Wednesday, September 29, 2021

कम्प्यूटर प्रिन्टर क्या है – प्रिंटर कितने प्रकार के होते हैं | What Is Computer Printer And Types – Best Printer For Home Use

कम्प्यूटर प्रिन्टर क्या है – प्रिंटर कितने प्रकार के होते हैं | What Is Computer Printer And Types – Best Printer For Home Use

कम्प्यूटर प्रिन्टर क्या है – प्रयोगकर्ता कम्प्यूटर से प्राप्त परिणामों को मॉनीटर स्क्रीन पर देख सकता है, परन्तु अनेक कार्य ऐसे होते हैं, जहां पर केवल मॉनीटर स्क्रीन पर प्रदर्शन पर्याप्त नहीं होता, उसको कागज पर मुद्रित करने की आवश्यकता होती है और इस कार्य के लिए आउटपुट डिवाइस प्रिन्टर का प्रयोग किया जाता है। कागज पर मुद्रित आउटपुट को हार्ड कॉपी (Hard Copy) कहा जाता है। कम्प्यूटर प्रिन्टर का कार्य कम्प्यूटर से प्राप्त डिजिटल संकेतों को मानव के समझने योग्य भाषा, संकेतों तथा चित्रों आदि में परिवर्तित करके हार्ड कॉपी के रूप में कागज पर प्रिंट करना होता है।

कम्प्यूटर प्रिन्टर (Printer) – कम्प्यूटर प्रिन्टर एक ऐसी Output Device है जो कम्प्यूटर से प्राप्त जानकारी को कागज पर छापती है, परन्तु कम्प्यूटर से जानकारी का आउटपुट Output बहुत तेजी से मिलता है और प्रिन्टर उतनी तेजी से काम नहीं कर पाता, इसलिए यह जरूरी हो जाता है कि यह जानकारी कम्प्यूटर प्रिन्टर में कहीं स्टोर की जा सके। इसलिए प्रिन्टर में भी एक मेमोरी होती है। कम्प्यूटर से प्रिन्टर की इस मेमोरी में जानकारी भेज दी जाती है, जहां से जानकारी निकालकर धीरे-धीरे छापी जाती है।

यदि कम्प्यूटर से मिलने वाली जानकारी इतनी अधिक हो कि इस भण्डार में स्टोर न की जा सके तो इसके लिए एक बफर लगाया जाता है जो एक या दो सेकेण्ड में कम्प्यूटर से सारे डेटा ले लेता है जहां से ये धीरे-धीरे प्रिन्टर में जाते हैं। प्रिन्टर की प्रिन्टिंग विधियां निम्नलिखित हैं-

कम्प्यूटर प्रिन्टर क्या है – प्रिंटर कितने प्रकार के होते हैं

कम्प्यूटर प्रिन्टर क्या है - प्रिंटर कितने प्रकार के होते हैं | What Is Computer Printer And Types - Best Printer For Home Use
कम्प्यूटर प्रिन्टर क्या है – प्रिंटर कितने प्रकार के होते हैं | What Is Computer Printer And Types – Best Printer For Home Use

इम्पैक्ट प्रिन्टिंग (Impact Printer)

इम्पैक्ट प्रिन्टिंग (Impact Printer)- प्रिन्टिंग की इस विधि में ठोकने की क्रिया द्वारा प्रिन्टिंग की जाती है। इस क्रिया में आवाज भी होती है। ऑफिसों में उपयोग में लाया जाने वाला टाइपराइटर इम्पैक्ट प्रिन्टिंग का एक कम्प्यूटर प्रिन्टर अच्छा उदाहरण है। कम्प्यूटरों के साथ प्रयोग किये जाने वाले इम्पैक्ट प्रिन्टर्स में डेजी व्हील प्रिन्टर (Daisy Wheel Printer) तथा डॉट मेट्रिक्स प्रिन्टर (Dot Matrix Printer) प्रमुख हैं। इनमें कार्बन पेपर लगाकर एक से अधिक प्रतियां भी एक साथ मुद्रित की जा सकती हैं।

इम्पैक्ट प्रिन्टिंग का कार्य एक विशेष अवयव, जिसे प्रिन्टहैड (Print Head) कहा जाता है, द्वारा किया जाता है। प्रिन्ट किया जाने वाला पेपर अपने स्थान पर स्थिर रहता है और प्रिन्टहैड बाईं ओर व दाईं ओर चलता हुआ प्रिंट करता जाता है। एक लाइन पूरी होने के बाद प्रिन्टर कागज पर दूसरी लाइन छापना शुरू कर देता है। इस प्रकार सारी सूचनाएं कागज पर मुद्रित कर दी जाती हैं। कुछ प्रिन्टर्स में प्रिन्टहैड बाएं से दाएं तथा दाएं से बाएं दोनों दिशाओं में प्रिन्टिंग करते हैं। इससे प्रिन्टिंग का समय आधा एवं गति दो गुनी हो जाती है।

नॉन-इम्पैक्ट प्रिन्टिंग (Non-Impact Printer)

नॉन-इम्पैक्ट प्रिन्टिंग (Non-Impact Printer)- नॉन-इम्पैक्ट प्रिन्टर्स में मुद्रण की क्रिया शांत होती है। इंक जैट प्रिन्टर (Ink Jet Printer) तथा लेजर प्रिन्टर (Laser Printer) नॉन-इम्पैक्टर प्रिन्टरों के उदाहरण हैं। इन प्रिन्टरों में एक बार एक ही पेज प्रिंट होती है। अब हम प्रमुख इम्पैक्ट व नॉन-इम्पैक्ट प्रिन्टर्स के बारे में चर्चा करेंगे।

डेजी व्हील प्रिन्टर्स (Daisy Wheel Printers)

डेजी व्हील प्रिन्टर्स (Daisy Wheel Printers) – इस कम्प्यूटर प्रिन्टर में एक व्हील की सहायता से प्रिन्टिंग होती है। इस छपाई करने वाले व्हील की आकृति एक खिले हुए फूल की तरह होने के कारण इसे डेजी व्हील (Daisy Wheel) कहा जाता है। यह प्लास्टिक से बना एक पहिया जैसा होता है। इसमें एक धुरी पर प्लास्टिक से बनी 96 सलाइयां होती हैं। जिनके बाहरी सिरों पर ठोस अक्षर बने रहते हैं।

मुद्रण के लिए डेजी व्हील को प्रिन्टहैड में लगा दिया जाता है और यह तेजी से घूमता रहता है। जिस अक्षर को छापना होता है उस अक्षर वाली पंखुड़ी के ठीक स्थिति में आते ही एक विद्युत-चलित हथौड़ा पीछे से उस पर चोट मारता है और वह अक्षर कागज पर छप जाता है। अक्षर छप जाने के बाद प्रिन्टहैड आगे बढ़कर इसी क्रिया से अक्षरों की लाइन प्रिंट करता चला जाता है। इस प्रकार से छपे अक्षर बहुत ही सुन्दर एवं स्पष्ट होते हैं, परन्तु इसके कार्य करते समय शोर होता है। इनकी प्रिंन्टिग गति धीमी, लगभग 60 अक्षर प्रति सैकेण्ड होती है।

लाइन प्रिन्टर्स (Line Printers)

लाइन प्रिन्टर्स (Line Printers) – यह कम्प्यूटर प्रिन्टर भी एक इम्पैक्ट प्रिन्टर है। इस प्रिन्टर द्वारा एक पूरी लाइन या पंक्ति एक बार में छापी जा सकती है। इनकी स्पीड अपेक्षाकृत काफी तेज, लगभग 20 से 80 लाइन प्रति सैकेण्ड होती है। ड्रम, चेन व बैण्ड प्रिन्टर लाइन प्रिन्टरों के कुछ उदाहरण हैं। ये एक मिनट 100 से 150 लाइनें छापते हैं। इन प्रिन्टरों में छपाई की गति कागज के खिसकने की गति पर निर्भर करती है। चेन (Chain) प्रिन्टर लाइन प्रिन्टर का अच्छा उदाहरण है। इस कम्प्यूटर प्रिन्टर में एक चेन होती है जो दो गियरों के बीच तेजी से घूमती रहती है। इस चेन पर 64 सम्प्रतीकों (चिह्नों) के चार समूह खुदे होते हैं।

म्प्यूटर से आदेश मिलते ही प्रतिघातक (Hammer) अर्थात् आघात करके छापने वाला लीवर द्वारा वार होता है जिससे एक विशेष अक्षर कागज पर छप जाता है। इसकी गति भी तीव्र होती है। ड्रम (Drum) प्रिन्टर भी लाइन प्रिन्टर का एक उदाहरण है। इस कम्प्यूटर प्रिन्टर में कैरेक्टर्स को एक बेलनाकार ड्रम की सतह पर उभारा जाता है। इसमें बेलनाकार ड्रम अत्यन्त तीव्र गति से घूमता है। ड्रम तथा कागज में मध्य एक कार्बन की रिबन भी होती है, जिसकी सहायता से कम्प्यूटर से निर्देश प्राप्त होने पर ड्रम से कैरेक्टर्स कागज पर प्रिन्ट होने लगते हैं।

लाइन प्रिन्टर का एक अन्य उदाहरण बैण्ड (Band) प्रिन्टर भी है। यह कम्प्यूटर प्रिन्टर चेन प्रिन्टर की ही भांति कार्य करता है। इसमें चेन के स्थान पर स्टील का एक प्रिन्ट बैण्ड (Print Band) होता है। कम्प्यूटर से आदेश प्राप्त होते ही प्रतिघातक (Hammer) द्वारा वार होने से वह कैरेक्टर कागज पर प्रिन्ट हो जाता है।

डॉट मैट्रिक्स प्रिन्टर्स (Dot Matrix Printers)

डॉट मैट्रिक्स प्रिन्टर्स (Dot Matrix Printers) – इन प्रिन्टर्स में अक्षरों को छापने के लिए एक बिल्कुल ही भिन्न विधि का प्रयोग किया जाता है। इनमें अलग-अलग अक्षरों के लिए अलग-अलग प्रिन्टहैड नहीं होते। सारे अक्षर एक ही प्रिन्टहैड द्वारा छापे जाते हैं। इसके बारे में विस्तार से जानने से पूर्व बिन्दुओं से बनी डॉट-मैट्रिक्स के बारे में जानना आवश्यक होगा। क्रम से जमाए हुए बिन्दुओं के समूह को मैट्रिक्स (Matrix) कहा जाता है।

सामान्यतः तीन मैट्रिक्स प्रचलन में हैं- 5×7, 7×9 तथा 9×12। एक मैट्रिक्स में यद्यपि अनेक बिन्दु होते है, परन्तु यह आवश्यक नहीं कि प्रिन्टहैड में भी उतनी ही पिनें हों, अर्थात 5 x 7 के लिए 35 एवं 7x 9 के लिए 63 आदि। आधुनिक प्रिन्टहैडों में एक या अधिक दो खड़ी लाइनों में पिनें लगी होती हैं।

उदाहरण के लिए 7×9 की मैट्रिक्स में अक्षर छापने के लिए एक खड़ी लाइन में 9 पिनें होती हैं। सामान्यतः ये पिनें प्रिन्टहैड के अन्दर छुपी रहती हैं, परन्तु प्रिन्टिंग के लिए ये फुर्ती से बाहर निकल कर रिबन पर ठोकर मारते हैं जिससे कागज पर बिन्दु छप जाते हैं; इसे इस प्रकार समझें : यदि सभी 9 पिने कागज पर एक साथ निकलकर ठोकर मारें तो कागज पर 9 बिन्दुओं वाली एक खड़ी लाइन छप जाएगी। जैसे-जैसे प्रिन्टहैड बाईं ओर से दाहिनी ओर चलता है, भिन्न-भिन्न पिनें बाहर निकल कर ठोकर मारती रहती हैं और बिन्दुओं से बने अक्षर प्रिन्टर पर लगे कागज पर छपते चले जाते हैं।

चूंकि डॉट-मैट्रिक्स प्रिन्टर भी एक इम्पैक्ट प्रिन्टर ही है अत: यह प्रिन्टिंग करते समय काफी शोर करता है। परन्तु इसमें प्रिन्टहैड दोनों दिशाओं में चलते हुए प्रिन्टिंग कर सकता है अतः प्रिन्टिंग में समय कम लगता है। कार्बन पेपर का प्रयोग करके एक से अधिक प्रतियों का एक साथ मुद्रण किया जा सकता है। यह प्रिन्टर पाठ्य (Text) तथा चित्र (Graphics) दोनों को एक साथ आसानी से प्रिन्ट कर सकता है।

इंकजेट प्रिन्टर्स (Ink-Jet Printers)

इंकजेट प्रिन्टर्स (Ink-Jet Printers) – ये नॉन-इम्पैक्ट प्रिन्टर होते हैं। इनकी मुद्रण प्रणाली भी डॉट-मैट्रिक्स प्रिन्टर्स की भांति ही होती है। अन्तर केवल इतना है कि इसमें कागज पर छपने वाले बिन्दु स्याही की बहुत छोटी-छोटी बूंदों द्वारा बनाए जाते हैं। ये बिन्दु डॉट-मैट्रिक्स प्रिन्टरों से बने बिन्दुओं की अपेक्षा बहुत छोटे होते हैं और इसलिए छपे हुए अक्षर बहुत सुन्दर व स्पष्ट होते हैं। इस प्रिन्टर में प्रिन्टहैड में बहुत महीन छेदों वाले नॉजल (Nozzle) में से स्याही पम्प करके बाहर फेंकी जाती है।

जैसे प्रिन्टहैड चलता जाता है, ये स्याही की नन्हीं-नन्हीं बूंदें अक्षर बनाती चली जाती हैं। इस क्रिया से सभी प्रकार के कागज और अन्य माध्यमों पर भी मुद्रण किया जा सकता है।

डॉट मैट्रिक्स प्रिन्टर की भांति इंक जैट प्रिन्टर भी एक-एक लाइन करके ही छपाई करते हैं और इनकी प्रिन्टिंग गति भी लगभग डॉट मैट्रिक्स प्रिन्टर के समान ही होती है, परन्तु इनके छपे अक्षर बहुत स्वच्छ व सुन्दर होते हैं। पाठ्य सामग्री के मुद्रण के लिए तो ये उत्तम हैं परन्तु कुछ मॉडल ग्रॉफिक्स (Graphics) का मुद्रण अधिक स्पष्ट नहीं करते। वर्तमान में रंगीन मुद्रण करने वाले इंक जैट कम्प्यूटर प्रिन्टर भी मिलने लगे हैं जो कागज के अतिरिक्त पलास्टिक शीटों व अन्य माध्यमों पर भी एक रंग में अथवा अनेक रंगों में मुद्रण कर सकते हैं।

इन प्रिन्टर्स में कम्प्यूटर से प्राप्त विद्युत सिग्नल को पहले प्रेशर (Pressure) में परिवर्तित करके उसे स्याही के बर्तन पर दिया जाता है। इससे स्याही की बूंदें चार्ज होकर बाहर निकलकर कागज पर छाप देती हैं। बबल जेट (Bubble Jet) प्रिन्टर भी कुछ इसी प्रकार से कार्य करते हैं।

लेजर प्रिन्टर्स (Laser Printers)

लेजर प्रिन्टर्स (Laser Printers) – लेजर प्रिन्टर नॉन-इम्पैक्ट प्रिन्टर है, ये कम्प्यूटर प्रिन्टर भी बिन्दुओं द्वारा ही मुद्रण करते हैं परन्तु ये बिन्दु बहुत छोटे व पास-पास होने से अक्षर अति स्पष्ट छपते हैं। सामान्य लेजर प्रिन्टर 300×300 बिन्दु छापता है। आधुनिक लेजर प्रिन्टर्स 600×600 या 1200×1200 या उससे भी अधिक रिजॉल्यूशन (Resolution) के होते हैं। लेजर प्रिन्टर्स के कार्य करने की विधि मूल रूप से दस्तावेजों की प्रतियां बनाने वाली Zerox Photo Copier मशीनों की तरह ही होती हैं।

अंतर केवल सिलिकॉन के बेलन पर विद्युत-चार्ज के रूप में अक्षर बनाने का है। फोटो कॉपी की मशीन में प्रकाश किरणों का प्रयोग होता है और लेजर प्रिन्टर्स में लेजर किरणों का। ये लेजर किरणें सेमीकन्डक्टर से बने लेजर यंत्र से उत्पन्न होती हैं।

ये लेजर किरणें एक-एक दर्पण की सहायता से गुजरती हुई एक अष्टभुजाकार प्रिज्म से गुजरकर सिलीकॉन से बने बेलन पर पड़ती हैं। जहां-जहां ये लेजर किरणें पड़ती हैं, वहां सिलीकॉन के बेलन पर छोटा- सा चार्ज बिन्दु उत्पन्न हो जाता है। कम्प्यूटर से प्राप्त वैद्युत संकेतों द्वारा लेजर किरण की सहायता से ड्रम पर अक्षर के आकार में चार्ज बिन्दु उत्पन्न किए जाने से अक्षर बन जाते हैं।

इस प्रकार इस बेलन की सतह आवेशित हो जाती है। इस आवेशित सतह पर एक खास किस्म का पाउडर डाला जाता है, जिसे टोनर (Toner) कहते हैं। टोनर के कण केवल उन्हीं स्थानों पर चिपकते हैं, जहां पर चार्ज है। इस बेलन को घुमाने से स्याही कागज पर छप जाती है। अब इस कागज को फिक्सिंग यूनिट से गुजारा जाता है। इस यूनिट में कागज को गर्म किया जाता है।

इससे टोनर के कण पिघलकर कागज पर चिपक जाते हैं और प्रिन्टिंग स्थाई हो जाती है। टोनर पाउडर जितना अधिक बारीक (Fine) होगा, प्रिन्टिंग उतनी अधिक स्वच्छ और सुन्दर होगी। लेजर प्रिन्टर्स की प्रिन्टिंग सभी से अच्छी होती है। इस आउटपुट डिवाइस ने प्रिन्टिंग की दुनिया में क्रांति ला दी है।

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