Wednesday, June 23, 2021
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कम्प्यूटर जनरेशन क्या है – कम्प्यूटर की पीढ़ियाँ | Generations of Computers – Best Info In Hindi

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कम्प्यूटर जनरेशन क्या है - कम्प्यूटर की पीढ़ियाँ | Generations of Computers – Best Info In Hindi
कम्प्यूटर जनरेशन क्या है - कम्प्यूटर की पीढ़ियाँ | Generations of Computers – Best Info In Hindi

कम्प्यूटर जनरेशन क्या है – कम्प्यूटर की पीढ़ियाँ| Generations of Computers – Best Info In Hindi

कम्प्यूटर की पीढ़ियाँ सन् 1946 में प्रथम इलैक्ट्रॉनिक कम्प्यूटर के विकसित होने के साथ ही, कम्प्यूटर में नित नए शोध विकास की प्रक्रिया अनवरत चल रही है। कम्प्यूटर के सन्दर्भ में पीढ़ी (Generation) का आशय कम्प्यूटर तकनीक  में एक नया कदम है। मूल रूप से कम्प्यूटर में प्रयुक्त हार्डवेयर तकनीक के परिवर्तन से पीढ़ी का परिवर्तन दर्शाया गया है। कम्प्यूटर की पीढ़ियाँ – कम्प्यूटर के आज तक के विकास को पांच पीढ़ियों में बांटा गया है-

कम्प्यूटर की पीढ़ियाँ

प्रथम पीढ़ी (First Generation)                 –           सन् 1946 से 1956 सन्
द्वितीय पीढ़ी (Second Generation)           –           सन् 1956 से 1964 सन्
तृतीय पीढ़ी (Third Generation)               –           सन् 1964 से सन् 1970
चतुर्थ पीढ़ी (Fourth Generation)             –           सन् 1970 से अब तक
पंचम पीढ़ी (Fifth Generation)                 –           भविष्य के कम्प्यूटर्स

कम्प्यूटर की प्रथम पीढ़ी (First Generation)

सन् 1946 से सन् 1956 तक विकसित हुए कम्प्यूटर्स को प्रथम पीढ़ी के कम्प्यूटर्स के रूप में मान्यता प्राप्त हुई है। इस पीढ़ी के कम्प्यूटर्स में डायोड वाल्व वैक्यूम ट्यूब का प्रयोग किया गया था। इस डायोड वाल्व नामक वैक्यूम ट्यूब का आविष्कार सर एम्ब्रोज फ्लेमिंग ने सन् 1904 में किया था। इन्हें थर्मोनियोनिक वॉल्व (Thermonionic Valve) का नाम भी दिया गया। चूंकि इसमें दो इलैक्ट्रोड्स (Electrodes) होते थे-कैथोड (Cathode) और एनोड (Anode); इसीलिए इसे डायोड (Diode) कहा गया और चूंकि Cathode से इलैक्ट्रॉन Anode की ओर ही जाते थे; इसीलिये इसे वाल्व (Valve) कहा गया।

इसके वाल्व होने के कारण इसे केवल इलैक्ट्रॉनिक स्विच (Electronic Switch) की भांति प्रयोग किया गया था। ENIAC (Electronic Numerical Integrator and Calculator) प्रथम इलैक्ट्रॉनिक कम्प्यूटर, प्रथम पीढ़ी का कम्प्यूटर है। इसके बारे में विस्तृत जानकारी हम पहले ही दे चुके हैं। बिनॉक (BINAC) का निर्माण ENIAC बनाने वाली कम्पनी ने ही सन् 1949 में किया था। ENIAC और BINAC के निर्माता एकर्ट और माचली ने व्यावसायिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये यूनिवैक (Universal Automatic Calculator-UNIVAC) बनाया। यूनिवैक वह प्रथम इलैक्ट्रॉनिक कम्प्यूटर था, जिसका प्रयोग आम जनता के बीच किया गया।

कम्प्यूटर जनरेशन क्या है - कम्प्यूटर की पीढ़ियाँ | Generations of Computers – Best Info In Hindi
कम्प्यूटर जनरेशन क्या है – कम्प्यूटर की पीढ़ियाँ | Generations of Computers – Best Info In Hindi

सन् 1949 में इंग्लैण्ड के कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में एक कम्प्यूटर एडसैक (EDSAC) बनाया। BINAC और UNIVAC में पारे पर डेटा का स्टोर किया जाता था, परन्तु EDSAC में कैथोड रे ट्यूब पर मेमोरी स्टोर होती थी। Electro-Mechanical कम्प्यूटर के निर्माण में अग्रणी आई.बी.एम. ने सन् 1952 में कम्प्यूटर मॉडल-101 बनाया। इस कम्प्यूटर में मेमोरी स्टोर करने के लिये मैग्नेट टेप के साथ कैथोड और अत्यधिक मेमोरी के लिये चुम्बकीय ड्रम का प्रयोग किया गया था। इस कम्प्यूटर में Data Input के लिये Punched Cards का प्रयोग किया जाता था। प्रथम पीढ़ी के अन्य मुख्य कम्प्यूटर्स IBM-650, IBM0702, IBM-704 आदि हैं।

कम्प्यूटर की द्वितीय पीढ़ी (Second Generation)

सन् 1956 से सन् 1964 तक विकसित हुए कम्प्यूटर्स को द्वितीय पीढ़ी के कम्प्यूटर्स के रूप में मान्यता प्राप्त हुई है। सन् 1948 में ट्रांजिस्टर के आविष्कार ने इलैक्ट्रॉनिक टेक्नॉलोजी के क्षेत्र में एक क्रांति-सी ला दी। द्वितीय पीढ़ी के कम्प्यूटर्स के वैक्यूम ट्यूब के स्थान पर ट्रांजिस्टर का प्रयोग किया गया। सिलीकॉन युक्त ट्रांजिस्टर के बनने के बाद कम्प्यूटर्स ही क्या, सभी इलैक्ट्रॉनिक उपकरणों में डायोड वॉल्व का प्रयोग अत्यन्त कम हो गया। सन् 1952 में विकसित हुए Field Effect Transistor को एक स्थिति से दूसरी स्थिति में पहुंचने में मात्र एक माइक्रोसैकेण्ड ही लगता था।

सन् 1953 में एम.रॉस द्वारा बनाये गये ट्रांजिस्टर को एक स्थिति से दूसरी स्थिति में पहुंचने में लगने वाला समय लगभग एक नैनो सैकण्ड (एक सैकेण्ड का अट्ठारहवां भाग) था। यह ट्रांजिस्टर जरमेनियम (Germenium) का बनाया गया था। द्वितीय पीढ़ी के कम्प्यूटर प्रथम पीढ़ी के कम्प्यूटर्स की तुलना में आकार में छोटे थे और इनमें ऊष्मा विकरण भी कम होता था। इन कम्प्यूटर्स की कार्य करने की गति एवं क्षमता भी इससे पूर्व के कम्प्यूटर्स की अपेक्षा अधिक थी। सन्1959 में आई.बी.एम. ने पूरी तरह से ट्रांजिस्टर पर आधारित एक कम्प्यूटर बनाया जिसका नाम था MODEL-7090। स्पेरी यूनीवैक-3, हनीवैल 400, 800, CDC 1604, CDC 3600, लियो का Mark-3 आदि द्वितीय पीढ़ी के मुख्य कम्प्यूटर्स थे।

कम्प्यूटर की पीढ़ियाँ – द्वितीय पीढ़ी के कम्प्यूटर्स में Moduler Design का प्रयोग होने लगा था। कम्प्यूटर की प्रोग्रामिंग के लिये Assembly Language का प्रयोग किया जाने लगा। इसमें कुछ विशेष चिन्हों का प्रयोग भी किया जाना था। द्वितीय पीढ़ी के कम्प्यूटर में स्टोरेज के लिये चुम्बकीय कोर का प्रयोग किया जाना भी इस समय की एक महत्वपूर्ण घटना थी। चुम्बकीय कोर छोटे-छोटे फैराइट के बने छल्ले थे।

इनका व्यास (Diameter) 0.02 इंच था और इन्हें Clockwise और Anti Clockwise दोनों ओर चुम्बकित (Megnatise) किया जाता था। ये दोनों दिशायें 0 और 1 का प्रतिनिधित्व करती थीं। कम्प्यूटर की पीढ़ियाँ – द्वितीय पीढ़ी के कम्प्यूटर्स की मेमोरी लगभग 100 किलोबाइट्स थी। इसी दौरान कुछ उच्चस्तरीय प्रोग्रामिंग भाषाओं Fortran, Cobol आदि का भी विकास हुआ। इस उच्चस्तरीय भाषाओं में अंग्रेजी के शब्दों में ही प्रोग्रामिंग की जा सकती थीं।

कम्प्यूटर की तृतीय पीढ़ी (Third Generation)

सन् 1964 से 1970 तक के कम्प्यूटर्स को तृतीय पीढ़ी में रखा गया। इस पीढ़ी के कम्प्यूटर्स में ट्रांजिस्टर के स्थान पर Integrated Circuits का प्रयोग होने लगा था। एक I.C. में ट्रांजिस्टर, रेजिस्टर और कैपेसिटर तीनों को ही समाहित कर लिया गया। सन् 1938 में टेक्सास इन्स्ट्रुमेन्ट कम्पनी के जे.एस.किल्वी ने सिलीकॉन के छोटे से चिप (Chip) पर एक Integrated Circuit बनाया। इस चिप में किसी उपकरण के सरकिट के 26 भागों को अत्यन्त छोटे आकार (नाखून के आकार) की चिप पर उतार लिया गया, जिन्हें तारों से जोड़कर धातु छपे सरकिट्स (DCBS) पर लगाया गया।

कम्प्यूटर की पीढ़ियाँ – इस प्रयोग से सफलता प्राप्त करने के बाद हजारों भागों को छोटे चिप पर बनाया जाने लगा। सन् 1953 में हार्विच जॉनसन ने इस तकनीक को MOSFET (Metal Oxide Semi-Conductor Field Effect Transistor) के नाम से पेटेन्ट करा लिया। सन् 1966 में एक ही चिप पर हजारों ट्रांजिस्टर को बना पाना सम्भव हो गया। इस कारण कम्प्यूटर्स का आकार इससे पहले की पीढ़ियों की तुलना में अत्यन्त छोटा हो गया अर्थात् जहां पहले कम्प्यूटर के लिए एक कमरे की आवश्यकता होती थी, अब एक अलमारी के बराबर स्थान में ही कम्प्यूटर का स्थापन किया जा सकता था।

इस पीढ़ी के कम्प्यूटर्स में Video Display unit का भी प्रयोग होने लगा। इस पीढ़ी के मुख्य कम्प्यूटर्स IBM का System-360m DEC (Digital Equipment Corporation) का Programable Data Processor-1 (PDP-1), PDP-5, PDP-5, PDP-8, ICL 1900, और UNIVAC 1108 और 9000 थे।

कम्प्यूटर की चतुर्थ पीढ़ी (Forth Generation)

सन् 1970 से लेकर आज तक के कम्प्यूटर्स को चतुर्थ पीढ़ी के कम्प्यूटर्स में रख गया है। Large Scale Integration (LSI) और फिर सन् 1975 में Very Large Scale Integration (VLSI) चिप के निर्माण से पूरी Control Processing Unit का ही एक चिप पर आ पाना सम्भव हो पाया। इन चिपों को Microprocessor और जिन कम्प्यूटर्स में Microporcessors का प्रयोग किया गया, उन्हें Micro Computer कहा गया। इन्टेल-8080 पर आधारित पहला माइक्रोकम्प्यूटर ‘आल्टेयर’ बनाया गया जिसकी मेमोरी (memory) एक किलोवाट थी।

कम्प्यूटर की पीढ़ियाँ – 1976 के आस-पास अन्य कम्पनीज़ ने भी इस प्रकार के कम्प्यूटर बना लिये, जिनमें से कुछ ने जीलॉग (Zilog) कम्पनी के 7-80 चिप लगाये। कैम्ब्रिज के वैज्ञानिक क्लाइव सिन्क्लेयर ने 1970 में एक छोटा और सस्ता कैलकुलेटर बनाया, जिसके आधार पर जापानियों ने पहले पॉकेट कैलकुलेटर बनाये जो आज घर-घर में पहुंच गये हैं। सिन्क्लेयन ने Zx-80 नाम का एक छोटा कम्प्यूटर बनाया जिसे रंगीन टी.वी. से जोड़कर स्क्रीन पर कम्प्यूटर के परिणाम देखे जा सकते थे। इस कम्प्यूटर पर अनेक प्रकार के खेल भी खेले जा सकते थे।

1976 में दो अमेरिकी विद्यार्थियों स्टीव बेजनाइक और स्टीव जॉन ने बहुत कम खर्च में एक ऐसा कम्प्यूटर बना डाला जिसे एक माचिस की डिब्बी में बंद किया जा सकता था। कम्प्यूटर की पीढ़ियाँ – इस खोज ने कम्प्यूटर की दुनिया में क्रांन्ति सी ला दी। इन आठ बिटों पर आधारित माइक्रो कम्प्यूटर को एप्पल नाम दिया गया जिस पर बाद में एप्पल-1 और एप्पल-2 श्रृंखला का निर्माण हुआ। एप्पल-2 पर्सनल कम्प्यूटर नाम दिया गया। अन्य कम्पनियों ने भी अपनी-अपनी तकनीक पर आधारित माइक्रोप्रोसेसर चिप बनाये।

जैसे इन्टेल ने 8080, 8085, 8086, 80286, 80486, पेन्टियम, मोटरोला 6800, 68000 और जीलॉग 7-80, Z-8001 आदि। इस सीरीज के मुख्य कम्प्यूटर्स एप्पल-1, एप्ल-2 कामडोर का PET, BBC का अकॉर्न, स्पैक्ट्रम आदि हैं। आई.बी.एम. के बनाये गये पर्सनल कम्प्यूटर्स ने कम्प्यूटर बाजार पर अधिकार-सा कर लिया। ये कम्प्यूटर निश्चय ही क्षमता में तो एप्पल कम्प्यूटर्स से कम थे, परन्तु कीमतें अपेक्षाकृत अत्यन्त कम होने के कारण इनका प्रयोग बहुतायत में किया जाने लगा।

कम्प्यूटर की पंचम पीढ़ी (Fifth Generation)

वैज्ञानिक अब पांचवीं पीढ़ी के कम्प्यूटर्स पर कार्य कर रहे हैं। इस पीढ़ी के कम्प्यूटर्स में मानव सदृश गुणों को समाहित करने का प्रयास किया जा रहा है। जापान के वैज्ञानिकों ने इन कम्प्यूटर्स के विकास को अपनी योजना का नाम नॉलेज इन्फॉर्मेशन प्रोसेसिंग सिस्टम (Knowledge Information Processing System) अर्थात् किप्स (KIPS) रखा है।

इस पीढ़ी के कम्प्यूटर्स अभी भी विकास की स्थिति में ही हैं। इन कम्प्यूटर्स में Artificial Intelligence को प्रयोग करने की योजना है। इनसे Voice Recognition एवं Image Control के कार्य अत्यन्त दक्षता और तीव्र गति से किया जाना सम्भव हो सकेगा। परन्तु भविष्य में कम्प्यूटर कम्प्यूटर की अब तक की पीढ़ियां इलेक्ट्रॉन के प्रवाह पर आधारित हैं, पदार्थ के मूलभूत कणों में एक इलेक्ट्रॉन के स्थान पर प्रकाश के मूलभूत कण फोट्रॉन पर आधारित होंगे। लेजर किरणें भी फोट्रॉन से ही बनी होती हैं।

कम्प्यूटर जनरेशन क्या है – कम्प्यूटर की पीढ़ियाँ

ये कम्प्यूटर्स, अब तक के कम्प्यूटर्स की अपेक्षा तीव्र गति, क्षमता एवं शक्ति वाले होंगे। इन कम्प्यूटर्स को अत्यधिक कोऑप्टिकल कम्प्यूटर्स अथवा फोटॉनिक कम्प्यूटर्स कहा जायेगा।

कम्प्यूटर कितने प्रकार के होते हैं – कम्प्यूटर के प्रकार | Types of Computer – Best Computer knowledge in Hindi

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कम्प्यूटर कितने प्रकार के होते हैं - कम्प्यूटर के प्रकार | Types of Computer – Best Computer knowledge in Hindi
कम्प्यूटर कितने प्रकार के होते हैं - कम्प्यूटर के प्रकार | Types of Computer – Best Computer knowledge in Hindi

कम्प्यूटर कितने प्रकार के होते हैं – कम्प्यूटर के प्रकार | Types of Computer – Best Computer knowledge in Hindi

कम्प्यूटर के प्रकार – कम्प्यूटर अपनी कार्य-क्षमता, उद्देश्य तथा  रूप-आकार के आधार पर विभिन्न प्रकार का होता है। कम्प्यूटर को निम्नलिखित तीन आधारों पर वर्गीकृत किया जा सकता है-

  1. अनुप्रयोग (Application)
  2. उद्देश्य (Purpose)
  3. आकार (Size)

अनुप्रयोगों के आधार पर कम्प्यूटरों के प्रकार | Types Of Computers On The Basis Of Applications

कम्प्यूटर के प्रकार – अनुप्रयोगों के आधार पर कम्प्यूटर तीन वर्गों में वर्गीकृत किया जा सकता है- एनालॉग कम्प्यूटर (Analog Computer), डिजिटल कम्प्यूटर (Digital Computer) और हाइब्रिड कम्प्यूटर (Hybrid Computer)|

एनालॉग कम्प्यूटर (Analog Computer)– एनालॉग ग्रीक भाषा का एक शब्द है, जिसका अर्थ किन्हीं दो राशियों में समरूपता को तलाश करना है। एनालॉग कम्प्यूटर्स का प्रयोग किसी भौतिक क्रिया का प्रारूप बनाकर उस क्रिया को लगातार जारी रखने हेतु निर्देश देने के लिए किया जाता है। किसी भौतिक क्रिया को गणितीय समीकरणों में परिवर्तित करके एनालॉग कम्प्यूटर्स के एम्पलीफायर ब्लॉक्स की सहायता से इसके अनुरूप विद्युत परिपथ बनाकर इसे पूर्वनिर्धारित प्रक्रिया द्वारा इलैक्ट्रॉनिक मॉडल तैयार कर लिया जाता है। इस पूर्वनिर्धारित प्रक्रिया के कारण निर्देशों को समझकर ही एनालॉग कम्प्यूटर निर्देशों के अनुसार कार्य करता है।

एनालॉग कम्प्यूटर प्रमुख रूप से विज्ञान और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में प्रयोग किए जाते हैं क्योंकि इन क्षेत्रों में मात्राओं (Quantities) का अधिक उपयोग होता है। इन कम्प्यूटर्स से पूर्णतः शुद्ध परिणाम प्राप्त नहीं हो पाते हैं, परन्तु 99% तक शुद्ध परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।

हम यह भी कह सकते हैं कि वे कम्प्यूटर जो भौतिक मात्राओं, जैसे-दाब, तापमान, लम्बाई आदि को मापकर उनके परिणाम को अंकों में परिवर्तित करके प्रस्तुत करते हैं, एनालॉग कम्प्यूटर कहलाते हैं। जैसे कि एक थर्मामीटर कोई गणना नहीं करता है अपितु यह पारे के सम्बन्धित प्रसार (Relative Expansion) की तुलना करके शरीर के तापमान को मापता है। इसी प्रकार पेट्रोल पम्प पर लगा एनालॉग कम्प्यूटर, पम्प से निकले पेट्रोल की मात्रा को मापता है और लीटर में दिखाता है तथा उसके मूल्य की गणना करके स्क्रीन पर दिखाता है।


डिजिटल कम्प्यूटर (Digital Computer)– डिजिट (Digit) का अर्थ है-अंक। डिजिटल पद्धति में अंक अपने स्थान से विस्थापित हो सकते हैं। इलैक्ट्रॉनिक घड़ी अथवा कैलकुलेटर डिजिटल पद्धति पर ही आधारित हैं। इनमें सभी अंक 8 पर आधारित होते हैं, क्योंकि 8 ही एक ऐसा अंक है, जिसके विभिन्न भागों को प्रदर्शित करके भिन्न-भिन्न अंकों को प्रदर्शित किया जा सकता है। अंक 8 को सात प्रदीप्त छड़ों (LED) से बनाया जाता है। भिन्न-भिन्न अंक के लिए इनमें से कुछ छड़ों को प्रदीप्त करके प्रदर्शित किया जा सकता है।

डिजिटल कम्प्यूटर बायनरी पद्धति (Binary System) पर आधारित होते हैं। इनमें मेमोरी के विभिन्न खानों में बायनरी कोड 0 तथा 1 के द्वारा स्विचिंग करके किसी भी अक्षर अथवा अंक की रचना की जाती है। जिस खाने में बायनरी कोड 1 के द्वारा सिगनल पहुंचता है, वह सक्रिय हो जाता है और जिस खाने में बायनरी कोड 0 के कारण सिगनल नहीं पहुंचता, वह निष्क्रिय हो जाता है। डिजिटल कम्प्यूटर सभी गणनाएं, अंकगणित को आधार मानकर करता है। डिजिटल कम्प्यूटर किसी भी डेटा को बायनरी के रूप में परिवर्तित करके बायनरी योग के आधार पर सभी प्रकार की गणनाएं कर लेता है।


हाइब्रिड कम्प्यूटर (Hybrid Computer) –  हाइब्रिड (Hybrid) का अर्थ है संकरित अर्थात् अनेक गुण-धर्म युक्त होना। एनालॉग कम्प्यूटर और डिजिटल कम्प्यूटर दोनों के श्रेष्ठ गुणों को सम्मिलित करके हाइब्रिड कम्प्यूटर्स (Hybrid Computers) को बनाया गया। एनालॉग कम्प्यूटर में किसी भी सिस्टम के नियन्त्रण के लिए एक ही क्षण में दिशा-निर्देश प्राप्त हो जाते हैं। हाइब्रिड कम्प्यूटर्स इन निर्देशों को डिजिटल निर्देशों में परिवर्तित करने के लिए विशेष यन्त्रों का प्रयोग करते हैं। मॉडम इसी प्रकार का एक यन्त्र है। यह एनालॉग संकेतों को डिजिटल संकेतों तथा डिजिटल संकेतों को एनालॉग संकेतों में परिवर्तित करने का कार्य करता है। 

कम्प्यूटर कितने प्रकार के होते हैं – कम्प्यूटर के प्रकार

कम्प्यूटर कितने प्रकार के होते हैं - कम्प्यूटर के प्रकार | Types of Computer – Best Computer knowledge in Hindi
कम्प्यूटर कितने प्रकार के होते हैं – कम्प्यूटर के प्रकार | Types of Computer – Best Computer knowledge in Hindi

उद्देश्य के आधार पर कम्प्यूटरों के प्रकार | Types of Computers Based on Purpose

कम्प्यूटर के प्रकार – विभिन्न प्रकार के उद्देश्य हेतु भिन्न-भिन्न प्रकार के कम्प्यूटर प्रयोग में लाये जाते हैं। कम्प्यूटर को उद्देश्य के अनुरूप नाम देकर उसका वर्गीकरण किया जा सकता है-

कम्प्यूटर कितने प्रकार के होते हैं – कम्प्यूटर के प्रकार


सामान्य उद्देश्यीय कम्प्यूटर (General Purpose Computer)- सामान्य उद्देश्यीय कम्प्यूटर द्वारा सामान्य प्रकार के समस्त कार्य किए जा सकते हैं, चाहे वह विज्ञान, वाणिज्य, इंजीनियरिंग अथवा शिक्षा आदि किसी भी क्षेत्र से सम्बन्ध रखते हों। विभिन्न प्रकार के कार्यों को एक ही कम्प्यूटर से किया जा सकता है और ऐसा कम्प्यूटर जिस पर यह सभी कार्य सम्भव होते हैं, सामान्य उद्देश्यीय कम्प्यूटर कहलाता है। इस प्रकार के कम्प्यूटर सबसे अधिक प्रयोग किये जाते हैं। इसका सर्वोत्तम उदाहरण आई.बीएम.-पी.सी. (I.B.M.-P.C.) है।


विशेष उद्देश्यीय कम्प्यूटर (Special Purpose Computer)- जो कम्प्यूटर सदैव एक जैसे कार्य करने के लिए बनाये जाते हैं, उन्हें विशेष उद्देश्यीय कम्प्यूटर कहा जाता है। इस प्रकार के कम्प्यूटर में अधिक मैमोरी तथा अधिक तीव्र गति से कार्य करने की क्षमता होती है। विशेष उद्देश्यीय कम्प्यूटर में कार्य अधिक कुशलता से होता है। साथ ही उसका मूल्य भी बहुत कम रहता है, क्योंकि उस कम्प्यूटर से अनावश्यक भागों को निकाल दिया जाता है। जैसे अधिकांश गन्ना मिलों में विशेष उद्देश्यीय कम्प्यूटर का प्रयोग किया जाता है।


यांत्रिक उद्देश्यीय कम्प्यूटर (Machine inbuilt Purpose Computer)- जब कम्पयूटर के माध्यम से यन्त्रों को नियन्त्रित करना होता है तो उस कम्प्यूटर की आउटपुट, विद्युत सिगनल्स के रूप में बाहर निकालकर स्विच के माध्यम से उसे मशीनों के साथ जोड़ देते हैं। इस प्रकार के कम्प्यूटर यांत्रिक उद्देश्यीय कम्प्यूटर कहलाते हैं। दूरभाष केन्द्र में ऑटोमेटिक लाइन मिलाने के लिए, अस्पताल में ऑपरेशन एवम् जांच के उपकरणों को नियन्त्रित करने के लिए एवं अन्य कोई प्रकार की मशीनों को नियन्त्रित करने के लिए इस कम्प्यूटर का प्रयोग करते हैं। कम्प्यूटर के माध्यम से आंखों को जांचना, इस मशीन का अच्छा उदाहरण है।


सहयोगी कम्प्यूटर (Users Friendly Computers)-वे  कम्प्यूटर जिनको सामान्य व्यक्ति भी ऑपरेट कर सकता है, चाहे उसे कम्प्यूटर को ऑपरेट करना आता हो या न आता हो, सहयोगी कम्प्यूटर कहलाते हैं। इस प्रकार कम्प्यूटर को भी एक विशेष विधि द्वारा बनाया जाता है जिससे ये कम्प्यूटर ऑपरेटर को स्वयं ही संचालन के निर्देश एवम् अन्य जानकारियां देते रहते हैं। ये समस्त जानकारियां कम्प्यूटर की मॉनीटर स्क्रीन पर प्रदर्शित होती रहती हैं। इस प्रकार के कम्प्यूटर्स विद्यालयों में बच्चों को प्रशिक्षण देने अथवा कम्प्यूटर पर मनोरंजन करने हेतु प्रयोग किए जाते हैं।


हाई इन्टेलीजेन्ट मशीन (High Intelligent Machine)- इस प्रकार के कम्प्यूटर का जटिल समस्याओं के समाधान एवं भारी मशीनों के संचालन के लिये प्रयोग किया जाता है। हाई इन्टेलीजेन्ट मशीन एक प्रखर बुद्धि वाला कम्प्यूटर है; रोबोट, रॉकेट, प्रक्षेपक आदि को जिसकी सहायता से संचालित किया जा सकता है।


नॉलेज इनफॉर्मेशन प्रॉसेसिंग सिस्टम (Knowledge Information Processing System)- अब तक के कम्प्यूटर, उसकी स्मृति में सुरक्षित प्रोग्राम की सहायता से कार्य करते हैं, उनमें अपनी कोई बुद्धि नहीं होती थी। इस प्रकार के कम्प्यूटर का प्रथम आविष्कार जापान में किया गया जिसका नाम KIPS था। इस कम्प्यूटर में विश्व के सभी संभावित कार्य करने के लिए पहले से ही प्रोग्राम बनाकर इस कम्प्यूटर में दे दिये गये हैं, जिसे हम कम्प्यूटर की कृत्रिम बुद्धि कह सकते हैं। यह कम्प्यूटर अभी तक बाजार में उपलब्ध नहीं है परन्तु शीघ्र ही
उपलब्ध होने की संभावना है।

तकनीकी के आधार पर कम्प्यूटरों के प्रकार | Types Of Computers On The Basis Of Technology

कम्प्यूटर के प्रकार – तकनीकी के आधार पर कम्प्यूटर चार प्रकार के होते हैं—माइक्रो कम्प्यूटर, मिनी कम्प्यूटर, मेनफ्रेम कम्प्यूटर और सुपर कम्प्यूटर।

कम्प्यूटर कितने प्रकार के होते हैं – कम्प्यूटर के प्रकार

माइक्रो कम्प्यूटर (Micro Computer)- तकनीकी दृष्टि से माइक्रो सबसे कम कार्य क्षमता रखने वाला कम्प्यूटर है परन्तु यह सभी कार्यों के लिये प्रयुक्त होते हैं। इन कम्प्यूटरों के विकास में जो सबसे बड़ा सहयोग हुआ वह था 1970 में माइक्रोप्रोसेसर (Microprocessor) का आविष्कार। ये कम्प्यूटर छोटे व सस्ते होते हैं इसलिये ये व्यक्तिगत उपयोग के लिये घर या बाहर किसी भी कार्यक्षेत्र में लगाये जा सकते हैं, अतः इन्हें व्यक्तिगत कम्प्यूटर (Personal Computer) अथवा पी.सी. (PC) भी कहते हैं। माइक्रो कम्प्यूटर में एक ही सी.पी.यू. (CPU) लगा होता है। वर्तमान समय में माइक्रो कम्प्यूटर्स का विकास अत्यन्त तीव्र गति से हो रहा है।

परिणामस्वरूप माइक्रो कम्प्यूटर एक पुस्तक के आकार, फोन के आकार और यहां तक कि घड़ी के आकार में भी विकसित हो रहे हैं। माइक्रो कम्प्यूटर्स घरों, विद्यालयों, कार्यालयों आदि में प्रयुक्त किये जाते हैं। घरों में ये घर के बजट को बनाने में परिवार के सदस्यों की मदद करता है और मनोरंजन के काम भी आता है। विद्यालयों में कम्प्यूटर्स का प्रयोग विद्यार्थियों के प्रश्न-पत्र तैयार करने और अनेक विषयों पर आधारित रोचक जानकारियां देने में प्रयोग किया जाता है। कार्यालयों में तो कम्प्यूटर्स ने आधा काम बांट लिया है। कार्यालयों का सारा हिसाब-किताब सारी फाइलें, फाइलों का रख-रखाव इत्यादि कम्प्यूटर ही संभालता है। कम्प्यूटर की मदद से दफ्तरों में फाइलों की भीड़ कम हो गई है।

कम्प्यूटर के प्रकार – माइक्रो कम्प्यूटर्स का सबसे प्रचलित रूप आई.बी.एम. (International Business Machined IBM) की पसर्नल कम्प्यूटर श्रृंखला के रूप में बाजार में आया। इस शंखला के आने पर इन पर प्रयोग किये जा सकने वाले सॉफ्टवेयर्स इतनी बड़ी संख्या में बनने लगे कि आई.बी.एम.-पी.सी. अथवा इस पर आधारित कम्प्यूटर्स का प्रयोग बहुतायात में होने लगा।


मिनी कम्प्यूटर (Mini Computer)- कम्प्यूटर्स का आकार लगभग माइक्रो कम्प्यूटर्स जैसा ही होता है परन्तु कार्यक्षमता मिनी कम्प्यूटर्स की अधिक होती है। इनका प्रयोग बैंकों, फैक्ट्रियों, बीमा कम्पनियों आदि में हिसाब-किताब रखना आदि कार्यों में किया जाता है। मिनी कम्प्यूटर्स की कीमत मिनी कम्यूटर्स से अधिक होने के कारण इन्हें व्यक्तिगत रूप से खरीदा नहीं जा सकता। इन कम्प्यूटर्स का प्रयोग मध्यम स्तर की कम्पनियों में किया जाता है। इस कम्प्यूटर पर एक से अधिक प्रयोगकर्ता काम कर सकते हैं।

मिनी कम्प्यूटर्स की भंडारण क्षमता (Memory), गति (Speed) एवं कार्य क्षमता माइक्रो कम्प्यूटर्स से अधिक और मेन फ्रेम कम्प्यूटर्स से कम होती है। इसमें एक से अधिक सी.पी.यू. (C.P.U.) होते हैं। सबसे पहला मिनी कम्प्यूटर PDP-8 एक रेफ्रिजरेटर के आकार की 18000 डॉलर (लगभग 852400.00) कीमत का था। जिसे डी. ई. सी. (D.E.C.-Digtal Equipment Corporation) ने सन् 1965 में तैयार किया गया था। मिनी कम्प्यूटर के मुख्य भाग को एक बिल्डिंग में रखा जाता है एवम् उसके साथ कई टर्मिनल जोड़ दिए जाते हैं।

कम्प्यूटर के प्रकार – यद्यपि अनेक व्यक्तियों के लिये अलग- अलग माइक्रो कम्प्यूटर लगाना भी संभव है, परन्तु यह महंगा पड़ता है। इसके अलावा अनेक माइक्रो कम्प्यूटर्स होने पर उनके रख-रखाव व मरम्मत की समस्या बढ़ जाती है।एक कम्पनी मिनी कम्प्यूटर का उपयोग निम्नलिखित कार्यों के लिये कर सकती है- वित्तीय खातों का रख-रखाव, बिक्री-विश्लेषण, उत्पादन योजना, लागत-विश्लेषण, कर्मचारियों के वेतनपत्र तैयार करना, मिनी कम्प्यूटर्स के अन्य उपयोग यातायात में यात्रियों के लिये आरक्षण-प्रणाली का संचालन और बैंकों में बैंकिग के कार्य हैं।


मेन फ्रेम कम्प्यूटर (Main Frame Computer)- यह कम्प्यूटर बहुत शक्तिशाली होते हैं अर्थात् इन कम्प्यूटर्स की भंडारण क्षमता तथा गति माइक्रो कम्प्यूटर एवं मिनी कम्प्यूटर की तुलना में बहुत अधिक होती है। इन कम्प्यूटर्स का प्रयोग नेटवर्किंग के लिए किया जाता है अर्थात् इन कम्प्यूटर पर बहुत से टर्मिनल जुड़े रहते हैं तथा इन टर्मिनल्स को कहीं पर भी रखा जा सकता है। यदि टर्मिनल्स को मुख्य कम्यूटर के पास रखा जाता है, जैसे एक ही बिल्डिंग में, तो इस प्रकार की नेटवर्किंग को लोकल एरिया नेटवर्किंग (Local Area Networking) कहा जाता है।

और यदि कम्प्यूटर टर्मिनल्स को मुख्य कम्प्यूटर से दूर रखा जाता है, जैसे दूसरे शहर में, तो इस प्रकार की नेटवर्किंग को वाइड एरिया नेटवर्किंग (Wide Area Networking) कहा जाता है। रेलवे में प्रयोग किये जाने वाले टर्मिनल्स वाइड एरिया नेटवर्किंग का अच्छा उदाहरण है। अधिकांश कम्पनियां अथवा संस्थान, मेनफ्रेम कम्प्यूटर का उपयोग निम्नलिखित कार्यों के लिए करती हैं-  उपभोक्ताओं द्वारा खरीद का ब्यौरा रखना, भुगतानों का ब्यौरा रखना, बिलों को भेजना, रखना, नोटिस (Notice) भेजना, कर्मचारियों के भुगतान करना, कर (Tax) का विकास विस्तृत ब्यौरा रखना आदि।


इस कम्प्यूटर की गति टर्मिनल्स की संख्याओं, तारों की लम्बाई के अनुसार बढ़ती एवं घटती रहती है। वास्तव में ये सभी टर्मिनल्स मेन फ्रेम कम्प्यूटर का प्रयोग करने के लिए एक लाइन में खड़े रहते हैं, परन्तु अत्यन्त शक्तिशाली होने के कारण मेन फ्रेम कम्प्यूटर प्रत्येक टर्मिनल का कार्य इतनी शीघ्रता से निबटा देता है कि टर्मिनल पर काम कर रहे प्रत्येक कर्मचारी को यही आभास होता है कि कम्प्यूटर केवल उसी का कार्य कर रहा है। इस प्रकार कार्य सम्पन्न करने की विधि को टाइम शेअर्ड सिस्टम (Time Shared System) कहा जाता है।

इस कम्प्यूटर की भंडारण क्षमता बहुत अधिक होती है जिससे सभी टर्मिनल्स द्वारा किये जाने वाले कार्य को सुचारू रूप से संग्रह किया जा सके। इन कम्प्यूटर की भंडारण क्षमता आवश्यकतानुसार बढ़ायी अथवा घटाई जा सकती है। P.C.-A.T./386, 486 IBM4381, ICL39 शृंखला और CDC Cyber श्रृंखला मेन फेम कम्प्यूटर के मुख्य उदाहरण हैं।

कम्प्यूटर कितने प्रकार के होते हैं – कम्प्यूटर के प्रकार


सुपर कम्प्यूटर (Super Computer)- यह कम्प्यूटर आधुनिक युग का सबसे शक्तिशाली कम्प्यूटर है। इसमें अनेक सी. पी. यू. समान्तर क्रिया को समान्त प्रक्रिया (Parallel Processing) कहते हैं। विश्व का प्रथम सुपर कम्प्यूटर I.L.L.I.A.C. है। एक सी. पी. यू. (CPU) द्वारा डाटा (Data) और प्रोग्राम (Program) एक धारा (Stream) में क्रियान्वित करने की पारस्परिक विचारधारा ‘वॉन न्यूमान सिद्धान्त’ (Von Neumann Concept) कहलाती है।

लेकिन सुपर कम्प्यूटर ‘नॉन-वॉन न्यूमान सिद्धान्त’ (Non-Von Neumann Concept) के आधार पर तैयार किया जाता हैं सुपर कम्प्यूटर में अनेक ए.एल.यू. (ALU) सी.पी.यू. का एक भाग होते हैं। प्रत्येक ALU निश्चित क्रिया के लिए होता है और सभी ALU एक साथ समान्तर प्रक्रिया करते हैं। इस प्रकार के कम्प्यूटर में बहुत-सी इनपुट एवम् आउटपुट डिवाइस जोड़ी जा सकती हैं। सुपर कम्प्यूटर का उपयोग निम्नलिखित कार्यों में होता है-

  • बड़ी वैज्ञानिक और शोध प्रयोगशालाओं में शोध व खोज करना।
  • अन्तरिक्ष-यात्रा के लिये अन्तरिक्ष-यात्रियों को अन्तरिक्ष में भेजना।
  • मौसम की भविष्यवाणी।
  • उच्च गुणवत्ता की एनीमेशन (Animation) वाले चलचित्र (Movie) का निर्माण।


कम्प्यूटर के प्रकार – भारत में Cray-X MP-14 नामक प्रथम सुपर कम्प्यूटर दिल्ली में स्थापित किया गया था। इसका प्रयोग मौसम एवं कृषि सम्बन्धी जानकारियों को प्राप्त करने के लिए किया गया था। इसके बाद भारत ने भी कुछ समय पहले ही सुपर कम्प्यूटर बनाने में सफलता प्राप्त कर ली है। जापान की कम्पनी N.E.C. ने विश्व का सर्वाधिक तीव्र सुपर कम्प्यूटर बनाया है जो एक सैकंड में 28 अरब गणनाएं कर सकता है। CRAY-2, CRAYXM-24 और NEC-500 सुपर कम्प्यूटर के मुख्य उदाहरण हैं।

कम्प्यूटर के अनोखे प्रयोग | Unique Uses Of Computer – Best Knowledge In Hindi

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कम्प्यूटर के अनोखे प्रयोग | Unique Uses Of Computer – Best Knowledge In Hindi
कम्प्यूटर के अनोखे प्रयोग | Unique Uses Of Computer – Best Knowledge In Hindi

कम्प्यूटर के अनोखे प्रयोग | Unique Uses Of Computer – Best Knowledge In Hindi

कम्प्यूटर के अनोखे प्रयोग – आज हमारे जीवन का कोई भी ऐसा क्षेत्र शेष नहीं रह गया है, जिसमें कम्प्यूटर का प्रयोग प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से न हो रहा हो। आइए अब ऐसे ही कुछ कम्प्यूटर के अनोखे प्रयोग के बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं-

ज्योतिष विज्ञान में कम्प्यूटर- कम्प्यूटर ने अपना स्थान ज्योतिष के क्षेत्र में भी बना लिया है। ऐसे सॉफ्टवेयर भी तैयार हो गए हैं, जिनकी सहायता से जातक की जन्म तिथि, जन्म समय व जन्म स्थान की सही-सही जानकारी कम्प्यूटर में प्रविष्ट करने पर अनेक प्रकार से जन्मकुण्डलियों का निर्माण किया जा सकता है। Future Point, Kundali आदि इसी प्रकार के सम्पूर्ण ज्योतिष प्रोग्राम्स हैं। इन सॉफ्टवेयर्स की सहायता से वर्षफल, मासफल आदि प्राप्त करने के साथ-साथ विवाह के लिए कुण्डलियों का मिलान भी किया जा सकता है।

कम्प्यूटर रोबोट- रोबोट को सामान्यतः ‘यांत्रिक मानव’ समझा जाता है। वास्तव में रोबोट एक ऐसी मशीन है, जो मनुष्य के लिए बार-बार दोहराए जाने वाले, नीरस, श्रमसाध्य अथवा जोखिमभरे कार्य कर सकती है, परन्तु रोबोट तथा स्वचालित मशीनों में कुछ अन्तर होता है। अनेक ऐसे घातक कार्य, जैसे-बहुत गर्म चीजों को इधर से उधर उठाकर रखना अथवा रेडियोधर्मी पदार्थों को संभालना आदि रोबोट द्वारा आसानी से करवाए जा सकते हैं। अनेक सैंसर्स से युक्त तथा कम्प्यूटर द्वारा नियन्त्रित रोबोट विशेष परिस्थिति में अपने कार्य करने की प्रक्रिया में परिवर्तन भी कर सकते हैं। यह आवश्यक नहीं कि रोबोट आकार में मनुष्य के समान ही हों।

उद्योगों में प्रयोग किया जाने वाला प्रथम रोबोट अमेरिका की जनरल मोटर्स कम्पनी में सन् 1961 में स्थापित किया गया था। सबसे अधिक रोबोट्स मोटरवाहन बनाने कम्पनीज़ में प्रयोग होते हैं। कम्प्यूटर के अनोखे प्रयोग – रोबोट में कम्प्यूटर तकनीक का उपयोग होने से इनमें कृत्रिम बुद्धि का प्रयोग होने लगा है। इससे रोबोट्स की कार्य-क्षमता और उनके निर्णय लेने की क्षमता में अत्यधिक वृद्धि हुई है। अब इनका प्रयोग नाभिकीय प्रयोगों तथा अन्तरिक्ष अभियानों के लिए किया जाने लगा है।

कम्प्यूटर के अनोखे प्रयोग | Unique Uses Of Computer – Best Knowledge In Hindi
कम्प्यूटर के अनोखे प्रयोग | Unique Uses Of Computer – Best Knowledge In Hindi

कम्प्यूटर के अनोखे प्रयोग | Unique Uses Of Computer

कम्प्यूटर के अनोखे प्रयोग – मंगल ग्रह पर भेजे गए अमेरिकी अन्तरिक्ष यान ‘वाइकिंग-2’ में मुख्य कार्यकारी व्यक्ति एक रोबोट ही था, क्योंकि इस यान में कोई मनुष्य था ही नहीं। यान के मंगल पर उतर जाने के बाद रोबोट ने अपनी बांह फैलाई, चट्टान हटाकर मंगल की मिट्टी का नमूना इकट्ठा किया और उसे कैप्सूल में भरकर उस पर विभिन्न रासायनिक एवं अन्य परीक्षण किए साथ ही इस परीक्षण के परिणामों को पृथ्वी पर बैठे वैज्ञानिकों तक प्रेषित भी कर दिया।

कम्प्यूटरीकृत कार (Computerized Cars)— इन्टरएक्टिव ड्राइविंग सिस्टम, आधुनिक कारों में अत्यन्त लोकप्रिय होता जा रहा है। यह ड्राइविंग सिस्टम कम्प्यूटर के द्वारा ही सम्भव हुआ है। कम्प्यूटर के अनोखे प्रयोग इसके अतिरिक्त अत्याधुनिक कारों में तो सभी नियन्त्रण कम्प्यूटर द्वारा संचालित होते हैं: जैसे-कार-मालिक की आवाज को पहचाने के बाद कार का दरवाजा स्वतः ही खुल जाता है, कार में पेट्रॉल की उचित मात्रा चेतावनी प्राप्त होती है, जिस रास्ते पर कार चल रही है उस सड़क व शहर का मानचित्र उपलब्ध कराना आदि।


बैंक में कम्प्यूटर (Computer In Bank) – बैंक ऐसा संस्थान है, जहां पर लेखे-जोखे का अत्यधिक कार्य होता है। यहां प्रत्येक ग्राहक के लिए जो व्यक्तिगत रिकॉर्ड बनाया जाता है, वह अत्यन्त महत्वपूर्ण होता है। प्रारम्भ में कार्यभार कम होने पर भी किसी भी बैंक कर्मचारी की सहायता से यह कार्य पूरा करना कठिन था। आजकल बैंकों में कार्य बहुत बढ़ गया है, और अब बैंकों में कम्प्यूटर के उपयोग द्वारा कार्य को सरलता से अल्प समय त्रुटिरहित पूरा कर लिया जाता है। इसीलिए पहले बैंक ग्राहकों के लिए अधिकतम् चार घण्टे के लिए खुलते थे, परन्तु अब ये छह घण्टे तक के लिए और कहीं-कहीं तो इससे भी अधिक समय के लिए खुलने लगे हैं।

कम्प्यूटर के अनोखे प्रयोग – प्रायः एक बड़े कम्प्यूटर को बैंक के मुख्य कार्यालय में स्थापित किया जाता है और अधीनस्थ ब्रान्चों को टर्मिनल द्वारा उससे जोड़ दिया जाता है। कम्प्यूटर द्वारा प्रत्येक ग्राहक के खाते का ब्यौरा हमेशा तैयार रखा जाता है, समय-समय पर इस खाते में होने वाले परिवर्तनों अर्थात् खाते में पैसा जमा करने अथवा निकालने पर तुरन्त ही उसे अपडेट कर लिया जाता है।

आधुनिक बैंकों के अब इन्टरनेट से सम्बद्ध होने के कारण यदि किसी ग्राहक ने मुम्बई में किसी खाते में पैसा जमा किया है, तो कुछ ही मिनट्स में उस खाते से पैसा दिल्ली में निकाला जा सकता है। अनेक बैंकों द्वारा प्रारम्भ की गई ए.टी.एम. सेवा भी बैंक में कम्प्यूटर के उपयोग का उदाहरण है।

मानव जीवन में कम्प्यूटर के उपयोग एवं सीमाएं | Computer Capabilities and Limitations in Human Life- Best Info in Hindi

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मानव जीवन में कम्प्यूटर के उपयोग एवं सीमाएं | Computer Capabilities and Limitations in Human Life- Best Info in Hindi
मानव जीवन में कम्प्यूटर के उपयोग एवं सीमाएं | Computer Capabilities and Limitations in Human Life- Best Info in Hindi

मानव जीवन में कम्प्यूटर के उपयोग एवं सीमाएं | Computer Capabilities and Limitations in Human Life

मानव जीवन में कम्प्यूटर | Computer In Human Life – मानव जीवन में कम्प्यूटर ने अपना एक विशेष स्थान बना लिया है। आज समाज का लगभग हर मनुष्य कम्प्यूटर को किसी ना किसी रूप में प्रयोग कर रहा है। हर स्कूल में आज कम्प्यूटर सिखाया जा रहा है। देश का कोई भी विभाग कम्प्यूटर से अछूता नहीं रहा है। बिना कम्प्यूटर के सारे विभाग ठप्प पड़ जाएंगे। टेलीफोन व्यवस्था, टी.वी., उपग्रह, बैंक, रेलवे बुकिंग आदि सभी कम्प्यूटरीकृत हो गये हैं।

कम्प्यूटर की सीमाएं | Computer Limitations

कम्प्यूटर के अनेक लाभ हैं तो इसमें कुछ कमियां भी हैं। जिस तरह हर मानव की सीमाएं होती है उसी तरह कम्प्यूटर की भी सीमाएं हैं। कम्प्यूटर को सही प्रकार कार्य कर सके, इसके लिए एक निश्चित तापमान (15°C से 35°C के । मध्य) की आवश्यकता होती है। इस तापमान सीमा से अधिक अथवा कम तापमान होने की स्थिति में कम्प्यूटर उचित प्रकार से कार्य नहीं करेगा। मानव जीवन में कम्प्यूटर -मानव के समान कम्प्यूटर कठिनाई अथवा अवांछनीय परिस्थितियों में स्वयं को उनके अनुरूप नहीं ढाल सकता।

कम्प्यूटर में स्वयं सोचने-समझने की क्षमता नहीं होती। वह केवल प्रयोगकर्ता के दिये गये निर्देशों के आधार पर ही परिणाम प्रस्तुत कर देता है। कम्प्यूटर अपनी क्षमता से बाहर के कार्यों के लिये निर्देशों का पालन नहीं करता और त्रुटिपूर्ण परिणाम देता है। कम्प्यूटर प्रत्येक कार्य को एक कार्य-प्रणाली के अन्तर्गत करता है। प्रत्येक कार्य के लिये निर्देशों का एक निश्चित क्रम होता है। यदि इस क्रम में कोई भी निर्देश अपनी निर्धारित स्थिति पर नहीं होता तो कम्प्यूटर परिणाम या तो देगा ही नहीं और अगर देगा तो त्रुटिपूर्ण।

मानव जीवन में कम्प्यूटर के उपयोग एवं सीमाएं | Computer Capabilities and Limitations in Human Life- Best Info in Hindi
मानव जीवन में कम्प्यूटर के उपयोग एवं सीमाएं | Computer Capabilities and Limitations in Human Life- Best Info in Hindi

मानव जीवन में कम्प्यूटर के उपयोग एवं सीमाएं

कम्प्यूटर के उपयोग (Applications of Computers)

आज कम्प्यूटर की सहायता से वे सभी कार्य अत्यन्त सरलता से अल्प समय में ही किए जा सकते हैं, जिनको करने में पहले बहुत अधिक परेशानी तथा अत्यधिक समय व्यर्थ करना होता था। कम्प्यूटर द्वारा प्रत्येक वह कार्य किया जा सकता है, जिसकी कल्पना की जा सकती है। आजकल कम्प्यूटर जीवन के समस्त क्षेत्रों में उपयोगी है। कम्प्यूटर के कुछ प्रमुख अनुप्रयोग निम्नलिखित हैं-

घर तथा व्यक्तिगत कार्यों में कम्प्यूटर | Computer For Home And Personal Work —आज अनेक व्यक्तियों के घरों में कम्प्यूटर पहुंच चुका है। सामान्य व्यक्ति कम्प्यूटर की घर में उपस्थिति बच्चों की शिक्षा के लिए आवश्यक उपकरण के रूप में उचित ठहराते हैं। परन्तु ये केवल शुरूआत ही है। आजकल पर्सनल कम्प्यूटर का प्रयोग घरों में बजट तैयार करने, पत्र-व्यवहार करने, विभिन्न रिकॉर्ड्स को सुरक्षित रखने तथा इन्टरनेट के प्रयोग से विभिन्न नई-नई सूचनाओं को प्राप्त करने के लिए किया जा रहा है।

मानव जीवन में कम्प्यूटर – इसके साथ-साथ एयरकन्डीशन का नियन्त्रण करने, टेलीफोन कॉल्स का स्वतः ही उत्तर देने तथा घरों की सुरक्षा व्यवस्था के लिए कम्प्यूटर का प्रयोग चमत्कारिक रूप से किया जा रहा है। सन् 1970 में विकसित किए गए माइक्रो कम्प्यूटर के विभिन्न छोटे आकार और सुविधाजनक मॉडल व्यक्तिगत कार्यों के लिए घरों में स्थापित किए जा रहे हैं। रसोईघर में इलेक्ट्रॉनिक प्रोसेसर और मेमोरी युक्त माइक्रोवेव ओवन (Microwave Oven) का प्रयोग उच्चवर्ग तथा उच्च-मध्यम वर्ग के घरों में होने लगा है। मानव जीवन में कम्प्यूटर साधन-सम्पन्न व्यक्तियों में आजकल अपने घरों को कम्प्यूटर-नियन्त्रित बनवाने का प्रचलन बढ़ता जा रहा है।

मानव जीवन में कम्प्यूटर – दरवाजे पर घण्टी बजते ही, मेहमान की पहचान करना, निर्धारित समय पर किसी विशेष कार्य को याद दिलाना, लॉन (Lawn) में पानी देना आदि कार्य इसके द्वारा किए जा सकते हैं। ये स्वतः ही घर का तापमान भी नियन्त्रित रखते हैं। मानव जीवन में कम्प्यूटर आधुनिक एवं सुविधा सम्पन्न घरों में कम्प्यूटर द्वारा संचालित रोबोट को घरेलू नौकर के रूप में भी उपयोग में लाया जा रहा है। स्मॉल वण्डर नामक एक टैली सीरियल में एक ऐसे रोबोट की कल्पना की जो कि एक बच्ची की भांति व्यवहार करता है।


कृषि में कम्प्यूटर | Computer In Agriculture – आधुनिक कृषि में छोटे कम्प्यूटर्स का प्रयोग किया जा रहा है। किसान इन कम्प्यूटर्स का प्रयोग फसल सूचना, प्रति एकड़ लागत तथा खाद-बीज आदि की लागत जानने के लिए कर रहे हैं। मानव जीवन में कम्प्यूटर हमारे देश में उत्पादक ने खेतों में खाद डालने के सही समय का पता लगाने में कम्प्यूटर का प्रयोग करके अपनी वार्षिक आय में लगभग दस प्रतिशत की वृद्धि की।

शिक्षा में कम्प्यूटर | Computer In Education – आधुनिक शिक्षा में कम्प्यूटर का प्रयोग निरन्तर विस्तार पर है। यदि यह कहा जाए कि कम्प्यूटर तथा शिक्षा आज एक-दूसरे के पूरक हैं, मानव जीवन में कम्प्यूटर तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। शिक्षा में कम्प्यूटर का उपयोग निम्नलिखित तीन प्रकार से किया जा रहा है


कम्प्यूटर के बारे में जानकारी प्राप्त करना | Getting Information About Computer – आजकल यदि कोई व्यक्ति कम्प्यूटर के बारे में जानता है, उसे चलाना तथा उस पर वांछित कार्य करना जानता है, तो उसे किसी भी प्रतिष्ठित संस्थान में अच्छी नौकरी मिलने की सम्भावना अधिक होती है। कम्प्यूटर के अनेक विषयों; जैसे-कम्प्यूटर विज्ञान, कम्प्यूटर सूचना-प्रणाली, कम्प्यूटर की प्रोग्रामिंग करना, इन्टरनेट, ई-कॉमर्स, ई-बिजनेस आदि का अध्ययन किया जा सकता है।

कम्प्यूटर के माध्यम से शिक्षा प्राप्त करना | Learning Through Computer – कम्प्यूटर का प्रयोग एक शिक्षक के रूप में किया जा सकता है। कम्प्यूटर असिस्टेड इन्सट्रक्शन अर्थात् CAI एक ऐसा सॉफ्टवेयर है, जो कम्प्यूटर को एक शिक्षक का रूप देता है। उदाहरण के लिए विद्यार्थी कम्प्यूटर में CAI सॉफ्टवेयर में बीजगणित का अध्ययन करता है तो यह विद्यार्थी को मॉनीटर स्क्रीन पर बीजगणित का एक प्रश्न हल करने के लिए प्रदर्शित करेगा, यदि विद्यार्थी उस प्रश्न को सही हल करता है तो यह सॉफ्टवेयर विद्यार्थी को अगला सवाल हल करने के लिए मॉनीटर स्क्रीन पर प्रदर्शित करता है और यदि विद्यार्थी ने प्रश्न को गलत हल किया है,

तो यह मॉनीटर स्क्रीन पर उस प्रश्न को सही प्रकार हल करके प्रदर्शित करता है, और पुनः विद्यार्थी के समक्ष उस प्रश्न के समान ही कोई अन्य प्रश्न मॉनीटर स्क्रीन पर प्रदर्शित किया जाता है। विभिन्न विषयों पर जानकारी प्राप्त करने के लिए अनेक एनसाइक्लोपीडियाज़ सीडी के रूप में उपलब्ध हैं। इनमें से वांछित जानकारी प्राप्त करने का कार्य अत्यन्त अल्प समय में हो सकता है। मानव जीवन में कम्प्यूटर विभिन्न सॉफ्टवेयर्स एवं सीडीज़ के द्वारा विद्यार्थी कम्प्यूटर पर पुस्तकों का अध्ययन भी कर सकते हैं।


मनोरंजन में कम्प्यूटर | Computer In Entertainment – मनोरंजन के साधनों में खेल, कला, संगीत तथा फिल्में ही आती हैं। कम्प्यूटर पर हम अनेक प्रकार के मनोरंजक और बौद्धिक क्षमता में वृद्धि करने वाले खेलों का आनन्द ले सकते हैं। मानव जीवन में कम्प्यूटर जैसे – फ्रेड फीडेल नामक वैज्ञानिक ने शतरंज खेलने वाला एक अद्भुत कम्प्यूटर ‘फ्रिट्स-3’ बनाया, जो कि तेज गति से शतरंज खेलने की क्षमता रखता है।

यह कम्प्यूटर जब शतरंज खेलता है, तो अगली कुछ चालों में की सारी स्थितियों का अनुमान लगा लेता था। कोई शतरंज खिलाड़ी आगे की कितनी चालों पर गौर कर सकता है, यह उसकी एक साथ अनेक स्थितियों की जानकारी रखने की क्षमता पर निर्भर करता वर्तमान में फिल्मों में विशेष प्रभावों के लिए कम्प्यूटर का ही प्रयोग किया जाता है।

पहले फिल्म को बनाते समय ही कैमरे के लैंस के साथ विभिन्न फिल्टर्स का प्रयोग किया जाता था, परन्तु अब यह कार्य पोस्ट प्रोडेक्शन के समय अर्थात् फिल्म की एडिटिंग के समय भी किया जा सकता है। कम्प्यूटर से फिल्मों में अनेक फोटोग्राफिक प्रभाव, संगीत प्रभाव, एक्शन प्रभाव आदि को उत्पन्न किया जा सकता है। कम्प्यूटर में मल्टीमीडिया (Multimedia) तकनीक की सुविधा से काल्पनिक और यह दृश्य भी जीवंत-से लगते हैं। संगीत के क्षेत्र में आजकल आधुनिक वाद्य यंत्र इलैक्ट्रॉनिक सिंथेसाइजर (Electronic Synthesizer) अत्यन्त लोकप्रिय है।

आजकल अनेक एल्बम्स में केवल इसी एकमात्र वाद्य यंत्र की सहायता से अधिकांश वाद्य यंत्रों का कार्य ले लिया जाता है। यह वाद्य यंत्र आवाज रिकॉर्ड करता है तथा पुरानी धुनों को मेमोरी (Memory) में से देता है। कम्प्यूटर की सहायता से विभिन्न वाद्ययंत्रों की धुनें इस वाद्य यंत्र द्वारा कृत्रिम रूप से तैयार की जा सकती हैं।

सूचना प्रौद्योगिकी में कम्प्यूटर | Computer In Information Technology – कम्प्यूटर के विस्तार से एक नई प्रोद्योगिकी का प्रादुर्भाव हुआ है जिसे सूचना प्रौद्योगिकी (Information Technology) के नाम से जाना जाता है। इस प्रौद्योगिकी में इन्टरनेट (Internet) का विशेष महत्व है। इन्टरनेट कम्प्यूटर का अन्तर्राष्ट्रीय नेटवर्क है। सम्पूर्ण विश्व के अनेक कम्प्यूटर्स इन्टरनेट के नेटवर्क से जुड़े होते हैं और कहीं से भी घर में बैठे-बैठे अपने कम्प्यूटर से विभिन्न विषयों, जैसे-राजनीति, खेल, सिनेमा, संगीत, स्वास्थ्य, चिकित्सा,विज्ञान, कला-संस्कृति आदि पर वांछित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

इन्टरनेट पर लगभग सभी विषयों पर विविध जानकारियां उपलब्ध हैं। इन्टरनेट पर वांछित विषय के लिए आवश्यक वेबसाइट को चुनने के लिए सर्च इंजन्स (Search Engines) का प्रयोग किया जाता है। ये सॉफ्टवेयर्स इन्टरनेट पर ही उपलब्ध होते हैं। प्रमुख सर्च इंजन्स (Search Engines) हैं- google.comyahoo.comkhoj.com, आदि। सभी वेबसाइट्स के नाम से पहले अंग्रेजी के तीन अक्षर www अवश्य होते हैं, इनका अर्थ है-‘वर्ल्ड वाइड वेब’ (World Wide Web)। आने वाले समय के व्यवसाय में इन्टरनेट का महत्वपूर्ण योगदान होने जा रहा है।

आधुनिक व्यवसाय जो कम्प्यूटर और इन्टरनेट के सहयोग से किया जाता है ‘ई-बिजनेस’ (E-Business) कहलाता है। इसके बारे में ‘ई-कॉमर्स’ (E-Commerce) के अन्तर्गत विस्तार से सीखा जा सकता है।

व्यवसाय में कम्प्यूटर | Computer In Business – व्यापार में कम्प्यूटर का प्रयोग धन के आदान-प्रदान का लेखा-जोखा रखने के साथ-साथ स्टॉक का भी हिसाब-किताब कम्प्यूटर की सहायता से भी किया जा सकता है। इस कार्य के लिए प्रतिष्ठान अपनी आवश्यकता के अनुरूप सॉफ्टवेयर विकसित किए जा सकते हैं। इस कार्य के लिए बने-बनाए सॉफ्टवेयर्स भी बाजार में उपलब्ध हैं। अभी हमने कम्प्यूटर का व्यवसाय में उपयोग के बारे में जाना, परन्तु आजकल कम्प्यूटर को व्यवसाय के रूप में भी प्रयोग किया जा रहा है।

कम्प्यूटर ने सूचना को विक्रय योग्य एवं उपयोगी वस्तु बना दिया है जिससे घर में चलाए जा सकने वाले व्यवसायों का उदय हुआ है।  साइबर कैफे, जिनमें इन्टरनेट पर कार्य करने के लिए लोगों को सुविधा प्रदान की जाती है तथा डेस्क टॉप पब्लिशिंग, जिसमें पुस्तक प्रकाशन से लेकर वेब प्रकाशन का कार्य आता है, आदि इसी प्रकार के व्यवसाय हैं।पुस्तक प्रकाशन का कार्य कम्प्यूटर के प्रयोग से पहले जटिल कार्य था। पहले छपाई के लिए कम्पोजिंग का कार्य, मनुष्यों द्वारा एक-एक अक्षर को उठाकर खांचे में बिठाकर किया जाता था, जो कि समय तो अधिक लेता ही था, साथ ही इसमें त्रुटियों की सम्भावना अधिक होती थी।

अब कम्पोजिंग का कार्य कम्प्यूटर की सहायता से किया जाता है, इससे कम समय में कार्य हो जाता है और पुस्तक के प्रिन्ट होने से पूर्व एक प्रिन्ट उपलब्ध होता है, जिसमें कोई भी सुधार बिना इसके मूल रूप को छेड़े किया जा सकता है। इस प्रकार इसमें त्रुटियों की सम्भावना भी नगण्य ही होती है। आजकल विभिन्न सूचनाएं जैसे कि परीक्षा परिणाम, नए पाठ्यक्रमों की जानकारी, समाचार, आदि इन्टरनेट पर ही उपलब्ध हैं, अभी कम्प्यूटर प्रत्येक घर में नहीं पहुंचा है, अतः इस सुविधा को उपलब्ध कराने का कार्य साइबर कैफे में होता है।

यहां पर इन्टरनेट से जुड़े अनेक कम्प्यूटर्स स्थित होते हैं, जिन पर कोई भी व्यक्ति एक निश्चित शुल्क देकर कुछ समय के लिए कम्प्यूटर का प्रयोग कर सकता है और वांछित सूचना इन्टरनेट से प्राप्त कर सकता है। आजकल सूचनाओं को तेजी से भेजने एवं प्राप्त करने के लिए भी कम्प्यूटर का प्रयोग होता है। यह कार्य ई-मेल के द्वारा होता है। साइबर कैफे में ई-मेल भेजने तथा ई-मेल को देखने का कार्य भी किया जाता है।

चिकित्सा में कम्प्यूटर | Computer In Medicine – आधुनिक चिकित्सा में कम्प्यूटर का वृहद् उपयोग है। पहले जिन बीमारियों का इलाज उनका सही पता न लगने के कारण नहीं हो पाता था, अब कम्प्यूटराइज्ड उपकरणों की सहायता से उनका सही समय पर पता लगाकर उचित इलाज हो जाता है। चिकित्सा के क्षेत्र में कम्प्यूटर असिस्टेड डाइग्नोसिस (Computer Assisted Diagnosis) एक ऐसी सुविधा है जिसमें कम्प्यूटर हार्डवेयर अथवा सॉफ्टवेयर, चिकित्सकों को रोगियों के परीक्षण में सहायता करते हैं।

रोगी के लक्षणों को कम्प्यूटर में इनपुट (Input) किया जाता है और सॉफ्टवेयर रोगी के लक्षणों की तुलना अब तक के पिछले रोगियों के कम्प्यूटर में संग्रहीत लक्षणों व रोगों से करके रोग का पता लगाते हैं। इसी प्रकार कम्प्यूटर टोमोग्राफी (Computer Tomography) एक ऐसी सुविधा है, जिसमें कैट स्कैनिंग (CAT Scanning) की जाती है। इसमें X-Rays, हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर मिलकर रोगी के आन्तरिक अंगों का त्रि-विमीय (Three Dimensional) चित्र तैयार करते हैं।

इस चित्र की सहायता से रोगी के रोग की अधिक शुद्धता से जाँच की जा सकती है। कम्प्यूटराइज्ड लाइफ सपोर्ट प्रणाली (Computerized Life-Support Systems) कम्प्यूटर द्वारा ही संचालित एक ऐसी नर्सिंग (Nursing) सहायता है, जिससे गम्भीर अवस्था में रोगी का लगातार प्रेक्षण किया जाता है और रोगी की हृदयगति, तापमान और रक्तचाप में  प्राणघातक बदलाव को अलार्म (Alarm) से सूचित किया जाता है। इसी कारण अब मनुष्य की औसत आयु में वृद्धि हुई है।

विज्ञान में कम्प्यूटर | Computer in Science – आधुनिक विज्ञान की रिसर्च में कम्प्यूटर का बहुतायत में प्रयोग होता है। भले ही वह अन्तरिक्ष विज्ञान हो, जन्तु विज्ञान हो, रसायन विज्ञान हो या फिर मौसम विज्ञान अर्थात् विज्ञान की कोई भी शाखा क्यों न हो?

खगोल विज्ञान में कम्प्यूटर | Computer In Astronomy –मानव सभ्यता के प्रारम्भिक काल में खगोल शास्त्र द्वारा ही सूर्य व चन्द्रमा की गतिविधियों की गणना करके ही मौसमों की अवधियों का अनुमान लगाया जाता था। इससे ग्रहण का समय लगभग ठीक बताया जा सकता था। आज कम्प्यूटर ने इस प्रकार की गणना को एक नई दिशा दी है।

मानव जीवन में कम्प्यूटर के उपयोग एवं सीमाएं

आज कम्प्यूटर का प्रयोग खगोल विज्ञान के पारम्परिक कार्यों को करने के लिए किया जा रहा है, जैसे- Gregorian तथा Julian तिथियों का पारस्परिक परिवर्तन, स्थानीय समय तथा वास्तविक समय की गणना, सूर्योदय व चन्द्रोदय के सही समय की गणना आदि। कम्प्यूटर की सहायता से किसी भी समय नक्षत्रों
की सही स्थिति पल भर में ही बताई जा सकती है।


मौसम विज्ञान में कम्प्यूटर | Computer In Meteorology – मौसम का अनुमान लगाने के लिए, मौसम की स्थिति के डेटा (Data) को कम्प्यूटर में इनपुट (Input) किया जाता है, अब कम्प्यूटर में स्थित सॉफ्टवेयर मौसम के बारे में जानकारियों, जो कि कम्प्यूटर में पहले से इनपुट की गई होती हैं, से वर्तमान डेटा की तुलना करके, इसके आधार पर मौसम में होने वाले परिवर्तन को दर्शाता है।


अन्तरिक्ष विज्ञान में कम्प्यूटर | Computer In Space Science –अन्तरिक्ष विज्ञान में कम्प्यूटर के हस्तक्षेप को नकारा नहीं जा सकता। मानव का चन्द्रमा पर कदम कम्प्यूटर के कारण ही पड़ सका है। अतितीव्र गति से त्रुटिहीन गणनाएं करना एवं इनके आधार पर अपना मार्ग निर्धारित करना रॉकेट के लिए कम्प्यूटर की सहायता से ही सम्भव हो पाया है। कम्प्यूटर की सहायता से ही आज मानव चन्द्रमा ही नहीं मंगल व शुक्र ग्रह पर भी पहुंचने का स्वप्न देख रहा है। मानव जीवन में कम्प्यूटर के उपयोग एवं सीमाएं आज पृथ्वी के चारों ओर जो अनेक कृत्रिम उपग्रह परिक्रमा कर रहे हैं, यह भी कम्प्यूटर के प्रयोग से ही सम्भव हो पाया है।

कम्प्यूटर सिस्टम क्या है – कम्प्यूटर सिस्टम अवधारणा एवं विशेषताएं | Computer System Concept & Features – Best Knowledge In Hindi

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कम्प्यूटर सिस्टम क्या है - कम्प्यूटर सिस्टम अवधारणा एवं विशेषताएं | Computer System Concept & Features – Best Knowledge In Hindi
कम्प्यूटर सिस्टम क्या है - कम्प्यूटर सिस्टम अवधारणा एवं विशेषताएं | Computer System Concept & Features – Best Knowledge In Hindi

कम्प्यूटर सिस्टम क्या है – कम्प्यूटर सिस्टम अवधारणा एवं  विशेषताएं | Computer System Concept & Features – Best Knowledge In Hindi

कम्प्यूटर सिस्टम क्या है – सिस्टम शब्द का प्रादुर्भाव एक ग्रीक शब्द Systeema से हुआ है, इसका तात्पर्य है किसी भी प्रक्रिया के विभिन्न प्रभागों के मध्य व्यवस्थित सम्बन्ध। किसी भी सिस्टम में दो अथवा दो से अधिक तत्व सम्मिलित होते हैं, जो अन्तिम उद्देश्य की पूर्ति के लिए आपस में मिलकर कार्य करते हैं। किसी भी सिस्टम के प्रभागों को ‘सब-सिस्टम’ कहा जाता है। किसी भी सिस्टम को तभी सफल कहा जा सकता है, जब उसके सभी प्रभागों के संयुक्त रूप से कार्य करने पर, उन प्रभागों के पृथक्-पृथक् कार्य करने की अपेक्षा, कम्प्यूटर सिस्टम अधिक उपयोगी परिणाम प्रस्तुत कर सकें।

पारिभाषिक शब्दों में एक अथवा एक से अधिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए मिल-जुल कार्यरत प्रभागों के समूह को सिस्टम कहा जाता है। इसी प्रकार कम्प्यूटर भी एक सिस्टम (System) के रूप में कार्य करता है। इसके विभिन्न प्रभाग निम्नलिखित हैं-


1. कम्प्यूटर हार्डवेयर (Computer Hardware) – साधारण रूप से कम्प्यूटर के वे सभी प्रभाग जिन्हें देखा तथा छुआ जा सकता है, कम्प्यूटर हार्डवेयर कहलाते हैं। इनमें मुख्य रूप से कम्प्यूटर के यांत्रिक Mechanical), वैद्युत (Electrical) तथा इलैक्ट्रॉनिक (Electronic) प्रभाग आते हैं। कम्प्यूटर के अन्दर तथा बाहर के सभी प्रभाग, की इनपुट तथा आउटपुट युक्तियां आदि सभी कम्प्यूटर हार्डवेयर ही हैं। कम्प्यूटर की वे युक्तियां, जो कि कम्प्यूटर को चलाए जाने के लिए आवश्यक होती हैं, स्टेण्डर्ड युक्तियां (Standard Devices) कहलाती हैं, जैसे-की-बोर्ड, फ्लॉपी ड्राइव, हार्डडिस्क आदि। इन युक्तियों के अतिरिक्त वे युक्तियां, जिनको कम्प्यूटर से जोड़ा जाता है, पेरीफेरल युक्तियां (Peripheral Devices) कहलाती हैं। स्टैण्डर्ड तथा पेरीफेरल युक्तियों को मिलाकर ही कम्प्यूटर हार्डवेयर तैयार होता है।

2. कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर (Computer Software) – कम्प्यूटर तथा उससे जुड़ी हुई युक्तियों से कार्य लेने के लिए सॉफ्टवेयर का प्रयोग किया जाता है। ये कम्प्यूटर के वे प्रभाग होते हैं, जोकि न तो आंखों से दिखाई देते हैं और न ही जिनको छुआ जा सकता है। कम्प्यूटर भाषाओं में लिखे गए, कम्प्यूटर को कार्य करने के लिए विधिवत् एवं व्यवस्थित निर्देशों के समूह को कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर कहा जाता है। कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर्स को संग्रहण युक्तियों में संग्रहीत किया जाता है। इस प्रकार कहा जा सकता है, कि कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर्स वे प्रोग्राम्स होते हैं, जो कि कम्प्यूटर को यह निर्देश देते हैं कि डेटा को किस प्रकार प्रोसेस किया जाए और प्राप्त परिणाम को किस प्रकार प्रस्तुत किया जाए।


3. कम्प्यूटर फर्मवेयर (Computer Firmware) – हार्डवेयर तथा सॉफ्टवेयर को संयुक्त रूप से फर्मवेयर कहा जाता है। जिस हार्डवेयर में सॉफ्टवेयर को स्थापित कर दिया गया है, वह फर्मवेयर कहलाएगा।


4. कम्प्यूटर स्किनवेयर (Computer Skinware) – कम्प्यूटर के वे अंग अथवा प्रभाग, जिनको देखने के लिए कम्प्यूटर को खोलने की आवश्यकता नहीं, होती है, कम्प्यूटर स्किनवेयर कहलाते हैं, जैसे-मॉनीटर, की-बोर्ड, माउस, प्रिन्टर आदि।


5. कम्प्यूटर ह्यूमनवेयर (Computer Humanware) – वे सभी मनुष्य, जो किसी-न-किसी प्रकार से कम्प्यूटर से सम्बन्धित होते हैं, कम्प्यूटर ह्यूमनवेयर कहलाते हैं। इनको कम्प्यूटर लाइववेयर (Computer Liveware), कम्प्यूटर पर्सनल (Computer Personnel) अथवा कम्प्यूटर यूजर (Computer User) भी कहा जाता है। जब किसी कम्प्यूटर सिस्टम के सभी प्रभाग सुचारु रूप से क्रियाशील होंगे, तभी वह कम्प्यूटर सिस्टम प्रभावशाली ढंग से कार्य कर सकेगा। किसी भी एक प्रभाग के क्रियाशील न होने की स्थिति में कम्प्यूटर सिस्टम अपना कार्य नहीं कर सकेगा।

कम्प्यूटर सिस्टम क्या है - कम्प्यूटर सिस्टम अवधारणा एवं  विशेषताएं | Computer System Concept & Features – Best Knowledge In Hindi
कम्प्यूटर सिस्टम क्या है – कम्प्यूटर सिस्टम अवधारणा एवं विशेषताएं | Computer System Concept & Features – Best Knowledge In Hindi

कम्प्यूटर सिस्टम की विशेषताएं | Computer System Characteristics

कम्प्यूटर अपनी उत्कृष्ट एवं अनुपम विशिष्टताओं के कारण आज मानव जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में प्रवेश करता जा रहा है। इसकी प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं-

गति (Speed) – एक प्रकार से कम्प्यूटर को एक तीव्र गति का एक ऐसा Calculator कहा जा सकता है, जिसके द्वारा असम्भव वैज्ञानिक गणनाओं को कुछ ही सेकेण्ड्स में किया जा सके। कम्प्यूटर द्वारा किए जा सकने वाले समस्त कार्य गणनाओं पर ही आधारित होते हैं। आज कम्प्यूटर का प्रयोग सेना, विज्ञान व शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ता ही जा रहा है। कम्प्यूटर एक इलैक्ट्रॉनिक यन्त्र है।

आज के कम्प्यूटर बहुत तीव्र गति से गणना करते हैं। इनकी गति को इस प्रकार से जाना जा सकता है कि समय की इकाई सेकेण्ड, माइक्रोसेकेण्ड (सेकेण्ड का एक लाखवां भाग अर्थात् 10-5 सेकेण्ड), नेनोसेकेण्ड (10-9), पीकोसेकेण्ड (10-12) होती है। आज के कम्प्यूटर 18 से 20 अंकों वाली संख्याओं को जोड़ने के लिए मात्र 300 से 400 नेनोसेकेण्ड का समय ही लेते हैं।

स्मृति (Memory) एक व्यक्ति को मस्तिष्क के सभी कार्यों को करने के लिए स्मृति की आवश्यकता होती है। यदि व्यक्ति कोई गणना करता है तो वह गणना के उपरान्त परिणाम को भी स्मृति में रखने के बाद ही उत्तर देता है। परन्तु एक व्यक्ति सीमित सन्देशों को ही अपनी स्मृति में सुरक्षित रख सकता है। अतः जो बात उसके लिए पुरानी होती जाती है, वह स्मृति से हटने लगती है। कम्प्यूटर की स्मृति, जो बहुत अधिक होती है, में सभी सन्देशों को एकत्र करके बहुत समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

इलैक्ट्रॉनिक कम्प्यूटर में प्रयोग की जाने वाली स्मृति (Memory) की इकाई किलोबाइट होती है। एक किलोबाइट में 1024 स्मृति खण्ड होते हैं। कम्प्यूटर की आन्तरिक मेमोरी में सभी सन्देशों को संग्रहित कर पाना बहुत कठिन है, अतः इसके लिए बाहरी स्मृति (External Memory) का प्रयोग किया जाता है। बाहरी स्मृति में जितने चाहे सन्देशों को स्टोर किया जा सकता है; और इन्हें कभी भी प्रयोग किया जा सकता है। कम्प्यूटर सिस्टम एक Recall (पुनः निमन्त्रण चालक) महत्वपूर्ण सुविधा प्रदान करता है।

इस सुविधा के द्वारा किसी भी जानकारी को पुनः कम्प्यूटर स्क्रीन पर Display किया जा सकता है। यह सुविधा कम्प्यूटर की द्वितीयक स्मृति (Secondary Memory) द्वारा संचालित होती है। रिकॉल की हुई जानकारी उतनी ही सही होती है है जितनी कि तब होती है जब उस जानकारी को पहली बार प्राप्त किया जाता है। 

भावना रहित (Feeling Less) – कम्प्यूटर सिस्टम में कोई भावना या कोई समझ नहीं होती है क्योंकि कम्प्यूटर एक मशीन है। कम्प्यूटर कभी भी कोई निर्णय स्वयं नहीं ले सकता, कम्प्यूटर द्वारा प्रमाणित निर्णय प्रयोगकर्ता के निर्देशों पर निर्भर करता है।


शुद्धता (Accuracy) – कम्प्यूटर में शुद्ध परिणामों को प्रस्तुत करने की क्षमता बहुत अधिक होती है। अधिकतर कम्प्यूटर द्वारा प्रस्तुत की गयी अशुद्धता प्रयोगकर्ता द्वारा की गयी गलती और कम्प्यूटर हार्डवेयर में होने वाली खराबी के कारण ही होती है, इसका अन्य कोई कारण सम्भव ही नहीं है। कम्प्यूटर में गलतियों को सही करने की क्षमता अन्य यंत्रों के मुकाबले अधिक होती है।

स्वचालन  (Automation) – प्रोग्राम के एक बार कम्प्यूटर की मेमोरी में लोड हो जाने पर, प्रोग्राम का प्रत्येक सन्देश सैन्ट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (Central Processing Unit) द्वारा कार्यान्वित होता रहता है। सैन्ट्रल प्रोसेसिंग यूनिट द्वारा यह कार्यान्वयन तब तक चलता रहता है जब तक प्रोग्राम का अन्त अर्थात् सन्देश “प्रोग्राम समाप्त” नहीं आ जाता।

सार्वभौमिकता (Versality) – जो भी कार्य कम्प्यूटर द्वारा संपादित करना होता है, उसे एक निश्चित क्रम में बांधा जाता है, फिर डाटा इस तरह एक पूर्व निश्चित सांचे में ढाला जाता है कि वह कम्प्यूटर को ग्रहण हो सके। इस प्रकार कम्प्यूटर द्वारा मुख्य रूप से निम्न चार कार्य कराए जाते हैं-

  • प्रयोगकर्ता द्वारा इनपुट-आउटपुट युक्तियों द्वारा डेटा का आदान-प्रदान करना।
  • प्रयोगकर्ता द्वारा इनपुट की गई सूचना का आन्तरिक स्थानान्तरण।
  • अंकगणितीय गणना द्वारा परिणाम प्राप्त करना।
  • कम्प्यूटर में इनपुट की गई सूचनाओं का तुलनात्मक विवेचन करना।

सक्षमता (Deligency) – यदि कम्प्यूटर को उचित वातावरण में प्रयोग किया जाये तो यह बहुत ही सक्षमता से कार्य कर सकता है। कम्प्यूटर के एक इलेक्ट्रॉनिक यन्त्र, होने के कारण अधिक कार्यभार होने पर भी थकावट का कोई नामो-निशान परिलक्षित नहीं होता है। इसमें कार्यभार अधिक होने पर भी खराबी के लक्षण नहीं पाये जाते, परन्तु अनेक यान्त्रिक यन्त्र कार्यभार अधिक होने पर थकावट अथवा खराबी के लक्षण प्रकट करने लगते हैं।

मानव से भी यदि लगातार कार्य करवाया जाये तो एक समय बाद मनुष्य का मस्तिष्क भी थकावट महसूस करने लगता है, और इस कारण वह सन्तुलन खोकर गलतियां करने लगता है। यदि कम्प्यूटर सिस्टम को कई प्रकार के कार्य करने के लिए निर्देशित किया गया है, तो यह अन्तिम कार्य भी उसी दक्षता एवं सक्षमता के साथ करेगा, जिस दक्षता एवं सक्षमता से उसने प्रथम कार्य किया होगा।

दुनिया के कुछ जाने-माने प्रारम्भिक कम्प्यूटर्स के इतिहास | World’s Best Known Early Computers- The History Of Computer

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दुनिया के कुछ जाने-माने प्रारम्भिक कम्प्यूटर्स के इतिहास | World's Best Known Early Computers- The History Of Computer
दुनिया के कुछ जाने-माने प्रारम्भिक कम्प्यूटर्स के इतिहास | World's Best Known Early Computers- The History Of Computer

दुनिया के कुछ जाने-माने प्रारम्भिक कम्प्यूटर्स के इतिहास | World’s Best Known Early Computers- The History Of Computer

प्रारम्भिक कम्प्यूटर्स के इतिहास प्रारम्भ से ही मनुष्य का यह स्वप्न रहा है कि वह कोई ऐसी मशीन अथवा युक्ति का निर्माण करे, जिसकी कार्य-प्रणाली एकदम मनुष्य के समान ही हो। इस स्वप्न के साकार रूप में मनुष्य ने कम्प्यूटर का आविष्कार किया है। जिस प्रकार एक मनुष्य अपनी आंखों से देखकर, कानों से सुनकर एवं हाथ से स्पर्श करके मस्तिष्क को सूचनाएं प्रेषित करता है उसी प्रकार कम्प्यूटर की इनपुट युक्तियों, की-बोर्ड, माउस, माइक आदि के द्वारा सूचनाएं कम्प्यूटर को प्रेषित होती हैं।

जिस प्रकार मनुष्य का मस्तिष्क प्राप्त सूचनाओं का विश्लेषण करता है उसी प्रकार कम्प्यूटर का सी.पी.यू. भी प्राप्त सूचनाओं का विश्लेषण करता है। तो आइये अब कुछ जाने-माने प्रारम्भिक कम्प्यूटर्स के इतिहास के बारे में जानते हैं-

दुनिया के कुछ जाने-माने प्रारम्भिक कम्प्यूटर्स के इतिहास | World's Best Known Early Computers- The History Of Computer
दुनिया के कुछ जाने-माने प्रारम्भिक कम्प्यूटर्स के इतिहास | World’s Best Known Early Computers- The History Of Computer

कुछ जाने-माने प्रारम्भिक कम्प्यूटर्स के इतिहास

मार्क-प्रथम (Mark-I)

इस पूर्णतया स्वचालित कैलकुलेटिंग मशीन को हारवर्ड यूनिवर्सिटी (Harvard University) के हॉवर्ड ए. आइकेन (Howard A. Aiken) ने IBM द्वारा प्राप्त 5,000 डॉलर की आर्थिक सहायता से तैयार किया। इसका डिज़ाइन पंच कार्ड मशीनरी के लिए विकसित तकनीकों पर ही तैयार किया गया था। लगभग पांच वर्षों के अथक प्रयासों के उपरान्त सन् 1944 में यह कैलकुलेटिंग मशीन तैयार हुई। इस मशीन का नाम ऑटोमेटिक स्वीकेंस कन्ट्रोल्ड कैलकुलेटर रखा गया। कालान्तर में इसे मार्क-प्रथम (Mark-I) के नाम से जाना गया। इस मशीन का आकार बहुत बड़ा तथा डिज़ाइन जटिल होने के बावजूद यह अत्यन्त विश्वसनीय सिद्ध हुई। इसकी लम्बाई 50 फीट तथा चौड़ाई 8 फीट थी।

इस कम्प्यूटर के निर्माण में लगभग 500 मील लम्बे तार एवं लगभग 76,000 पुर्जी को लगभग तीस लाख जोड़ों (Electrical Connections) का प्रयोग किया गया था। इसके परिचालन को नियन्त्रित करने के लिए इसमें 3000 से अधिक विद्युत स्विचों का प्रयोग किया गया था। यह अंकगणित की चारों मूलभूत संक्रियाओं-जोड़ना, घटाना, गुणा तथा भाग को करने के साथ-साथ टेबल रेफरेंसेज़ के लिए भी सक्षम था। इस कम्प्यूटर की सहायता से सभी अंकगणितीय गणनाएं तो की जा सकती थीं; साथ ही लघुगणक एवं त्रिकोणमितीय गणनाएं करना भी सम्भव था। वैसे तो इसे कैलकुलेटर नाम दिया गया परन्तु चूंकि इस यन्त्र में स्वयं निर्णय लेने की भी क्षमता थी। अतः इसे विश्व का सर्वप्रथम कम्प्यूटर कहना अधिक उचित होगा।

इस कम्प्यूटर की सहायता से किन्हीं दो संख्याओं का गुणनफल (भले ही वे संख्याएं 20 अंकों वाली हों) केवल 6 सेकेण्ड में और भागफल 12 सेकेण्ड में प्राप्त किया जा सकता था। मार्क-1 के साथ रोचक हिस्सा जुड़ा हुआ है। एक बार यह कम्प्यूटर खराब हो गया। अनेक प्रयासों के बाद भी विशेषज्ञ कम्प्यूटर में हुई खराबी के कारण व स्थान को नहीं जान पाये। जब इस खराबी का कारण ज्ञात हुआ, तो विशेषज्ञ हैरान रह गये। खराबी का कारण इसका विद्युत परिपथ भंग हो गया था।

इस परिपथ को जोड़ने में अत्यधिक समय लगा। इस घटना को फर्म की लॉगटेबुल में लिखा गया कि आज Mark-1 पर डिबग कर दिया गया। इसी घटना के कारण आज भी कम्प्यूटर में किसी त्रुटि को ठीक कराने को डिबगिंग कहा जाता है।

एबीसी (ABC)

डॉ. जॉन एटनासॉफ (Dr. John Atanasoff) तथा इनके सहायक क्लिफोर्ड बैरी (Clifford Berry) ने मिलकर कुछ विशिष्ट गणितीय समीकरणों को हल करने के लिए सन् 1942 में एक इलैक्ट्रॉनिक मशीन को विकसित किया, जिसे इन दोनों के नाम पर इसे एटनासॉफ बैरी कम्प्यूटर (Atanasoff Berry Computer) के नाम से जाना गया। इस कम्प्यूटर को सामान्य बोलचाल में एबीसी (ABC) भी कहा जाता है। 

इस कम्प्यूटर में निर्वात नलिकाओं (Vaccume Tubes) का प्रयोग किया गया। इन निर्वात नलिकाओं का उपयोग इस कम्प्यूटर में आन्तरिक तार्किक निर्णयों के लिए किया गया था। इस कम्प्यूटर में भण्डारण के लिए सहनित्रों (Capacitors) का प्रयोग किया गया था।

एनियाक (ENIAC)

सन् 1943 में मूरी स्कूल ऑफ इन्जीनियरिंग, बैलेस्टिक रिसर्च लैब एवं अमेरिकी सेना ने संयुक्त रूप से इस दिशा में कार्य करना प्रारम्भ किया। इस प्रयास के परिणामस्वरूप सन् 1946 में अमेरिकन इन्जीनियर प्रोफेसर जे. प्रेस्पर इकर्ट (J. Presper Eciert) तथा जॉन मैकले (John Mauchly) के नेतृत्व में विश्व के प्रथम इलैक्ट्रॉनिक कम्प्यूटर को तैयार किया गया। अमेरिकी सेना के लिए तैयार किए गए इस कम्प्यूटर को इलैक्ट्रॉनिक न्यूमेरिकल इन्ट्रीगेटर एण्ड कैलकुलेटर (Electronic Numerical Integrator and Calculator) अर्थात् एनियाक (ENIAC) नाम दिया गया।

इस कम्प्यूटर की कार्य करने की गति हॉवर्ड के Mark-1 की अपेक्षा बहुत अधिक थी। ऐनियाक से 5000 जोड़ अथवा 350 गुणा व भाग की गणनाएं मात्र एक सेकेण्ड में की जा सकती थीं। यह कम्प्यूटर पूर्णरूप से स्वचालित रूप से गणनाएं करता था तथा उन गणनाओं का संग्रहण अपनी स्मृति अस्थाई रूप से संग्रहित कर, अगली गणना करने के लिए तैयार हो जाता था। उस समय के नए सैनिक हथियारों की मापक-दूरियों का निर्धारण करने में अमेरिकी सेना ने इस कम्प्यूटर का उपयोग किया।

यह कम्प्यूटर आकार में बहुत बड़ा था, इसके लिए लगभग 20 x 40 वर्ग फीट के कमरे की आवश्यकता थी। इसका भार लगभग 30 टन था। इस कम्प्यूटर में 1800 निर्वात् नलिकाएं (Vacume Tubes), 70,000 प्रतिरोधक (Resisters), 10000 संघारित्र (Capacitors) एवं 6,000 स्विचों (Switches) का प्रयोग किया गया था। इस कम्प्यूटर में दो संख्याओं का जोड़ का कार्य 200 माइक्रोसेकेण्ड तथा गुणा का कार्य 2000 माइक्रोसेकेण्ड में किया जा सकता था। इसमें स्थाई स्मृति भण्डारण की व्यवस्था न होने के कारण कुछ कम्प्यूटर वैज्ञानिक इसे कम्प्यूटर कम और कैलकुलेटर अधिक मानते हैं।

एडवॉक (EDVAC)

एनियाक में स्थाई स्मृति का ना होना ही उसकी सबसे बड़ी कमी थी। इसी कमी को दूर करने के लिए डॉ. जॉन वॉन न्यूमैन (Dr. John Von Neumann) ने संचित प्रोग्राम अवधारणा (Stored Program Concept) को प्रस्तुत किया। संचित प्रोग्राम अवधारणा में कम्प्यूटर के संचालन को स्वतः ही निर्देशित करने के लिए कम्प्यूटर की स्मृति में निर्देशों को एक निश्चित क्रम में संचित किया जाना था। इलैक्ट्रॉनिक डिस्क्रीट वैरिएबल ऑटोमेटिक कम्प्यूटर (Electronic Discrete Variable Automatic Computer) को संचित प्रोग्राम अवधारणा पर ही यू.एस.ए. में डिज़ाइन किया गया। 

एडसेक (EDSAC)

प्रारम्भिक कम्प्यूटर्स के इतिहास – जिस समय अमेरिका में EDSAC का विकास किया जा रहा था, लगभग उसी समय ब्रिटेन में इलैक्ट्रॉनिक डिले स्टोरेज ऑटोमेटिक कैलकुलेटर (Electronic Delay Storage Automatic Calculator) का विकास किया गया। इस मशीन को कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मौरिस विल्केस (Maurice Wilkes) ने विकसित किया तथा मई सन् 1949 में इस मशीन पर पहले प्रोग्राम को कार्यान्वित किया गया।

यूनिवेक-प्रथम (UNIVAC-I)

यूनीवेक (UNIVAC) का पूरा नाम यूनिवर्सल ऑटोमेटिक कम्प्यूटर (Universal Automatic Computer) है। यह कोई विश्व का प्रथम डिजिटल कम्प्यूटर था। प्रारम्भिक कम्प्यूटर्स के इतिहास – यूं तो अनेक यूनीवेक कम्प्यूटर्स का निर्माण हुआ, परन्तु सन् 1951 में अमेरिकन सेंसस ब्यूरो (American Census Bureau) सबसे पहला यूनीवेक स्थापित किया गया, जो कि अगले दस वर्षों तक लगातार में प्रयोग में लाया गया। सन् 1954 में जनरल इलैट्रिक कॉरपोरेशन ने पहली बार UNIVAC-I का व्यावसायिक प्रयोग किया।

कम्प्यूटर क्या है – इसकी उपयोगिता एवं विशेषताएँ | What is Computer, its Utility and Features Best Knowledge In Hindi

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कम्प्यूटर क्या है - इसकी उपयोगिता एवं विशेषताएँ | What is Computer, its Utility and Features Best Knowledge In Hindi
कम्प्यूटर क्या है - इसकी उपयोगिता एवं विशेषताएँ | What is Computer, its Utility and Features Best Knowledge In Hindi

कम्प्यूटर क्या है – इसकी उपयोगिता एवं विशेषताएँ | What is Computer, its Utility and Features

कम्प्यूटर क्या हैवर्तमान युग कम्प्यूटर का ही युग है। कम्प्यूटर शब्द की उत्पत्ति Compute शब्द से हुई है, जिसका अर्थ है गणना अथवा गिनती करना। इसीलिए सामान्यतः कम्प्यूटर को एक संगणक युक्ति (Calculating Device) के रूप में जाना जाता है। कम्प्यूटर एक स्वचालित एवं असीम प्रयोजनों वाली इलैक्ट्रॉनिक युक्ति (Electronic Device) है, जो एक बार चालू किए जाने के बाद स्वतः ही सक्रिय रहता है साथ ही इससे एक समय में अनेक कार्य किए जा सकते हैं।

कम्प्यूटर एक ऐसी इलैक्ट्रॉनिक युक्ति है जो प्रयोगकर्ता द्वारा दिए गए निर्देशों एवं संदेशों का तुरन्त एवं अक्षरशः पालन करता है। कम्प्यूटर में स्वयं की तार्किक शक्ति एवं स्मृति होती है। मनुष्य की स्मृति तो समय के साथ-साथ धूमिल होती जाती है, परन्तु कम्प्यूटर की स्मृति वैसी ही बनी रहती है, जैसी कि पहले थी। कम्प्यूटर एवं मनुष्य में सबसे बड़ा अन्तर यह है, कि कम्प्यूटर में अपनी बुद्धि एवं विवेक नहीं होता है। इसीलिए कम्प्यूटर प्रयोगकर्ता द्वारा दिए गए निर्देशों को प्रोग्राम के नियन्त्रण द्वारा समझकर उसका पालन करता है, और प्रयोगकर्ता को वांछित परिणाम प्राप्त हो जाते हैं।

इसके लिए कम्प्यूटर को प्रोग्राम की आवश्यकता होती है और यह प्रोग्राम कम्प्यूटर की स्मृति में संचित होता है। कम्प्यूटर की इस स्मृति में कम्प्यूटर प्रोग्राम्स के अतिरिक्त प्राप्त परिणामों का भी भण्डारण किया जा सकता है। ये कम्प्यूटर प्रोग्राम्स कम्प्यूटर को समझ में आने वाली भाषा में तैयार किए जाते हैं।

कम्प्यूटर क्या है - इसकी उपयोगिता एवं विशेषताएँ | What is Computer, its Utility and Features Best Knowledge In Hindi
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कम्प्यूटर और मानव | Computer and Human

प्रारम्भ से ही मनुष्य का यह स्वप्न रहा है कि वह कोई ऐसी मशीन अथवा युक्ति का निर्माण करे, जिसकी कार्य-प्रणाली एकदम मनुष्य के समान ही हो। इस स्वप्न के साकार रूप में मनुष्य ने कम्प्यूटर का आविष्कार किया है। जिस प्रकार एक मनुष्य अपनी आंखों से देखकर, कानों से सुनकर एवं हाथ से स्पर्श करके मस्तिष्क को सूचनाएं प्रेषित करता है उसी प्रकार कम्प्यूटर की इनपुट युक्तियों, की-बोर्ड, माउस, माइक आदि के द्वारा सूचनाएं कम्प्यूटर को प्रेषित होती हैं। जिस प्रकार मनुष्य का मस्तिष्क प्राप्त सूचनाओं का विश्लेषण करता है उसी प्रकार कम्प्यूटर का सी.पी.यू. भी प्राप्त सूचनाओं का विश्लेषण करता है।

जिस प्रकार विश्लेषित सूचनाओं से प्राप्त परिणामों को मनुष्य मुंह, हाथ, पैर आदि सामने लाते हैं, उसी प्रकार कम्प्यूटर मॉनीटर, प्रिन्टर तथा स्पीकर्स की सहायता से विश्लेषित सूचनाओं से प्राप्त परिणामों को प्रस्तुत करता है। मनुष्य और कम्प्यूटर में एक असमानता यह है कि मनुष्य का मस्तिष्क तथ्यों से परे भी जा सकता है वह प्रेषित की सूचनाओं से हटकर भी सोच सकता है, वह भावनाओं के वशीभूत होकर भी कोई परिणाम प्रस्तुत कर सकता है, जबकि कम्प्यूटर केवल प्रेषित किए गए तथ्यों पर ही विश्लेषण करके परिणाम प्रस्तुत करता है।

वैसे मनुष्य इसके लिए भी प्रयासरत है कि सर्वव्यापी कम्प्यूटर के नए संसार में मशीनों में बुद्धि होगी वे तथ्यों से परे भी सोच सकेंगी और बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के अपने कार्य को स्वयं ही निष्पादित कर सकेंगी।

कम्प्यूटर के विकास का इतिहास | History of Computer Development

मानव प्राचीन काल से ही जिज्ञासु रहा है और इसी जिज्ञासा के कारण ही मानव प्रकृति अन्य जन्तुओं से पृथक् एवं श्रेष्ठ है। मानव को पाषाण काल से ही गणना की आवश्यकता प्रतीत होने लगी थी। उसे वस्तुओं के आदान-प्रदान का हिसाब रखने की आवश्यकता तो थी, परन्तु ज्ञान की कमी के कारण वे इस कार्य में असमर्थ थे। उस समय उनके पास इस कार्य के केवल एक ही रास्ता था-पत्थर के छोटे-छोटे टुकड़ों द्वारा
गणना। वे प्रत्येक वस्तु के लिए पत्थर का एक छोटा टुकड़ा रखा करते थे। इसे गणना की शुरूआत कहा जा सकता है।

इस शुरूआत के पश्चात् मनुष्य ने गिनने के लिए उंगलियों का प्रयोग किया। उंगलियों पर गणनाएं बहुत कम मात्रा में की जा सकती हैं। इसी काल में शिकारियों को यह जानने की इच्छा रहती थी कि उन्होंने कितने जानवरों, पक्षियों आदि का शिकार किया। इसके लिए मानव ने मिट्टी की दीवारों पर पशु-पक्षियों के चित्र बनाने प्रारम्भ कर दिए। इसके उपरान्त 650 बी.सी. में इजिप्ट के निवासियों ने पशु-पक्षियों की आकृतियों को एक विशेष प्रकार के चिन्हों द्वारा गुफाओं में बनाया। ये लोग इन चिन्हों को एक विशेष विधि द्वारा गिनने के काम लाते थे।

इसके बाद मानव ने गिनने के लिए अनेक युक्तियों को खोजा, परन्तु कोई अन्य युक्ति कारगर सिद्ध नहीं हुई। लगभग 600 बी.सी. के दौरान गणना के लिए प्रथम वास्तविक प्रयास चीन में किया गया। यहां पर एक गणन यंत्र ‘अबाकस’ का आविष्कार किया गया। अबाकस एक यांत्रिक गणन यंत्र है, जिसका प्रयोग चीन के बाद जापान, भारत और रूस आदि में होता हुआ सम्पूर्ण विश्व में होने लगा। अबाकस को कम्प्यूटर का सबसे पहला प्रारूप (Model) माना जाता है। यह यंत्र आज भी बच्चों को गिनती सिखाने के काम आता है। अबाकस लकड़ी के आयताकार फ्रेम में तारों में पिरोए गए मोतियों से तैयार किया जाता है।

लकड़ी का यह आयताकार फ्रेम दो भागों, जिनमें इन दोनों भागों में एक भाग छोटा तथा दूसरा बड़ा होता है, में बंटा होता है। छोटा भाग हैवन (Heaven) तथा बड़ा भाग अर्थ (Earth) कहलाता है। इस फ्रेम में बाएं सिरे से दाएं सिरे तक मध्य छड़ को पार करते हुए अनेक समानान्तर तार लगे रहते थे। इन तारों में पांच या उससे अधिक मोती पिरोए जाते थे। चाइनीज़ अबाकस के छोटे भाग की प्रत्येक पंक्ति में दो-दो मोती होते थे जिनमें से प्रत्येक का मान पांच होता था। इसके बड़े भाग में पांच-पांच मोती होते थे जिनमें से प्रत्येक का मान एक होता था। इन मोतियों को मध्य छड़ के समीप सरकाकर वांछित संख्या का प्रदर्शन किया जाता था।

ऊपर से नीचे की ओर प्रत्येक तार क्रमशः इकाई, दहाई, सैंकड़ा, हजार, दस हजार तथा लाख प्रदर्शित करता है। इन मनकों को सरकाकर जोड़, घटाना, गुणा अथवा भाग की क्रियाएं की जाती थीं। चीन में अबाकस का प्रयोग आज भी किया जाता है। अनेक विद्यार्थी Calculator की अपेक्षा अबाकस द्वारा गणनाएं करना सरल मानते हैं और प्रतियोगिताओं में अबाकस द्वारा तीव्र गति से गणना करके परिणाम शीघ्र प्राप्त किए जा सकते हैं।

जापान में बनाया गया अबाकस चीनी अबाकस से पृथक् था। इसमें मध्य छड़ के बाईं ओर एक ही मोती होता था और शेष पांच मोती छड़ के दाईं ओर होते थे। कुछ समय के उपरान्त रूसी अबाकस का निर्माण हुआ। यह चीनी और जापानी दोनों अबाकसों से भिन्न था। इसके आयताकार फ्रेम में मध्य छड़ नहीं थी और प्रत्येक पंक्ति में दस-दस मोती होते थे। सन् 1617 में स्कॉट के गणितज्ञ सर जॉन नेपियर ने एक गणन युक्ति का आविष्कार किया, जिसे नेपियर बोन के नाम से जाना जाता था।

इस युक्ति में हड्डी से बनी दो छड़ें होती हैं। ये छड़ें एक-दूसरे से जुड़ जाती थीं। इस युक्ति द्वारा जोड़, घटाना, गुणा अथवा भाग बड़ी सरलता से किया जा सकता था। जर्मन के विलियन ऑटरेड ने सन् 1620 में स्लाइड रूल नामक गणन यंत्र का आविष्कार किया, जो कि लघुगणक के सिद्धान्त पर कार्य करता है।

प्रथम यांत्रिक गणन यंत्र का आविष्कार सन् 1642 में फ्रांस के निवासी उन्नीस वर्ष के नवयुवक ब्लेज पास्कल ने किया था। इस गणन यंत्र का नाम पास्कलीन रखा गया। इस यांत्रिक गणन यंत्र में गियर्स, पहिए तथा डिस्क्स होती थीं। प्रत्येक पहिए पर शून्य से नौ तक के अंक लिखे होते थे। जब एक पहिया एक पूरा चक्कर घूम जाता था, तब दूसरा पहिया एक स्थान खिसक जाता था अर्थात् इकाई के पहिए के दस बार घूमने पर दहाई का पहिया एक बार घूमता था। इस गणन यंत्र से जोड़ने का कार्य ही किया जा सकता था।

सन् 1671 में जर्मनी के बैरॉन गॉटफ्रीड विलहेल्म वॉन लाइनिज़ ने पास्कलीन में डिस्क्स के स्थान पर दांतेदार गरारियों का प्रयोग किया गया। साथ इसमें कुछ संशोधन भी किए, जिनके फलस्वरूप इससे गुणा तथा भाग की क्रियाएं भी सरलता से की जा सकती थीं। इसके उपरान्त जर्मनी के गणितज्ञ कुम्मेर से एक ऐसी मशीन का विकास किया, जो कितनी भी संख्याओं को किसी भी क्रम में जोड़ अथवा घटा सकती थी। यह मशीन बहुत बड़े पैमाने पर बनाई एवं बेची गयीं, जो बहुत ही लोकप्रिय भी हुईं।

ब्रिटिश गणितज्ञ एवं आविष्कारक चार्ल्स बैबेज (Charles Babbage), जो कि कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में एक प्रोफेसर थे, ने पहली बार सम्पूर्ण कम्प्यूटर की कल्पना की थी और इस कल्पना को साकार रूप देने के लिए उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन और धन अर्पण कर दिया। सन् 1822 में वे एक ऐसी मशीन का कार्यकारी प्रारूप (Working Model) विकसित करने में सफल हो गए, जो कि बीजगणितीय समीकरणों और गणितीय तालिकाओं का दशमलव के तीसरे स्थान तक का शुद्ध मान ज्ञात कर सकती थी। इस मशीन को डिफ्रेंस इंजन (Difference Engine) नाम दिया गया।

इसके बाद उन्होंने इसे और अधिक बड़ा और शक्तिशाली बनाने पर कार्य करना प्रारम्भ किया। अब वे इसे इस प्रकार विकसित करना चाह रहे थे कि गणनाओं का दशमलव के बीसवें स्थान तक शुद्ध परिणाम प्राप्त हो सके। सन् 1842 में उन्होंने संसार के समक्ष एनालिटिकल इंजन (Analytical Engine) की एक नई अवधारणा को प्रस्तुत किया। इसमें आधुनिक कम्प्यूटर के सभी गुण स्थित थे। इसमें इनपुट, प्रोसेस यूनिट, कन्ट्रोल यूनिट, स्मृति तथा आउटपुट की व्यवस्था थी।

चार्ल्स बैबेज एनालिटिकल इंजन के कार्यकारी प्रारूप को देख नहीं पाए। इसके पूरा होने से पूर्व ही उनका देहावसान हो गया था। कम्प्यूटर के क्षेत्र में इस अद्वितीय योगदान के कारण ही चार्ल्स बैबेज को आधुनिक डिजिटल कम्प्यूटर का जनक (Father of Modern Digital Computer) कहा जाता है।

चार्ल्स बैबेज के अधूरे कार्य को उनकी सहयोगिनी एडा ऑगस्ता (Ada Augusta) ने आगे बढ़ाया। एडा ऑगस्ता ने पहली बार एनालिटिकल इंजन में निर्देशों (Instructions) को संग्रहीत किया और इन निर्देशों के अनुरूप एनालिटिकल इंजन से कार्य किया गया, इसीलिए उन्हें विश्व के प्रथम प्रोग्रामर के रूप में जाना गया है। चार्ल्स बैबेज की सहायता से एडा ने बायनरी संख्या पद्धति का विकास किया। एडा के इस कार्य का सम्मान करते हुए अमेरिकी रक्षा विभाग द्वारा अपने यहां प्रयोग किए जाने वाले कम्प्यूटर्स की विशेष भाषा का नाम एडा रखा।

चार्ल्स बैबेज के एनालिटिकल इंजन की परिकल्पना के लगभग पचास वर्षों के उपरान्त अमेरिका के वैज्ञानिक हर्मन होलेरिथ (Herman Hollerith), जो कि अमेरिकन जनसंख्या ब्यूरो में कार्य करते थे, ने इलैक्ट्रिकल टेबुलेटिंग मशीन (Electrical Tabulating Machine) का विकास किया।

इस मशीन में पंच कार्ड्स की सहायता से आंकड़ों को संग्रहीत किया जाता था। इन पंच कार्ड्स को एक-एक करके टेबुलेटिंग मशीन पर रखा जाता था और इस मशीन पर लगी सुईंयां इन कार्ड्स से आंकड़ों को पढ़ने का कार्य करती थीं। जब ये सुईंयां कार्ड पर बने छिद्र के कारण आर-पार हो जाती थीं, तो वे कार्ड के नीचे रखे पारे को छू जाती थीं और विद्युत परिपथ पूर्ण हो जाता था। हर्मन होलेरिथ की इस मशीन की सहायता से जनगणना का कार्य, जो कि लगभग पांच वर्षों तक चलना था, केवल दो वर्षों में ही पूर्ण हो गया था।

सन् 1886 में होलेरिथ ने इन मशीनों के व्यापार के लिए टेबुलेटिंग मशीन कम्पनी (Tabulating Machine Company) नामक एक कम्पनी बनाई। सन् 1911 में इस कम्पनी के साथ कई अन्य कम्पनियां भी जुड़ गईं। होलेरिथ ने सभी कम्पनियों के संयुक्त समूह को एक नया नाम दिया कम्प्यूटर टेबुलेटिंग रिकॉर्डिंग कम्पनी (Computer Tabulating Recording Company)| 

रूस सन् 1924 में इस कम्पनी को एक नया नाम दिया गया इन्टरनेशनल बिजिनेस मशीन कॉरपोरेशन (आईबीएम) [International Business Machine Corporation (IBM)]| सन् 1930 के समाप्त होते-होते विश्व के पंच कार्ड उपकरणों के बाजार के 80% भाग पर IBM का अधिकार हो चुका था। IBM के कारण ही उस समय तक प्रचलित यांत्रिक उपकरणों (Mechanical Equipments) को वैद्युत-यांत्रिक उपकरणों (Electro- Mechanical Equipments) में परिवर्तित कर दिए गए।

बीसवीं सदी के तीसरे और चौथे दशकों में विभिन्न देशों, जर्मनी, ब्रिटेन, संयुक्त राष्ट्र अमेरिका, आदि में विभिन्न प्रकार के कम्प्यूटर्स को बनाने की मानो होड़-सी लग गई। इन दशकों में कम्प्यूटर तकनीक में असामान्य रूप से प्रगति हुई।

सन् 1948 में हारवर्ड यूनिवर्सिटी (Harvard University) के वैज्ञानिक हावर्ड ए. आइकेन (Howard A. Aiken) ने IBM के साथ मिलकर ऑटोमेटिक स्वीकेंस कन्ट्रोल्ड कैलकुलेटर के नाम से पहले इलैक्ट्रॉनिक कम्प्यूटर को विकसित करने में सफलता प्राप्त की। इसे मार्क-प्रथम जैसा सम्मानित नाम दिया गया। अट्ठारह मीटर लम्बे और तीन मीटर ऊंचे इस विशालकाय कम्प्यूटर में 800 किलोमीटर लम्बे तार हजारों की संख्या में वैद्युतचुम्बकीय रिलेज़ थीं, सैंकड़ों इलैक्ट्रॉनिक ट्यूब्स थी और अनेक अन्य घटक थे।

अह कम्प्यूटर 23 अंकों वाली दो संख्याओं को गुणा करके गुणनफल मात्र साढ़े चार सेकेण्ड में प्रस्तुत कर सकता था। यह कम्प्यूटर कार्य करते समय शोर बहुत करता था और बहुत गर्म भी हो जाया करता था। सन् 1946 में संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के पेंसवालिया यूनिवर्सिटी (University of Pennsyvalia) के मूरी स्कूल ऑफ इन्जीनियरिंग (Moore School of Engineering) में इलेक्ट्रॉनिक न्यूमेरिकल इन्टीग्रेटर एण्ड कैलकुलेटर (ENIAC) विकसित किया गया। यह मार्क प्रथम से अधिक तीव्र गति से कार्य करने वाली मशीन थी।

यह मशीन एक सेकेण्ड में 5000 योग तथा 350 गुणा की क्रियाएं कर सकती थी। इसमें स्मृति भण्डारण की व्यवस्था न होने के कारण कुछ कम्प्यूटर वैज्ञानिक इसे कम्प्यूटर कम और कैलकुलेटर अधिक मानते हैं। इसके उपरान्त अनेक वृहत्काय कम्प्यूटर बनाए गए, जो कि बायनरी पद्धति पर कार्य करते थे और इनमें स्मृति भण्डारण की भी व्यवस्था थी। इनके कुछ उदाहरण हैं-EDVAC, EDSAC, UNIVAC-I आदि।

मदरबोर्ड क्या होता है – पीसी के लिए बेस्ट मदरबोर्ड | Motherboards For PC – Top 10 Best Motherboards

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मदरबोर्ड क्या होता है - पीसी के लिए बेस्ट मदरबोर्ड | Motherboards For PC – Top 10 Best Motherboards
मदरबोर्ड क्या होता है - पीसी के लिए बेस्ट मदरबोर्ड | Motherboards For PC – Top 10 Best Motherboards

मदरबोर्ड क्या होता है – पीसी के लिए बेस्ट मदरबोर्ड| Motherboards For PC – Top 10 Best Motherboards

मदरबोर्ड क्या होता है एक बेस्ट मदरबोर्ड एक पीसी (पर्सनल कंप्यूटर) का सबसे महत्वपूर्ण सेंट्रल यूनिट  है। यह एक मुद्रित सर्किट बोर्ड (पीसीबी) है और एक सिस्टम के अन्य महत्वपूर्ण घटकों के लिए मुख्य कनेक्टर है। इसे एक मुख्य बोर्ड या सिस्टम बोर्ड के रूप में भी जाना जाता है और इसे Apple कंप्यूटर के मामले में तर्क बोर्ड के रूप में जाना जाता है। इसे आकस्मिक रूप से मोबो कहा जाता है।

मदरबोर्ड से जुड़े घटक जो पीसी के सामान्य चलने के लिए महत्व रखते हैं, वे हैं बेसिक इनपुट / आउटपुट सिस्टम (BIOS), मेमोरी, सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (CPU), ग्राफिक्स कार्ड, साउंड कार्ड, हार्ड ड्राइव, डिस्क ड्राइव और अन्य बाहरी पोर्ट्स  और बाह्य उपकरणों चुनने के लिए बाजार में एक नहीं, बल्कि कई बेस्ट मदरबोर्ड मॉडल हैं।

यह सिस्टम विशिष्टताओं पर निर्भर करता है जो आप किसी विशेष मदरबोर्ड को खरीदने का निर्णय लेने के लिए चुनते हैं। विभिन्न मदरबोर्ड विभिन्न यूनिट्स को सुपरओर्ट करते हैं इसलिए आपके सिस्टम के लिए आपके द्वारा खरीदे जाने वाले मोबो के प्रकार में सही विकल्प बनाना महत्वपूर्ण है। सीपीयू के दो सबसे बड़े निर्माता आज उन्नत माइक्रो डिवाइस (एएमडी) और इंटेल हैं। दोनों को सपोर्ट करने वाले बेस्ट मदरबोर्ड नहीं खरीद सकते।

यह कनेक्टर्स में अंतर के कारण उनमें से किसी एक का ही समर्थन कर सकता है। एएमडी और इंटेल दोनों का प्रदर्शन समान कैलिबर का होता है जब समान एप्लीकेसन को चलाने की बात आती है, लेकिन कीमतों और प्रदर्शन में भिन्नता इस प्रकार होती है कि वे किस प्रकार का चयन करते हैं।

मदरबोर्ड क्या होता है - पीसी के लिए बेस्ट मदरबोर्ड | Motherboards For PC – Top 10 Best Motherboards
मदरबोर्ड क्या होता है – पीसी के लिए बेस्ट मदरबोर्ड | Motherboards For PC – Top 10 Best Motherboards

पीसी के लिए बेस्ट मदरबोर्ड परिभाषित करने के कई तरीके हैं कि कौन सा मदरबोर्ड सबसे अच्छा मदरबोर्ड है। सर्वेक्षण पूछ रहा है, जो लोकप्रियता से सबसे अच्छा मदरबोर्ड है उपयोगकर्ता द्वारा सर्वश्रेष्ठ मदरबोर्ड के लिए प्रतिक्रियाओं के करीब नहीं हैं। आपको वास्तव में अपने लिए निर्णय लेना है। हाल ही में, तकनीकी वस्तुओं के खरीदारों ने अधिक भेदभाव किया है और उपयोगकर्ता समीक्षाओं पर बहुत भरोसा किया है। मुझे उम्मीद है कि इस लेख में दी गई जानकारी आपको यह जानने के लिए करेगी  कि कौन सा मदरबोर्ड आपके लिए सबसे अच्छा मदरबोर्ड है।

इंटेल D859EMV2L पेंटियम 4 मदरबोर्ड

इस मॉडल में कई विस्तार स्लॉट, USB2.0 कनेक्शन और अच्छी कारीगरी है। यह डिजाइन बहुत बढ़िया होना चाहिए क्योंकि इस बेस्ट मदरबोर्ड बोर्ड में मेमोरी तेजी से ग्रो कर रही है। RDRAM की कीमत अधिक लगती है, लेकिन आपको वह मिलता है जो आप भुगतान करते हैं। मदरबोर्ड मैनुअल का कहना है कि इसे 350 वाट बिजली की आपूर्ति की आवश्यकता है। पूरी तरह से भरा हुआ है जो पर्याप्त नहीं है। सुनिश्चित करें कि आपके पास 550-वाट बिजली की आपूर्ति है। उस शक्ति से एक मदरबोर्ड  सुपरसोनिक हो जाती है, पूरी तरह से भरी हुई भी।

इंटेल D945GTP डेस्कटॉप मदरबोर्ड

इस बोर्ड की ताकत इंटेल ब्रांड है और इसमें IEEE-1394 का समर्थन है। मदरबोर्ड मैनुअल सलाह की तुलना में यह मदरबोर्ड एक कदम उच्चतर बिजली की आपूर्ति के साथ बेहतर काम करता है। एक 550 वाट बिजली की आपूर्ति अच्छी तरह से काम करती है।

Asus M4A78T-E डेस्कटॉप मदरबोर्ड – AMD – सॉकेट

यह मदरबोर्ड बहुत स्थिर है और आश्चर्य के बिना काम करता है। कई ओवरक्लॉकिंग विकल्प हैं, जिन्हें लागू करना मुश्किल नहीं है। इसमें बहुत अच्छा छापा नियंत्रक और बाहरी COM1 कनेक्टर है। ऑडियो शानदार है। यह सबसे अच्छा मदरबोर्ड के लिए एक अच्छा उम्मीदवार लगता है, जहां तक ​​हम बता सकते हैं। मदरबोर्ड मैनुअल और समन्वित वेबसाइट महान हैं। जो लोग अपना कंप्यूटर बनाते हैं, उनके लिए कई सहायक सुविधाएँ हैं।

इंटेल D915GEV डेस्कटॉप मदरबोर्ड

यह एक और बेस्ट मदरबोर्ड है जिसमें इंटेल ब्रांड निर्भरता, 4 जीबी मेमोरी, 800 एफएसबी, शानदार ऑन-बोर्ड ग्राफिक्स और ऑडियो प्रदर्शन है। इस मदरबोर्ड के अधिकांश खरीदारों की शून्य समस्याएं हैं। यदि आपके पास अपना कंप्यूटर बनाने से पहले कुछ अनुभव है , तो मदरबोर्ड मैनुअल पर्याप्त है ।

MSI प्लेटिनम P7N SLI प्लेटिनम डेस्कटॉप मदरबोर्ड

यह आश्चर्यजनक बेस्ट मदरबोर्ड बहुत स्थिर और पूर्ण विशेषताओं वाला है। ओवरक्लॉकिंग फ़ंक्शन स्वचालित है जो अच्छा है। इसे अपग्रेड करना आसान है, अगर आप इसे MSI यूटिलिटीज के साथ करते हैं। SATA कनेक्शन तक पहुंचना इतना आसान नहीं था और मदरबोर्ड मैनुअल बेहतर हो सकता था। यह बोर्ड सब से बड़ा है और कुछ मामलों के लिए नई खरीद आवश्यक हो सकती है। सही मैनुअल से कम के साथ भी, यह काम करने के लिए समग्र रूप से आसान लग रहा है । कुल मिलाकर, डिज़ाइन ने इसे उपयोग करने में आसान बनाने में मदद की। मदरबोर्ड ड्राइवर अपडेट करने के लिए सरल हैं।

GigaByte GA-X58A-UD7 डेस्कटॉप मदरबोर्ड

इसके आसपास कोई रास्ता नहीं है, यह सबसे अच्छा मदरबोर्ड हो सकता है लेकिन यह बच्चा महंगा है। डिजाइन भी भयानक लग रहा है और आप लगभग शक्ति महसूस कर सकते हैं जब आप इसे पकड़ते हैं और इसे देखते हैं। इसमें 10 SATA पोर्ट हैं और हर कोई 6GB तैयार है। ओवरक्लॉकिंग आसान है और इसमें स्थिर रहने की शानदार क्षमता है। बेस्ट मदरबोर्ड मैनुअल के साथ काम करना आसान हो सकता है ।

दूसरा आईडीई पोर्ट कुछ कनेक्शनों के लिए बहुत दूर है और इसमें री-केबलिंग की आवश्यकता होती है, जो एक दर्द है। इस महान मदरबोर्ड में एल ई डी प्रोसेसर और दो PCIEX16 स्लॉट्स का उपयोग करने के लिए एलईडी है। कीमत के बावजूद, इसे सर्वश्रेष्ठ मदरबोर्ड में से एक के रूप में रेट करना है।

फॉक्सकॉन एमबी 661 एमएक्स प्लस मदरबोर्ड

यह एक मिड रेंज प्राइस मदरबोर्ड है। यह एक सॉकेट 478 CPU MOBO है लेकिन इसमें दोहरी मेमोरी क्षमता नहीं है। पुराने 478 सॉकेट बोर्ड को एक्सचेंज / बदलने के लिए देख रहे लोगों के लिए यह सबसे अच्छा विकल्प है। बोर्ड स्थिर है और मदरबोर्ड मैनुअल बहुत अच्छा है।

ABIT KV-85 डेस्कटॉप मदरबोर्ड

इस मदरबोर्ड की सुविधाओं के लिए इसकी अच्छी कीमत है। यह VIA K8M800 चिपसेट का उपयोग करने में आसान है। एक समस्या एक गलत BIOS तापमान रीडिंग थी जो थोड़ी परेशान है। सभी पहली बार कंप्यूटर बिल्डरों को मदरबोर्ड मैनुअल बहुत मददगार मिलेगा। अधिकांश बिल्ड-अप पहली बार काम करते हैं। ऑपरेटिंग स्टेटस तक काम करना कितना आसान है। कुल मिलाकर, यह उन लोगों के लिए एक बेहतरीन विकल्प है जो अपना पहला कंप्यूटर बनाने में लगे हैं।

असूस AI लाइफस्टाइल P5K-E डेस्कटॉप मदरबोर्ड

इस मदरबोर्ड को उपयोगकर्ताओं द्वारा एक महान सौदे के रूप में मूल्यांकित किया गया है, लेकिन मूल्य में वृद्धि हुई है, इसलिए विनिर्देशों में कुछ को उन्नत किया जाना चाहिए। यह आंतरायिक वाईफाई समस्याओं के बारे में केवल कुछ शिकायतों से भरा हुआ है।

इंटेल D850GBC मदरबोर्ड

यह किसी भी बिल्ड-अप के लिए एक और शानदार इंटेल मदरबोर्ड है। यह एक प्रो मदरबोर्ड माना जाता है और इसमें महान आरडीआरएएम होता है लेकिन अगर कुछ गलत हो जाता है, तो आरडीआरएएम कई बार, प्राप्त करने के लिए बहुत महंगा और कठिन है । इस मदरबोर्ड पर 800 बस फीचर से है। इस बेस्ट मदरबोर्ड को पूर्ण क्षमता पर काम करने के लिए न्यूनतम 1Gb RDRAM की आवश्यकता होती है और यदि आप इसे वहन कर सकते हैं तो यह 2Gb तक जा सकता है। मदरबोर्ड मैनुअल शुरुआती लोगों के लिए नहीं है।

पीसी के लिए बेस्ट मदरबोर्ड

AMD मदरबोर्ड

एएमडी जो अभिनव माइक्रोप्रोसेसर और ग्राफिक्स समाधान का एक प्रमुख वैश्विक प्रदाता है और जब प्रोसेसर आर्किटेक्चर की बात आती है, तो एएमडी इंटेल को आउटसोर्स करता है। AMD मदरबोर्ड को काफी हद तक इंटेल द्वारा उत्पादित लोगों की तुलना में अधिक शक्तिशाली और मिलनसार के रूप में देखा जाता है।

जबकि एएमडी ने अब तक प्रमुख रूप से व्यापार बाजार पर ध्यान केंद्रित किया है, यह होम कंप्यूटिंग और गेमिंग बाजार को लक्षित करने के लिए कुछ विशेषताओं के साथ कम जटिल, छीन लिए गए मदरबोर्ड की पेशकश करना चाहता है। यह अपने बेहद बड़े मदरबोर्ड डिजाइनों के लिए गेम और ग्राफिक डिजाइनरों के बीच भी लोकप्रिय है, जो एक बार में बड़ी मात्रा में रैम और कई ग्राफिक्स कार्ड को आसानी से शामिल कर सकते हैं।

ऐसे उदाहरण हैं जहां यह अधिक रैम को स्टोर कर सकता है जो वर्तमान ऑपरेटिंग सिस्टम को अनुमति देता है और कई ग्राफिक कार्ड और 2 सीपीयू को एक साथ चला सकता है। हालांकि, अधिकांश मदरबोर्ड को लगभग सभी कंप्यूटर निर्माताओं के बजट में फिट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। उनका उपयोग केवल AMD CPU के साथ किया जा सकता है, जो कि उनके CPU के अधिक बेचने के लिए एक प्रचार रणनीति है। कुछ समय मदरबोर्ड की कीमत में छूट दी जाती है और इसे एएमडी सीपीयू की बिक्री को प्रोत्साहित करने के लिए नुकसान के रूप में बेचा जा सकता है जो कि वास्तविक मनीमेकर है।

पीसी के लिए बेस्ट मदरबोर्ड – बेस्ट मदरबोर्ड खरीदते समय सुनिश्चित करें कि आप बेस्ट मदरबोर्ड मैन्युफैक्चरिंग साइट पर पूरी तरह से रिसर्च करते हैं और इससे पहले कि आप अपनी जरूरत के सभी प्रोडक्ट स्पेसिफिकेशन के बारे में पढ़ लें।

अपने कंप्यूटर के लिए सबसे अच्छा मदरबोर्ड का चयन कैसे करें|How to Select the Best Motherboard For Your Computer

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अपने कंप्यूटर के लिए सबसे अच्छा मदरबोर्ड का चयन कैसे करें|How to Select the Best Motherboard For Your Computer
अपने कंप्यूटर के लिए सबसे अच्छा मदरबोर्ड का चयन कैसे करें|How to Select the Best Motherboard For Your Computer

अपने कंप्यूटर के लिए सबसे अच्छा मदरबोर्ड का चयन कैसे करें|How to Select the Best Motherboard For Your Computer

अपने कंप्यूटर के लिए सबसे अच्छा मदरबोर्डजबकि आज की तकनीक से अपना कंप्यूटर असेम्बल करना अपेक्षाकृत आसान है; कंप्यूटर का निर्माण करने के लिए सबसे अच्छा मदरबोर्ड चुनना महत्वपूर्ण है जो आपकी खुद की अनूठी जरूरतों को पूरा करता है।

अपने खुद के कंप्यूटर के निर्माण का मतलब पैसे की बचत कर सकता है और एक कस्टम निर्दिष्ट प्रणाली का निर्माण भी कर सकता है – इसका मतलब है कि वास्तव में आप जो चाहते हैं उसे प्राप्त करना। सभी कंप्यूटर कंपोनेंट्स  महत्वपूर्ण हैं (कंप्यूटर उनके बिना नहीं चल सकता है) लेकिन मदरबोर्ड आपके कंप्यूटर सिस्टम का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है और आपको इस बात की स्पष्ट समझ होनी चाहिए कि आप क्या चाहते हैं, आप इसे क्यों चाहते हैं, और कैसे आप ‘ चुनिंदा कंप्यूटर के एक बार असेम्बल होने के संचालन को प्रभावित करता है। आपको यह जानना होगा कि अपने कंप्यूटर के लिए सबसे अच्छा मदरबोर्ड कैसे चुनें।

आपके कंप्यूटर सिस्टम के सभी घटक मदरबोर्ड से जुड़ते हैं; यह प्रमुख पार्ट्स  है और इसलिए आपको इसे समझने की आवश्यकता है। इस लेख के प्रयोजनों के लिए, हम मानेंगे कि आप मौजूदा कंप्यूटर सिस्टम में मदरबोर्ड को बदलने के बजाय अपना खुद का कंप्यूटर असेम्बल कर  रहे हैं। लेकिन या तो मामले में, यह सीखना कि सबसे अच्छा मदरबोर्ड को कैसे देखना चाहिए और आपके कंप्यूटर के प्रदर्शन को कैसे प्रभावित करता है।

सबसे पहले, विचार करें कि आप किस सीपीयू का उपयोग कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, इंटेल और एएमडी सीपीयू दोनों अलग-अलग मदरबोर्ड का उपयोग करते हैं क्योंकि प्रत्येक एक अलग सॉकेट प्रकार का उपयोग करता है। फिर, आपको प्रोसेसर की गति को भी समझना होगा; आपके मदरबोर्ड को चयनित सीपीयू का समर्थन करने की आवश्यकता है। आज के परिवेश में तेजी से हो रहे तकनीकी परिवर्तनों के साथ, उपयोग में सॉकेट प्रकारों की एक विस्तृत विविधता है।

प्रोसेसर में समान संख्या में पिन होते थे, तकनीक में तेजी से बदलाव के साथ, मदरबोर्ड के सॉकेट्स को अधिक शक्ति प्रदान करने और नई सुविधाओं का समर्थन करने के लिए अधिक पिन की आवश्यकता होती है। नए प्रोसेसर सीपीयू के बजाय सॉकेट पर पिन लगाना शुरू कर रहे हैं, जिससे आसान सेट-अप की अनुमति मिलती है। आपको सही CPU (और सॉकेट प्रकार) को सही मदरबोर्ड से मेल खाना चाहिए। सीपीयू को चिपसेट के माध्यम से मदरबोर्ड घटकों के साथ संचार करने के लिए सॉकेट की आवश्यकता होती है।

सीपीयू निर्णय लेता है कि किस चिपसेट को खरीदना और उपयोग करना है। एक तेज चिपसेट कुशल डेटा स्थानांतरण और बिजली प्रबंधन की अनुमति देता है; चिपसेट सीपीयू, मेमोरी और स्थानीय बस के बीच सभी संचार को नियंत्रित करता है। चिपसेट के दो प्रमुख हिस्से हैं: नॉर्थब्रिज और साउथब्रिज। सीपीयू सिस्टम रैम (एजीपी ग्राफिक्स कार्ड) या पीसीआई-ई (ग्राफिक्स कार्ड) के साथ नॉर्थब्रिज के माध्यम से संचार करता है।

सीपीयू भी साउथब्रिज से संवाद करने के लिए नॉर्थब्रिज का इस्तेमाल करता है। नॉर्थब्रिज सीपीयू के करीब है और तेज है; CPU और धीमे से साउथब्रिज आगे है। यूएसबी पोर्ट, पीसीआई स्लॉट, एसएटीए कनेक्शन और अन्य घटकों के संचार को दक्षिण-दक्षिण द्वारा नियंत्रित किया जाता है।

बस एक सर्किट है जिसके माध्यम से डेटा संचारित होता है; यह मदरबोर्ड के कुछ हिस्सों को जोड़ता है। बस का आकार महत्वपूर्ण है क्योंकि आकार, या चौड़ाई, निर्धारित करता है कि कितना डेटा प्रेषित किया जा सकता है। मदरबोर्ड का चयन करते समय, मेगाहर्ट्ज में मापा गया बस गति प्रासंगिक है। गति घटकों संचार की गति और डेटा हस्तांतरण को निर्धारित करती है; इसलिए एक तेज बस गति तेजी से डेटा हस्तांतरण और तेजी से चल रहे अनुप्रयोगों की अनुमति देती है।

CPU को नॉर्थब्रिज से जोड़ने वाला सर्किट फ्रंट साइड बस (FSB) है। एफएसबी गति का शीर्ष अंत 1666 मेगाहर्ट्ज है – उच्च, तेज और आमतौर पर, अधिक महंगा। गति विकसित हो रही है और नई तकनीक के साथ अपग्रेड किया जा रहा है, न केवल इसलिए क्योंकि तेजी से बेहतर है बल्कि अपग्रेड और नए अनुप्रयोगों से गति की मांग के साथ सिंक्रनाइज़ करना है। अधिकांश उपकरणों और प्रौद्योगिकी के साथ, सबसे धीमा घटक पूरे ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए एक गति अड़चन होगा – एक धीमी एफएसबी गति के साथ, आपका कंप्यूटर धीमी गति से भी काम करेगा।

अपने सबसे अच्छा मदरबोर्ड का चयन करते समय आपको मेमोरी पर विचार करने की आवश्यकता होती है और आप अपने कंप्यूटर सिस्टम के लिए कितनी मेमोरी चाहते हैं। जब तक आप गेमर नहीं हैं, या बहुत सारे ग्राफिक्स या वीडियो काम नहीं करते हैं, तब तक 2 जीबी रैम पर्याप्त होना चाहिए। अधिकांश मदरबोर्ड आज कम से कम दो मेमोरी स्लॉट के साथ आते हैं, और कई चार के साथ आते हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए कि आपके पास भविष्य के लिए पर्याप्त विस्तार योग्य मेमोरी क्षमता है (भले ही आप 2 जीबी रैम से शुरू करें), 4 स्लॉट के साथ एक सबसे अच्छा मदरबोर्ड खरीदें।

अपने कंप्यूटर के लिए सबसे अच्छा मदरबोर्ड का चयन कैसे करें|How to Select the Best Motherboard For Your Computer
अपने कंप्यूटर के लिए सबसे अच्छा मदरबोर्ड का चयन कैसे करें|How to Select the Best Motherboard For Your Computer

अपने कंप्यूटर के लिए सबसे अच्छा मदरबोर्ड

आपके कंप्यूटर बिल्ड के लिए सबसे अच्छा मदरबोर्ड का चयन करते समय अन्य विचार कीबोर्ड, माउस, प्रिंटर, फ्लैश ड्राइव, बाहरी ड्राइव और डिजिटल कैमरा जैसे परिधीय हैं। यदि आप अतिरिक्त कार्ड (जैसे ग्राफिक्स कार्ड, वायरलेस नेटवर्क कार्ड, साउंड कार्ड) जोड़ने की योजना बनाते हैं, तो आपको बाह्य उपकरणों को संभालने के लिए पर्याप्त पीसीआई स्लॉट की आवश्यकता होगी।

अधिकांश मदरबोर्ड में चार यूएसबी स्लॉट और दो और होते हैं जो केस पर यूएसबी पोर्ट से जुड़ते हैं। आपको बैटरी पर भी विचार करने की आवश्यकता है (आपको अपने मदरबोर्ड में हर चार से 5 साल में बैटरी बदलने की आवश्यकता होगी – यदि आप अपने कंप्यूटर को लंबे समय तक रखते हैं) और प्रीलोडेड BIOS (जो आपके कंप्यूटर को बूट करता है)।

जिन लोगों ने अभी तक अपने स्वयं के कंप्यूटर का निर्माण नहीं किया है, वे अक्सर चिंतित होते हैं कि वे उस प्रणाली का निर्माण नहीं कर पाएंगे जो वे चाहते हैं, सटीक, कुशलतापूर्वक और प्रभावी ढंग से लागत। हालांकि, अपने कंप्यूटर के लिए सबसे अच्छा मदरबोर्ड – सीखने का सबसे अच्छा तरीका, पैसे बचाने के लिए, और एक कस्टम निर्मित प्रणाली प्राप्त करना है, बस इसे बनाना है!

बेस्ट उपयोगी टिप्स सर्वश्रेष्ठ गेमिंग मदरबोर्ड चुनने के लिए | Useful Tips To Choose The Best Gaming Motherboard

अपने कंप्यूटर के लिए सबसे अच्छा मदरबोर्ड – मदरबोर्ड पूरे कंप्यूटर सिस्टम का हार्ट होता  है। यह वह भाग है जो अन्य सभी भागों को एक साथ जोड़ता है और सुनिश्चित करता है कि वे आसानी से चलें। जैसे, सबसे अच्छा गेमिंग मदरबोर्ड – सबसे अच्छा मदरबोर्ड चुनना सबसे महत्वपूर्ण कार्य है जो आपको गेमिंग कंप्यूटर का निर्माण करते समय करना होगा। यह लेख आपको सिखाएगा कि सबसे अच्छा गेमिंग मदरबोर्ड कैसे चुनें।

सबसे पहले आप तय करें कि किस प्रकार का सीपीयू उपयोग करना है – यह मदरबोर्ड चुनने के लिए अप्रासंगिक लग सकता है। वास्तव में, यह एक सबसे महत्वपूर्ण बात है जो आपको मदरबोर्ड का चयन करने से पहले करनी चाहिए। इसका कारण यह है कि सीपीयू का प्रकार आपके लिए आवश्यक मदरबोर्ड के प्रकार को निर्धारित करेगा। उदाहरण के लिए, यदि आप एक इंटेल सीपीयू चुनते हैं, तो आपको सॉकेट 775 मदरबोर्ड प्राप्त करना होगा अन्यथा सीपीयू मदरबोर्ड में फिट नहीं होगा। सीपीयू के प्रकार पर निर्णय लेने से आपको सबसे अच्छा गेमिंग सबसे अच्छा मदरबोर्ड चुनने पर बेहतर विकल्प बनाने में मदद मिलेगी।

निर्धारित करें कि क्या मदरबोर्ड आपके द्वारा चुने गए सीपीयू के प्रकार का समर्थन करता है – जैसा कि पहले उल्लेख किया गया है, यदि आप एक इंटेल सीपीयू का उपयोग कर रहे हैं, तो आपको एक सॉकेट 775 मदरबोर्ड प्राप्त करना होगा जबकि एक एएमडी सीपीयू के लिए एक सॉकेट एएम 2 मदरबोर्ड की आवश्यकता होती है। इसके अलावा, कुछ पुराने सॉकेट 775 मदरबोर्ड दोहरे कोर प्रोसेसर (भले ही वे एक ही सॉकेट का उपयोग करते हैं) या क्वाड-कोर प्रोसेसर का समर्थन नहीं करते हैं। सबसे अच्छा मदरबोर्ड खरीदने से पहले पुष्टि करने के लिए निर्माता की वेबसाइट देखें।

ओवरक्लॉकिंग की सुविधा – यदि आप अपने सीपीयू को ओवरक्लॉक कर रहे हैं, तो आपको एक मदरबोर्ड प्राप्त करना होगा जो आपको छोटे वेतन वृद्धि में एफएसबी गति और सीपीयू वोल्टेज को बदलने की अनुमति देता है।

रैम सपोर्ट और मेमोरी स्लॉट नंबर – आपका मदरबोर्ड DDR2 रैम का समर्थन करने में सक्षम होना चाहिए, एक साधारण कारण के लिए कि DDR2 वर्तमान में बाजार में सबसे तेज रैम है। नोट करने के लिए अतिरिक्त चीज रैम की अधिकतम गति है जो मदरबोर्ड का समर्थन करता है। कुछ मदरबोर्ड केवल DDR2 667MHz RAM तक का समर्थन कर सकते हैं जबकि नवीनतम DDR2 1066MHz तक का समर्थन कर सकते हैं।

इसके अलावा, आप भविष्य में अपनी रैम को अपग्रेड कर सकते हैं, इसलिए आपके वर्तमान मदरबोर्ड में कम से कम 4 मेमोरी स्लॉट होने चाहिए और यह 8GB तक रैम को सपोर्ट कर सकता है ताकि आपके पास भविष्य में अपग्रेड करने का विकल्प हो।

SLI / क्रॉसफायर तैयार है – SLI / क्रॉसफायर रेडी मदरबोर्ड का मतलब है कि आप ग्राफिक्स को रेंडर करने के लिए दो समान उच्च प्रदर्शन वाले ग्राफिक्स कार्ड का उपयोग कर सकते हैं, इस प्रकार एक तेज और अधिक यथार्थवादी वीडियो प्रभाव प्राप्त कर सकते हैं। प्रत्येक मदरबोर्ड इस सुविधा का समर्थन नहीं करता है। जैसा कि वीडियो प्रभाव अधिक से अधिक उन्नत हो रहे हैं, यह जल्द ही होगा कि एसएलआई या क्रॉसफायर तकनीक वीडियो प्रदर्शन के लिए मानक बन जाती है। इसलिए, भले ही आप अभी इस तकनीक का उपयोग नहीं कर रहे हों, फिर भी SLI या क्रॉसफायर फीचर के साथ सबसे अच्छा मदरबोर्ड गेमिंग मदरबोर्ड प्राप्त करना उचित है।

SATA 2 नियंत्रक – SATA2 SATA 1 की गति से दोगुनी गति से डेटा स्थानांतरित कर सकता है। जब गेमिंग की बात आती है, तो हर एक गति मायने रखती है और गति में वृद्धि आपके गेम में निर्णायक कारक हो सकती है। एक SATA 2 पोर्ट SATA 1 उपकरणों के साथ पीछे की ओर संगत है, लेकिन दूसरे तरीके से नहीं। आपके लिए मदरबोर्ड प्राप्त करना बेहतर है जो SATA 2 उपकरणों का समर्थन करता है। इसके अलावा, यदि आप RAID का उपयोग कर रहे हैं, तो आपको एक सबसे अच्छा मदरबोर्ड प्राप्त करना होगा जिसमें चार एसएटीए 2 पोर्ट हैं।

अतिरिक्त विशेषताएँ – गेमिंग मदरबोर्ड चुनते समय आप अतिरिक्त सुविधाओं जैसे कि अतिरिक्त USB2.0 पोर्ट, फायरफॉक्स, इंटीग्रेटेड लैन और फ्रंट-पैनल एलईडी पर विचार कर सकते हैं। मदरबोर्ड में से कुछ में अन्य की तुलना में अधिक विशेषताएं हैं और मतभेदों को देखने के लिए आपको इसकी तुलना करनी होगी।

सबसे अच्छा मदरबोर्ड – सबसे अच्छा मदरबोर्ड गेमिंग मदरबोर्ड में एकीकृत साउंड और वीडियो जैसी विशेषताएं उतनी महत्वपूर्ण नहीं हैं, क्योंकि वे एक अच्छे गेमिंग सत्र में अच्छा योगदान नहीं दे सकते हैं। गेमिंग कंप्यूटर के लिए, आपको एक अलग ग्राफिक्स कार्ड और साउंड कार्ड प्राप्त करना होगा ताकि बाजार में नवीनतम गेम खेला जा सके।

कंप्यूटर मदरबोर्ड क्या है ? और क्या काम करता है | What is a Computer Motherboard – Best Information In Hindi

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कंप्यूटर मदरबोर्ड क्या है ? और क्या काम करता है | What is a Computer Motherboard – Best Information In Hindi
कंप्यूटर मदरबोर्ड क्या है ? और क्या काम करता है | What is a Computer Motherboard – Best Information In Hindi

कंप्यूटर मदरबोर्ड क्या है ? और क्या काम करता है | What is a Computer Motherboard – Best Information In Hindi

कंप्यूटर मदरबोर्ड क्या होता है – कंप्यूटर सिस्टम के सभी महत्वपूर्ण आंतरिक घटक एक फ्लैट आयताकार सर्किट बोर्ड से जुड़े होते हैं जिन्हें कंप्यूटर का मदरबोर्ड कहा जाता है। यदि सीपीयू को कंप्यूटर के “मस्तिष्क” के रूप में जाना जाता है, तो मदरबोर्ड को “दिल” के रूप में माना जा सकता है। कंप्यूटर शब्दों में, मदरबोर्ड को लॉजिक बोर्ड, मेन बोर्ड या सिस्टम बोर्ड भी कहा जाता है। आमतौर पर संक्षिप्त रूप में “मोबो” या एमबी।

कंप्यूटर मदरबोर्ड आपके कंप्यूटर की गति को नहीं बढ़ाते हैं, लेकिन वे आपके कंप्यूटर के सबसे महत्वपूर्ण हिस्सों में से एक हैं क्योंकि वे सभी घटकों को जोड़ते हैं जो आपके कंप्यूटर सिस्टम की कार्यक्षमता को सक्षम करते हैं।

आपके कंप्यूटर के अधिकांश आंतरिक घटक सीधे सॉकेट या स्लॉट के माध्यम से मदरबोर्ड से जुड़े होते हैं। मदरबोर्ड में एजीपी वीडियो कार्ड, पीसीपी वीडियो और नेटवर्क कार्ड के लिए परिधीय घटक इंटरकनेक्ट (पीसीआई) स्लॉट और हार्ड ड्राइव और ऑप्टिकल ड्राइव के लिए एक एकीकृत ड्राइव इलेक्ट्रॉनिक्स (आईडीई) इंटरफ़ेस को एकीकृत करने के लिए एक त्वरित ग्राफिक्स पोर्ट (एजीपी) है। जुडिये ड्राइव कंप्यूटर मदरबोर्ड में बाह्य परिधीय के लिए कई पोर्ट होते हैं जैसे मॉनिटर, प्रिंटर, कीबोर्ड, माउस , स्पीकर और रिमूवेबल डिवाइस।

कंप्यूटर घटकों को मदरबोर्ड में बनाया जा सकता है। कुछ उदाहरण एकीकृत साउंड कार्ड, ग्राफिक्स कार्ड या नेटवर्क इंटरफेस कार्ड (एनआईसी) हैं। अधिक शक्तिशाली संस्करणों के पक्ष में एम्बेडेड कंप्यूटर घटक अक्षम हो सकते हैं।

विशेष रूप से, कंप्यूटर मदरबोर्ड में सॉकेट होते हैं जो कुछ प्रकार के सीपीयू को समायोजित कर सकते हैं। कुछ मदरबोर्ड केवल एएमडी सीपीयू का समर्थन करते हैं, अन्य केवल इंटेल प्रोसेसर के साथ संगत होते हैं। कोई भी मदरबोर्ड अभी तक सभी प्रकार के सीपीयू का समर्थन नहीं कर सकता है।

कंप्यूटर मदरबोर्ड क्या है ? और क्या काम करता है | What is a Computer Motherboard – Best Information In Hindi
कंप्यूटर मदरबोर्ड क्या है ? और क्या काम करता है | What is a Computer Motherboard – Best Information In Hindi

कंप्यूटर मदरबोर्ड में एक नार्थ  ब्रिज चिपसेट और एक साउथब्रिज चिपसेट भी शामिल है। नॉर्थब्रिज हार्ड डिस्क ड्राइव और रैम को मदरबोर्ड से जोड़ता है, और साउथब्रिज अन्य कंप्यूटर घटकों जैसे वीडियो और साउंड कार्ड को मदरबोर्ड से जोड़ता है।

इसके अलावा, मदरबोर्ड में एक मूल इनपुट / आउटपुट सिस्टम (BIOS) चिप होता है जो कंप्यूटर हार्डवेयर और हार्ड डिस्क ड्राइव पर बिजली की आपूर्ति की खराबी की जांच करता है। हार्डवेयर का परीक्षण करने के बाद, BIOS चिप कंप्यूटर के सीपीयू को शक्ति प्रदान करता है। जब आप अपने पीसी को बूट करते हैं, तो BIOS पहला प्रोग्राम है जिसे आपका कंप्यूटर विंडोज या आपके पसंदीदा ऑपरेटिंग सिस्टम पर जाने से पहले चलाता है।

कंप्यूटर मदरबोर्ड क्या है –

कंप्यूटर मदरबोर्ड में एक वास्तविक समय बैटरी चालित घड़ी चिप होती है जो समय निर्धारित करती है। इसलिए, आप सटीक समय जान सकते हैं, भले ही इसका उपयोग हफ्तों या महीनों के लिए न किया गया हो। सीधे शब्दों में कहें तो मदरबोर्ड सीपीयू, रैम, हार्ड डिस्क ड्राइव, ऑप्टिकल ड्राइव, ग्राफिक्स कार्ड, साउंड कार्ड और अन्य कंप्यूटर हार्डवेयर खोजने और मिलान करने के लिए एक हब के रूप में कार्य करता है।

आपको एक कंप्यूटर मदरबोर्ड के बारे में क्या जानना जरुरी होता हैं?What do you need to know about a computer motherboard?

आपके सिस्टम मदरबोर्ड आपके कंप्यूटर सिस्टम की कार्यक्षमता में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मदरबोर्ड की जिम्मेदारी अपने सभी पोर्ट और स्लॉट का उपयोग करके अन्य सभी घटकों को एक साथ जोड़ने की है। मदरबोर्ड वह है जो सभी कंप्यूटर सहायक उपकरण से जुड़ा हुआ है और किसी भी कंप्यूटर सिस्टम से बिल्कुल अभिन्न है। मदरबोर्ड के बिना कंप्यूटर कंप्यूटर नहीं है।

कंप्यूटर मदरबोर्ड बनाने वाले कई तत्व हैं। यह ये तत्व या घटक हैं जो कंप्यूटर सिस्टम को संचालित करने के लिए मदरबोर्ड की सहायता से एक साथ लिंक करते हैं। मदरबोर्ड एक मुद्रित सर्किट बोर्ड (पीसीबी) है जो कई ट्रांजिस्टर और प्रतिरोधों से मिलकर बनता है जो कुछ विशेषताओं और कार्यक्षमता की अनुमति देता है।

आपके सिस्टम मदरबोर्ड यह सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार है कि आपके कंप्यूटर में आपके घटकों के आधार पर वीडियो और ध्वनि और आवश्यक विशेष प्रभाव हैं। जब भी आप अपने सिस्टम में एक नया प्रोग्राम जोड़ते हैं या एक नया हार्डवेयर डिवाइस इंस्टॉल करते हैं, तो यह आपका मदरबोर्ड है जो यह सुनिश्चित करता है कि आप इसके साथ सहभागिता कर सकें। यह व्यक्तिगत घटकों के साथ संचार करता है जिससे आप अपने माउस या कीबोर्ड का उपयोग करके सॉफ्टवेयर के साथ कोमनिकेट कर सकते हैं। आपके सिस्टम बोर्ड में विभिन्न घटकों के बीच शक्ति को विनियमित करने की जिम्मेदारी भी है।

यदि आपके पास एक पुराना कंप्यूटर मदरबोर्ड है, तो आपको एक नया खरीदना होगा यदि आप नवीनतम संवर्द्धन या बस तेज प्रदर्शन का अनुभव करना चाहते हैं। ये बोर्ड अपेक्षाकृत सस्ते हैं और स्व-स्थापित करने के लिए बहुत मुश्किल नहीं है। यदि आप ऑनलाइन खोज करते हैं तो आप कई प्रतिस्पर्धी मूल्य वाले बोर्ड पा सकते हैं। यदि आप अपने कंप्यूटर सिस्टम के लिए एक नया बोर्ड खरीदने में रुचि रखते हैं, तो यह महत्वपूर्ण है कि आप एक के लिए जाएं जो सभी नवीनतम तकनीकों का समर्थन करता है ताकि यह खरीदारी को सही ठहराते हुए आपको एक लाइफ दे।

कंप्यूटर मदरबोर्ड के पार्ट्स | Motherboard Parts Explained

कंप्यूटर मदरबोर्ड एक महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स है जो कंप्यूटर पर डेटा के सुचारू प्रसंस्करण के लिए जिम्मेदार है। मदरबोर्ड को थोड़ा नुकसान हुआ यानि इससे पूरे सिस्टम को नुकसान होगा, क्योंकि मदरबोर्ड संलग्न सभी हार्डवेयर घटकों के लिए वेस  है। मदरबोर्ड में पोर्ट का उपयोग करके ग्राफिक्स कार्ड, रैम, हार्ड डिस्क, ऑप्टिकल ड्राइव, सभी को एक इकाई में जोड़ा जाता है। सामान्य मदरबोर्ड कंपोनेंट्स  की सूची नीचे दी गई है:

सीपीयू सॉकेट: यह खंड एक जगह है जो एक प्रोसेसर को रखा जाता है यहां तक ​​कि कई छोटे छेद हैं जो पिन प्रोसेसर लगाने के लिए उपयोग किए जाते हैं।

RAM स्लॉट: मेमोरी मॉड्यूल (RAM) स्थापित करने के लिए स्थान। एक आधुनिक मदरबोर्ड के लिए, आमतौर पर 4 स्लॉट्स होते हैं DDR2 PC 6400 जिसमें 8GB तक की क्षमता और दोहरे चैनल कॉन्फ़िगरेशन के लिए समर्थन होता है।

पावर पोर्ट: पुराने प्रकार 20 +4 पिन का उपयोग करते हैं, जबकि नए प्रकार 24 +4 पिन का उपयोग करते हैं। इस पोर्ट के माध्यम से बिजली की आपूर्ति के माध्यम से आपूर्ति की जाने वाली प्रणाली द्वारा आवश्यक सभी बिजली।

सीरियल एटीए पोर्ट: इस पोर्ट का उपयोग करके नया प्रकार मदरबोर्ड। आमतौर पर 4 से 8 होते हैं। इसका उपयोग हार्ड डिस्क ड्राइव के लिए किया जाता है जहां SATA इंटरफ़ेस का उपयोग किया जाता है। उपयोग की जाने वाली केबल आमतौर पर IDE केबल से छोटी होती है। एसएटीए तकनीक तेजी से बढ़ रही है, इस समय 3 जी / एस तक डेटा ट्रांसफर गति के साथ एसएटीए -2 की अगली पीढ़ी तक पहुंचने के लिए है।

आईडीई पोर्ट: यह केवल पुराने प्रकार के मदरबोर्ड में पाया जाता है। इसका उपयोग हार्ड डिस्क ड्राइव और ऑप्टिकल ड्राइव को स्थापित करने के लिए किया जाता है, इसमें केबल चौड़ाई का एक बड़ा आकार होता है।

चिप-सेट: एक चिप जो सिस्टम पर डेटा ट्रैफ़िक को नियंत्रित करती है। एक दूसरे के साथ एक अलग फ़ंक्शन के साथ 2 प्रकार के चिप सेट होते हैं। नॉर्थ-ब्रिज चिप-सेट प्रोसेसर और रैम स्लॉट के बीच स्थित है। यह चिप-सेट काम करता है इसलिए रैम और प्रोसेसर मॉड्यूल एक साथ काम कर सकते हैं (सीपीयू और रैम के बीच ट्रैफ़िक डेटा का सेट)। दक्षिण-ब्रिगेड चिप-सेट नीचे स्थित है। या तो प्रोसेसर के नीचे या ग्राफिक्स कार्ड के लिए स्लॉट के नीचे। चिप-सेट ग्राफिक्स कार्ड, हार्ड डिस्क और अन्य मदरबोर्ड बाह्य उपकरणों से ट्रैफ़िक डेटा के इस कार्य प्रवाह को संभालता है।

एजीपी / पीसीआई एक्सप्रेस स्लॉट: ग्राफिक्स कार्ड स्थापित करने के लिए उपयोग किया जाता है। एजीपी स्लॉट शायद ही कभी नए प्रकार में पाया जाता है, क्योंकि इस समय ग्राफिक्स की जरूरतों के लिए पर्याप्त बैंडविड्थ पर्याप्त नहीं है। अब, लगभग सभी मदरबोर्ड एक बड़े बैंडविड्थ के साथ पीसीआई एक्सप्रेस स्लॉट का उपयोग करते हैं। वास्तव में, ऐसे मदरबोर्ड हैं जिनमें 4 PCI एक्सप्रेस स्लॉट हैं।

PCI (परिधीय घटक इंटरकनेक्ट): क्या अतिरिक्त कार्ड जैसे साउंड कार्ड, LAN कार्ड, टीवी ट्यूनर और अन्य को रखने की जगह है। यह 33 मेगाहर्ट्ज आवृत्ति पर काम कर रहा है।

BIOS (बेसिक इनपुट आउटपुट सिस्टम): सॉफ्टवेयर का वह रूप जो मदरबोर्ड में सन्निहित होता है, जहाँ मदरबोर्ड बैटरी से ऊर्जा की आपूर्ति होती है। स्थापित किए गए हार्डवेयर के सभी प्रारंभिक कॉन्फ़िगरेशन को BIOS के माध्यम से एक्सेस और बदला जा सकता है।

कई कंप्यूटर मदरबोर्ड निर्माता अन्य उत्पादों को कई अतिरिक्त विशेषताओं के साथ पूरा करते हैं जो विभिन्न हार्डवेयर वृद्धि की और अधिक अनुकूलता बनाते हैं ।