कम्प्यूटर वायरस क्या है – एवं कम्प्यूटर वायरस के प्रकार | What Is Computer Virus – Best Info In Hindi

कम्प्यूटर वायरस क्या है – एवं कम्प्यूटर वायरस के प्रकार | What Is Computer Virus – Best Info In Hindi

कम्प्यूटर वायरस क्या है – कम्प्यूटर वायरस कुछ निर्देशों का एक ऐसा शक्तिशाली प्रोग्राम है, जो कम्प्यूटर को अपने तरीके से नियन्त्रित करने लगता है। ये वायरस प्रोग्राम्स किसी भी उस सामान्य कम्प्यूटर प्रोग्राम के साथ जुड़ जाते हैं, जिसका कि उपयोग कम्प्यूटर पर किया जा रहा होता है और उनके माध्यम से कम्प्यूटर में प्रवेश करके अपने उद्देश्य अर्थात् आंकड़ों का क्षतिग्रस्त करना, की पूर्ति करते हैं। अपने संक्रमणकारी प्रभाव से ये सम्पर्क में आने वाले सभी प्रोग्राम्स को प्रभावित करके उन्हें क्षतिग्रस्त अथवा नष्ट कर देते हैं।


कम्प्यूटर वायरस प्रोग्राम्स का प्रमुख उद्देश्य केवल कम्प्यूटर की मेमोरी में संचित डेटा तथा सम्पर्क में आने वाले सभी प्रोग्राम्स को अपने संक्रमण से प्रभावित करना है। जिस प्रकार वायरल इंफैक्शन अथवा वायरल बुखार, मानव शरीर की कार्य-प्रणाली को लगभग ठप्प-सा कर देता है, ठीक उसी प्रकार कम्प्यूटर वायरस, कम्प्यूटर की आन्तरिक कार्य-प्रणाली को ठप्प-सा कर देता है। किसी अतिसूक्ष्म कीटाणु की भांति यह वायरस प्रोग्राम अपनी संख्या को स्वगुणन प्रक्रिया से अति तीव्र गति से निरन्तर बढ़ाते रहते हैं।

कम्प्यूटर वायरस क्या है – एवं कम्प्यूटर वायरस के प्रकार | What Is Computer Virus – Best Info In Hindi
कम्प्यूटर वायरस क्या है – एवं कम्प्यूटर वायरस के प्रकार | What Is Computer Virus – Best Info In Hindi

कम्प्यूटर वायरस प्रोग्राम्स के लक्षण क्या हैं  (Symptoms of Virus Programs)

कम्प्यूटर वायरस प्रोग्राम्स के लक्षण – वायरस से प्रभावित कोई भी कम्प्यूटर प्रोग्राम अपनी सामान्य कार्य शैली में अनजानी तथा अनचाही रुकावटें, गलतियां तथा अनेक अन्य समस्याओं को उत्पन्न कर देता है। इनसे कम्प्यूटर की स्मृति में एकत्रित किये गए आंकड़े भी नष्ट हो सकते हैं। यह उस वायरस प्रोग्राम के निर्माता पर निर्भर करता है । सभी कम्प्यूटर वायरस प्रोग्राम मुख्यतः असेम्बली भाषा या किसी उच्च स्तरीय (High-Level) भाषा जैसे पास्कल या सी में लिखे जाते हैं। सभी वायरस प्रोग्रामों में निम्न अभिलक्षण पाये जाते हैं-

कम्प्यूटर वायरस एक अत्यन्त सूक्ष्म प्रोग्राम होता है जिससे इनको ज्ञात करना अत्यन्त कठिन होता है। किसी भी अन्य प्रोग्राम से जुड़ जाना अथवा अन्य प्रोग्रामों को प्रति-स्थापित कर उसका स्थान ले लेना, उदाहरणार्थ-सी-अशर नामक वायरस डिस्क में से बूट-स्ट्रेप प्रोग्राम को शून्य सेक्टर से उठाकर अन्यत्र कहीं प्रति-स्थापित कर देता है और स्वयं उसके स्थान पर शून्य सेक्टर स्थापित हो जाता है। संक्रमण-यही वह प्रक्रिया है जिससे वायरस गुणात्मक प्रक्रिया में निरन्तर बढ़ते हुए फैलता रहता है। अन्य कार्यकारी प्रोग्रामों के क्रियान्वयन में कठिनाईयां उत्पन्न करना, उदाहरणार्थ-किसी विशेष समय पर कोई विशेष संदेश प्रदर्शित करना, किसी विशिष्ट समय अथवा दिनांक पर डिस्क में उपस्थित समस्त प्रोग्राम तथा डाटा नष्ट अथवा क्षतिग्रस्त कर देना आदि।

कम्प्यूटर वायरस संक्रमण के क्या संकेत है  (Signs Of Virus Infection)

कम्प्यूटर वायरस के आक्रमण से यदि कम्प्यूटर ग्रसित हो चुका है इसकी पहचान इन संकेतों से प्राप्त होती है-
1- कार्यकारी प्रोग्राम को स्मृति में लोड किये बगैर ही उपलब्ध स्मृति (RAM) का कम हो जाना।
2- बिना, किसी कारण किसी कार्यकारी फाइल के आकार में परिवर्तन हो जाना।
3- फाइलों की संख्या में अपने आप ही परिवर्तन हो जाना।
4- ‘की’ बोर्ड का अचानक अवांछित रूप से कार्य करने लगा।

5- कम्प्यूटर का हैंग हो (अटक) जाना।
6- कम्प्यूटर का अनेक प्रकार के अनिर्धारित व अवांछित अशुद्धि संदेश देने लगना।
7- कम्प्यूटर की गति स्वतः ही कम हो जाना।
8- कम्प्यूटर अथवा आंकड़ों में परिवर्तन अथवा उनका नष्ट हो जाना।

कंप्यूटर वायरस के प्रकार (Type Of Virus)

सामान्यतः कम्प्यूटर वायरस प्रोग्राम तीन प्रकार के पाये जाते हैं

  1. बूट सेक्टर वायरस (Boot Sector Virus)
  2. फाइल वायरस (File Virus)
  3. अन्य वायरस (Other Virus)

बूट सेक्टर वायरस (Boot Sector Virus)

बूट सेक्टर वायरस (Boot Sector Virus) – इस प्रकार के वायरस हार्ड डिस्क या डिस्क प्रचालन प्रणाली (Disk Operating System, DOS) की बूट फ्लॉपी के शून्य सेक्टर में अपना संक्रमण फैलाते हैं। यह वायरस हार्ड डिस्क में मौजूद विभाजन सारणी (Pattern Table) को भी बदल देते हैं। इस प्रकार के वायरस कम्प्यूटर के चालू (Start) होते ही सबसे पहले ऑपरेटिंग सिस्टम के प्रोग्राम के स्थान पर स्वयं मेमोरी में स्थापित हो जाते हैं।

बूट वायरस कम्प्यूटर की मेमोरी में तब भी स्थापित हो सकता है जब किसी भी अन्य डिस्क से (जो बूट डिस्क न हो) कम्प्यूटर को बूट करने का प्रयास किया जाए, क्योंकि ऐसी स्थिति में कम्प्यूटर डिस्क का शून्य सेक्टर डिस्क प्रचालन प्रणाली को पढ़ने का प्रयास करते समय वायरस प्रोग्राम पढ़कर नॉन सिस्टम डिस्क एरर प्रदर्शित करेगा, परन्तु, तब तक वायरस मेमोरी में स्थापित हो चुका होगा। अब कम्प्यूटर में बूट डिस्क लगाने पर कम्प्यूटर स्मृति में स्थित वायरस डिस्क में प्रवेश कर जाता है (यदि डिस्क write Protected नहीं है)।

फाइल वायरस (File Virus)

फाइल वायरस (File Virus) जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, इस प्रकार के वायरस कंप्यूटर की प्रोग्राम फाइलों में प्रवेश कर जाते हैं। ये वायरस COM, EXE, SYS, OVL तथा BIN फाइलों को ही अपना शिकार बनाते हैं। सामान्यतः EXE तथा COM फाइलों पर इनका प्रभाव देखा जाता है। यह वायरस फाइलों से स्वयं को जोड़ लेता है। इसके प्रभाव से पहले यह वायरस स्वयं क्रियान्वित होता है, बाद में उस फाइल को क्रियान्वित होने देता है। यह इन फाइलों के आकार को भी प्राभावित करता है। यहां फाइल वायरसों के विवरण हैं-

  1. 1701, 1704, 1744 वायरस- ये सभी वायरस COM फाइल्स को प्रभावित करते हैं।
  2. अप्रैल फर्स्ट- यह वायरस EXE फाइल्स को प्रभावित करता है।
  3. जैरुसलम संस्करण B- यह वायरस EXE तथा COM फाइल्स को प्रभावित करता है।
  4. 648 वायरस- यह वायरस COM फाइल्स को प्रभावित करता है।)
  5. डेटा क्राइम 1208, 1168 – ये सभी वायरस COM फाइल्स को प्रभावित करते हैं।
  6. FRIDAY 13- यह वायरस COM तथा EXE फाइल्स को प्रभावित करता है। यह इन फाइलों का आकार 1808 बाइट्स बढ़ा देता है और यह वायरस जिस शुक्रवार को 13 तारीख होती है, उस दिन अपने आप नष्ट हो जाता है।
  7. 8290 वायरस- यह वायरस डिस्क में 82 तथा 90 संख्याओं को खोजता है और जब बूट सेक्टर में यह इन संख्याओं को नहीं पाता है तो बूट रिकार्ड को उसके स्थान से कहीं और प्रातिस्थापित कर देता है और सिस्टम बूट होना बन्द हो जाता है।
  8. ली-लार्ड वायरस- यह वायरस डॉस की COMMAND.COM फाइल को प्रभावित करता है। इस वायरस में एक गणक होता है जो डॉस की साधारण कमाण्ड, जो कि हम अपने किसी कार्य के लिए प्रयोग कर रहे हैं, देने पर अपनी स्व-प्रतिलिपि तैयार कर लेता है। तब यह File Allocation Table के साथ-साथ डिस्क के सभी प्रोग्राम व आंकड़ों को नष्ट कर देता है।
  9. रेनड्राप वायरस- यह वायरस भी COM फाइलों को प्रभावित करता है। इस वायरस के प्रभाव से अक्षर डॉस कमाण्ड देने पर बरसात की तरह नीचे की ओर टपकना या बहना शुरू कर देता है। डाई हार्ड टू-इस फाइल वायरस के प्रभाव से COM फाइल्स क्षतिग्रस्त हो जाती हैं तथा किसी भी प्रोग्राम के क्रियान्वयन के समय या तो यह प्रोग्राम क्रियान्वित नहीं होता या फिर कम्प्यूटर को boot हो जाता है। कुछ वायरस फाइलों में संक्रामण करने के साथ-साथ बूट क्षेत्र में भी संक्रमण करते हैं, जैसे—648 वायरस।

अन्य वायरस (Other Virus)

ऊपर बताए गए बूट सेक्टर वायरस तथा फाइल वायरसों के अलावा कुछ अन्य वायरस भी होते हैं जो कंप्यूटर में संग्रहित प्रोग्रामों तथा आंकड़ों को भारी नुकसान पहुंचाते हैं।

ट्रोजन (Trojan)- अन्य वायरस प्रोग्रामों में ट्रोजन प्रोग्राम होते हैं। ये प्रोग्राम प्रयोग के समय तो बड़े आकर्षक रूप के, भिन्न-भिन्न प्रकार के शब्द संसाधक (Word-Processor) या डाटा-बेस प्रोग्राम होने का भ्रम पैदा कर देते हैं, परन्तु वास्तव में यह सब वायरस ही होते हैं। जैसे अभी हाल ही में एड्स बीमारी से बचने के उपायों को प्रसारित करने के लिए एक प्रमुख प्रोग्राम बाजार में जोर-शोर से बिका, परन्तु बाद में पाया गया कि यह ट्रेनिंग प्रोग्राम न होकर एक आज्ञत वायरस प्रोग्राम है। ।

वर्म (वर्म )- यह वायरस किसी भी जैविक कीड़े की भांति लंबी दूरी तक के फासले तय करने की क्षमता रखते हैं। ये मुख्यतः लम्बे कम्पयूटर नेटवर्क को संक्रमण से प्रभावित करते हैं। ये अत्याधुनिक वायरस प्रोग्राम हैं, जिनमें सूक्ष्म निर्देश दिए होते हैं, जिनसे ये हर प्रकार की क्रिया करने में सक्षम होते हैं। इस प्रकार वायरसों का संक्रमण अधिकतर यूनिक्स ऑपरेटिंग सिस्टम पर आधारित कम्प्यूटर नेटवर्कों पर होता है।

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