

किसी भी पूर्व में बने प्रोजेक्ट को ओपन करना बहुत ही आसान कार्य है। यह ठीक वैसी ही प्रक्रिया जैसे हम एम.एस.वर्ड में किसी फाइल को खोलने के लिए करते आए हैं। किसी बनी फाइल को ओपन करने के लिए निम्न चरणों का क्रमबद्ध पालन करें –

  • विजुअल स्टूडियों को खोलें।
  • File मेनू को क्लिक करें तथा Open Project… का चयन करें या फिर की-बोर्ड से Ctrl + 0 एक साथ दबायें।
  • तत्पश्चात् Open Project डायलॉग बॉक्स प्रदर्शित होगा।
  • अब आप अपने सॉल्यूशन फोल्डर को खोलें। इसमें कई फाइल और फोल्डर्स हो सकते हैं। सावधानी से माइक्रोसॉफ्ट विजुअल स्टूडियो सॉल्यूशन फाइल को खोलें। कई फोल्डर्स तथा दो फाइल हैं। इसमें पहला फाइल सॉल्यूशन फाइल है तथा दूसरा फाइल प्रोजेक्ट फाइल है। इनमें से कोई भी फाइल खुलने पर आपका प्रोजेक्ट खुल जायेगा। लेकिन यदि मान लें कि सॉल्यूशन के अन्दर एक से अधिक प्रोजेक्ट हैं तो सॉल्यूशन फाइल को ही खोलना ज्यादा सुरक्षित है। सॉल्यूशन फाइल को दो बार क्लिक करें या फिर उस फाइल को चयन कर Open को क्लिक करें।

इसके अलावा एक और तरीका है जिससे आप अपने प्रोजेक्ट को ओपन कर सकते हैं। जो निम्न है।

  • File को क्लिक करें तथा Recent Projects… को इंगित करें तथा इच्छित प्रोजेक्ट को क्लिक करें।
  • स्टार्ट पेज के Recent Projects में से आवश्यक प्रोजेक्ट का चयन करें।

उपरोक्त दोनों विधि केवल हाल में बनाये गये प्रोजेक्ट को खोलने तक ही सीमित हैं।

प्रोजेक्ट में फार्म जोड़ना (Adding a form to a Project)

आप अपनी आवश्यकतानुसार प्रोजेक्ट में जितना चाहें फार्म जोड़ सकते हैं। प्रोजेक्ट में एक नया फार्म जोड़ने के लिए निम्न चरणों का पालन करें –

  • Project को क्लिक करें तथा Add Windows Form… का चयन करें।
  • तत्पश्चात् Add New Item डायलॉग बॉक्स स्क्रीन पर दिखाई देगा।
  • Windows Form विकल्प का चयन करें यदि यह पहले से चयनित नहीं है।
  • Name टेक्स्टबॉक्स में नाम टाइप करें यदि आप इसका डिफॉल्ट नाम बदलना चाहते हैं।
  • अंत में OK बटन को क्लिक करें ।

आज आपने क्या सीखा (What Did You Learn Today)

  • डॉस जैसा एप्लीकेशन का तात्पर्य टेक्चुअल यूजर इन्टरफेस (Textual user Interface) से है। अर्थात् माउस या ग्राफिक्स की उपयोगिता वहाँ नहीं होगी।
  • यदि आप अपने प्रोजेक्ट में किये गये बदलावों को सुरक्षित करना चाहते हैं तो File Save का चयन करें। या फिर Ctrl + S की-बोर्ड से दबायें।
  • सॉल्यूशन माइक्रोसॉट विजुअल स्टूडियो की एक मौलिक इकाई है। जब आप कोई प्रोजेक्ट बनाते हैं तो वस्तुतः वो एक सॉल्यूशन होता है। सॉल्यूशन को आप किसी एक सम्पूर्ण सॉफ्टवेयर की तरह जान सकते हैं। एक सॉल्यूशन में कई प्रोजेक्ट्स हो सकते हैं तथा एक प्रोजेक्ट में कई फॉर्म, क्लास इत्यादि हो सकते हैं। 

विजुअल स्टूडियो क्या है | Best Info Visual Studio In Hindi

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विजुअल स्टूडियो क्या है - परिचय (Introduction) | विजुअल स्टूडियो कैसे काम करता है? | Introduction To Visual Studio In Hindi
विजुअल स्टूडियो क्या है - परिचय (Introduction) | विजुअल स्टूडियो कैसे काम करता है? | Introduction To Visual Studio In Hindi

Table of Contents

विजुअल स्टूडियो क्या है – परिचय (Introduction) | विजुअल स्टूडियो कैसे काम करता है? | Introduction To Visual Studio In Hindi

विजुअल स्टूडियो क्या है – परिचय (Introduction) –आपने माइक्रोसॉफ्ट वर्ड में कार्य तो किया ही होगा। वहाँ आप जो भी लिखते हैं वह उसी रूप में दिखता है जिस रूप में आप उसे छापते हैं। आपको अपने डॉक्यूमेण्ट को फॉरमेट करने के लिये मेन्यू तथा टूल्स का उपयोग करना होता है जो विभिन्न पट्टिकाओं में उपलब्ध होते हैं।

विजुअल स्टूडियो भी एक अत्यन्त शक्तिशाली माध्यम है जो सॉफ्टवेयर विकास को उतना ही सरल बनाता है जितना कि वर्ड, एक्सल और पावर पॉइन्ट में कार्य करना। ये एक उत्कृष्ठ इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट सहायता से आप इंटरफेस डिज़ाइन करते हैं। इसकी सहायता से केवल आपको कुछ ऑब्जेक्ट को कार्य करने हेतु लिखे जाते हैं। विजुअल स्टूडियो (Visual Studio) 2005 इनवायरमेण्ट प्रदान करता है जिसकी कोडिंग करने पड़ते हैं जो विभिन्न डॉट नेट (.Net) फ्रेमवर्क के सिद्धांत पर कार्य करने वाले कई कम्प्यूटर भाषाओं का संग्रह है।

अर्थात् आप कई भाषाओं के साथ इस इनवायरमेण्ट में काम कर सकते हैं। इस अध्याय में हम आपको विजुअल स्टूडियो 2005 में कार्य करने के तरीके बतायेंगे। 

विजुअल स्टूडियो क्या होता है एवं उपयोग | माइक्रोसॉफ्ट विजुअल स्टूडियो का उद्देश्य क्या है? | Visual Studio .Net In Hindi

विजुअल स्टूडियो क्या है - परिचय (Introduction) | विजुअल स्टूडियो कैसे काम करता है? | Introduction To Visual Studio In Hindi
विजुअल स्टूडियो क्या है – परिचय (Introduction) | विजुअल स्टूडियो कैसे काम करता है? | Introduction To Visual Studio In Hindi

विजुअल स्टूडियो क्या है ? (What is Visual Studio ?)

विजुअल स्टूडियो शेस्कटॉप ऐप्लीकेशनों एएसपी ने ऐलीकेशनों एक्स एम एल COME) वेब सेवाओं तथा मोबाइल ऐप्लीकेशनों को विकसित करने हेतु विकास उपकरणों का एक सम्पूर्ण सेट है। विजुअल स्टूडियो विजुअल बेसिक, विजुल C++, सी शार्प (CM) तथा मे शार्प (34) को एक एक समान इंटीग्रेटेड डेवलपमेन्ट एन्वायरमेन्ट प्रदान करता है। इसमें आप इनके समायोजन से सॉल्यूशन का निर्माण कर सकते हैं।

इसके अतिरिक्त ये भाषायें डॉट नेट फ्रेमवर्क की फंक्रानिलिय की शक्ति का उपयोग करता है जो मुख्य प्रौद्योगिकियां प्रदान करता है जिससे ए एस पी वेब ऐप्लीकेशन तथा एक्स एम एल वेब सेवाओं का विकास को  सरल बनाता है। विजुअल स्टूडियो 2005 में कुछ नये उपकरणों तथा प्रौद्योगिकियों को जोड़ा गया है जो इस प्रकार है –

1- विजुअल स्टूडियो टूल्स फॉर ऑफिस (Visual Studio Tools For Office) – माइक्रोसॉफ्ट विजुअल स्टूडियो 2005 टूल्स फॉर र माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस सिस्टम की सहायता से आप विजुअल बेसिक तथा विजुअल सी शॉर्प का उपयोग करते हुए कई 2005 डॉक्यूमेन्टस तथा एक्सल 2003 वर्कबुक्स को एक्सटेंड कर सॉल्यूशन का निर्माण कर सकते हैं।

विजुअल स्टूडियो टूल्स फॉर ऑफिस में कई वर्ड डॉक्यूमेन्ट्स, वर्ड टेम्पलेट्स, एक्सल वर्कबुक तथा एक्सल टेम्पलेट्स के पीछे कोड बनाने के लिये नये विकुआल स्टूडियो प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। आप इसे स्टैण्ड अलोन प्रोग्राम के रूप में या फिर माइक्रोसॉफ्ट विकुआल स्टूडियो 2005 टीम सिस्टम प्रोडक्ट्स के एक अंश के रूप में इंस्टॉल
कर सकते हैं।

2- विजुअल वेब डेवलवपर (Visual Web Developer) – विजुअल स्टूडियो 2005 में एक नया विजुअल वेब डेवलपर नामक वेब पेज डिजाइनर है जिसमें ए एस पी डॉट नेट वेब पेजों तथा एच टी एम एल (HTML) पेजों को बनाने तथा संपादन करने हेतु कई और चीजों को सम्मिलित किया गया है। इसमें विजुअल स्टूडियो 2003 की अपेक्षाकृत वेब फॉमर्स को बनाने की सरल और तेज़ विधि है।

विजुअल स्टूडियो 2005 वेब डेवलपर बबसाइट विकास के सभी क्षेत्रों में उन्नत फीचरों को उपलब्ध कराता है। आप वेबसाइटों को लोकल फोल्डर की तरह इंटरनेट इन्फॉरमेशन सर्विसेज में या किसी एक टी पी (FTP) में या शेयरपॉइन्ट सर्वर पर बना सकते हैं तथ्था मेण्टेन कर सकते हैं।

3- विण्डोज़ फॉर्म्स (Windows Forms)
विण्डोज़ फॉमर्स का उपयोग डॉट नेट फ्रेमवर्क पर माइक्रोसॉफ्ट एप्लीकेशनों को बनाने के लिये होता है। ए फ्रेमवर्क क्लास का एक स्पष्ट, ऑब्जेक्ट ओरियेन्टेड एक्सटेन्सिबाल सेट प्रदान करता है जिसमें आप अच्छे प्रकार के विण्डोज ऐप्लीकेशन विकसित कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त विण्डोज फॉर्म माल्टी टायर डिस्ट्रीब्यूटेड सॉल्यूशन में स्थानीय यूजर इन्टरफेस की भांति कार्य कर सकता है।

4- एक्स एम एल वेब सर्विसेज (XML Web Services)
एक्स एम एल वेब सेवायें ऐसे एप्लीकेशन होते हैं जो एच टी टी पी (HTTP) पर एक्स एम एल (XML) का उपयोग कर आग्रह (requests) तथा डाटा प्राप्त कर सकते हैं। एक्स एम एल वेब सेवाएँ किसी विशेष कम्पोनेण्ट प्रौद्योगिकी या ऑब्जेक्ट कॉलिंग नियम से बंधा नहीं होता है इसलिए किसी भी भाषा, कम्पोनेण्ट मॉडल या ऑपरेटिंग सिस्टम के द्वारा एक्सेस किया जा सकता है। विजुअल स्टूडियो में आप विजुअल बेसिक, सी शार्प, जेस्क्रिप्ट (JScript) या ए टी एल (ATL) सर्वर का उपयोग कर एक्स एम एल वेब सेवाओं को बना या जोड़ सकते हैं।

5- एक्स एम एल सर्पोट (XML Support) – एक्सटेन्सिबल मार्कअप भाषा (e Xtensible Markup Language) स्ट्रक्चर्ड डाटा के वर्णन की एक विधि प्रदान करता है। एक्स एम एल एस जी एम एल (SGML) का एक सब सेट है जो वेब पर डिलीवरी के लिये ऑप्टीमाइज किया जाता है।

वर्ल्ड वाइड वेब कनसॉर्टियम (World Wide Web Consortium) एक्स एम एल स्टैण्डर्ड को परिभाषित करता है ताकि स्ट्रक्वर्ड डाटा एक समान तथा एप्लीकेशन स्वतंत्र रहे। विजुअल स्टूडियो पूरी तरह से एक्स एम एल को सर्पोट करता है तथा एक्स एम एल डिज़ाइनर उपलब्ध कराता है जो एक्स एम एल को संपादित करना तथा एक्स एम एल स्केमा बनाना आसान बनाता है।

विजुअल स्टूडियो खोलना (Opening Visual Studio)

विजुअल बेसिक प्रोगाम बनाने के लिए सबसे पहली आवश्यकता यह है कि विजुअल स्टूडियो को खोला जाये। खास कर जब हम विण्डोज़ यूज़र इंटरफेस बना रहे हैं। यद्यपि हम कुछ हद तक कन्सोल यूजर इंटरफेस नोटपैड में भी बना सकते हैं। परन्तु यह बुद्धिमानी नहीं है जब हमारे पास विजुअल स्टूडियो के रूप में एक शक्तिशाली इंटीग्रेटेड डेवलपमेण्ट एन्वायरमेण्ट मौजूद है। अर्थात यह जानना आवश्यक है कि हम विजुअल स्टूडियो को कैसे खोलेंगे।

विजुअल स्टूडियो 2005 माइक्रोसॉफ्ट विण्डोज के किसी अन्य प्रोग्राम की तरह ही एक प्रोग्राम है। तथा इसे खोलने की वही विधि है जो आप किसी अन्य प्रोग्राम को खोलने में करते हैं। इसको प्रारम्भ करने के लिये ये स्टेप प्रयुक्त होते हैं।

  1. Start को क्लिक करें।
  2. All Programs को इंगित करें। (यह आपके ऑपरेटिंग सिस्टम तथा इसके सेटिंग पर निर्भर करता है।)
  3. फिर, Microsoft Visual Studio 2005 को इंगित करें। (यह स्टूडियो आपने किस प्रकार इन्स्टॉल किया है इस बात पर निर्भर करता है। मूलतः इसमें कोई बड़ा बदलाव नहीं होता है।)
  4. अंत में फिर Microsoft Visual Studio 2005 का चयन करिये।

तत्पश्चात् आपको माइक्रोसॉफ्ट विजुअल स्टूडियो 2005 का प्रारम्भिक स्क्रीन की भाँति दिखेगा।
आगे अब हम थोड़ी सी चर्चा इसके प्रारम्भिक स्क्रीन पर कर लेते है। यद्यपि हम इसकी विस्तृत चर्चा आगे के पाठ में इंटीग्रेटेड डेवलपमेन्ट इनवायरमेन्ट के खण्ड में करेंगे। इसके प्रारम्भिक पेज को हम तकनीक के शब्दों में स्टार्ट पेज (Start Page) कहते हैं। स्टार्ट पेज में चार प्रमुख खण्ड हैं।

  1. Recent Projects – इस खण्ड में वैसे प्रोजेक्ट सूचीबद्ध होते हैं जो आपने अभी-अभी बनाये हैं या फिर उन्हें खोला है। Recent Projects खण्ड में आप देख रहे हैं कि मात्र 5 प्रोजेक्ट ही दिख रहे हैं। इसे आप बढ़ा भी सकते हैं। इसमें प्रदर्शित प्रोजेक्ट की अधिकतम संख्या 24 है। इस खण्ड से आप नए प्रोजेक्ट बना सकते हैं तथा पुराने प्रोजेक्ट को खोल भी सकते हैं।
  2.  Getting Started- इस खण्ड में विजुअल बेसिक डॉट नेट से सम्बन्धित फीचर हाइलाइट होते हैं । इस खण्ड को आपकी उत्पादकता को बढ़ाने हेतू वेबसाइटो, तकनीकी लेखों तथा अन्य विषयों पर सहायता उपलब्ध कराने हेतू डिज़ायन किया गया है । यह विषय सूची आपके द्वारा किए गए सेटिंग के अनुसार बदलता है | इस खण्ड में आप सहायता तब प्राप्त कर सकते हैं, जब आपके सिस्टम पर एम एस डी एन (MSDN) इन्स्टॉल हो।
  3. Visual Studio Headlines – इस खण्ड में आपके लिए विजुअल स्टूडियो से सम्बन्धित कुछ ऑनलाइन सूचना उपलब्ध होता है। इसके लिये आवश्यक है कि आप इंटरनेट से जुड़े हों।
  4. Visual Studio Developer News – यदि आप इंटरनेट से जुड़े हैं तो माइक्रोसॉफ्ट इससे सम्बन्धित ढेर सारा सूचना विशेषकर बिल्कुल नवीनतम खबरों से आपको परिचित करवाता है।
  5. नया प्रोजेक्ट और मेमोरी में इसका संग्रह – जब आप एक नया प्रोजेक्ट बनाते हैं तो शुरूआत में यह प्रारम्भिक मेमोरी में ही केवल विद्यमान होता है जब तक कि आप इसे सुरक्षित (save) करके एक अर्थपूर्ण नाम नहीं दे देते हैं।

Recent Projects में प्रदर्शित प्रोजेक्ट की संख्याओं को बदलना।

  • Tools को क्लिक करें तथा Options…. का चयन करें।
  • तत्पश्चात् Options डायलॉग बॉक्स प्रकट होगा।
  • यहाँ, Environment को एक्सपैन्ड करके General का चयन करें। उसके बाद Recent Files में दूसरे टेक्स्ट बॉक्स में इच्छानुसार संख्या लिख दें परन्तु ये याद रखें कि इसकी अधिकतम सीमा 24 है, अर्थात् आप ज्यादा से ज्यादा 24 प्रोजेक्ट्स इस खण्ड में प्रकट कर सकते हैं।

नया प्रोजेक्ट बनाना (Creating A New Project)

विजुअल स्टूडियो आपके द्वारा खोलने का अर्थ यही है कि आप कोई प्रोजेकट नया बनाना चाहते हैं या फिर किसी पहले से बने प्रोजेक्ट को खोलना चाहते हैं। विजुअल स्टूडियो में किसी नये प्रोजेक्ट को बनाने के लिये लिखित पदों का अनुसरण करिये-
File को क्लिक करिये तथा New Project… को क्लिक करें या फिर आप Ctrl+N की बोर्ड से दबायें। तत्पश्चात् आपको New Project डायलॉग बॉक्स दिखेगा। यहाँ पर इच्छानुसार प्रोजेक्ट का चयन करें।

जब आप कोई प्रोजेक्ट बनाते हैं तब एक नया फॉर्म (जिसे फॉर्म डिज़ायनर भी कहा जाता है प्रकट होता है।) इंटीवेटेड डेवलपमेन्ट इन्वायरमेन्ट में प्रकट होता है। यह वह फॉर्म है जो प्रोग्राम के क्रियान्वित होने पर डिस्प्ले होता है। एक प्रोजेकट में कई फॉर्म हो सकते हैं जैसे एक एप्लीकेशन कई विण्डो पर आधारित होता है। 

प्रोजेक्ट के प्रकार (Project Type)

आप बी बी डॉट नेट में कई प्रकार के प्रोजेक्ट व सोल्यूशन बना सकते हैं। फिर भी तीन मुख्य प्रकार के प्रोजेक्टल स्टूडियो डॉट नेट में बनाया जा सकता है। जैसे विण्डोज एप्लीकेशन (Windows Applications), मेन एप्लीकेशन (Web Application) और कंसोल एप्लीकेशन (Console Application) |

विण्डोज एप्लीकेशन के अंर्तगत आप टेली (Tally) के जैसा सॉफ्टवेयर बना सकते हैं। वहीं, वेब एप्लीकेशन को लेकर आप वेबसाइटस विकसित कर सकते हैं। जबकि कन्सोल एप्लीकेशन के उपयोग से आप डॉस विण्डो के जैसा एप्लीकेशन बना सकते हैं। इसके अतिरिक्त आप पॉकेट कम्प्यूटर तथा स्मार्ट फोन के लिये भी सॉफ्टवेयर बना सकते हैं।

विण्डोज एप्लीकेशन बनाना (Creating Windows Application)

जैसा कि आपको पूर्व में बताया गया है कि आप वी.बी. डॉट नेट में कई प्रकार के एप्लीकेशन बना सकते हैं। जिसमें विण्डोज एप्लीकेशन एक है। जिसे हम यहाँ बनाना सीख रहे हैं। विण्डोज एप्लीकेशन बनाने के लिए आपको निम्न पदों (steps) का क्रमशः अनुसरण करना होगा

1- New Project डायलॉग बॉक्स खोलें ।

2- Project Types : खण्ड से Visual Basic के अंतर्गत Windows का चयन करिये तथा Templates खण्ड में Visual Studio installed templates में Windows Application का चयन करिये। Name में आप देखेंगे कि आप के बिना टाइप किए हुए WindowsApplication1 आ गया है।

यह नाम वी वी डॉट नेट की ओर से बाई डिफॉल्ट दिया जाता है। इसे आप अभी या फिर जब आप प्रोजेक्ट बंद करते समय भी बदल सकते हैं। बेहतर विधि यही है कि आप नाम अभी बाई डिफॉल्ट ही रहने दें। अगर किसी स्थिति में आप का कम्प्यूटर अचानक बंद भी हो जाता है तो आप का एप्लीकेशन उस नाम से सुरक्षित रहेगा। फिर, OK क्लिक करिये।

3- इसके पश्चात् आपको फॉर्म डिज़ायनर दिखेगा। अब आप फॉर्म डिजायनर के बायीं ओर दिख रहे टूलबॉक्स से कंट्रोल्स अपने फॉर्म पर रख सकते हैं।

यूजर इंटरफेस क्या होता है ? – यूजर इंटरफेस एप्लीकेशनों का वो दृश्य भाग होता है जिसकी सहायता से उपयोगकर्ता एप्लीकेशनों के साथ इंटरेक्ट करता है |

फॉर्म डिजाइनर पर कंट्रोल को जोड़ना (Adding Controls Onto The Form Designer)

जब भी हम विजुअल स्टूडियो के अन्दर वी.बी. डॉट नेट में एक विण्डोज यूजर इंटरफेस का निर्माण कर रहे होते हैं मे हम फॉर्म डिजाइनर को प्रदर्शित करने के पश्चात उस पर कट्रोल रखते हैं। फॉर्म डिजाइनर पर कंट्रोल रखने के लिये टूलबॉक्स टूलबॉक्स ‘स्टूडियो में फॉर्म डिजाइनर के बायीं ओर स्थित होता है तथा इसमें कई टैब यथा Data, Component और All Windows Forms होते हैं।

आप विभिन्न उपयोग के लिये कार्य को सम्पन्न करने के लिये अपने एप्लीकेशन में जोड़ते हैं। उदाहरणार्थ, All Windows यथा Data, Component और All Windows Forms होते हैं। प्रत्येक टैब के अंदर कंट्रोल तथा कम्पोनेन्ट होते हैं Forms में टेक्स्ट बॉक्स, बटन, चेकबॉक्स होते हैं। फॉर्म पर इन कंट्रोल को जोड़ने के लिये आप या तो टूलबॉक्स से उस कंट्रोल को दो क्लिक करते हैं या फिर उन्हें एक बार क्लिक कर उनका चयन करते हैं और उन्हें फॉर्म पर एक विशेष लोकेशन पर रखते हैं।

एप्लीकेशन में कंट्रोल को जोड़ने के लिये इन पदों का उपयोग करें –

  • टूलबॉक्स पैनल को क्लिक करें।
  • तत्पश्चात् टूलबॉक्स खुलेगा। अगर टूलबॉक्स पैनल नहीं उपलब्ध है तथा टूलबॉक्स दृश्य नहीं है तो इसे प्रदर्शित करने के लिये View मेन्यू को क्लिक करें और Toolbox का चयन करें या फिर कीबोर्ड से Carl + ALT+ X दबायें या स्टैण्डर्ड टूलबार से टूलबॉक्स बटन को क्लिक करें।
  • उसके बाद, उस कंट्रोल (यथा बटन) को क्लिक करें और उसे बैग कर फॉर्म डिजाइनर पर इच्छानुसार स्थान पर रखें या फिर कंट्रोल को दो बार क्लिक करें। जब आप कंट्रोल दो बार क्लिक करते हैं तो ये फॉर्म के सबसे ऊपर बायें कोने में प्रकट होता है।
  • कंट्रोल को फॉर्म डिजाइनर पर एक जगह से दूसरी जगह ले जाने के लिये उसे ईंग करते हैं। कंट्रोल के आकार को बदलने के लिये उसे क्लिक करें और उसे कोनों या किनारों पर बने छोटे आयताकार बॉक्स पर ले जाकर उसे इच्छानुसार आकार तक ड्रैग करें।

टूलबॉक्स में दूल को व्यवस्थित करना – यदि आप टूलबॉक्स में सही कंट्रोल को बूढ़ने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं तो टूलबॉक्स पर दायें क्लिक करें और Sort Items Alphabetically को क्लिक करें। ऐसा करने पर दूलबॉक्स पर सभी टूल वर्णमाला क्रम में व्यवस्थित हो जायेगी।

लेबल एक ऐसा कंट्रोल है जिसके आकार में तब तक कोई बदलाव नहीं किया जा सकता जब तक कि इसके प्रॉपर्टी AutoSize को False सेट नहीं किया जाये। इसकी AutoSize प्रॉपर्टी बाई डिफॉल्ट Tue सेट होता है। इसका कारण यह है कि लेबल का आमतौर पर आकार उसके कैप्शन द्वारा निर्धारित किया जाता है।

कंट्रोल के रूप तथा आचरण को कस्टमाइज करना (Customizing Looks and Behavior of Controls)

जैसा कि आप देख सकते हैं टूलबॉक्स में कई कंट्रोल हैं तथा प्रत्येक कंट्रोल का एक खास कार्य है। उदाहरण के तौर पर, पैनल कंट्रोल का उपयोग कई अन्य कंट्रोल को एक साथ रखने के लिये होता है। बटन कंट्रोल का उपयोग किसी विशेष कार्य को (उदाहरण के लिये किसी अन्य फॉर्म को खोलने या बंद करने के लिये) सम्पन्न करने के लिये होता है जब उपयोगकर्ता उस बटन को क्लिक करता है।

टेक्स्टबॉक्स कंट्रोल का उपयोग की-बोर्ड के माध्यम से यूजर द्वारा इनपुट करने में होता है। इन सब कंट्रोल को फॉर्म पर रखने के बाद एप्लीकेशन की आवश्यकतानुसार उनके रूप तथा आचरण को कस्टमाइज करना पड़ता है। कंट्रोल के रूप तथा आचरण को मूलत: Propetries विण्डो की सहायता से डिजाइन समय में सेट विस्तृत जानकारी अगले अध्यायों में की गयी है। यहाँ हम केवल आप से इसका संक्षिप्त परिचय करवा रहे हैं। 

कंट्रोल की प्रॉपर्टी को सेट करने के लिये-

  • उस कंट्रोल को क्लिक करें जिसकी प्रॉपर्टी को सेट करना चाहते हैं या बदलना चाहते हैं।
  • फिर, Propetries विण्डो को डिस्प्ले करें यदि यह आपके स्क्रीन पर नहीं दिख रहा है। ऐसा आप View मेन्यू से Propetries Window का चयन कर के कर सकते हैं। या फिर इसे की-बोर्ड से F4 फंक्शन की दबाकर सकते है।। या फिर इसके लिए स्टैण्डर्ड टूलबार से प्रॉपर्टीज विण्डो बटन को क्लिक कर सकते हैं।

प्रॉपटींज विण्डो प्रदर्शित होने पर इसकी विभिन्न प्रॉपर्टी यथा Name, Text, Dock, BackColor इत्यादि में आप बदलाव कर सकते हैं।

वी.बी. डॉट नेट की प्रॉपर्टी (VB Dot Net Property)

विजुअल बेसिक डॉट नेट में प्रॉपर्टी किसी ऑब्जेक्ट के फीचर होते हैं। उदाहरणस्वरूप, बटन कंट्रोल का Text प्रॉपर्टी उस ऑब्जेक्ट अर्थात कंट्रोल का वह फीचर है जो उस कंट्रोल के कैप्शन को प्रकट करता है। प्रॉपर्टी का मान कभी आपको चयन करना होता और कभी इनपुट करना होता है। ये, मान छोटे विण्डो, टेक्स्ट, इंटीजर तथा बूलियन (सत्य तथा असत्य) हो सकते हैं। कई प्रॉपर्टी के मान आप रनटाइम (कोड लिखकर) भी सेट करते हैं। 

प्रोग्राम में विभिन्न ऑब्जेक्ट के लिये कोड लिखना (Writing Codes For Various Objects In Your Program)

अब मैं आपको यह बता रहा हूँ कि आप अपने प्रोग्राम को निर्देश कैसे देंगे। यह कार्य प्रोग्राम में विभिन्न कंट्रोल के लिये कोड लिख कर होगा। यह प्रोग्राम विकास का सबसे महत्त्वपूर्ण हिस्सा है जो पूरी लेख में आप पड़ेंगे।

अपने प्रोग्राम में कोड लिखने के लिये ये करें –

  • उस कंट्रोल को डबल क्लिक करें जिसके लिये आप कोड जोड़ना चाहते हैं। तत्पश्चात्, आपको कोड डिजाइनर
    विण्डो की भाँति दिखेगा।
  • जब आप किसी कंट्रोल को दो बार क्लिक करते हैं तो बहुत सारा कार्य विजुअल स्टूडियो स्वयं ही कर देता है।
    उदाहरणार्थं यदि आप फॉर्म को दो बार क्लिक करते हैं तो निम्नलिखित कोड स्वयं ही प्रदर्शित होगा.
    Private Sub Form1_Load (ByVal sender As System.Object, Byvale As
    System.EventArgs) Handles My Base. Load
    End Sub

उपरोक्त Sub Form1 तथा End Sub के मध्य ही आपको कोड लिखना होता है। इसे हम इवेण्ट हैण्डलर या सब प्रोसीजर कहते हैं। Sub Form1 सबरूटीन (फंक्शन) का आरम्भिक तथा End Sub उसी सबरूटीन का अंतिम लाइन है। Load मेथड (method) का नाम है जो उस ऑब्जेक्ट की एक क्रिया है अर्थात प्रोग्राम की अब आपको यह बताना है कि जब Fom1 लोड हो तब प्रोग्राम क्या करे। अब आप जो भी निर्देश देना चाहें दे सकते हैं।

उदाहरणस्वरूप आप Form1 की तीन प्रॉपटी Text, BackColor तथा aximizeBox को सेट करने के लिये यह तीन लाइन दोनों पंक्ति के बीच में लिखेंगे-
Me.Text = “Welcome to VB.Net”
Me. BackColor = Color.Aqua
Me. MaximizeBox = False

रनटाइम में प्रॉपटी सेट करना – विजुअल बेसिक डॉट नेट में जब आप किसी ऑब्जेक्ट के प्रॉपर्टी को सेट करते हैं तब उस प्रॉपटी के परिणाम आपकी 

अपने प्रोग्राम को क्रियान्वित करना (Running Your Program)

जब आप अपना प्रोग्राम पूरा कर लेते हैं तब इसके बाद आपका प्रोग्राम ठीक से कार्य कर रहा है अथवा नहीं इसकी जाँच करनी होती है। इसके लिये इसको क्रियान्वित करना होता है। प्रोग्राम को रन करने के लिये यह करें।

  • Debug मेन्यू को क्लिक करें तथा Start Debugging का चयन करें। ये फिर स्टैण्डर्ड टूलबार से Start Debugging बटन को क्लिक करें। या F5 फंक्शन की की-बोर्ड से दबायें।

डिबगिंग क्या हैं ? – आमतौर पर आप कोड जोड़ने के बाद यह देखने के लिये प्रोग्राम को रन करते हैं कि प्रोग्राम ठीक-ठीक कार्य कर रहा है अथवा कोई त्रुटि दे रहा है। इसी प्रक्रिया को डिबगिंग (debugging) कहते हैं।

आओ अभ्यास करें और सीखें  (Let’s Practice And Learn)

एक विण्डोज़ एप्लिकेशन बनाऐं। इसमें एक बटन जोड़ें जिसका कैप्शन Say Hello सेट करें। तथा जिसे क्लिक करने पर फॉर्म पर Say Hello प्रकट हो ।

ऑब्जेक्टप्रॉपर्टीमान
फॉर्म
बटन
लेबल
Name
Text
Size
MaximizeBox
firm Hello
Hello
338,308
False
 Name
Text
Size
Location
TextAlign
btnHello
Say Hello !
75, 23
132,198
MiddleCenter
 Name
Text
AutoSize
Size
Location
TextAlign
Font
binHello

False
216, 23
56,44
MiddleCenter
Verdana, 10pt, Bold 

समाधान :

  • File मेन्यू को क्लिक करें तथा New Project का चयन करें ।
  • New Project डायलॉग बॉक्स खुलने के पष्ठचात Templates पेन में Windows Application को क्लिक करें ।
  • Name टेक्स्टबॉक्स में Lab Exercise 5.2 टाइप करें तथा OK को क्लिक करें । उसके बाद एक नया विण्डोज
    फॉर्मस प्रोजेक्ट खुलेगा ।
  • फॉर्म पर प्रश्न में दिए गए विवरण के अनुसार टूलबॉक्स से एक लेबल तथा एक बटन कंट्रोल को जोडें । तथा प्रश्नानुसार उनके प्रॉपर्टी को सेट करें तथा चित्रानुसार उनहें सजाएँ। Say Hello बटन को दो बार क्लिक करके btnHello इवेण्ट हैण्डलर में इस कोड को टाइप करें IblHello.Text = “Hullo! Ladies and Gentlemen”
  • उसके बाद F5 दबायें। तत्पश्चात् Say Hello ! बटन को क्लिक करने पर आप परिणाम चित्र LA2.3 की तरह
  • पायेंगे।

आज आपने क्या सीखा (What Did You Learn Today)

  • विजुअल स्टूडियो डेस्कटॉप ऐप्लीकेशनों, ए एस पी डॉट नेट ऐप्लीकेशनों, एक्स एम एल (XML), वेब सेवाओं तथा मोबाईल ऐप्लीकेशनों को विकसित करने हेतु विकास उपकरणों का एक सम्पूर्ण सेट है।
  • विजुअल स्टूडियो विजुअल बेसिक, विजुअल C++, सी शार्प (C#) तथा जे शार्प (J#) को इकट्ठे एक समान इंटीग्रेटेड डेवलपमेन्ट एन्वायरमेंन्ट प्रदान करता है। इसमें आप इनके समायोजन से सॉल्यूशन का निर्माण कर सकते हैं।
  • विजुअल स्टूडियो 2005 टूल्स फॉर द माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस सिस्टम की सहायता से आप विजुअल बेसिक तथा विजुअल सी शॉर्प का उपयोग करते हुए वर्ड 2003 डॉक्यूमेंण्टस तथा एक्सल 2003 वर्कबुक्स को एक्सटेंड कर सॉल्यूशन का निर्माण कर सकते हैं।
  • विजुअल स्टूडियो 2005 में एक नया विजुअल वेब डेवलपर नामक वेब पेज डिजाइनर है जिसमें ए एस डॉट नेट वेब पेजों तथा एच टी एम एल (HTML) पेजों को बनानें तथा संपादन करने हेतु कई और चीजों को सम्मिलित किया गया है। इसमें विजुअल स्टूडियो 2003 की अपेक्षाकृत वेब फॉमर्स को बनाने की सरल और तेज विधि है।
  • विण्डोज़ फॉमर्स का उपयोग डॉट नेट फ्रेमवर्क पर माइक्रोसॉफ्ट एप्लीकेशनों को बनाने के लिये होता है – ए फ्रेमवर्क क्लास का एक स्पष्ट, ऑब्जेक्ट ओरियेन्टेड एक्सटेन्सिबल सेट प्रदान करता है जिसमें आप अच्छे प्रकार के विण्डोज ऐप्लीकेशन विकसित कर सकते हैं।
    है। ये उपयोग कर आग्रह (requests) तथा डाय प्राप्त कर सकते हैं।
  • एक्स एम एल वेब सेवायें ऐसे एप्लीकेशन होते हैं जो एच टी टी पी (HTTP) पर एक्स एम एल (XML) का उपयोग क़र आग्रह तथा डाटा प्राप्त कर सकते हैं |
  • एक्सटेन्सिबल मार्कअप भाषा (eXtensible Markup Language) स्ट्रक्चर्ड डाटा के वर्णन की एक विधि प्रदान करता है। एक्स एम एल एस जी एम एल (SGML) का एक सब सेट है जो वेब पर डिलीवरी के लिये ऑप्टीमाइज किया जाता है।
  • विजुअल स्टूडियो 2005 माइक्रोसॉफ्ट विण्डोज के किसी अन्य प्रोग्राम की तरह ही एक प्रोग्राम है। तथा इसे खोलने की वही विधि है जो आप किसी अन्य प्रोग्राम को खोलने में करते हैं।
  • Recent Projects में वैसे प्रोजेक्ट सूचीबद्ध होते हैं जो आपने अभी-अभी बनाये हैं या फिर उन्हें खोला है। Recent Projects खण्ड में प्रदर्शित प्रोजेक्ट की अधिकतम संख्या 24 है।
  • जब आप एक नया प्रोजेक्ट बनाते हैं तो शुरूआत में यह प्रारम्भिक मेमोरी में ही केवल विद्यमान होता है जब तक कि आप इसे सुरक्षित (save) करके एक अर्थपूर्ण नाम नहीं दे देते हैं।
  • जब आप कोई प्रोजेक्ट बनाते हैं तब एक नया फॉर्म (जिसे फॉर्म डिजायनर भी कहा जाता है प्रकट होता है।) इंटीग्रेटेड डेवलपमेन्ट इन्वायरमेन्ट में प्रकट होता है। यह वह फॉर्म है जो प्रोग्राम के क्रियान्वित होने पर डिस्प्ले होता है। एक प्रोजेक्ट में कई फॉर्म हो सकते हैं जैसे एक एप्लीकेशन कई विण्डो पर आधारित होता है।
  • आप वी बी डॉट नेट में कई प्रकार के प्रोजेक्ट व सोल्यूशन बना सकते हैं। फिर भी तीन मुख्य प्रकार के प्रोजेक्ट विजुअल स्टूडियो डॉट नेट में बनाया जा सकता है। जैसे – विण्डोज एप्लीकेशन (Windows Applications), वेब एप्लीकेशन (Web Application) और कंसोल एप्लीकेशन (Console Application) ।
  • यूजर इंटरफेस एप्लीकेशनों का वो दृश्य भाग होता है जिसकी सहायता से उपयोगकर्ता एप्लीकेशनों के साथ इंटरेक्ट करता है।
  • जब भी हम विजुअल स्टूडियो के अन्दर वी.बी. डॉट नेट में एक विण्डोज यूजर इंटरफेस का निर्माण कर रहे होते हैं तो हम फॉर्म डिजाइनर को प्रदर्शित करने के पश्चात उस पर कट्रोल रखते हैं। फॉर्म डिजाइनर पर कंट्रोल रखने के लिये टूलबॉक्स का उपयोग किया जाता है।
  • लेबल एक ऐसा कंट्रोल है जिसके आकार में तब तक कोई बदलाव नहीं किया जा सकता जब तक कि इसके प्रॉपर्टी AutoSize को False सेट नहीं किया जाये। इसकी AutoSize प्रॉपर्टी बाई डिफॉल्ट True सेट होता है। इसका कारण यह है कि लेबल का आमतौर पर आकार उसके कैप्शन द्वारा निर्धारित किया जाता है।
  • टूलबॉक्स में कई कंट्रोल होते हैं तथा प्रत्येक कंट्रोल का एक खास कार्य है।
  • Propetries विण्डो को डिस्प्ले करने के लिए View मेन्यू से Propetries Window का चयन करें या फिर इसे की-बोर्ड से F4 फंक्शन की दबाकर सकते है।
  • विजुअल बेसिक डॉट नेट में प्रॉपर्टी किसी ऑब्जेक्ट के फीचर होते हैं। उदाहरणस्वरूप, बटन कंट्रोल का Text प्रॉपर्टी उस ऑब्जेक्ट अर्थात कंट्रोल का वह फीचर है जो उस कंट्रोल के कैप्शन को प्रकट करता है। विजुअल बेसिक डॉट नेट में जब आप किसी ऑब्जेक्ट के प्रॉपर्टी को सेट करते हैं तब उस प्रॉपर्टी के परिणाम आपको केवल रनटाइम में ही दिखते हैं।
  • आमतौर पर आप कोड जोड़ने के बाद यह देखने के लिये प्रोग्राम को रन करते हैं कि प्रोग्राम ठीक-ठीक कार्य कर रहा है अथवा कोई त्रुटि दे रहा है। इसी प्रक्रिया को डिबगिंग (debugging) कहते हैं।

विजुअल बेसिक डॉट नेट | Best Info VB.NET

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विजुअल बेसिक डॉट नेट | विज़ुअल बेसिक डॉट नेट क्या है ? एवं उपयोग | वी०बी० डॉट नेट (VB. Dot Net) | What is VB.Net? in Hindi
विजुअल बेसिक डॉट नेट | विज़ुअल बेसिक डॉट नेट क्या है ? एवं उपयोग | वी०बी० डॉट नेट (VB. Dot Net) | What is VB.Net? in Hindi

विज़ुअल बेसिक डॉट नेट क्या है? एवं उपयोग | वी०बी० डॉट नेट (VB. Dot Net) | What is VB.Net? in Hindi

विजुअल बेसिक डॉट नेट (VB. Dot Net)– विजुअल बेसिक डॉट नेट या वी० बी० डॉट नेट विजुअल बेसिक का माइक्रोसॉफ्ट डॉटनेट फ्रेमवर्क संस्करण है। विजुअल बेसिक डॉट नेट ऑब्जेक्ट ओरिएण्टेड प्रोग्रामिंग भाषा है।

वी० बी० डॉट नेट की सहायता से आप बड़े स्तर पर भी एप्लिकेशन विकसित कर सकते हैं बगैर इसकी चिन्ता किये हुए कि आप प्रोग्रामिंग में निपुण है या नहीं हैं। यह अत्यन्त प्रयोक्ता मित्वत भाषा है। प्रोग्रामर को इसमें केवल विजुअल टूल्स का प्रयोग कर कम्पोनेन्ट को व्यवस्थित करना तथा कम्पोनेन्टस के लिए कोड लिखना होता है।

अधिकतर वी० बी० डॉट नेट प्रोग्रामर अपने विकास के आवश्यकताओं की पूर्ति विजुअल स्टूडियो की सहायता से करते हैं। इसके अतिरिक्त माइक्रोसॉफ्ट डॉट नेट फ्रेमवर्क पहले से प्रोग्राम किये गये कोड पर निर्मित होता है जिसे प्रयोक्ता किसी भी समय एक्सेस कर सकते हैं। इस पहले से प्रोग्राम किये गये कोड को क्लास लाइब्रेरी कहते है।

क्लास लाइब्रेरी में प्रोग्राम को मिलाकर या संशोधित कर प्रोग्रामरों की आवश्यकताओं से निपटा जा सकता है। डॉट नेट के प्रोग्राम सी॰एल॰आर॰ या कॉमन लैंग्वेज रनटाइम इन्वायरमेण्ट पर चलते हैं। चाहे कोई भी कम्प्यूटर हो यदि यह इन्वायरमेण्ट उपलब्ध है तो डॉट नेट भाषा में विकसित प्रोग्राम उस कम्प्यूटर पर चलेगा।

वी० बी० डॉट नेट के पक्ष तथा विपक्ष (Pros and Cons of VB.NET)

वी.बी. डॉट नेट के साकारात्मक तथा नकारात्मक पक्षों को आप सारणी से समझ सकते हैं।

पक्ष (Pros)
1. वी.बी. डॉट नेट प्रोग्रामिंग भाषा का प्रयोग कर आप प्रोग्राम को तेजी के साथ विकसित कर सकते हैं।
2. वी.बी. डॉट नेट क्लास लायब्रेरी में ढेर सारे संसाधन होते हैं जिनका लाभ आप प्राप्त कर सकते हैं।
3. वी.बी. डॉट नेट को डॉट नेट फ्रेमवर्क का पूरा एक्सेस प्राप्त होता है।
4. वी. बी. डॉट नेट जैसे ऑब्जेक्ट ओरिएन्टेड प्रोग्रामिंग भाषा में अपने विचारों को व्यवस्थित करना आसान होता है।
5. वी. बी. डॉट नेट अन्य माइक्रोसॉफ्ट एप्लीकेशन के साथ तालमेल बना पाता है।

विपक्ष (Cons)
1. वी.बी. डॉट नेट के लम्बे कोडिंग में गलती ढूँढना तथा उन्हें ठीक करना कठिन होता है।
2. वी.बी. डॉट नेट का लाइसेंस संस्करण महंगा होता है।
3. बड़े इंटरप्राइज सॉफ्टवेयर विकास के समाधान के रूप में इसका प्रयोग प्रोत्साहित नहीं किया जाता है क्योंकि इसमें प्रोग्राम करने तथा कम्पाइल करने के बाद भी इसकी कोडिंग या प्रोग्रामिंग पैटर्न को समझना आसान होता है। परिणामस्वरूप कोडिंग को कॉपी करना आसान होता है तथा टैलेण्ट का दुरूपयोग हो सकता है। 

विजुअल बेसिक डॉट नेट | वीबी डॉट नेट का क्या फायदा है? | Vb.Net Kya Hota Hai

विजुअल बेसिक डॉट नेट | विज़ुअल बेसिक डॉट नेट क्या है ? एवं उपयोग | वी०बी० डॉट नेट (VB. Dot Net) | What is VB.Net? in Hindi
विजुअल बेसिक डॉट नेट | विज़ुअल बेसिक डॉट नेट क्या है ? एवं उपयोग | वी०बी० डॉट नेट (VB. Dot Net) | What is VB.Net? in Hindi

वी० बी० डॉट नेट का विकास (Evolution of VB. Net)

वी० बी० डॉट नेट से पहले वी० बी० (विजुअल बेसिक) था तथा वी० बी० से पहले बेसिक था। बेसिक का पूर्ण रूप बिगिनर्स ऑल परपस सिम्बॉलिक इंस्ट्रक्शन कोड (Beginner’s All purpose Symbolic Instruction Code) होता है। इसे 1963 में डार्ट माउथ कॉलेज में दो कम्प्यूटर वैज्ञानिकों जॉन केमेनी (John Kemeny) तथा टॉमस कुत्रज (Thomas Krutz) ने विकसित किया था।

यह एक सामान्य उद्देशीय प्रोग्रामिंग भाषा था जो केवल नौसिखिए के लिए तैयार किया गया था। 1975 में जब मीट्स (MITS) एल्टेयर 8800 माइक्रो कम्प्यूटर रिलिज हुआ, तब बेसिक एल्टेयर बेसिक हुआ जिसे कम्प्यूटर बाहुबलियों बिल गेट्स तथा पॉल एलेन ने विकसित किया।

80 के दशक के दौरान जब पर्सनल कम्प्यूटर हर घर में अपना स्थान बना रहा था बेसिक की पकड़ कम्प्यूटर भाषा के बाजार में कमजोर होने लगी क्योंकि अब अधिक लोग तथा कम्पनियाँ कम्प्यूटर प्रोग्राम का प्रयोग साधारण तथा बुनियादी कार्य के बजाय जटिल कार्यों के लिए कर रहे थे। 1991 में बेसिक को इसके विजुअल कम्पोनेण्ट के साथ इनफ्युज किया गया तथा विजुअल बेसिक बना।

नये ग्राफिकल यूजर इंटरफेस की शुरूआत एलेन कूपर (Alan Cooper) ने की। विजुअल बेसिक को आरम्भ में इसके कम्पैटिबिलिटि मुद्दों के कारण ख्याति नहीं मिली। परन्तु 90 के मध्य तथा अंत के दशक में इसे अप्रत्याशित रूप से सफलता मिली जब विकासकर्त्ता इसके साथ परिचित होने लगे। नयी सदी में वी०बी० डॉट नेट विजुअल बेसिक प्रोग्रामिंग भाषा का उत्तरवर्ती (successor) बना।

माइक्रोसॉफ्ट डॉट नेट फ्रेमवर्क के संस्करण (Versions of Microsoft. Net Framework)

माइक्रोसॉफ्ट डॉट नेट फ्रेमवर्क का सबसे पहला संस्करण डॉट नेट फ्रेमवर्क 1.0 संस्करण का आगमन विजुअल स्टूडियो डाटॅ नेट के साथ हुआ। आज तक माइक्रोसॉफ्ट डाटॅ नेट फ्रेमवर्क के कई संस्करणों को रिलीज किया है। इसका अंतिम संस्करण 3.5 विजुअल स्टूडियो 2008 के साथ 2007 के 19 नवम्बर को आया।

1- डॉट नेट फ्रेमवर्क 1.0 (Dot net framework 1.0) – यह डॉट नेट फ्रेमवर्क का सबसे पहला संस्करण था। इसे 13 फरवरी 2002 को रिलीज किया गया था। इसे विण्डोज 98, एन०टी० 4.0, विण्डोज 2000 तथा विण्डोज एक्स०पी० के लिए उपलब्ध किया गया था। इसके लिए माइक्रोसॉफ्ट के द्वारा 14 जुलाई 2009 को सपोर्ट करना बंद कर दिया जाएगा।

2- डॉट नेट फ्रेमवर्क 1.1 (Dot net framework 1.1) – यह पहला बड़ा डॉट नेट फ्रेमवर्क है। इसे 3 अप्रैल 2003 में एक सॉफ्टवेयर डेवलपमेन्ट किट के साथ प्रकाशित किया गया था। यह माइक्रोसॉफ्ट विजुअल स्टूडियो डॉट नेट के दूसरे रिलीज जो कि विजुअल स्टूडियो 2003 के रूप में रिलीज किया गया का भी हिस्सा था। यह डॉट नेट फ्रेमवर्क का पहला संस्करण था जिसे विण्डोज ऑपरेटिंग सिस्टम में शामिल किया गया जो विण्डोज सर्वर 2003 के साथ लाया गया।

डॉट नेट फ्रेमवर्क 1.1 के लिए मेनस्ट्रीम सपोर्ट 14 अक्तुबर 2008 को समाप्त हुआ तथा विस्तापित सपोर्ट 8 अक्तुबर 2013 को समाप्त होगा। चूंकि डॉट नेट 1.1 विण्डोज सर्वर 2003 का एक कम्पोनेण्ट है, सर्वर 2003 पर नेट 1.1 का विस्तारित सपोर्ट ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ 14 जुलाई 2015 को समाप्त होगा।

संस्करण 1.0 के अपेक्षा संस्करण 1.1 में निम्नलिखित बदलाव थे-

  • डॉट नेट फ्रेमवर्क 1.1 से मोबाईल ए.एस.पी. डॉट नेट कंट्रोलस के लिए बिल्ट-इन-सपोर्ट उपलब्ध था। इससे पहले 1.0 संस्करण में यह सुविधा ऐड औन (add-on) के रूप में उपलब्ध था जबकि इस संस्करण में यह फ्रेमवर्क का हिस्सा था।
  • ओ.डी.बी.सी. (ODBC) तथा ऑरेकल डाटाबेस डॉट नेट फ्रेमवर्क 1.0 में ऐड-ऑन के रूप में उपलब्ध था जबकि 1.1 में यह फ्रेमवर्क का हिस्सा था।
  • इससे डॉट-नेट कॉम्पैक्ट फ्रेमवर्क जो छोटे उपकरणों के लिए डॉट नेट फ्रेमवर्क का संस्करण है इसके साथ
    उपलब्ध है। 
  • इसमें इण्टरनेट प्रोटोकॉल संस्करण 6 (IPV6) सपोर्ट उपलब्ध है।
  • इसके ए० पी० आई० में कई बदलाव हैं।

3- डॉट नेट फ्रेमवर्क 2.0 (. Net Framework 2.0) – डॉट नेट फ्रेमवर्क 2.0 को 22 जनवरी 2006 को प्रकाशित किया गया। 2.0 रिडिस्ट्रिब्यूबल पैकेज को माइक्रोसॉफ्ट साइट (www.microsoft.com) में निःशुल्क डाउनलोड किया जा सकता है। यह विजुअल स्टूडियो 2005, माइक्रोसॉफ्ट एस. क्यू साथ भी रिलीज किया गया। डॉट नेट फ्रेमवर्क 2.0 बगैर किसी एल. सर्वर 2005 तथा बिजटॉक 2005 (Biztalk 2005) सर्विस पैक के विण्डोज 98 तथा विण्डोज मी (मिलेनियम संस्करण) में सपोर्ट के साथ अंतिम संस्करण था।

सर्विस पैक 1 के साथ संस्करण 2.0 विण्डोज 2000 पर सपोर्ट के साथ अंतिम संस्करण था हालांकि विण्डोज 2000 में संस्करण 35 से फंक्शनलिटी का एक सब्सेट को उपयोग करने के लिए ऑनलाइन कुछ अनाधिकृत वर्कअराउण्डस (Workarounds) प्रकाशित किये गये। संस्करण 2.0 सर्विस पैक के साथ के लिए विण्डोज एक्स पी या विण्डोज सर्वर 2003 आवश्यक है। इसमें संस्करण की अपेक्षा मुख्य बदलाव निम्नलिखित है।

  • कई ए.पी.आई. बदलाव
  • डॉट नेट रनटाइम के एक इंस्टैन्स को होस्ट करने के उद्देश्य से नेटिव एप्लीकेशनों के लिए एक नया होस्टिंग एपी.आई।
    X 64 तथा IA64 हार्डवेयर प्लेटफार्म लिए पूर्ण 64 बीट सपोर्ट
  • डॉट नेट कॉमन लैंग्वेज रनटाइम में सीधे-सीधे जेनेरिक्स बिल्ट (Generics built) के लिए भाषा सपोर्ट।
  • कई अतिरिक और उन्नत ए.एस.पी. डॉट नेट वेब कंट्रोल्स।
  • डिक्लेअरेटिव डाटा बाइन्डिंग के साथ नये डाटा कंट्रोल ।
  • ए. एस. पी. डॉट नेट के लिए नये पर्सनामाइजेशन फीचर जैसे थीम्स, स्क्रीन्ज और वेबपार्टस।
  • डॉट नेट माइक्रो फ्रेमवर्क (यह स्मार्ट पर्सनल ऑब्जेक्टस टेक्नोलॉजी इनिशिएटिव से संबंधित डॉट नेट फ्रेमवर्क का एक संस्करण है। )
  • पार्शिअल क्लासेज
  • अनोनिमस मेथड्स
  • जेनेरिक्स
  • डाटा टेबलस

4- डॉट नेट फ्रेमवर्क 3.0 (. Net Framework 3.0) – डॉट नेट फ्रेमवर्क 3.0 जिसे पूर्व में WinFx से जाना जाता था, को 21 नवम्बर 2006 को रिलीज किया गया था। इसमें मैनेजड कोड ए.पी.आईज (APIs) का एक नया सेट है जो विण्डोज विस्टा तथा विण्डोज सर्वर 2008 ऑपरेटिंग सिस्टम का अभिन्न अंग है। यह विण्डोज एक्स.पी. सर्विस पैक 2 तथा विण्डोज सर्वर 2003 के लिए भी डाउनलोड किया जा सकता है।

इस रिलीज में कोई बड़ा आर्किटेक्टरल बदलाव नहीं है। डॉट नेट फ्रेमवर्क 3.0 डॉट नेट फ्रेमवर्क 2.0 के कॉमन लैंग्वेज रनटाइम का प्रयोग करता है। पिछले बड़े डॉट नेट रिलिजेज के विपरीत इस संस्करण के काउण्टरपार्ट की तरह डॉट नेट कॉम्पैक्ट फ्रेमवर्क को रिलीज नहीं किया गया। डॉट नेट फ्रेमवर्क 3.0 कई नये कम्पोनेटस से मिलकर बना है जो इस प्रकार है- 


(i) विण्डोज कम्यूनिकेशन फाउण्डेशन (Windows Communication Foundation) – इसका पहले कोड नाम इंडिगो (Indigo) था। यह एक सर्विस ओरिएण्टेड मेसेजिंग सिस्टम है जिसकी सहायता से प्रोग्राम स्थानीय या दूर से इंटरऑपरेट होते है। यह क्रिया वेब सर्विसेज की तरह है।

(ii) विण्डोज प्रेजेनटेशन फाउण्डेशन (Windows Presentation Foundation) – इसका पहले कोड नाम ऐवेलॉन (Avalon) था। यह एक्स. एम. एल. तथा वेक्टर ग्राफिक्स पर आधारित एक नया यूजर इंटरफेस सब सिस्टम तथा ए पी.आई. है जो त्रिविमीय कम्प्यूटर ग्राफिक्स हार्डवेयर तथा डायरेक्ट थ्री डी प्रौद्योगिकी का प्रयोग करता है।

(iii) विण्डोज वर्कफ्लो फाउण्डेशन (Windows Workflow Foundation) – विण्डोज वर्कफ्लो फाउण्डेशन की सहायता से वर्कफ्लो का प्रयोग कर टास्क ऑटोमेशन तथा एकीकृत ट्रांजैक्शन का निर्माण होता है। विण्डोज कार्डस्पेस (Windows Cardspace) – इसका कोड नाम इंफोकोड था। यह सॉफ्टवेयर कम्पोनेण्ट है जो पुराने ढंग से निजी डिजीटल पहचान (Personal digital identifies) को स्टोर करता है तथा एक खास ट्रांजैक्शन जैसे वेबसाइट में लॉग इन करने के लिए पहचान के चयन के लिए एक एकीकृत इंटरफेस प्रदान करता है।

डॉट नेट बनाम जावा (.Net versus Java)

सी शार्प तथा वी. बी. जैसी. सी. एल.आई. तथा डॉट नेट भाषाएँ सन के जावा तथा जावा वर्चुअल मशीन के साथ कई समानताएँ रखती है। दोनों ही एक दूसरे के मजबूत प्रतिस्पर्धी है। दोनों ही वर्चुअल मशीन मॉडल पर आधारित हैं जो उस कम्प्यूटर हार्डवेयर के विवरण को छिपाती हैं जिनपर उनके प्रोग्राम रन होते है। दोनों ही अपने इंटरमीडिएट बाइट कोड का प्रयोग करते है।

अंतर यह है कि माइक्रोसॉफ्ट उस इन्टरमीडिएट बाइट कोड को कॉमन इंटरमीडिएट भाषा (Common Intermediate Language) कहती है तथा सन उसे जावा बाइट कोड (bytecode) कहता है। डॉट नेट में बाइट-कोड हमेशा जस्ट इन टाइम (Just in time) या ngen.exe यूटिलिटि का उपयोग कर एक्जिक्यूशन से पहले कम्पाइल होता है।

जावा की स्थिति में, बाइटकोड या तो अग्रिम में इंटरप्रेट अथवा कम्पाइल होता है या जस्ट इन टाइम कम्पाइल होता है। दोनों व्यापक क्लास लायब्रेरी प्रदान करता है जो कई समान प्रोग्रामिंग आवश्यकताओं को संबोधित करता है तथा कई सुरक्षा मुद्दों को संबोधित करता है जो अन्य एप्रोच में उपलब्ध है।

डॉट नेट फ्रेमवर्क में प्रदान किये नेमस्पेस स्टाइल तथा इंवोकेशन (invocation) में जावा इंटप्राइज एडिशन स्पेसिफिकेशन में प्लेटफार्म पैकेजेज से मिलते-जुलते है। डॉट नेट अपने पूर्ण स्वरूप (माइक्रोसॉफ्ट इम्प्लीमेण्टेशन) में केवल विण्डोज प्लेटफार्म पर उपलब्ध है तथा आंशिक रूप से लाइनक्स तथा मैकिनटॉश पर उपलब्ध है जबकि जावा पूर्ण स्वरूप में कई प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है।

डॉट नेट ने अपने आरम्भ से ही एक से अधिक प्रोग्रामिंग भाषाओं को सपोर्ट किया है तथा इसमें ऐसा कुछ है जिससे अन्य विक्रेता (vendors) इसे अन्य प्लेटफार्म पर इम्पलिमेण्ट कर सके हालांकि माइक्रोसॉफ्ट इम्प्लीमेण्टेशन केवल विण्डोज, विण्डोज सी.ई. तथा एक्सबॉक्स प्लेटफार्म को टारगेट करता है। जावा प्लेटफार्म शुरू में केवल जावा भाषा को सपोर्ट करने के लिए बनाया गया है। अन्य प्रोग्रामिंग भाषाओं को भी जावा वर्चुअल मशीन पर इम्प्लीमेण्ट किया गया लेकिन उनका उपयोग बहुत कम किया जाता है।

विजुअल बेसिक तथा विजुअल बेसिक डॉट नेट (Visual Basic and Visual Basic. Net)

विजुअल बेसिक डॉट नेट को विजुअल बेसिक 7.0 अर्थात विजुअल बेसिक 6.0 का अपग्रेडेशन माना जाता है। बहुत सारे लोगों का यह मानना है। मैं यह नहीं जानता कि माइक्रोसॉफ्ट वालों की इस संबंध में क्या राय है। यदि आप चाहें तो अपने स्तर पर यह पता कर सकते हैं। परन्तु यह भी सत्य है की इस तरह की माइक्रोसॉफ्ट के तरफ से कोई औपचारिक घोषणा नहीं है। मैं भी इसे नहीं मानता की यह संस्करण विजुअल बेसिक 6.0 का अपग्रेड है।

विजुअल बेसिक डॉट नेट में केवल नाम पुराने संस्करण से लिया गया लेकिन डॉट नेट बिल्कुल एक नई भाषा है। इसमें इतने सारे नये फीचर है कि विजुअल बेसिक 6.0 में बने प्रोग्राम और इसके साथ कम्पैटिबीलिटी एक बड़ा मुद्दा है। कम्पैटिबीलिटी का अर्थ यह है कि पुराने प्रोग्रामों को आप नये सॉफ्टवेयर पर चला सकें। और यह विजुअल बेसिक 6.0 से बहुत अधिक बेहतर है। और यदि आप वी.बी. में अच्छे प्रोग्रामर थे तो यह जान लीजिए कि आपको भी इसमें काम करने के लिए बहुत कुछ सिखना पड़ेगा।


आपको इसकी कुछ खास चीजें बता रहा हूँ जिससे आपको पता चलेगा कि क्यों आपको वी.बी. डॉट नेट सिखना चाहिए –

  • वी. बी. डॉट नेट में बहुत ही बढ़िया वेब एप्लिकेशनस बनाये जा सकते है। और इन्हें उतनी ही आसानी से बनाये जा सकते हैं जितनी आसानी से आप विण्डोज एप्लिकेशन को विकसित करते है।
  • अधिकतर आधुनिक भाषाओं की तरह, तथा वी. बी. 6.0 के विपरीत यह एक सम्पूर्ण ऑब्जेक्ट ओरिएण्टेड भाषा है।
  • विजुअल बेसिक डॉट नेट अन्य भाषाओं जैसे सी++ और सी शार्प की तरह ही शक्तिशाली भाषा है जबकि विजुअ
    बेसिक की इस संबंध में अपनी सीमाएं थीं।
  • विजुअल बेसिक डॉट नेट डॉट नेट फ्रेमवर्क का एक अंग है। इस कारण से आप बहुत सारे कम्पोनेण्टस् तथ
    फंक्शनों को एक्सेस कर पाते है तथा यह आपको सुरक्षा तथा विश्वसनीयता के कई फीचर प्रदान करता है
    माइक्रोसॉफ्ट इसे मैनेजड कोड कहता है जिसका अर्थ यह होता है कि डॉट नेट रन टाइम आपके प्रोग्राम की सुर
    मेमोरी उपयोग तथा परफॉरमेंस ऑप्टीमाइजेशन को व्यवस्थित करता है।

उपरोक्त के अतिरिक्त भी कई कारण है जो आप इसमें प्रोग्राम विकसित करते समय जानेंगे। हालांकि अब भी वो
बी. को उपयोग करने का आपके पास कारण है। उदाहरण के तौर पर आप वी. बी. की सहायता से विण्डोज् 95 के
लिए एप्लिकेशन विकसित कर सकते है जिसे विजुअल बेसिक डॉट नेट सपोर्ट नहीं करता है। कुल मिलाकर बात यह
है कि आप अपने आधुनिकृत आवश्यकताओं की पूर्ति चाहते है तो वी. बी. डॉट नेट आज सबसे बढ़िया विकल्प है।

कॉमन लैंग्वेज रनटाइम | Best Common Language Runtime

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कॉमन लैंग्वेज रनटाइम द्वारा कौन-कौन से काम किए जाते हैं? | Common Language Runtime In Hindi
कॉमन लैंग्वेज रनटाइम द्वारा कौन-कौन से काम किए जाते हैं? | Common Language Runtime In Hindi

कॉमन लैंग्वेज रनटाइम द्वारा कौन-कौन से काम किए जाते हैं? | Common Language Runtime In Hindi

कॉमन लैंग्वेज रनटाइम – कॉमन लैंग्वेज रनटाइम मेमोरी थ्रेड एक्जिक्युशन, कोड एक्जिकयुशन, कोड सेफ्टी वेरिफिकेशन, कम्पाइलेशन तथा अन्य सिस्टम सेवाओं को व्यवस्थित करता है। ये फीचर व्यवस्थित कोड के आधार हैं जो कॉमन लैंग्वेज रनटाइम पर रन होते हैं। कॉमन लैंग्वेज रनटाइम वह इंजिन है जो सोर्स कोड को एक इण्टरमीडिएट लैंग्वेज में कम्पाइल करता है।

इस इण्टरमीडिएट लैंग्वेज को माइक्रोसॉफ्ट इण्टरमीडिऐट लैंग्वेज (MicroSoft Intermediate Language) कहा जाता है जिसे हम कॉमन इण्टरमीडिऐट लैंग्वेज (Common Intermediate Language) या केवल इन्टरमीडिएट लैंग्वेज (Intermediate Language) से भी जानते हैं।

जब आप अपने प्रोग्राम को रन करते हैं तब माइक्रोसॉफ्ट इण्टरमीडिऐट लैंग्वेज को जस्ट इन टाइम कम्पाइलर के माध्यम से स्थानीय (नेटिव) कोड या मशीनी कोड में बदलते हैं। प्रोग्राम कोड के कम्पाइल किये जाने पर परिणामस्वरूप एक पोर्टेबल एक्जीक्यूटेबल (Portable Executable) फाइल बनता है जिसमें माइक्रोसॉफ्ट इण्टरमीडिऐट लैंग्वेज तथा कुछ अतिरिक्त सूचना होते हैं। इस अतिरिक्त सूचना को मेटाडेटा (metadata) कहते हैं।

मेटाडेटा माइक्रोसॉफ्ट इण्टरमीडिऐट लैंग्वेज (MicroSoft Intermediate Language) का वर्णन करता है तथा इसमें नाम, मेथड, हस्ताक्षर (signature) और कई निर्भरता सूचना (dependency information) जैसे ब्यौरे मौजूद होते हैं। कॉमन लैंग्वेज रनटाइम का एक और अत्यन्त महत्त्वपूर्ण कार्य है। प्रोग्राम रन होने के दौरान यह मेमोरी को व्यवस्थित करने का कार्य स्वयं ही गार्बेज कलेक्शन नामक प्रोसेस के माध्यम से करता है।

परिणामस्वरूप वी.बी. के पहले के संस्करणों के विपरीत प्रोग्रामर को मेमोरी प्रबन्धन के विभिन्न चरणों के बारे में चिन्तित होने की आवश्यकता नहीं होती है। चूँकि कॉमन लैंग्वेज रनटाइम (Common Language Runtime) आपके कोड को एक इण्टरमीडिएट लैंग्वेज में कम्पाइल करता है अर्थात अपने इच्छा की किसी भी भाषा में आप कोड लिख सकते हैं। डॉट नेट फ्रेमवर्क के इस फीचर के कारण इस भाषा स्वतंत्र प्लेटफॉर्म कहा जाता है और ये डॉट नेट फ्रेमवर्क के लाभों में एक है।

कॉमन लैंग्वेज रनटाइम आपके प्रोग्राम विकास की गति में कई तरह से तेजी लाता है। ये किस प्रकार विकास की प्रक्रिया
को तेज करता है, इसको समझिए –

1- प्रोग्रामर जब प्रोग्राम को लिखते हैं तब उन्हें आमतौर पर स्वयं ही प्रोग्राम को मेमोरी अलोकेट तथा डिलोकेट करना पड़ता है। डॉट नेट में कॉमन लैंग्वेज रनटाइम इस कार्य को स्वयं ही करता है अर्थात् प्रोग्रामरों द्वारा मेमोरी को व्यवस्थित करने में लगने वाला समय बचता है।

2- जब आप किसी प्लेटफॉर्म पर एप्लीकेशन विकसित करते हैं तो आपको उस भाषा में आवश्यक रूप से निपुण होना चाहिए। जब आप डॉट नेट प्लेटफॉर्म पर कोई एप्लीकेशन विकसित करना चाहते हैं तो आपके पास एक से अधिक भाषा में कोड लिखने की स्वतंत्रता प्राप्त होती है ।

अर्थात् यह आवश्यक नहीं है कि आप वी.बी. के पिछले संस्करणों की तरह केवल विजुअल बेसिक में ही कोड लिखें। आप यदि C# में कोड लिख सकते हैं तो आप इसी में कोड लिख सकते हैं। परिणामस्वरूप आपको विजुअल बेसिक सीखने में जो समय लगता उसकी भी बचत कॉमन लैंग्वेज रनटाइम के कारण ही होती है। 

कॉमन लैंग्वेज रनटाइम क्या होता है एवं उपयोग  | Common Language Runtime In .Net Framework

कॉमन लैंग्वेज रनटाइम द्वारा कौन-कौन से काम किए जाते हैं? | Common Language Runtime In Hindi
कॉमन लैंग्वेज रनटाइम द्वारा कौन-कौन से काम किए जाते हैं? | Common Language Runtime In Hindi

कॉमन लैंग्वेज रनटाइम की प्रक्रिया (Process Of Common Language Runtime)

डॉट नेट फ्रेमवर्क पर रन हेने वाले कोड (मैनेज्ड कोड) की कम्पाइलिंग तथा क्रियान्वयन प्रक्रिया

  • सबसे पहले आप अपने पसन्द की भाषा में प्रोग्राम कोड लिखते हैं।
  • फिर वह कोड उस भाषा के कम्पाइलर द्वारा कम्पाइल होता है।
  • कम्पाइल होने के बाद एक फाइल बनती है जसे हम पोर्टेबल एक्जीक्यूटेबल फाइल कहते हैं जिसमें आप द्वारा लिखा गया इन्टरमिडियेट भाषा में परिवर्तित होता है तथा जिसमें कुछ अतिरिक्त सूचना भी होते हैं। इस सूचना को मेटाडेय कहा जाता है। मेटाडेटा में प्रोग्राम से सम्बन्धित पूरा ब्यौरा मौजूद होता है।
  • उसके बाद इण्टरमीडिएट भाषा तथा मेटाडेटा एक लायब्रेरी से लिंक होते हैं।
  • इसके पश्चात् कम्पाइलर exe अथवा dll फाइल बनाता है।
  • जब आप इस exe या dll फाइल को एक्ज़ीक्यूट करते हैं तब बेस क्लास लायब्रेरी से कोड तथा सभी प्रासंगिक सूचना क्लास लोडर को भेजा जाता है। क्लास लोडर का कार्य कोड को मेमोरी में लोड करना होता है।
  • जस्ट इन टाइम कम्पाइलर कोड को इन्टरमिडिऐट भाषा से फिर मैनेज्ड नेटिव कोड में अनुवाद करता है। कॉमन लैंग्वेज रनटाइम प्रत्येक सी पी यू (CPU) के लिए एक जस्ट इन टाइम (Just In Time) कम्पाइलर उपलब्ध कराता है।
  • कोड कम्पाइलेशन के दौरान जस्ट इन टाइम (Just In Time) सम्पूर्ण इण्टरमीडिऐट लैंग्वेज को कम्पाइल करने के बदले केवल उन्हीं इण्टरमीडिऐट लैंग्वेज कोड को कम्पाइल करता है जिसकी आवश्यकता एक्ज़ीक्युशन के दौरान होता है। इस प्रक्रिया के दौरान यदि कोई अनकम्पाइल्ड मेथड जागृत होता है तो उस स्थिति में जस्ट इन टाइम कम्पाइलर उस मेथड के लिये उस इण्टरमीडिऐट लैंग्वेज को स्थानीय कोड में कम्पाइल करता है।
  • जस्ट इन टाइम कम्पाइलेशन के दौरान कोड की टाइप सेफ्टी जाँच होती है। टाइप सेफ्टी यह सुनिश्चित करता है कि ऑब्जेक्ट हमेशा एक कॉम्पैटिबल तरीके से ही एक्सेस किया जायेगा। अर्थात् आप मेथड को 4 बाइट के बजाय 8 बाइट में मान पास करते हैं तो जस्ट इन टाइम पकड़ लेता है।
  • IL को स्थानीय कोड में बदलने के बाद, परिवर्तित कोड डॉट नेट रनटाइम मैनेजर को भेज दिया जाता है। डॉट नेट रनटाइम मैनेजर कोड को एक्जीक्यूटेबल बनाता है। कोड के एक्जीक्यूशन के दौरान यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि कोड को रिर्सोस ऐक्सेस करने के सही अधिकार प्राप्त हों।

एम. एस. आई० एल० (MSIL)

एम० एस० आई० एल० का पूर्ण रूप माइक्रोसॉफ्ट इंटरमीडिएट लैंग्वेज (Microsoft Intermediate Language) है। इसे आइ एल (IL) या इन्टरमीडिएट लैंग्वेज (Intermediate Language) के नाम से भी जाना जाता है। इसे कभी-कभी कॉमन इंटरमीडिएट लैंग्वेज के नाम से भी संबोधित किया जाता है। अतः आप इन तीनों नामों के अलग-अलग स्थान पर उपयोग किये जाने पर भ्रमित न हों।

जब आप वी० बी० डॉट नेट या ऐसे किसी भाषा (सी शार्प इत्यादि) में प्रोग्राम (सोर्स कोड) तैयार करते हैं जो सी० एल० आर० को टारगेट करता है तथा उसे कम्पाइल किया जाता है तब सोर्स कोड को मशीन कोड में कम्पाईल किये जाने के बजाय कम्पाइलर इस कोड को माइक्रोसॉफ्ट इंटरमीडिएट लैंग्वेज में अनुवाद करता है। ऐसा करने में भाषा इंटरओपरेबिलिटी (interoperability) सुनिश्चित होता है। भाषा इंटरओपरेबिलिटी का मतलब एक से अधिक भाषा के मध्य कार्य करने की स्वतंत्रता से है।

माइक्रोसॉफ्ट इंटरमीडिएट लैंग्वेज को सोर्स कोड तथा स्थानीय मशीनी कोड के मध्य का कोड भी कहा जा सकता है। ये जावा के बाइटकोड के समान है। शब्द मिमांसा : इंटरऑपरेबिलिटी (Interoperability) पर्यायवाची  इंटरऑपरेबिलिटी का सटिक हिन्दी पर्यायवाची बनाना अत्यंत कठिन कार्य है। बल्कि इसका सटिक हिन्दी असम्भव है । दो अलग अलग सिस्टम या कम्पोनेण्ट के द्वारा सूचना के आदान प्रदान करने तथा उनका उपयोग करने की क्षमता को इंटरऑपरेबिलिटी कहा जाता है ।

असेम्बलीज (Assemblies)

जब आप वी०बी० डॉट नेट में डॉट नेट फ्रेमवर्क सपोर्टेड किसी भी भाषा में कोई प्रोग्राम लिखते हैं तो वह सोर्स कोड कम्पाइलर के द्वारा इंटरमीडिएट लैंग्वेज में परिवर्तित होता है। कम्पाईलर कोड को इंटरमीडियेट लैंग्वेज में बदलने के क्रम में ही मेटाडाटा बनाता है।

यह मेटाडाटा प्रोग्राम में संबंधित कुछ महत्वपूर्ण सूचना जैसे क्लास तथा इंटरफेस, प्रोग्राम में उपयोग हुए कम्पोनन्ट का संस्करण इत्यादि रखता है। ये दोनों की इंटरमीडिएट लैंग्वेज तथा मेटाडाटा असेम्बली मे लिंक होते है। डॉट नेट फ्रेमवर्क में विकसित सभी एप्लीकेशन असेम्बली से मिलकर ही बने होते है। सी० एल० आर० एप्लीकेशन को एक्ज़िक्यूट करते समय उस एप्लीकेशन से संबंधित सूचना असेम्बली से ही प्राप्त करता है।

क्लास लायब्रेरी (Class Library)

डॉट नेट फ्रेमवर्क लायब्रेरी या क्लास लायब्रेरी बार-बार उपयोग में लाये जाने वाले क्लासों का एक संकलन होता है जो कॉमन लैंग्वेज रनटाइम के साथ जुड़ा होता है। क्लास ऑब्जेक्ट ओरिएण्टेड होता है तथा इसका प्रयोग कर आप कंसोल (डॉस आधारित), विण्डोज जी०यू०आई० एप्लीकेशन ए०एस० पी० डॉट नेट आधारित एप्लीकेशन तथा वेब सर्विसेज, विण्डोज प्रेज़ेण्टेशन फाउन्डेशन एप्लीकेशन, विण्डोज सर्विसेज विकसित कर सकते हैं।

ऐसा करने पर केवल डॉट नेट फ्रेमवर्क क्लासों को उपयोग करना ही आसान नहीं होता बल्कि डॉट नेट फ्रेमवर्क के नये फीचरों को समझने में लगने वाला समय भी कम लगता है। इसके अतिरिक्त ततीय पक्ष (third party) कम्पोनेण्ट डॉट नेट फ्रेमवर्क के क्लासों के साथ बगैर किसी त्रुटि के एकीकृत हो सकता है।

उदाहरण के लिऐ डॉट नेट फ्रेमवर्क संकलन क्लास (collection classes) इंटरफेस का एक सेट लागू करता है जो आप अपने संकलन क्लासों को विकसित करने में कर सकते हैं। आपका संकलन क्लास बगैर त्रुटि के डॉट नेट फ्रेमवर्क के क्लासों के साथ मिलकर कार्य करेगा।

नेमस्पेस क्या है? | What is Namespace?

नेमस्पेस का उपयोग एक जैसे क्लास तथा इंटरफेस के लॉजिकल समूहों के निर्माण में होता है जिसे किसी भी ऐसे भाषा द्वारा उपयोग में लाया जा सकता है जो डॉट नेट फ्रेमवर्क को टारगेट करता है । नेमस्पेस की सहायता से आप क्लासों को व्यवस्थित कर सकते हैं ताकि वे अन्य एप्लीकेशनों में आसानी के साथ उपयोग किये जा सकें। नेमस्पेसेज का अन्य उपयोग ये है कि इसके कारण एक ही नाम वाले क्लास के मध्य नाम का उलझन नहीं होता है।

उदाहरण के लिए एक एप्लीकेशन में एक नाम के अलग-अलग नेमस्पेस वाले क्लास हो सकते हैं। आप किसी एप्लीकेशन में नेमस्पेस इम्पोट कर उस नेमस्पेस के क्लास को एक्सेस कर सकते है। डॉट नेट फ्रेमवर्क क्लास तथा नेमस्पेस के बीच उन दोनों को अलग करने के लिए बिन्दु (.) का प्रयोग करता है। उदाहरण के लिए (System. Windows) विण्डोज क्लास को व्यक्त करता है जो सिस्टम नेमस्पस से संबंध रखता है।

Question- : कॉमन लैंग्वेज रनटाइम की चार भूमिकाओं को बताएँ।
Answer – कॉमन लैंग्वेज रनटाइम की चार भूमिकाएँ ये हैं.

  1. गारबेज संकलन (Garbage Collection)
  2. कोड परिक्षण (Code Verification)
  3. कोड एक्सेस सुरक्षा (Code Access Security)
  4. इन्टरमिडिएट भाषा से स्थानीय भाषा में अनुवाद (Intermediate Language to Native Language Translation)

डॉट नेट फ्रेमवर्क क्या है | Best Info .Net Framework Features

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डॉट नेट फ्रेमवर्क क्या है - .NET फ्रेमवर्क कितने प्रकार के होते हैं? | .Net Framework Features and Architecture in Hindi
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डॉट नेट फ्रेमवर्क क्या है – .NET फ्रेमवर्क कितने प्रकार के होते हैं? | .Net Framework Features and Architecture in Hindi

डॉट नेट फ्रेमवर्क क्या है- डॉट नेट फ्रेमवर्क (Dot Net Framework) – आइए हम अब यह जानते हैं कि डॉट नेट है क्या? फ्रेमवर्क का शाब्दिक अर्थ होता है आकार तथा सपोर्ट देने वाली ढाँचा। इसका एक और अर्थ सामाजिक व्यवस्था और प्रणाली भी होता है।

इन अर्थ के प्रकाश में यह कहा जा सकता है कि डॉट नेट फ्रेमवर्क एक ढाँचा है जो प्रोग्रामिंग को एक आकार, रूप तथा सपोर्ट प्रदान करता है। इसी के आधार पर प्रोग्रामों को विकसित किया जाता है। इसे प्रोग्राम की ऐसी व्यवस्था भी कहा जा सकता है जो कुछ विशेष प्रोग्रामिंग भाषाओं द्वारा अनुसरण किया जाता है।

डॉट नेट फ्रेमवर्क के फीचर (Features of Dot net Framework)

डॉट नेट फ्रेमवर्क माइक्रोसॉफ्ट कॉरपोरेशन के प्रोग्रामिंग कल्चर की एक नयी शुरूआत है। इस कल्चर के दम पर माइक्रोसॉफ्ट ने अपनी एक नई पारी खेलने की शुरूआत की है जो प्रतिस्पर्धा से भरा है। स्पष्ट है कि यह जिस आधार पर इस प्रतिस्पध में सफल होने का प्रयास कर रहा है। इसमें कई गुण होगें। आइए हम इसके कुछ गुणों को समझते हैं।

1- सुरक्षित, बहुभाषीय विकास प्लेटफार्म (Secure, Multi Language Development Platform )  – डॉट नेट की सबसे खास बात यह है कि यह सुरक्षित होने के साथ ही विकास के लिए एक से अधिक भाषा पर कार्य करने हेतु प्लेटफॉर्म देता है।

विकासकर्त्ता तथा आई० टी० विशेषा डॉट नेट को एक शक्तिशाली तथा कर्मठ सॉफ्टवेयर विकासकर्ता प्रौद्योगिकी के रूप में भरोसा करते हैं जो न केवल सुरक्षा एडवांसमेंटस (Security Advancements), प्रबंध न टूल्स (Management Tools) आपको उपलब्ध कराता है बल्कि आपको अत्यंत विश्वसनीय तथा सुरक्षित सॉफ्टवेयर बनाने, जाँचने तथा डिप्लॉय करने हेतु आवश्यकता अनुसार अपडेट भी करता है।

डॉट नेट आपके मनचाहे भाषा में ही आपको प्रोग्राम बनाने की आजादी देता है जिसके लिए एक बहुभाषीय विकास प्लेटफार्म उपलब्ध है ताकि आप अपने काम करने के विकल्प को स्वयं चुन सके। कॉमन लैंग्वेज रनटाइम (Common Language Runtime) शक्तिशाली स्टैटिक भाषाओं यथा विजुअल बेसिक तथा विजुअल सी ++ को सपोर्ट करता है।

2- तेज, मॉडल चालित डेवलपमेंट प्रोग्रामिंग (Rapid Model Driven Programming Paradigm ) – डॉट नेट पथ प्रदर्शक समाधान प्रस्तुत करता है जो तेजी के साथ एप्लीकेशन विकास करवाता है। फलस्वरूप उत्पादन में अप्रत्याशित रूप से तेजी आती है। उदाहरण के लिए नया ए० डी० ओ० डॉट नेट (ADO. Net) एन्टिटि फ्रेमवर्क आधारित डेवलपमेंट पैराडाइम तथा स्टैण्डर्डस आधारित फ्रेमवर्क प्रस्तुत करता है जो डेटाबेस प्रोग्रामिंग की एक नयी अवधारणा प्रस्तुत करता है। ए० डी० ओ० डॉट नेट (ADO.Net) का प्रयोग करके विकासकर्त्ता बिल्कुल स्पष्ट रूप से अपने बिजनेस लॉजिक डाटा तथा यूजर इंटरफेस को अलग कर पाते हैं।

3- अगली पीढ़ी उपयोगकर्त्ता अनुभव (Next Generation User Experiences) –  विण्डोज प्रेजेण्टेशन फाउण्डेशन (Windows Presentation Foundation ) विण्डोज विस्टा में एप्लीकेशन निर्माण के लिए एक एकीकृत फ्रेमवर्क (integrated framework) तथा उच्च एकनिष्ठता अनुभवों (high fidelity experiences) का प्रस्तुत करता है जो कम्प्यूटर की पूरी क्षमता का उपयोग करते हुए एप्लिकेशन यूजर इंटरफेस, डॉक्यूमेण्टस् तथा मीडिया करेंट को साथ-साथ एकिकत करता है।

विण्डोज प्रजेण्टेशन फाउण्डेशन के केन्द्र में एक रेजोल्यूशन मुक्त तथा वेक्टर आधारित कार्यकारी इंजिन है जिसका निर्माण आधुनिक ग्राफिक्स हार्डवेयर का पूरा-पूरा लाभ उठाने के उद्देश्य से हुआ है। विण्डोज प्रज्रेण्टेशन फाउण्डेशन एक्सटेन्सिबल एप्लीकेशन मार्कआप भाषा (extensible Application Markup Language), कन्ट्रोल्स, डाटा बाइन्डिंग, लेआउट, द्वि-विमीय तथा त्रि-विमीय ग्राफिक्स, एनिमेशन, स्टाइल्स, टेम्पलेट्स, डॉक्यूमेण्ट्स, मीडिया टेक्स्ट तथा टाइपोग्राफी जैसे फीचरों को उपलब्ध कराता है।

विण्डोज प्रजेण्टेशन फाउण्डेशन माइक्रोसॉफ्ट डॉट नेट फ्रेमवर्क में सम्मिलित है। इसलिए आप डॉट नेट फ्रेमवर्क क्लास लायब्रेरी के अन्य अवयवों को मिलाकर भी एप्लीकेशनों का निर्माण कर सकते हैं।

4- बेहतर वेब एप्लीकेशन विकास (Better Web Application Development) – ए० एस० पी० डॉट नेट निःशुल्क प्रौद्योगिकी है जिससे वेब विकासकर्त्ता छोटे तथा निजी वेबसाइट से लेकर बडे एन्टरप्राइज वर्ग के डायनमिक वेब एप्लीकेशन बना सकते हैं।

5- माइकोसॉफट का निःशुल्क अजैक्स (AJAX) अर्थात असिंक्रोनस जावास्क्रिप्ट तथा एक्स० एम० एक (Asynchronous JavaScript and XML) फ्रेमवर्क – ए० एस० पी० डॉट नेट अजैक्स की सहायता से विकास कर्त्ता तेजी से अधिक कुशल अधिक इंटरएक्टिव तथा अत्यंत निजी वेब कार्य कर सकते है जो प्रायः सभी प्रचालित ब्राउजर्स पर कार्य कर सकता है। तथा यदि आप विजुअल स्टूडियो 2008 में कार्य करना चाहें तो जान लें कि इसमें जोड़े गये नये एस० पी० डॉट नेट डायनामिक फंक्शनैलिटी में एक बेहद शक्तिशाली फ्रेमवर्क है जो बगैर कोड लिखे हुए डाटा चालित वेब विकास में सहायता करता है।

6- सुरक्षित, भरोसेमंद वेब सेवाएँ (Secure, Reliable Web Services) – विण्डोज कम्यूनिकेशन फाउण्डेशन (Windows Communication Foundation) का सर्विस ओरिएण्टेड प्रोग्रामिंग मॉडल माइक्रोसॉफ्ट डॉट नेट फ्रेमवर्क पर बना हुआ है तथा कनेक्टेड सिस्टमस के विकास को आसान बनाता है तथा इंटरऑपरेबिलिटी (interoperability) सुनिश्चित करता है। विण्डोज कम्यूनिकेशन फाउण्डेशन वितरित सिस्टम की क्षमताओं के एक बड़े संग्रह को ट्रांस्पोर्ट सुरक्षा प्रणाली, मेसेजिंग पैटर्न, एनकोडिंग, नेटवर्क टोपोलॉजीज तथा हॉस्टिंग मॉडल को बनाये रखते हुए एक कम्पोजेबल तथा एक्सटेंसिव आर्किटेक्चर में एकीकृत करता है।

7- मिशन क्रिटीकल व्यापार प्रोसेसेज के योग्य बनाना (Enabling Mission Critical Business Processes) – के साथ बिजनेस प्रोसेसेज का मॉडल तैयार कर सकते हैं जो विकासकर्त्ता तथा बिजनेस प्रोसेस मालिक के साथ अच्छा डॉट नेट के साथ विकासकर्त्ता विण्डोज वर्कफ्लो फाउण्डेशन (Windows Workflow Foundation) का उपयोग कर कोड तालमेल बनाये रख सकते हैं तथा उपयोग कर्त्ताओं को डाटा का बेहतर एक्सेस प्रदान कर सकता है और इस प्रकार बेहतर परिणाम आता है।

8- डिवाइसों तथा प्लेटफॉर्मों तक बेहतर पहुंच (Superior Reach Across Devices and Platform) – कान विकसित कर सकते हैं। सिल्वर लाइन रनटाइम में डॉट नेट फ्रेमवर्क का एक सब-सेट उपलब्ध है जो विकासकर्ताओं डॉट नेट फ्रेमवर्क पर विकासकर्त्ता पर्सनल कम्प्यूटर से लेकर सर्वर, मोबाइल फोन तथा इम्बेडेड उपकरणों तक के लिए समाधान विकसित क़र सकते हैं सिल्वर लाइन रन टाइम में डॉट नेट फ्रेमवर्क का एक सब सेट उपलब्ध है जो विकासकर्ताओं को एक क्रॉस ब्राउज़र, क्रॉस प्लेटफॉर्म तथा क्रॉस डिवाइस प्लग इन प्रदान कर उनकी पहुँच को विस्तृत करता है।

फलस्वरूप वे डॉट नेट आधारित मीडिया अनुभव, विज्ञापन तथा रिच इंटरेक्टिव ऐप्लीकेशनस ( rich interactive applications) डिलीवर कर पाते हैं।

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डॉट नेट फ्रेमवर्क की कमिया (Limitations of Dot net Framework)

माइक्रोसॉफ्ट कॉरपोरेशन भगवान से बडा रचियता तो हो नहीं सकता। माइक्रोसॉफ्ट कॉरपोरेशन के भयंकर लॉबीइंग (Lobbying) के बावजूद इसकी सीमाएँ सामने प्रतीत होती है जिसको जानना सॉफ्टवेयर विकासकर्ता की क्षमता में आपके लिये आवश्यक है। इसकी सबसे प्रमुख कमी जो है वह ध्रुविये भालू के उदाहरण की तरह सटीक है। डॉट नेट फ्रेमवर्क प्रोग्राम का सम्बन्ध वही है जो बर्फ और ध्रुविये भालू का है। आइए हम देखते हैं कि में इसकी सीमाएँ क्या है।

  1. डॉट नेट फ्रेमवर्क अपने आप में एक सॉफ्टवेयर है। फलस्वरूप इसमें त्रुटियों की सम्भावनाएँ निहित हैं।
  2. डॉट नेट फ्रेमवर्क केवल नये विण्डोज संस्करणों में उपलब्ध है। अतः पुराने विण्डोज सिस्टमों पर डॉट नेट प्रोग्राम का चलाना सम्भव नहीं है।
  3. डॉट नेट प्रोग्रामों को लाइनक्स (Linux) तथा मैक ऑपरेटिंग सिस्टम पर नहीं चलाया जा सकता।
  4. सभी प्रोग्रामिंग भाषाएँ डॉट नेट फ्रेमवर्क के साथ काम नहीं कर सकते। उदाहरण के तौर पर आप जावा प्रोग्राम को डॉटनेट फ्रेमवर्क पर नहीं चला सकते।
  5. आम तौर पर यह कहा जाता है कि विजुअल बेसिक डॉट नेट विजुअल बेसिक का ही उन्नत संस्करण है। यह बात कुछ हद तक सही है पर दोनों के स्टाइल में काफी अंतर है इसलिए विजुअल बेसिक प्रोग्राम को डॉट नेट पर काम करने के लिए डॉट नेट सीखना जरूरी होगा। अतः यह कहा जा सकता है कि इसमें काम करने पर बैकवर्डस् कम्पैटिबिलिटी (backwards compatibility) को छोड़ना होगा।

फिर भी, उपरोक्त सभी सीमाओं के बावजूद आज कम प्रतिभावान प्रोग्रामर भी विजुअल बेसिक डॉट नेट की सहायता से
अच्छे सॉफ्टवेयर विकसित कर सकते हैं।

डॉट नेट फ्रेमवर्क आर्किटेक्चर (Dot Net Framework Architecture)

डॉट नेट फ्रेमवर्क दो मुख्य भाग पर निर्मित है। ये दो भाग कॉमन लैंग्वेज रनटाइम तथा डॉट नेट फ्रेमवर्क क्लास लाईब्रेरी है। कॉमन लैंग्वेज रनटाइम डॉट नेट फ्रेमवर्क का फाउण्डेशन व आधारशिला होता है। रनटाइम एक एजेण्ट की तरह होता है जो एक्जिक्यूशन के दौरान कोड को व्यवस्थित करने के लिए मेमोरी प्रबंधन, थ्रेड प्रबंधन तथा रिमोटिंग के साथ-साथ स्ट्रिक्ट टाइप सेफ्टी (Strict Type Safety) तथा कोड एक्युरेसी (code accuracy) के विभिन्न रूपों को लागू करता है जो सुरक्षा तथा शक्ति को प्रोत्साहित करता है।

वस्तुतः कोड मैनेजमेण्ट की परिकल्पना रनटाइम का मूलभूत सिद्धांत है। वह कोड़ जो रनटाइम को टारगेट करता है मैनेजड कोड (managed code) कहा जाता है जबकि कोड जो रनटाइम को टारगेट नहीं करता है अनमैनेजड कोड (unmanaged code) कहा जाता है।

क्लास लायब्रेरी डॉट नेट फ्रेमवर्क का दूसरा मुख्य भाग है। यह रियूजेबल टाइप्स (reusable types) का एक व्यापक ऑब्जेक्ट प्रदत संकलन है जिसकी सहायता से आप पारम्परिक कमाण्ड लाइन या ग्राफिकल यूजर इंटरफेस एप्लीकेशन से लेकर ए० एस० पी० डॉट नेट आधारित एप्लीकेशन जैसे वेब फॉर्मस तथा एक्स० एम० एल० वेब सेवाएँ विकसित कर सकते हैं।

डॉट नेट फ्रेमवर्क अव्यवस्थित कम्पोनेण्टस के द्वारा होस्ट किया जा सकता है जो कॉमन लैंगवेज रनटाइम को अपने प्रोसेस में लोड करता है तथा व्यवस्थित कोड के क्रियान्वयन को शुरू करता है जिसमें ऐसा सॉफ्टवेयर वातावरण बन जाता है जो व्यवस्थित तथा अव्यवस्थित दोनों ही फीचरों का उपयोग कर सकता हो।

डॉट नेट फ्रेमवर्क न ही केवल अनेक रनटाइम होस्ट प्रदान करता है बल्कि तृतीय पक्ष रनटाइम होस्ट के विकास को भी सपोर्ट करता है। उदाहरण के तौर पर ए० एस० पी० डॉट नेट व्यवस्थित कोड के लिए स्केलेबल सर्वर पक्ष वातावरण प्रदान करने के लिए। रनटाइम होस्ट करता है। ए० एस० पी० डॉट नेट रनटाइम के साथ सीधे-सीधे कार्य कर ए० एस० पी० डॉट नेट एप्लीकेशनों तथा एक्स० एम० एल० वेब सेवाओं को योग्य बनाता है।

इण्टरनेट एक्सप्लोरर अव्यवस्थित एप्लीकेशन का एक उदाहरण है जो रनटाइम को माइम (mime) टाइप विस्तारक के रूप में होस्ट करता है। रनटाइम को होस्ट करने के पश्चात् इण्टरनेट एक्सप्लोरर का उपयोग कर आप एच०टी०एम०एल० डाक्यूमेन्टस में व्यवस्थित कम्पोनेण्टस या विण्डोज फॉर्मस कंट्रोलस को इम्बेड करते है।