Sunday, March 3, 2024

दुनिया के कुछ जाने-माने प्रारम्भिक कम्प्यूटर्स के इतिहास | World’s Best Known Early Computers- The History Of Computer

दुनिया के कुछ जाने-माने प्रारम्भिक कम्प्यूटर्स के इतिहास | World’s Best Known Early Computers- The History Of Computer

प्रारम्भिक कम्प्यूटर्स के इतिहास प्रारम्भ से ही मनुष्य का यह स्वप्न रहा है कि वह कोई ऐसी मशीन अथवा युक्ति का निर्माण करे, जिसकी कार्य-प्रणाली एकदम मनुष्य के समान ही हो। इस स्वप्न के साकार रूप में मनुष्य ने कम्प्यूटर का आविष्कार किया है। जिस प्रकार एक मनुष्य अपनी आंखों से देखकर, कानों से सुनकर एवं हाथ से स्पर्श करके मस्तिष्क को सूचनाएं प्रेषित करता है उसी प्रकार कम्प्यूटर की इनपुट युक्तियों, की-बोर्ड, माउस, माइक आदि के द्वारा सूचनाएं कम्प्यूटर को प्रेषित होती हैं।

जिस प्रकार मनुष्य का मस्तिष्क प्राप्त सूचनाओं का विश्लेषण करता है उसी प्रकार कम्प्यूटर का सी.पी.यू. भी प्राप्त सूचनाओं का विश्लेषण करता है। तो आइये अब कुछ जाने-माने प्रारम्भिक कम्प्यूटर्स के इतिहास के बारे में जानते हैं-

दुनिया के कुछ जाने-माने प्रारम्भिक कम्प्यूटर्स के इतिहास | World's Best Known Early Computers- The History Of Computer
दुनिया के कुछ जाने-माने प्रारम्भिक कम्प्यूटर्स के इतिहास | World’s Best Known Early Computers- The History Of Computer

कुछ जाने-माने प्रारम्भिक कम्प्यूटर्स के इतिहास

मार्क-प्रथम (Mark-I)

इस पूर्णतया स्वचालित कैलकुलेटिंग मशीन को हारवर्ड यूनिवर्सिटी (Harvard University) के हॉवर्ड ए. आइकेन (Howard A. Aiken) ने IBM द्वारा प्राप्त 5,000 डॉलर की आर्थिक सहायता से तैयार किया। इसका डिज़ाइन पंच कार्ड मशीनरी के लिए विकसित तकनीकों पर ही तैयार किया गया था। लगभग पांच वर्षों के अथक प्रयासों के उपरान्त सन् 1944 में यह कैलकुलेटिंग मशीन तैयार हुई। इस मशीन का नाम ऑटोमेटिक स्वीकेंस कन्ट्रोल्ड कैलकुलेटर रखा गया। कालान्तर में इसे मार्क-प्रथम (Mark-I) के नाम से जाना गया। इस मशीन का आकार बहुत बड़ा तथा डिज़ाइन जटिल होने के बावजूद यह अत्यन्त विश्वसनीय सिद्ध हुई। इसकी लम्बाई 50 फीट तथा चौड़ाई 8 फीट थी।

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इस कम्प्यूटर के निर्माण में लगभग 500 मील लम्बे तार एवं लगभग 76,000 पुर्जी को लगभग तीस लाख जोड़ों (Electrical Connections) का प्रयोग किया गया था। इसके परिचालन को नियन्त्रित करने के लिए इसमें 3000 से अधिक विद्युत स्विचों का प्रयोग किया गया था। यह अंकगणित की चारों मूलभूत संक्रियाओं-जोड़ना, घटाना, गुणा तथा भाग को करने के साथ-साथ टेबल रेफरेंसेज़ के लिए भी सक्षम था। इस कम्प्यूटर की सहायता से सभी अंकगणितीय गणनाएं तो की जा सकती थीं; साथ ही लघुगणक एवं त्रिकोणमितीय गणनाएं करना भी सम्भव था। वैसे तो इसे कैलकुलेटर नाम दिया गया परन्तु चूंकि इस यन्त्र में स्वयं निर्णय लेने की भी क्षमता थी। अतः इसे विश्व का सर्वप्रथम कम्प्यूटर कहना अधिक उचित होगा।

इस कम्प्यूटर की सहायता से किन्हीं दो संख्याओं का गुणनफल (भले ही वे संख्याएं 20 अंकों वाली हों) केवल 6 सेकेण्ड में और भागफल 12 सेकेण्ड में प्राप्त किया जा सकता था। मार्क-1 के साथ रोचक हिस्सा जुड़ा हुआ है। एक बार यह कम्प्यूटर खराब हो गया। अनेक प्रयासों के बाद भी विशेषज्ञ कम्प्यूटर में हुई खराबी के कारण व स्थान को नहीं जान पाये। जब इस खराबी का कारण ज्ञात हुआ, तो विशेषज्ञ हैरान रह गये। खराबी का कारण इसका विद्युत परिपथ भंग हो गया था।

इस परिपथ को जोड़ने में अत्यधिक समय लगा। इस घटना को फर्म की लॉगटेबुल में लिखा गया कि आज Mark-1 पर डिबग कर दिया गया। इसी घटना के कारण आज भी कम्प्यूटर में किसी त्रुटि को ठीक कराने को डिबगिंग कहा जाता है।

एबीसी (ABC)

डॉ. जॉन एटनासॉफ (Dr. John Atanasoff) तथा इनके सहायक क्लिफोर्ड बैरी (Clifford Berry) ने मिलकर कुछ विशिष्ट गणितीय समीकरणों को हल करने के लिए सन् 1942 में एक इलैक्ट्रॉनिक मशीन को विकसित किया, जिसे इन दोनों के नाम पर इसे एटनासॉफ बैरी कम्प्यूटर (Atanasoff Berry Computer) के नाम से जाना गया। इस कम्प्यूटर को सामान्य बोलचाल में एबीसी (ABC) भी कहा जाता है। 

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इस कम्प्यूटर में निर्वात नलिकाओं (Vaccume Tubes) का प्रयोग किया गया। इन निर्वात नलिकाओं का उपयोग इस कम्प्यूटर में आन्तरिक तार्किक निर्णयों के लिए किया गया था। इस कम्प्यूटर में भण्डारण के लिए सहनित्रों (Capacitors) का प्रयोग किया गया था।

एनियाक (ENIAC)

सन् 1943 में मूरी स्कूल ऑफ इन्जीनियरिंग, बैलेस्टिक रिसर्च लैब एवं अमेरिकी सेना ने संयुक्त रूप से इस दिशा में कार्य करना प्रारम्भ किया। इस प्रयास के परिणामस्वरूप सन् 1946 में अमेरिकन इन्जीनियर प्रोफेसर जे. प्रेस्पर इकर्ट (J. Presper Eciert) तथा जॉन मैकले (John Mauchly) के नेतृत्व में विश्व के प्रथम इलैक्ट्रॉनिक कम्प्यूटर को तैयार किया गया। अमेरिकी सेना के लिए तैयार किए गए इस कम्प्यूटर को इलैक्ट्रॉनिक न्यूमेरिकल इन्ट्रीगेटर एण्ड कैलकुलेटर (Electronic Numerical Integrator and Calculator) अर्थात् एनियाक (ENIAC) नाम दिया गया।

इस कम्प्यूटर की कार्य करने की गति हॉवर्ड के Mark-1 की अपेक्षा बहुत अधिक थी। ऐनियाक से 5000 जोड़ अथवा 350 गुणा व भाग की गणनाएं मात्र एक सेकेण्ड में की जा सकती थीं। यह कम्प्यूटर पूर्णरूप से स्वचालित रूप से गणनाएं करता था तथा उन गणनाओं का संग्रहण अपनी स्मृति अस्थाई रूप से संग्रहित कर, अगली गणना करने के लिए तैयार हो जाता था। उस समय के नए सैनिक हथियारों की मापक-दूरियों का निर्धारण करने में अमेरिकी सेना ने इस कम्प्यूटर का उपयोग किया।

यह कम्प्यूटर आकार में बहुत बड़ा था, इसके लिए लगभग 20 x 40 वर्ग फीट के कमरे की आवश्यकता थी। इसका भार लगभग 30 टन था। इस कम्प्यूटर में 1800 निर्वात् नलिकाएं (Vacume Tubes), 70,000 प्रतिरोधक (Resisters), 10000 संघारित्र (Capacitors) एवं 6,000 स्विचों (Switches) का प्रयोग किया गया था। इस कम्प्यूटर में दो संख्याओं का जोड़ का कार्य 200 माइक्रोसेकेण्ड तथा गुणा का कार्य 2000 माइक्रोसेकेण्ड में किया जा सकता था। इसमें स्थाई स्मृति भण्डारण की व्यवस्था न होने के कारण कुछ कम्प्यूटर वैज्ञानिक इसे कम्प्यूटर कम और कैलकुलेटर अधिक मानते हैं।

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एडवॉक (EDVAC)

एनियाक में स्थाई स्मृति का ना होना ही उसकी सबसे बड़ी कमी थी। इसी कमी को दूर करने के लिए डॉ. जॉन वॉन न्यूमैन (Dr. John Von Neumann) ने संचित प्रोग्राम अवधारणा (Stored Program Concept) को प्रस्तुत किया। संचित प्रोग्राम अवधारणा में कम्प्यूटर के संचालन को स्वतः ही निर्देशित करने के लिए कम्प्यूटर की स्मृति में निर्देशों को एक निश्चित क्रम में संचित किया जाना था। इलैक्ट्रॉनिक डिस्क्रीट वैरिएबल ऑटोमेटिक कम्प्यूटर (Electronic Discrete Variable Automatic Computer) को संचित प्रोग्राम अवधारणा पर ही यू.एस.ए. में डिज़ाइन किया गया। 

एडसेक (EDSAC)

प्रारम्भिक कम्प्यूटर्स के इतिहास – जिस समय अमेरिका में EDSAC का विकास किया जा रहा था, लगभग उसी समय ब्रिटेन में इलैक्ट्रॉनिक डिले स्टोरेज ऑटोमेटिक कैलकुलेटर (Electronic Delay Storage Automatic Calculator) का विकास किया गया। इस मशीन को कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मौरिस विल्केस (Maurice Wilkes) ने विकसित किया तथा मई सन् 1949 में इस मशीन पर पहले प्रोग्राम को कार्यान्वित किया गया।

यूनिवेक-प्रथम (UNIVAC-I)

यूनीवेक (UNIVAC) का पूरा नाम यूनिवर्सल ऑटोमेटिक कम्प्यूटर (Universal Automatic Computer) है। यह कोई विश्व का प्रथम डिजिटल कम्प्यूटर था। प्रारम्भिक कम्प्यूटर्स के इतिहास – यूं तो अनेक यूनीवेक कम्प्यूटर्स का निर्माण हुआ, परन्तु सन् 1951 में अमेरिकन सेंसस ब्यूरो (American Census Bureau) सबसे पहला यूनीवेक स्थापित किया गया, जो कि अगले दस वर्षों तक लगातार में प्रयोग में लाया गया। सन् 1954 में जनरल इलैट्रिक कॉरपोरेशन ने पहली बार UNIVAC-I का व्यावसायिक प्रयोग किया।

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Suraj Kushwaha
Suraj Kushwahahttp://techshindi.com
हैलो दोस्तों, मेरा नाम सूरज कुशवाहा है मै यह ब्लॉग मुख्य रूप से हिंदी में पाठकों को विभिन्न प्रकार के कंप्यूटर टेक्नोलॉजी पर आधारित दिलचस्प पाठ्य सामग्री प्रदान करने के लिए बनाया है।

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