कम्प्यूटर सिस्टम क्या है – कम्प्यूटर सिस्टम अवधारणा एवं विशेषताएं | Computer System Concept & Features – Best Knowledge In Hindi

कम्प्यूटर सिस्टम क्या है – कम्प्यूटर सिस्टम अवधारणा एवं  विशेषताएं | Computer System Concept & Features – Best Knowledge In Hindi

कम्प्यूटर सिस्टम क्या है – सिस्टम शब्द का प्रादुर्भाव एक ग्रीक शब्द Systeema से हुआ है, इसका तात्पर्य है किसी भी प्रक्रिया के विभिन्न प्रभागों के मध्य व्यवस्थित सम्बन्ध। किसी भी सिस्टम में दो अथवा दो से अधिक तत्व सम्मिलित होते हैं, जो अन्तिम उद्देश्य की पूर्ति के लिए आपस में मिलकर कार्य करते हैं। किसी भी सिस्टम के प्रभागों को ‘सब-सिस्टम’ कहा जाता है। किसी भी सिस्टम को तभी सफल कहा जा सकता है, जब उसके सभी प्रभागों के संयुक्त रूप से कार्य करने पर, उन प्रभागों के पृथक्-पृथक् कार्य करने की अपेक्षा, कम्प्यूटर सिस्टम अधिक उपयोगी परिणाम प्रस्तुत कर सकें।

पारिभाषिक शब्दों में एक अथवा एक से अधिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए मिल-जुल कार्यरत प्रभागों के समूह को सिस्टम कहा जाता है। इसी प्रकार कम्प्यूटर भी एक सिस्टम (System) के रूप में कार्य करता है। इसके विभिन्न प्रभाग निम्नलिखित हैं-


1. कम्प्यूटर हार्डवेयर (Computer Hardware) – साधारण रूप से कम्प्यूटर के वे सभी प्रभाग जिन्हें देखा तथा छुआ जा सकता है, कम्प्यूटर हार्डवेयर कहलाते हैं। इनमें मुख्य रूप से कम्प्यूटर के यांत्रिक Mechanical), वैद्युत (Electrical) तथा इलैक्ट्रॉनिक (Electronic) प्रभाग आते हैं। कम्प्यूटर के अन्दर तथा बाहर के सभी प्रभाग, की इनपुट तथा आउटपुट युक्तियां आदि सभी कम्प्यूटर हार्डवेयर ही हैं। कम्प्यूटर की वे युक्तियां, जो कि कम्प्यूटर को चलाए जाने के लिए आवश्यक होती हैं, स्टेण्डर्ड युक्तियां (Standard Devices) कहलाती हैं, जैसे-की-बोर्ड, फ्लॉपी ड्राइव, हार्डडिस्क आदि। इन युक्तियों के अतिरिक्त वे युक्तियां, जिनको कम्प्यूटर से जोड़ा जाता है, पेरीफेरल युक्तियां (Peripheral Devices) कहलाती हैं। स्टैण्डर्ड तथा पेरीफेरल युक्तियों को मिलाकर ही कम्प्यूटर हार्डवेयर तैयार होता है।

2. कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर (Computer Software) – कम्प्यूटर तथा उससे जुड़ी हुई युक्तियों से कार्य लेने के लिए सॉफ्टवेयर का प्रयोग किया जाता है। ये कम्प्यूटर के वे प्रभाग होते हैं, जोकि न तो आंखों से दिखाई देते हैं और न ही जिनको छुआ जा सकता है। कम्प्यूटर भाषाओं में लिखे गए, कम्प्यूटर को कार्य करने के लिए विधिवत् एवं व्यवस्थित निर्देशों के समूह को कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर कहा जाता है। कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर्स को संग्रहण युक्तियों में संग्रहीत किया जाता है। इस प्रकार कहा जा सकता है, कि कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर्स वे प्रोग्राम्स होते हैं, जो कि कम्प्यूटर को यह निर्देश देते हैं कि डेटा को किस प्रकार प्रोसेस किया जाए और प्राप्त परिणाम को किस प्रकार प्रस्तुत किया जाए।


3. कम्प्यूटर फर्मवेयर (Computer Firmware) – हार्डवेयर तथा सॉफ्टवेयर को संयुक्त रूप से फर्मवेयर कहा जाता है। जिस हार्डवेयर में सॉफ्टवेयर को स्थापित कर दिया गया है, वह फर्मवेयर कहलाएगा।


4. कम्प्यूटर स्किनवेयर (Computer Skinware) – कम्प्यूटर के वे अंग अथवा प्रभाग, जिनको देखने के लिए कम्प्यूटर को खोलने की आवश्यकता नहीं, होती है, कम्प्यूटर स्किनवेयर कहलाते हैं, जैसे-मॉनीटर, की-बोर्ड, माउस, प्रिन्टर आदि।


5. कम्प्यूटर ह्यूमनवेयर (Computer Humanware) – वे सभी मनुष्य, जो किसी-न-किसी प्रकार से कम्प्यूटर से सम्बन्धित होते हैं, कम्प्यूटर ह्यूमनवेयर कहलाते हैं। इनको कम्प्यूटर लाइववेयर (Computer Liveware), कम्प्यूटर पर्सनल (Computer Personnel) अथवा कम्प्यूटर यूजर (Computer User) भी कहा जाता है। जब किसी कम्प्यूटर सिस्टम के सभी प्रभाग सुचारु रूप से क्रियाशील होंगे, तभी वह कम्प्यूटर सिस्टम प्रभावशाली ढंग से कार्य कर सकेगा। किसी भी एक प्रभाग के क्रियाशील न होने की स्थिति में कम्प्यूटर सिस्टम अपना कार्य नहीं कर सकेगा।

कम्प्यूटर सिस्टम क्या है - कम्प्यूटर सिस्टम अवधारणा एवं  विशेषताएं | Computer System Concept & Features – Best Knowledge In Hindi
कम्प्यूटर सिस्टम क्या है – कम्प्यूटर सिस्टम अवधारणा एवं विशेषताएं | Computer System Concept & Features – Best Knowledge In Hindi

कम्प्यूटर सिस्टम की विशेषताएं | Computer System Characteristics

कम्प्यूटर अपनी उत्कृष्ट एवं अनुपम विशिष्टताओं के कारण आज मानव जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में प्रवेश करता जा रहा है। इसकी प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं-

गति (Speed) – एक प्रकार से कम्प्यूटर को एक तीव्र गति का एक ऐसा Calculator कहा जा सकता है, जिसके द्वारा असम्भव वैज्ञानिक गणनाओं को कुछ ही सेकेण्ड्स में किया जा सके। कम्प्यूटर द्वारा किए जा सकने वाले समस्त कार्य गणनाओं पर ही आधारित होते हैं। आज कम्प्यूटर का प्रयोग सेना, विज्ञान व शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ता ही जा रहा है। कम्प्यूटर एक इलैक्ट्रॉनिक यन्त्र है।

आज के कम्प्यूटर बहुत तीव्र गति से गणना करते हैं। इनकी गति को इस प्रकार से जाना जा सकता है कि समय की इकाई सेकेण्ड, माइक्रोसेकेण्ड (सेकेण्ड का एक लाखवां भाग अर्थात् 10-5 सेकेण्ड), नेनोसेकेण्ड (10-9), पीकोसेकेण्ड (10-12) होती है। आज के कम्प्यूटर 18 से 20 अंकों वाली संख्याओं को जोड़ने के लिए मात्र 300 से 400 नेनोसेकेण्ड का समय ही लेते हैं।

स्मृति (Memory) एक व्यक्ति को मस्तिष्क के सभी कार्यों को करने के लिए स्मृति की आवश्यकता होती है। यदि व्यक्ति कोई गणना करता है तो वह गणना के उपरान्त परिणाम को भी स्मृति में रखने के बाद ही उत्तर देता है। परन्तु एक व्यक्ति सीमित सन्देशों को ही अपनी स्मृति में सुरक्षित रख सकता है। अतः जो बात उसके लिए पुरानी होती जाती है, वह स्मृति से हटने लगती है। कम्प्यूटर की स्मृति, जो बहुत अधिक होती है, में सभी सन्देशों को एकत्र करके बहुत समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

इलैक्ट्रॉनिक कम्प्यूटर में प्रयोग की जाने वाली स्मृति (Memory) की इकाई किलोबाइट होती है। एक किलोबाइट में 1024 स्मृति खण्ड होते हैं। कम्प्यूटर की आन्तरिक मेमोरी में सभी सन्देशों को संग्रहित कर पाना बहुत कठिन है, अतः इसके लिए बाहरी स्मृति (External Memory) का प्रयोग किया जाता है। बाहरी स्मृति में जितने चाहे सन्देशों को स्टोर किया जा सकता है; और इन्हें कभी भी प्रयोग किया जा सकता है। कम्प्यूटर सिस्टम एक Recall (पुनः निमन्त्रण चालक) महत्वपूर्ण सुविधा प्रदान करता है।

इस सुविधा के द्वारा किसी भी जानकारी को पुनः कम्प्यूटर स्क्रीन पर Display किया जा सकता है। यह सुविधा कम्प्यूटर की द्वितीयक स्मृति (Secondary Memory) द्वारा संचालित होती है। रिकॉल की हुई जानकारी उतनी ही सही होती है है जितनी कि तब होती है जब उस जानकारी को पहली बार प्राप्त किया जाता है। 

भावना रहित (Feeling Less) – कम्प्यूटर सिस्टम में कोई भावना या कोई समझ नहीं होती है क्योंकि कम्प्यूटर एक मशीन है। कम्प्यूटर कभी भी कोई निर्णय स्वयं नहीं ले सकता, कम्प्यूटर द्वारा प्रमाणित निर्णय प्रयोगकर्ता के निर्देशों पर निर्भर करता है।


शुद्धता (Accuracy) – कम्प्यूटर में शुद्ध परिणामों को प्रस्तुत करने की क्षमता बहुत अधिक होती है। अधिकतर कम्प्यूटर द्वारा प्रस्तुत की गयी अशुद्धता प्रयोगकर्ता द्वारा की गयी गलती और कम्प्यूटर हार्डवेयर में होने वाली खराबी के कारण ही होती है, इसका अन्य कोई कारण सम्भव ही नहीं है। कम्प्यूटर में गलतियों को सही करने की क्षमता अन्य यंत्रों के मुकाबले अधिक होती है।

स्वचालन  (Automation) – प्रोग्राम के एक बार कम्प्यूटर की मेमोरी में लोड हो जाने पर, प्रोग्राम का प्रत्येक सन्देश सैन्ट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (Central Processing Unit) द्वारा कार्यान्वित होता रहता है। सैन्ट्रल प्रोसेसिंग यूनिट द्वारा यह कार्यान्वयन तब तक चलता रहता है जब तक प्रोग्राम का अन्त अर्थात् सन्देश “प्रोग्राम समाप्त” नहीं आ जाता।

सार्वभौमिकता (Versality) – जो भी कार्य कम्प्यूटर द्वारा संपादित करना होता है, उसे एक निश्चित क्रम में बांधा जाता है, फिर डाटा इस तरह एक पूर्व निश्चित सांचे में ढाला जाता है कि वह कम्प्यूटर को ग्रहण हो सके। इस प्रकार कम्प्यूटर द्वारा मुख्य रूप से निम्न चार कार्य कराए जाते हैं-

  • प्रयोगकर्ता द्वारा इनपुट-आउटपुट युक्तियों द्वारा डेटा का आदान-प्रदान करना।
  • प्रयोगकर्ता द्वारा इनपुट की गई सूचना का आन्तरिक स्थानान्तरण।
  • अंकगणितीय गणना द्वारा परिणाम प्राप्त करना।
  • कम्प्यूटर में इनपुट की गई सूचनाओं का तुलनात्मक विवेचन करना।

सक्षमता (Deligency) – यदि कम्प्यूटर को उचित वातावरण में प्रयोग किया जाये तो यह बहुत ही सक्षमता से कार्य कर सकता है। कम्प्यूटर के एक इलेक्ट्रॉनिक यन्त्र, होने के कारण अधिक कार्यभार होने पर भी थकावट का कोई नामो-निशान परिलक्षित नहीं होता है। इसमें कार्यभार अधिक होने पर भी खराबी के लक्षण नहीं पाये जाते, परन्तु अनेक यान्त्रिक यन्त्र कार्यभार अधिक होने पर थकावट अथवा खराबी के लक्षण प्रकट करने लगते हैं।

मानव से भी यदि लगातार कार्य करवाया जाये तो एक समय बाद मनुष्य का मस्तिष्क भी थकावट महसूस करने लगता है, और इस कारण वह सन्तुलन खोकर गलतियां करने लगता है। यदि कम्प्यूटर सिस्टम को कई प्रकार के कार्य करने के लिए निर्देशित किया गया है, तो यह अन्तिम कार्य भी उसी दक्षता एवं सक्षमता के साथ करेगा, जिस दक्षता एवं सक्षमता से उसने प्रथम कार्य किया होगा।

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